नमस्ते दोस्तों! M S WORLD The WORLD of HOPE में आपका स्वागत है। यह लेख हमारी ‘करंट अफेयर्स + GK’ सीरीज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहाँ हम समसामयिकी के हर पहलू का गहराई से विश्लेषण करते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में विजेताओं एवं पुरस्कार का खंड अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, इसीलिए हम इस पर विशेष ध्यान देते हैं। अगर आपने बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान, [70वें फिल्मफेयर अवार्ड्स 2025 पर हमारा विस्तृत लेख], या फिर Global Hunger Index 2025 नहीं पढ़ा है, तो उसे भी अवश्य पढ़ें।
इंतज़ार खत्म! विज्ञान, साहित्य और शांति के क्षेत्र में दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान, नोबेल पुरस्कार 2025 के विजेताओं की घोषणा के साथ ही ज्ञान और उत्कृष्टता का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। यह लेख सिर्फ विजेताओं के नामों की एक सूची नहीं है, बल्कि यह उस गहराई में उतरने का एक प्रयास है जहाँ हम उन अद्भुत खोजों, साहसी प्रयासों और कालजयी रचनाओं को समझेंगे जो हमारी दुनिया को एक बेहतर कल की ओर ले जा रही हैं।
इस “अल्टीमेट गाइड” में, हम न केवल नोबेल पुरस्कार 2025 विजेता सूची का सम्पूर्ण विश्लेषण करेंगे, बल्कि हम नोबेल पुरस्कार के गौरवशाली इतिहास से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय से कैसे प्रश्न पूछे जाते हैं, और उनका उत्तर कैसे दिया जाए, हर पहलू को उजागर करेंगे। यह लेख आपकी तैयारी को वह धार देगा जो आपको दूसरों से मीलों आगे ले जाएगी। चलिए, इस ज्ञानवर्धक यात्रा की शुरुआत करते हैं।
इस लेख में आप क्या पढ़ेंगे:
- 1. नोबेल पुरस्कार 2025 विजेता सूची (संक्षिप्त तालिका)
- 2. नोबेल पुरस्कार 2025 बनाम 2024: एक तुलनात्मक विश्लेषण
- 2. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नोबेल पुरस्कार का महत्व और विश्लेषण
- 3. नोबेल पुरस्कार 2025: विजेताओं का सम्पूर्ण विश्लेषण
- 4. नोबेल पुरस्कार का गौरवशाली इतिहास: सब कुछ जो आपको जानना चाहिए
- 5. नोबेल पुरस्कार के आश्चर्यजनक तथ्य और आँकड़े (विस्तृत तालिका)
- 6. भारत और नोबेल पुरस्कार: एक समर्पित गाइड
- 7. विश्व के कुछ अन्य प्रमुख नोबेल विजेता (संक्षिप्त परिचय)
- 8. निष्कर्ष
- 9. संदर्भ और स्रोत (References and Sources)
- 10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 11. ज्ञान की परीक्षा: नोबेल पुरस्कार 2025 क्विज़
1. नोबेल पुरस्कार 2025 विजेता सूची (एक नज़र में)
विस्तृत विश्लेषण पर जाने से पहले, आइए एक साफ़-सुथरी और तुलनात्मक तालिका में 2025 के सभी नोबेल पुरस्कार विजेताओं की सूची देखें। यह तालिका त्वरित रिविज़न के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
| श्रेणी (Category) | विजेता का नाम (Winner’s Name) | देश (Country) | किसलिए मिला (Contribution in Brief) |
|---|---|---|---|
| भौतिकी (Physics) | जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट, और जॉन एम. मार्टिनिस | USA | क्वांटम कंप्यूटिंग की नींव रखने वाली अभूतपूर्व खोजों के लिए। |
| रसायन (Chemistry) | सुसुमु कितागावा, रिचर्ड रॉब्सन, और उमर एम. याघी | जापान, ऑस्ट्रेलिया, USA | अत्यधिक छिद्रयुक्त ‘मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क’ (MOFs) के विकास हेतु। |
| चिकित्सा (Medicine) | मैरी ई. ब्रुनको, फ्रेड रैमस्डेल, और डॉ. शिमोन साकागुची | USA, जापान | ऑटोइम्यून बीमारियों को समझने के लिए ‘इम्यून टॉलरेंस’ की खोज। |
