इस लेख में आप क्या पढ़ेंगे (Table of Contents)
- छत्तीसगढ़ की वन स्थिति: नवीनतम रिपोर्ट ISFR-2023
- वनों का वर्गीकरण (Classification of Forests)
- छत्तीसगढ़ की प्रमुख वनोपज (Major Forest Produce)
- वन संरक्षण और प्रमुख संस्थाएं
- CGPSC Mains कॉर्नर: विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
- संदर्भ और विश्वसनीय बाहरी स्रोत
- निष्कर्ष (Conclusion)
- ज्ञान की परीक्षा: छत्तीसगढ़ वन क्विज़
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1.0 छत्तीसगढ़ की वन स्थिति: नवीनतम रिपोर्ट ISFR-2023 के अनुसार
छत्तीसगढ़ की वन संपदा की सबसे सटीक और आधिकारिक जानकारी भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा हर दो साल में जारी की जाने वाली “भारत राज्य वन रिपोर्ट” (India State of Forest Report – ISFR) से मिलती है। इस लेख के सभी आंकड़े नवीनतम **ISFR-2023** पर आधारित हैं, जो प्रामाणिकता और सटीकता सुनिश्चित करते हैं।
1.1 भारत राज्य वन रिपोर्ट (ISFR-2023) के प्रमुख आंकड़े
ISFR-2023 के अनुसार, छत्तीसगढ़ की वन स्थिति से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य निम्नलिखित हैं:
- कुल वन आवरण (Total Forest Cover): छत्तीसगढ़ का कुल वन आवरण 55,797 वर्ग कि.मी. है।
- भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिशत: यह राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 41.27% है, जो राष्ट्रीय औसत (21.73%) से बहुत अधिक है।
- देश में स्थान (वन आवरण के आधार पर): क्षेत्रफल के अनुसार, छत्तीसगढ़ का देश में **तीसरा स्थान** है (मध्य प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश के बाद)।
- 2021 से बदलाव: पिछली रिपोर्ट की तुलना में, राज्य के वन आवरण में 80 वर्ग कि.मी. की सकारात्मक वृद्धि हुई है।
1.2 जिलों के अनुसार वनावरण (ISFR-2023)
राज्य के जिलों में वनों का वितरण असमान है। रिपोर्ट के अनुसार:
- क्षेत्रफल के अनुसार सर्वाधिक वनावरण वाला जिला: नारायणपुर।
- प्रतिशत के अनुसार सर्वाधिक वनावरण वाला जिला: नारायणपुर।
- क्षेत्रफल के अनुसार सबसे कम वनावरण वाला जिला: दुर्ग।
- प्रतिशत के अनुसार सबसे कम वनावरण वाला जिला: दुर्ग।
छत्तीसगढ़ के वनों का तुलनात्मक विश्लेषण: नवीनतम आंकड़े (ISFR-2023)
छत्तीसगढ़ की वन संपदा को बेहतर ढंग से समझने के लिए, आइए इसकी तुलना विभिन्न स्तरों पर नवीनतम आंकड़ों के आधार पर करें।
► नवीनतम वन रिपोर्ट 2023: भारत और छत्तीसगढ़ के मुख्य आंकड़े
ISFR-2023 के अनुसार भारत और छत्तीसगढ़ की वन स्थिति के सबसे महत्वपूर्ण आंकड़े इस प्रकार हैं:
| मापदंड | छत्तीसगढ़ | संपूर्ण भारत |
|---|---|---|
| कुल वन आवरण | 55,797 वर्ग कि.मी. | 7,15,410 वर्ग कि.मी. |
| भौगोलिक क्षेत्र का % | 41.27% | 21.73% |
| वन एवं वृक्ष आवरण | 62,335.7 वर्ग कि.मी. (46.12%) | 8,27,356.95 वर्ग कि.मी. (25.17%) |
| 2021 से बदलाव (वन आवरण) | + 80 वर्ग कि.मी. | + 1,621 वर्ग कि.मी. |
► राष्ट्रीय तुलना: भारत के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (ISFR-2023)
ISFR-2023 के अनुसार, भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वन आवरण (वर्ग कि.मी. में) और उनके भौगोलिक क्षेत्र के प्रतिशत के आधार पर रैंकिंग:
| रैंक | राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | वन आवरण (वर्ग कि.मी.) | भौगोलिक क्षेत्र का % |
|---|---|---|---|
| 1 | मध्य प्रदेश | 77,522 | 25.15% |
| 2 | अरुणाचल प्रदेश | 66,210 | 79.09% |
| 3 | छत्तीसगढ़ | 55,797 | 41.27% |
| 4 | ओडिशा | 52,472 | 33.70% |
| 5 | महाराष्ट्र | 50,858 | 16.53% |
| … | … (अन्य राज्य) … | … | … |
► राष्ट्रीय अवलोकन: भारत का भूमि उपयोग प्रतिमान (2022)
यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारत की कुल भूमि में से वनों का हिस्सा कितना है। यहाँ नवीनतम आंकड़ों (कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, 2022) के अनुसार भारत का भूमि उपयोग पैटर्न दिया गया है:
| भूमि उपयोग प्रकार | क्षेत्रफल (‘000 हेक्टेयर में) | प्रतिशत |
|---|---|---|
| वन (Forests) | 72,000 | 21.9% |
| शुद्ध रोपण क्षेत्र | 1,41,007 | 42.89% |
| भू-संवर्धन के लिए अनुपलब्ध | 44,093 | 13.41% |
| वर्तमान परती भूमियाँ | 13,255 | 4.03% |
| संवर्धनीय बंजर भूमि | 11,920 | 3.63% |
| वर्तमान परती भूमियों के अतिरिक्त परती भूमि | 10,917 | 3.32% |
| नियमित चरागाह एवं अन्य चराई भूमियाँ | 10,281 | 3.13% |
| विविध वृक्ष उपज एवं उपवनों के अधीन भूमि | 3,013 | 0.92% |
| कुल भौगोलिक क्षेत्रफल | 3,28,747 | 100% |
► कानूनी स्थिति: राज्यों में अभिलिखित वन क्षेत्र (Recorded Forest Area)
अभिलिखित वन क्षेत्र (RFA) वह भूमि है जिसे सरकारी रिकॉर्ड में ‘वन’ के रूप में अधिसूचित किया गया है, चाहे उस पर पेड़ हों या न हों। यह “वन आवरण” से अलग है, जो वास्तविक पेड़ों की उपस्थिति को मापता है।
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | कुल अभिलिखित वन क्षेत्र (वर्ग कि.मी.) | भौगोलिक क्षेत्रफल का % |
|---|---|---|
| अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह | 7,171 | 86.93% |
| सिक्किम | 5,841 | 82.31% |
| मणिपुर | 17,418 | 78.01% |
| उत्तराखंड | 38,000 | 71.05% |
| हिमाचल प्रदेश | 37,948 | 68.16% |
| अरुणाचल प्रदेश | 51,540 | 61.55% |
| त्रिपुरा | 6,295 | 60.03% |
| नागालैंड | 8,632 | 52.07% |
| छत्तीसगढ़ | 59,816 | 44.25% |
| मेघालय | 9,508 | 42.39% |
| ओडिशा | 61,204 | 39.31% |
| दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव | 217 | 36.05% |
| मिजोरम | 7,479 | 35.48% |
| गोवा | 1,271 | 34.33% |
| असम | 26,836 | 34.21% |
| झारखंड | 25,118 | 31.51% |
| मध्य प्रदेश | 94,689 | 30.72% |
| चंडीगढ़ | 35 | 30.70% |
| केरल | 11,522 | 29.66% |
| तेलंगाना | 27,688 | 24.69% |
| आंध्र प्रदेश | 37,258 | 22.87% |
| महाराष्ट्र | 61,952 | 20.13% |
| कर्नाटक | 38,284 | 19.96% |
| तमिलनाडु | 23,188 | 17.83% |
| पश्चिम बंगाल | 11,885 | 13.39% |
| गुजरात | 21,870 | 11.14% |
| राजस्थान | 32,869 | 9.60% |
| जम्मू एवं कश्मीर | 20,199 | 9.09% |
| बिहार | 7,442 | 7.90% |
| दिल्ली | 104 | 7.01% |
| पंजाब | 3,084 | 6.12% |
| हरियाणा | 1,559 | 3.53% |
| पुडुचेरी | 13 | 2.65% |
| लद्दाख | 7 | – |
| लक्षद्वीप | 0 | – |
| कुल भारत | 7,75,377 | 23.59% |
► वैश्विक परिप्रेक्ष्य: दुनिया के शीर्ष वन क्षेत्रों के सामने भारत की स्थिति