| साहित्य (Literature) | लास्जलो क्रास्ज्नाहोरकाई | हंगरी | अपने गहन, दूरदर्शी और अनूठी शैली के साहित्यिक कार्यों के लिए। |
| शांति (Peace) | मारिया कोरिना मचाडो | वेनेजुएला | लोकतंत्र और मानवाधिकारों की बहाली हेतु अथक और शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए। |
| अर्थशास्त्र (Economic Sc.) | जोएल मोकिर, फिलिप अघियन, और पीटर हॉविट | USA, फ्रांस, कनाडा | नवाचार-संचालित आर्थिक विकास (Innovation-Driven Growth) की व्याख्या करने के लिए। |

नोबेल पुरस्कार 2025 बनाम 2024: एक तुलनात्मक विश्लेषण
करंट अफेयर्स की तैयारी को और भी पुख्ता करने के लिए, आइए 2025 के विजेताओं की तुलना पिछले वर्ष, यानी 2024, के विजेताओं से करें। यह तुलना आपको पैटर्न समझने और दोनों वर्षों के विजेताओं को स्पष्ट रूप से याद रखने में मदद करेगी।
| श्रेणी | नोबेल पुरस्कार 2025 | नोबेल पुरस्कार 2024 | ||
|---|---|---|---|---|
| विजेता | योगदान | विजेता | योगदान | |
| भौतिकी | जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट, जॉन एम. मार्टिनिस | क्वांटम कम्प्यूटिंग की नींव रखने वाले ‘सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट’ के निर्माण के लिए। | पियरे एगोस्टिनी, फेरेंक क्रॉस्ज, ऐनी एल’हुइलियर | पदार्थ में इलेक्ट्रॉन गतिशीलता के अध्ययन के लिए प्रकाश के एटोसेकंड पल्स उत्पन्न करने के प्रायोगिक तरीकों हेतु। |
| रसायन | सुसुमु कितागावा, रिचर्ड रॉब्सन, उमर एम. याघी | अत्यधिक छिद्रयुक्त ‘मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क’ (MOFs) के डिजाइन और विकास के लिए। | मौंगी बावेंडी, लुईस ब्रूस, एलेक्सी एकिमोव | ‘क्वांटम डॉट्स’ की खोज और संश्लेषण के लिए, जो नैनोटेक्नोलॉजी के सबसे छोटे घटक हैं। |
| चिकित्सा | मैरी ई. ब्रुनको, फ्रेड रैमस्डेल, डॉ. शिमोन साकागुची | ऑटोइम्यून बीमारियों को समझने के लिए ‘इम्यून टॉलरेंस’ और ‘रेगुलेटरी टी-सेल्स’ की खोज। | कैटालिन कारिको, ड्रू वीसमैन | प्रभावी mRNA टीकों के विकास को संभव बनाने वाली न्यूक्लियोसाइड बेस संशोधनों से संबंधित खोजों के लिए। |
| साहित्य | लास्जलो क्रास्ज्नाहोरकाई | अपने गहन, दूरदर्शी और अनूठी शैली के साहित्यिक कार्यों के लिए। | जॉन फॉसे | उनके अभिनव नाटकों और गद्य के लिए जो अनकही को आवाज देते हैं। |
| शांति | मारिया कोरिना मचाडो | वेनेजुएला में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की बहाली हेतु अथक और शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए। | नरगिस मोहम्मदी | ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी लड़ाई और सभी के लिए मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने हेतु। |
| अर्थशास्त्र | जोएल मोकिर, फिलिप अघियन, पीटर हॉविट | नवाचार-संचालित आर्थिक विकास की व्याख्या। | क्लाउडिया गोल्डिन | श्रम बाजार में महिलाओं की भूमिका और आय के बारे में हमारी समझ को उन्नत करने के लिए। |
2. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नोबेल पुरस्कार का महत्व और विश्लेषण
यदि आप UPSC, CGPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे या किसी भी अन्य सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो ‘नोबेल पुरस्कार’ आपके लिए केवल सामान्य ज्ञान का विषय नहीं, बल्कि **स्कोरिंग मार्क्स का एक सुनहरा अवसर** है। परीक्षा आयोजित करने वाले लगभग हर आयोग का यह एक पसंदीदा विषय है क्योंकि यह ‘करंट अफेयर्स’ और ‘स्टैटिक GK’ दोनों को एक साथ पूछता है।
परीक्षा में क्यों महत्वपूर्ण है यह टॉपिक?
नोबेल पुरस्कार से प्रश्न पूछकर, परीक्षक एक उम्मीदवार की वैश्विक घटनाओं, वैज्ञानिक विकास और ऐतिहासिक जागरूकता की समझ का आकलन करता है। यह एक बहु-आयामी विषय है जो आपकी तैयारी की गहराई को मापता है।
परीक्षाओं में कैसे प्रश्न पूछे जाते हैं?
नोबेल पुरस्कारों से संबंधित प्रश्नों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
श्रेणी 1: प्रत्यक्ष करंट अफेयर्स आधारित प्रश्न
यह सबसे आम प्रकार है, जिसमें सीधे 2025 के विजेताओं के बारे में पूछा जाता है।
- विजेता का नाम: “वर्ष 2025 का शांति नोबेल पुरस्कार किसे प्रदान किया गया?”
- खोज/योगदान: “जॉन क्लार्क और उनके सहयोगियों को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार किस खोज के लिए मिला?”
- क्षेत्र और विजेता का मिलान (Match the Following): एक तरफ श्रेणी (भौतिकी, रसायन) और दूसरी तरफ विजेताओं के नाम दिए जाते हैं।
- देश/संस्था: “साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता लास्जलो क्रास्ज्नाहोरकाई किस देश के नागरिक हैं?”
श्रेणी 2: अवधारणा-आधारित प्रश्न (Concept-Based Questions)
UPSC और राज्य PSC जैसी परीक्षाओं में अब केवल नाम नहीं, बल्कि खोज के पीछे की अवधारणा को भी पूछा जाता है।
- “मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOFs), जिनके लिए 2025 का रसायन नोबेल दिया गया, के निम्नलिखित में से क्या संभावित अनुप्रयोग हो सकते हैं?” (बहु-विकल्पीय प्रश्न)
- “क्वांटम टनलिंग की घटना का क्या अर्थ है, जिसका उल्लेख 2025 के भौतिकी नोबेल में किया गया?”
श्रेणी 3: स्टेटिक GK / ऐतिहासिक तथ्य
यह सदाबहार खंड है, जिसमें नोबेल के इतिहास और रोचक तथ्यों से प्रश्न आते हैं।
- संस्थापक: “नोबेल पुरस्कार के संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल ने किसका आविष्कार किया था?”
- प्रथम विजेता: “भौतिकी का पहला नोबेल पुरस्कार किसे मिला था?” या “नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला कौन थीं?”
- भारतीय विजेता: “सी.वी. रमन को किस वर्ष और किस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था?”
- अनोखे तथ्य: “निम्नलिखित में से किसे दो बार नोबेल पुरस्कार मिला है?”