आइए देखें कि वन क्षेत्रफल के मामले में दुनिया के शीर्ष देश कहाँ खड़े हैं (स्रोत: FAO, Global Forest Resources Assessment 2020 और ISFR-2023):
| देश/राज्य | कुल वन क्षेत्र (मिलियन हेक्टेयर) | विश्व के वनों का % |
|---|---|---|
| रूस | 815 | 20% |
| ब्राजील | 497 | 12% |
| कनाडा | 347 | 9% |
| भारत | 71.5 | 2% |
रोचक तथ्य: छत्तीसगढ़ का कुल वन क्षेत्र (लगभग 5.58 मिलियन हेक्टेयर) **स्विट्ज़रलैंड (Switzerland)** जैसे यूरोपीय देश के कुल क्षेत्रफल से भी बड़ा है!
गहन विश्लेषण: छत्तीसगढ़ के वनों की गुणवत्ता में बदलाव (ISFR-2023)
वन क्षेत्र में कुल 80 वर्ग कि.मी. की वृद्धि एक अच्छी खबर है, लेकिन असली कहानी इस वृद्धि की गुणवत्ता में छिपी है। आइए देखें कि छत्तीसगढ़ के वनों के घनत्व में क्या परिवर्तन आया है:
| वन का प्रकार (घनत्व) | क्षेत्रफल (ISFR-2021) | क्षेत्रफल (ISFR-2023) | शुद्ध परिवर्तन (वर्ग कि.मी.) |
|---|---|---|---|
| बहुत घने वन (VDF) | 7,065 | 7,115 | + 50 |
| मध्यम घने वन (MDF) | 32,199 | 32,250 | + 51 |
| खुले वन (OF) | 16,453 | 16,432 | – 21 |
इस विश्लेषण से निकला निष्कर्ष:
- गुणवत्ता में सुधार: छत्तीसगढ़ में कुल वृद्धि सिर्फ खुले वनों के बढ़ने से नहीं हुई है, बल्कि **उच्च गुणवत्ता वाले वनों (बहुत घने और मध्यम घने)** के क्षेत्रफल में भी वृद्धि हुई है। यह एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है।
- संरक्षण का प्रभाव: यह दिखाता है कि राज्य में संरक्षण के प्रयास सफल हो रहे हैं, जिससे कम घने जंगल अधिक घने जंगलों में परिवर्तित हो रहे हैं।
- Mains के लिए महत्वपूर्ण बिंदु: जब परीक्षा में पूछा जाए, तो आप सिर्फ 80 वर्ग कि.मी. की वृद्धि का उल्लेख न करें, बल्कि यह भी बताएं कि यह वृद्धि मुख्य रूप से ‘बहुत घने’ और ‘मध्यम घने’ वनों में हुई है, जो आपके उत्तर को दूसरों से बेहतर बना देगा।

2.0 वनों का वर्गीकरण (Classification of Forests)
छत्तीसगढ़ के विशाल वन क्षेत्र को बेहतर ढंग से समझने के लिए, इन्हें विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है। परीक्षा की दृष्टि से, दो प्रकार के वर्गीकरण सबसे महत्वपूर्ण हैं: प्रजाति के आधार पर और प्रशासनिक आधार पर।
2.1 प्रजाति के आधार पर (Based on Species)
वृक्षों की बहुलता के आधार पर, छत्तीसगढ़ के वनों को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बांटा जा सकता है:
1. साल वन (Sal Forest)
- महत्व: साल (Shorea robusta) छत्तीसगढ़ का राजकीय वृक्ष है। इसके वनों को अपनी कठोर लकड़ी और स्थायित्व के लिए जाना जाता है।
- विस्तार: साल वन राज्य के कुल वन क्षेत्र के 40.56% हिस्से पर फैले हुए हैं। ये मुख्य रूप से राज्य के दक्षिणी भाग, विशेषकर बस्तर संभाग में केंद्रित हैं, जिसके कारण बस्तर को “साल वनों का द्वीप” कहा जाता है।
- उपयोग: इसकी लकड़ी का उपयोग रेलवे स्लीपर, इमारती लकड़ी, और फर्नीचर बनाने में होता है।
क्या आप जानते हैं? बस्तर के साल वनों की लकड़ी इतनी मजबूत और टिकाऊ होती है कि इसे “बस्तर की शान” कहा जाता है और यह अपनी गुणवत्ता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।
2. सागौन वन (Teak Forest)