इस टॉपिक की तैयारी कैसे करें: एक स्मार्ट रणनीति
स्मार्ट तैयारी के लिए एक्शन पॉइंट्स
- स्वयं की तालिका बनाएँ: एक नोटबुक में “नोबेल पुरस्कार 2025” की तालिका बनाएँ जिसमें 4 कॉलम हों: श्रेणी, विजेता का नाम, देश, और खोज (सरल शब्दों में)। इसे अपनी स्टडी टेबल पर चिपका लें।
- “क्यों” पर ध्यान दें: केवल ‘कौन’ न रटें, ‘क्यों’ को समझें। हर खोज के महत्व को 1-2 लाइनों में समझने की कोशिश करें। यह आपको अवधारणा-आधारित प्रश्नों को हल करने में मदद करेगा।
- स्टैटिक भाग को न छोड़ें: भारतीय विजेताओं की सूची, सबसे युवा/वृद्ध विजेता, और पहली महिला विजेता जैसे तथ्य हमेशा महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें बार-बार दोहराएँ।
- पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र देखें: अपनी परीक्षा के पिछले 5-7 वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण करें और देखें कि नोबेल पुरस्कार से कैसे प्रश्न पूछे गए हैं। इससे आपको पैटर्न समझने में मदद मिलेगी।
- क्विज़ और मॉक टेस्ट हल करें: अपनी तैयारी को परखने के लिए नियमित रूप से मॉक टेस्ट और क्विज़ (जैसे इस लेख के अंत में दिया गया है) हल करें।
3. नोबेल पुरस्कार 2025: विजेताओं का सम्पूर्ण विश्लेषण
अब हम प्रत्येक नोबेल पुरस्कार विजेता और उनकी खोज की गहराई में उतरेंगे। हम समझेंगे कि उनकी खोज क्या है, इसका वैज्ञानिक महत्व क्या है, और यह भविष्य में हमारी दुनिया को कैसे प्रभावित कर सकती है।
3.1 भौतिकी (Physics) का नोबेल पुरस्कार 2025: क्वांटम कम्प्यूटिंग की दहलीज पर

वर्ष 2025 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार उन तीन अमेरिकी वैज्ञानिकों को दिया गया है जिन्होंने क्वांटम दुनिया के अजीब नियमों को हमारी दुनिया में लाने का रास्ता खोला, जिससे क्वांटम कंप्यूटरों की क्रांति का मार्ग प्रशस्त हुआ।
विजेता कौन हैं?
- जॉन क्लार्क (John Clarke): कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के प्रोफेसर।
- मिशेल एच. डेवोरेट (Michel H. Devoret): येल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर।
- जॉन एम. मार्टिनिस (John M. Martinis): कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा के प्रोफेसर (पूर्व में गूगल के साथ भी काम किया)।
उनकी अभूतपूर्व खोज क्या है (सरल भाषा में)?
कल्पना कीजिए कि आपके पास एक गेंद है और आप उसे एक दीवार के पार फेंकना चाहते हैं। सामान्य दुनिया में, आपको गेंद को दीवार के ऊपर से फेंकना होगा। लेकिन क्वांटम दुनिया में, एक संभावना है कि गेंद बिना किसी सुराख के सीधे दीवार के “आर-पार” निकल जाए। इस अजीब घटना को “क्वांटम टनलिंग” कहते हैं।
इसी तरह, हमारी दुनिया में आप एक रैंप पर आसानी से कहीं भी खड़े हो सकते हैं, लेकिन क्वांटम दुनिया में ऊर्जा सीढ़ियों की तरह होती है – आप या तो पहली सीढ़ी पर हो सकते हैं या दूसरी पर, बीच में कहीं नहीं। इसे “ऊर्जा का क्वांटाइज़ेशन” (Energy Quantization) कहते हैं।
इन तीनों वैज्ञानिकों ने यही दो अद्भुत क्वांटम घटनाएँ (टनलिंग और क्वांटाइज़ेशन) एक सामान्य विद्युत सर्किट (जिसे अतिचालक या Superconducting बनाया गया था) में घटित होते हुए न केवल देखा, बल्कि उसे नियंत्रित भी किया। उन्होंने एक ऐसी चिप बनाई जिसमें करंट के कण (इलेक्ट्रॉन) क्वांटम नियमों का पालन कर रहे थे। इसी नियंत्रित क्वांटम सर्किट को आज हम “क्यूबिट” (Qubit) कहते हैं, जो क्वांटम कंप्यूटर का बिल्डिंग ब्लॉक है।
यह खोज नोबेल पुरस्कार के योग्य क्यों है?