- महत्व: सागौन (Tectona grandis) अपनी खूबसूरत और मजबूत लकड़ी के लिए प्रसिद्ध है, जो फर्नीचर निर्माण के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
- विस्तार: सागौन वन राज्य के कुल वन क्षेत्र के 9.42% हिस्से पर पाए जाते हैं। ये मुख्य रूप से नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा जिलों की घाटियों में मिलते हैं।
- विशेष: नारायणपुर जिले की खुरसेल घाटी को सर्वोत्तम किस्म के सागौन के लिए जाना जाता है।
3. मिश्रित वन (Mixed Forest)
- महत्व: जैसा कि नाम से पता चलता है, इन वनों में किसी एक प्रजाति की प्रमुखता नहीं होती, बल्कि साल और सागौन के अलावा कई अन्य प्रजातियां जैसे बांस, महुआ, हर्रा, तेंदू, आंवला आदि पाई जाती हैं।
- विस्तार: यह राज्य का सबसे बड़ा वन समूह है, जो कुल वन क्षेत्र के 43.52% हिस्से पर फैला हुआ है। ये मुख्य रूप से राज्य के उत्तरी और मध्य भागों (सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग संभाग) में पाए जाते हैं।
- उपयोग: ये वन लघु वनोपज की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
2.2 तुलनात्मक तालिका: प्रजाति आधारित वन
इन तीनों वन प्रकारों के बीच के अंतर और नवीनतम प्रतिशत को आसानी से याद रखने के लिए इस तालिका का उपयोग करें (आंकड़े: ISFR-2023):
| वन का प्रकार | प्रतिशत (लगभग) | प्रमुख क्षेत्र | विशेषता / महत्व |
|---|---|---|---|
| मिश्रित वन | 43.52% | उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ (सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर) | सर्वाधिक क्षेत्रफल, लघु वनोपज की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण। |
| साल वन | 40.56% | बस्तर संभाग (दक्षिणी छत्तीसगढ़) | छत्तीसगढ़ का राजकीय वृक्ष, बस्तर को “साल वनों का द्वीप” कहते हैं। |
| सागौन वन | 9.42% | नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा | सर्वोत्तम किस्म की इमारती लकड़ी, खुरसेल घाटी (नारायणपुर) प्रसिद्ध है। |
(नोट: शेष प्रतिशत अन्य छोटे वन प्रकारों या गैर-वन क्षेत्रों के अंतर्गत आता है।)
2.3 प्रशासनिक आधार पर (Based on Administration)
वन प्रबंधन और कानूनी अधिकारों की दृष्टि से, छत्तीसगढ़ के वनों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। यह वर्गीकरण सरकारी नियंत्रण के स्तर को दर्शाता है।
1. आरक्षित वन (Reserved Forest)
- परिभाषा: ये वन सर्वाधिक प्रतिबंधित होते हैं और पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में होते हैं। इनमें मानवीय गतिविधियां जैसे लकड़ी काटना, पशु चराई, और आम लोगों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित होता है।
- विस्तार: यह राज्य के कुल वन क्षेत्र का 43.13% हिस्सा है (लगभग 25,782 वर्ग कि.मी.)।
- महत्व: इनका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण, वन्यजीव और वन संपदा का संरक्षण करना होता है।
2. संरक्षित वन (Protected Forest)
- परिभाषा: इन वनों में सरकारी नियंत्रण थोड़ा कम होता है। स्थानीय निवासियों को कुछ शर्तों और अनुमति के साथ लघु वनोपज संग्रहण और पशु चराई की सीमित सुविधा दी जाती है, लेकिन वाणिज्यिक उद्देश्य से लकड़ी काटना प्रतिबंधित होता है।
- विस्तार: यह राज्य का सबसे बड़ा प्रशासनिक वन समूह है, जो कुल वन क्षेत्र के 40.22% हिस्से पर फैला हुआ है (लगभग 24,036 वर्ग कि.मी.)।