- दो दुनियाओं को जोड़ना: इससे पहले, क्वांटम प्रभाव केवल परमाणुओं और उप-परमाणु कणों जैसी प्राकृतिक सूक्ष्म चीजों में ही देखे जाते थे। इन वैज्ञानिकों ने साबित किया कि इन प्रभावों को मानव-निर्मित, बड़ी (मैक्रोस्कोपिक) प्रणालियों में भी बनाया और नियंत्रित किया जा सकता है।
- क्यूबिट का जन्म: इनकी खोज के बिना, एक स्थिर और नियंत्रणीय क्यूबिट बनाना लगभग असंभव था। उन्होंने क्लासिकल कंप्यूटर के ‘बिट’ (जो 0 या 1 होता है) के क्वांटम संस्करण ‘क्यूबिट’ (जो एक ही समय में 0 और 1 दोनों हो सकता है) को वास्तविकता में बदल दिया।
- एक नए क्षेत्र की नींव: उनके काम ने “सर्किट क्वांटम इलेक्ट्रोडायनामिक्स” (Circuit QED) नामक एक पूरे नए वैज्ञानिक क्षेत्र को जन्म दिया, जो आज क्वांटम कंप्यूटिंग अनुसंधान का सबसे सक्रिय क्षेत्र है।
भविष्य पर प्रभाव और अनुप्रयोग
इस खोज का सबसे बड़ा और सीधा प्रभाव क्वांटम कम्प्यूटिंग का विकास है। क्वांटम कंप्यूटर उन समस्याओं को सुलझा सकते हैं जिन्हें आज के सबसे शक्तिशाली सुपर कंप्यूटर भी अरबों वर्षों में हल नहीं कर सकते।
- दवा और सामग्री विज्ञान: नई दवाओं और सामग्रियों को आणविक स्तर पर डिज़ाइन करना।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): AI और मशीन लर्निंग को अकल्पनीय रूप से शक्तिशाली बनाना।
- वित्तीय मॉडलिंग: जटिल वित्तीय बाजारों का सटीक विश्लेषण करना।
- क्रिप्टोग्राफी: वर्तमान एन्क्रिप्शन विधियों को तोड़ना और अधिक सुरक्षित संचार प्रणालियाँ बनाना।
भौतिकी नोबेल 2025: रिविज़न पॉइंट्स
- विजेता: जॉन क्लार्क, मिशेल डेवोरेट, जॉन मार्टिनिस।
- मुख्य खोज: एक इलेक्ट्रिकल सर्किट में क्वांटम प्रभावों (टनलिंग और ऊर्जा क्वांटाइज़ेशन) का प्रदर्शन और नियंत्रण।
- मुख्य आविष्कार: “सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट” (The Superconducting Qubit) का निर्माण।
- सबसे बड़ा प्रभाव: क्वांटम कंप्यूटर बनाने की नींव रखना।
3.2 रसायन विज्ञान (Chemistry) का नोबेल पुरस्कार 2025: आणविक स्पंज बनाने वाले जादूगर

वर्ष 2025 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार उन तीन दूरदर्शी रसायनज्ञों को दिया गया है जिन्होंने “लेगो ब्लॉक्स” की तरह अणुओं को जोड़कर एक क्रांतिकारी नए प्रकार के पदार्थ का निर्माण किया। इन पदार्थों में हमारी दुनिया की कुछ सबसे बड़ी समस्याओं, जैसे जलवायु परिवर्तन और जल संकट, को हल करने की क्षमता है।
विजेता कौन हैं?
- सुसुमु कितागावा (Susumu Kitagawa): क्योटो विश्वविद्यालय, जापान के प्रोफेसर।
- रिचर्ड रॉब्सन (Richard Robson): मेलबर्न विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया के एमेरिटस प्रोफेसर। – उमर एम. याघी (Omar M. Yaghi): कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले, USA के प्रोफेसर।
उनकी अभूतपूर्व खोज क्या है (सरल भाषा में)?
इन वैज्ञानिकों ने “मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क” (Metal-Organic Frameworks – MOFs) नामक पदार्थों का आविष्कार और विकास किया।
इसे समझने का सबसे सरल तरीका एक आणविक (molecular) स्पंज की कल्पना करना है। MOFs क्रिस्टलीय पदार्थ होते हैं जो दो मुख्य घटकों से बने होते हैं:
- धातु आयन (Metal ions): ये कोनों की तरह काम करते हैं।
- जैविक लिंकर (Organic linkers): ये कोनों को जोड़ने वाली छड़ों की तरह काम करते हैं।
इन दो घटकों को अलग-अलग तरीकों से जोड़कर, वैज्ञानिक लगभग अनंत प्रकार के 3D ढांचे बना सकते हैं, जिनमें से प्रत्येक में विशिष्ट आकार और आकार के छिद्र (pores) होते हैं। इन छिद्रों का कुल सतह क्षेत्र अविश्वसनीय रूप से विशाल होता है – एक ग्राम MOF का सतह क्षेत्र एक फुटबॉल के मैदान के बराबर हो सकता है!
यह विशाल सतह क्षेत्र और छिद्रों को ट्यून करने की क्षमता MOFs को विभिन्न गैसों या अणुओं को पकड़ने, संग्रहीत करने और छोड़ने के लिए एकदम सही बनाती है।
यह खोज नोबेल पुरस्कार के योग्य क्यों है?
- एक नए क्षेत्र का निर्माण: इन वैज्ञानिकों ने “रेटिकुलर केमिस्ट्री” (Reticular Chemistry) नामक रसायन विज्ञान की एक पूरी नई शाखा की स्थापना की, जो बिल्डिंग ब्लॉक्स को मजबूत बंधनों के माध्यम से जोड़कर व्यवस्थित संरचनाएं बनाने पर केंद्रित है।
- अभूतपूर्व डिजाइन और नियंत्रण: पारंपरिक छिद्रपूर्ण सामग्री (जैसे सक्रिय कार्बन या जिओलाइट्स) में छिद्रों के आकार और व्यवस्था पर बहुत कम नियंत्रण होता है। MOFs पहली बार वैज्ञानिकों को परमाणु स्तर पर छिद्रों को डिजाइन और संश्लेषित करने की अनुमति देते हैं।
- असीम संभावनाएं: MOFs के बिल्डिंग ब्लॉक्स को बदलकर, वैज्ञानिक लगभग किसी भी वांछित कार्य के लिए एक कस्टम-निर्मित सामग्री बना सकते हैं, जिससे अनुप्रयोगों की एक विशाल श्रृंखला खुल जाती है।
भविष्य पर प्रभाव और अनुप्रयोग
MOFs को 21वीं सदी का चमत्कारी पदार्थ माना जा रहा है, जिसके अनुप्रयोग कई क्षेत्रों में क्रांति ला सकते हैं:
- कार्बन कैप्चर: बिजली संयंत्रों या सीधे हवा से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को कुशलतापूर्वक पकड़ना और जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करना।
- जल संचयन (Water Harvesting): रेगिस्तान जैसे शुष्क क्षेत्रों में भी हवा से नमी को सोखकर पीने योग्य पानी बनाना। उमर याघी की प्रयोगशाला ने एक ऐसा उपकरण बनाया है जो यह कर सकता है।
- गैस भंडारण: हाइड्रोजन या मीथेन जैसी स्वच्छ ऊर्जा गैसों को वाहनों के लिए पारंपरिक टैंकों की तुलना में बहुत कम दबाव पर सुरक्षित रूप से संग्रहीत करना।
- उत्प्रेरण (Catalysis): रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने के लिए छोटे रिएक्टरों के रूप में कार्य करना, जिससे औद्योगिक प्रक्रियाएं अधिक कुशल हो जाती हैं।
- ड्रग डिलीवरी: शरीर में दवाओं को लक्षित स्थानों पर धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से पहुँचाना।
रसायन नोबेल 2025: रिविज़न पॉइंट्स
- विजेता: सुसुमु कितागावा, रिचर्ड रॉब्सन, उमर याघी।
- मुख्य खोज: मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOFs) का डिजाइन और संश्लेषण।
- MOFs क्या हैं: धातु आयनों और जैविक लिंकर्स से बने अत्यधिक छिद्रपूर्ण, क्रिस्टलीय पदार्थ।
- सबसे बड़ा प्रभाव: कार्बन कैप्चर, जल संचयन और स्वच्छ ऊर्जा भंडारण जैसी समस्याओं का समाधान।
3.3 चिकित्सा (Physiology or Medicine) का नोबेल पुरस्कार 2025: शरीर के ‘दोस्त’ और ‘दुश्मन’ की पहचान

वर्ष 2025 का फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार उन तीन इम्यूनोलॉजिस्ट को प्रदान किया गया है जिनकी मौलिक खोजों ने एक गहरे सवाल का जवाब दिया: हमारा प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) बाहरी हमलावरों (जैसे बैक्टीरिया, वायरस) और शरीर की अपनी स्वस्थ कोशिकाओं के बीच अंतर कैसे करता है? उनकी खोज ने ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में एक नई क्रांति की नींव रखी है।
विजेता कौन हैं?