3. अवर्गीकृत वन (Unclassified Forest)
- परिभाषा: ये वे वन हैं जिनका अभी तक कोई स्पष्ट वर्गीकरण नहीं हुआ है। इन पर राजस्व विभाग का नियंत्रण होता है और इनमें लकड़ी काटने और पशु चराई पर अपेक्षाकृत कम प्रतिबंध होते हैं।
- विस्तार: यह राज्य के कुल वन क्षेत्र का 16.65% हिस्सा है (लगभग 9,954 वर्ग कि.मी.)।
[★ वैल्यू-ऐड] महत्वपूर्ण तथ्य: वन वृत्त
प्रशासनिक सुविधा के लिए, छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र को 6 वन वृत्तों (Forest Circles) में विभाजित किया गया है। इनसे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं:
- छत्तीसगढ़ में कुल 6 वन वृत्त हैं: बिलासपुर, सरगुजा, कांकेर, रायपुर, दुर्ग, और जगदलपुर।
- क्षेत्रफल के अनुसार, बिलासपुर वन वृत्त सबसे बड़ा है।
- क्षेत्रफल के अनुसार, दुर्ग वन वृत्त सबसे छोटा है।
- सरगुजा वन वृत्त में आरक्षित वनों का प्रतिशत सबसे अधिक है।

3.0 छत्तीसगढ़ की प्रमुख वनोपज (Major Forest Produce)
छत्तीसगढ़ के वनों को “अक्षय संपदा का भंडार” कहा जाता है। यहाँ से प्राप्त होने वाले उत्पाद न केवल स्थानीय लोगों की आजीविका का मुख्य आधार हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वनोपज को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है: मुख्य वनोपज और लघु वनोपज।
3.1 मुख्य और लघु वनोपज
मुख्य वनोपज (Major Forest Produce)
इसके अंतर्गत इमारती और गैर-इमारती लकड़ियाँ आती हैं।
- इमारती लकड़ी: साल, सागौन, शीशम, साजा आदि का उपयोग फर्नीचर, भवन निर्माण और अन्य औद्योगिक कार्यों में होता है।
- गैर-इमारती लकड़ी (बांस): बांस एक अत्यंत महत्वपूर्ण वनोपज है। इसका उपयोग कागज उद्योग, टोकरी निर्माण और घरेलू कार्यों में होता है। छत्तीसगढ़ के लगभग 11% वन क्षेत्र में बांस पाया जाता है।
लघु वनोपज (Minor Forest Produce – MFP)
लकड़ी के अलावा वनों से प्राप्त होने वाले अन्य सभी उत्पादों को लघु वनोपज कहा जाता है। छत्तीसगढ़ की ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था का यह मुख्य आधार है। राज्य में देश का लगभग 74% लघु वनोपज उत्पादित और संग्रहित होता है। प्रमुख लघु वनोपजों में तेंदूपत्ता, हर्रा, गोंद, महुआ, आंवला, लाख, इमली, चिरौंजी आदि शामिल हैं।
3.2 राष्ट्रीयकृत लघु वनोपज (Nationalized Minor Forest Produce)
कुछ लघु वनोपज इतने महत्वपूर्ण हैं कि उनके संग्रहण और व्यापार पर राज्य सरकार का पूर्ण नियंत्रण होता है, ताकि संग्राहकों को उनका सही मूल्य मिल सके और बिचौलियों का शोषण खत्म हो। इन्हें राष्ट्रीयकृत लघु वनोपज कहते हैं।
तेंदूपत्ता (Tendu Patta)
- उपनाम: इसे “हरा सोना” (Green Gold) भी कहा जाता है।
- उपयोग: इसका मुख्य उपयोग बीड़ी बनाने में होता है।
- उत्पादन: छत्तीसगढ़ भारत का सबसे बड़ा और सबसे अच्छी गुणवत्ता वाला तेंदूपत्ता उत्पादक राज्य है। देश के कुल उत्पादन का लगभग 17% यहीं होता है।
- संग्रहण: इसका संग्रहण कार्य मई-जून के महीने में होता है और यह लाखों परिवारों के लिए मौसमी रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत है। संग्रहण का कार्य “छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ” के माध्यम से किया जाता है।
तेंदूपत्ता के अलावा, सरकार ने हाल ही में कई अन्य लघु वनोपजों को भी राष्ट्रीयकृत किया है और उनके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price – MSP) की घोषणा की है।

3.3 एप्लीकेशन टेबल: प्रमुख लघु वनोपज एक नज़र में
छत्तीसगढ़ के वनों से प्राप्त होने वाले कुछ महत्वपूर्ण लघु वनोपजों और उनके उपयोग को इस तालिका में देखें:
| लघु वनोपज | महत्वपूर्ण उपयोग | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| तेंदूपत्ता | बीड़ी निर्माण | “हरा सोना”, भारत का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य। |
| हर्रा | औषधि (त्रिफला चूर्ण), चमड़ा शोधन | छत्तीसगढ़ देश का सबसे बड़ा हर्रा उत्पादक है। |
| लाख | चूड़ी निर्माण, स्याही, वार्निश | लाख के कीट पलाश, कुसुम और बेर के पेड़ों पर पाले जाते हैं। |
| गोंद | खाद्य पदार्थ, कन्फेक्शनरी, चिपकाने वाले पदार्थ | बस्तर क्षेत्र कुल्लू गोंद (Sterculia urens) के लिए प्रसिद्ध है। |
| महुआ | खाद्य तेल, पारंपरिक शराब, औषधि | आदिवासी संस्कृति में “कल्पवृक्ष” कहलाता है। |
3.4 याद रखने की शॉर्ट ट्रिक: राष्ट्रीयकृत लघु वनोपज
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीयकृत प्रमुख लघु वनोपजों (जिनका व्यापार सरकार के नियंत्रण में होता है) को याद रखने के लिए आप इस वाक्य का उपयोग कर सकते हैं:
“छत्तीसगढ़ का तेंदू खैर साल भर गोंद देता है।”
- तेंदू: तेंदूपत्ता
- खैर: खैर वृक्ष (जिससे कत्था बनता है)
- साल: साल बीज
- गोंद: कुल्लू गोंद
(नोट: यह प्रमुख राष्ट्रीयकृत वनोपज हैं। सरकार समय-समय पर इस सूची में बदलाव कर सकती है और कई अन्य वनोपजों के लिए MSP भी प्रदान करती है।)
वनवासियों का कल्पवृक्ष: छत्तीसगढ़ के जीवनरेखा वृक्ष
छत्तीसगढ़ के वनवासियों के लिए कुछ वृक्ष सिर्फ पेड़ नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं, जिन्हें वे ‘कल्पवृक्ष’ (इच्छा पूरी करने वाला पेड़) मानते हैं।
1. महुआ (The Tree of Life)
- अर्थव्यवस्था: इसके फूल से पारंपरिक पेय और फल से तेल निकाला जाता है, जो आय का मुख्य स्रोत है।
- संस्कृति: जन्म से लेकर मृत्यु तक के संस्कारों में इसका उपयोग होता है।
- पोषण: यह पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
2. बांस (गरीबों का टिम्बर)
- आश्रय: घर और बाड़ बनाने के लिए मुख्य सामग्री।
- रोजगार: टोकरी, फर्नीचर और हस्तशिल्प बनाकर आजीविका चलाना।
- भोजन: इसके नर्म कोपलों (बास्ता/करील) का उपयोग सब्जी के रूप में किया जाता है।
3. साल (बस्तर की शान)
- संस्कृति: इसके पत्तों से दोना-पत्तल बनाए जाते हैं जो हर भोज का हिस्सा हैं।
- आस्था: कई आदिवासी समुदाय इसे पवित्र मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं।
- अर्थव्यवस्था: इसके बीज (साल घी) और धूप (राल) का आर्थिक महत्व है।
4.0 वन संरक्षण और प्रमुख संस्थाएं
छत्तीसगढ़ की विशाल वन संपदा के प्रबंधन और संरक्षण के लिए कई सरकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जो वनों के सतत विकास और वनवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने का कार्य करती हैं।
1. छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम (CGSFDC)
इसकी स्थापना मई 2001 में हुई थी। इसका मुख्य कार्य वनों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना, वाणिज्यिक वृक्षारोपण (जैसे सागौन) को बढ़ावा देना और वन आधारित उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
2. छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ (CGMFP FED)
यह संघ राज्य में लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण (processing) और विपणन (marketing) के लिए सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। यह “छत्तीसगढ़ हर्बल्स” जैसे ब्रांड के तहत उत्पादों को बढ़ावा देता है और यह सुनिश्चित करता है कि वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिले।
3. प्रमुख सरकारी योजनाएं
वन संरक्षण और वनवासियों के उत्थान के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है, जैसे तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन, और “नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी” योजना के माध्यम से वनों का पुनरुद्धार।
वन और वन्यजीव का संबंध: एक अटूट रिश्ता
छत्तीसगढ़ के घने वन सिर्फ पेड़-पौधों का घर नहीं, बल्कि यह बाघ, तेंदुए, वन भैंसे (राजकीय पशु), और पहाड़ी मैना (राजकीय पक्षी) जैसे अनगिनत वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी हैं। राज्य के वनों का संरक्षण सीधे तौर पर यहाँ के वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़ा हुआ है।
- प्राकृतिक गलियारे (Natural Corridors): ये वन विभिन्न राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के बीच एक प्राकृतिक गलियारे के रूप में काम करते हैं, जिससे वन्यजीवों को घूमने-फिरने के लिए एक बड़ा और सुरक्षित क्षेत्र मिलता है।
- आवास और भोजन: साल और बांस के जंगल शाकाहारी जानवरों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत हैं, जो wiederum बाघ और तेंदुए जैसे मांसाहारी जानवरों की खाद्य श्रृंखला को बनाए रखते हैं।
इसलिए, जब हम वनों के संरक्षण की बात करते हैं, तो हम अनजाने में छत्तीसगढ़ की पूरी जैव-विविधता (Biodiversity) और वन्यजीव विरासत के संरक्षण की भी बात कर रहे होते हैं।
विगत वर्षों के प्रश्न (Prelims PYQs)
इस टॉपिक से CGPSC और Vyapam की परीक्षाओं में अक्सर प्रश्न पूछे गए हैं। यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं:
प्रश्न: छत्तीसगढ़ राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र के कितने प्रतिशत भाग पर वन हैं? (CGPSC Pre 2019)
प्रश्न: निम्न में से कौन सा छत्तीसगढ़ का राजकीय वृक्ष है? (CG Vyapam Mandi Inspector 2021)
प्रश्न: ‘खुरसेल घाटी’ किसलिए प्रसिद्ध है? (CGPSC ACF 2017)
इस लेख को पढ़ने के बाद आप इन सभी प्रश्नों के उत्तर आसानी से दे सकते हैं।
CGPSC Mains कॉर्नर: विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
मुख्य परीक्षा में, आपसे वनों के आर्थिक और सामाजिक महत्व पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
प्रश्न: “छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में लघु वनोपजों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।” (100/125 शब्द)
उत्तर की रूपरेखा:
1. भूमिका: बताएं कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में, लघु वनोपज (MFP) आजीविका का मुख्य आधार है।
2. सकारात्मक भूमिका: रोजगार (विशेषकर मौसमी), आय का अतिरिक्त स्रोत, पोषण सुरक्षा और महिला सशक्तीकरण में योगदान का उल्लेख करें। तेंदूपत्ता का उदाहरण दें।
3. चुनौतियां/आलोचनात्मक पक्ष: बिचौलियों द्वारा शोषण, संग्रहण और प्रसंस्करण की वैज्ञानिक पद्धतियों का अभाव, और मूल्य संवर्धन (value addition) की कमी जैसी चुनौतियों का उल्लेख करें।
4. निष्कर्ष: सरकारी संस्थाओं (जैसे लघु वनोपज संघ) की भूमिका की सराहना करते हुए, मूल्य संवर्धन और विपणन को और मजबूत करने का सुझाव देकर समाप्त करें।
6.0 संदर्भ और विश्वसनीय बाहरी स्रोत (References & External Links)
इस लेख में प्रस्तुत जानकारी को सत्यापित करने के लिए आप निम्नलिखित आधिकारिक स्रोतों का उपयोग कर सकते हैं:
-
भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI):
भारत की वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) के सभी आधिकारिक आंकड़ों के लिए, आप FSI की वेबसाइट पर जा सकते हैं।
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छत्तीसगढ़ वन विभाग:
राज्य के वनों, नीतियों और योजनाओं के बारे में जानकारी के लिए, छत्तीसगढ़ वन विभाग का आधिकारिक पोर्टल एक प्रामाणिक स्रोत है।
7.0 निष्कर्ष (Conclusion)
छत्तीसगढ़ के वन सिर्फ पेड़ों का जंगल नहीं, बल्कि प्रदेश की आत्मा हैं। ये राज्य की जलवायु को नियंत्रित करते हैं, नदियों को जीवन देते हैं, और लाखों लोगों को भोजन, आश्रय और आजीविका प्रदान करते हैं। साल वनों के द्वीप बस्तर से लेकर सरगुजा के मिश्रित वनों तक, यह हरित संपदा राज्य की सबसे बड़ी पूंजी है।
एक छात्र के रूप में, वनों के आंकड़ों, प्रकारों और उनसे मिलने वाले उत्पादों को समझना परीक्षा में सफलता की कुंजी है। वहीं, एक नागरिक के रूप में, इनके संरक्षण के महत्व को समझना हमारे collective भविष्य के लिए अनिवार्य है। छत्तीसगढ़ का असली सोना इसके खनिजों में नहीं, बल्कि इसके हरे-भरे वनों में छिपा है।
9.0 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्षेत्रफल की दृष्टि से छत्तीसगढ़ का सबसे अधिक वन वाला जिला कौन सा है?
ISFR-2021 के अनुसार, क्षेत्रफल और प्रतिशत दोनों की दृष्टि से छत्तीसगढ़ का सबसे अधिक वन वाला जिला नारायणपुर है।
प्रश्न 2: “साल वनों का द्वीप” किसे कहा जाता है?
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र को वहाँ साल वृक्षों की अत्यधिक सघनता के कारण “साल वनों का द्वीप” कहा जाता है।
प्रश्न 3: तेंदूपत्ता का मुख्य उपयोग क्या है और इसे क्या उपनाम दिया गया है?
तेंदूपत्ता का मुख्य उपयोग बीड़ी निर्माण में होता है। इसके आर्थिक महत्व के कारण इसे “हरा सोना” (Green Gold) का उपनाम दिया गया है।
प्रश्न 4: प्रशासनिक आधार पर छत्तीसगढ़ में किस प्रकार के वन सबसे अधिक हैं?
प्रशासनिक आधार पर, छत्तीसगढ़ में आरक्षित वन (Reserved Forest) का क्षेत्रफल सबसे अधिक है, जो कुल वनों का लगभग 43.13% है।
प्रश्न 5: छत्तीसगढ़ में कुल कितने वन वृत्त (Forest Circles) हैं और सबसे बड़ा कौन सा है?
छत्तीसगढ़ में कुल 6 वन वृत्त हैं। क्षेत्रफल की दृष्टि से बिलासपुर वन वृत्त सबसे बड़ा है।
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2 thoughts on “छत्तीसगढ़ के वन (Forests of Chhattisgarh): नवीनतम वन रिपोर्ट, वनों के प्रकार, प्रमुख वनोपज और संरक्षण पर एक सम्पूर्ण गाइड”