- मैरी ई. ब्रुनको (Mary E. Brunko): जेनेनटेक, USA की एक प्रमुख वैज्ञानिक।
- फ्रेड रैमस्डेल (Fred Ramsdell): पार्कर इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर इम्यूनोथेरेपी, USA के उपाध्यक्ष।
- डॉ. शिमोन साकागुची (Dr. Shimon Sakaguchi): ओसाका विश्वविद्यालय, जापान के प्रतिष्ठित प्रोफेसर।
उनकी अभूतपूर्व खोज क्या है (सरल भाषा में)?
इन वैज्ञानिकों ने हमारे इम्यून सिस्टम के एक विशेष प्रकार के “शांतिदूत” कोशिकाओं की खोज और उनके कार्यप्रणाली को उजागर किया, जिन्हें “रेगुलेटरी टी सेल्स” (Regulatory T cells) या Tregs कहा जाता है।
हमारा इम्यून सिस्टम T-कोशिकाओं (T-cells) नामक सैनिकों से भरा होता है जो हमलावरों को मारने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। हालांकि, कभी-कभी कुछ T-कोशिकाएं गलती से शरीर की अपनी स्वस्थ कोशिकाओं को ही दुश्मन समझकर उन पर हमला करने लगती हैं। अगर इसे अनियंत्रित छोड़ दिया जाए, तो यह गंभीर ऑटोइम्यून बीमारियों का कारण बन सकता है।
इन तीनों वैज्ञानिकों ने, अपने अलग-अलग लेकिन पूरक कार्यों के माध्यम से, Tregs की खोज की। Tregs इम्यून सिस्टम के ‘पुलिस बल’ या ‘मध्यस्थ’ की तरह काम करते हैं। वे:
- आत्म-हमले को रोकते हैं: वे उन T-कोशिकाओं को शांत करते हैं या निष्क्रिय करते हैं जो शरीर की अपनी कोशिकाओं पर हमला करने की कोशिश कर रही हैं।
- इम्यून प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं: जब कोई संक्रमण खत्म हो जाता है, तो Tregs ही इम्यून सिस्टम को “स्टैंड डाउन” का आदेश देते हैं ताकि अत्यधिक सूजन (inflammation) से शरीर को नुकसान न हो।
डॉ. साकागुची ने FOXP3 नामक एक मास्टर जीन की पहचान की जो Tregs के विकास और कार्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस जीन की खोज ने Tregs की पहचान करना और उनका अध्ययन करना बहुत आसान बना दिया।
यह खोज नोबेल पुरस्कार के योग्य क्यों है?
- एक मौलिक रहस्य का समाधान: दशकों से, “इम्यूनोलॉजिकल टॉलरेंस” (प्रतिरक्षा सहिष्णुता) – यानी शरीर खुद को कैसे सहन करता है – एक पहेली थी। Tregs की खोज ने इस पहेली के सबसे महत्वपूर्ण टुकड़ों में से एक प्रदान किया।
- ऑटोइम्यूनिटी की कुंजी: उनकी खोज ने स्पष्ट रूप से दिखाया कि जब Tregs ठीक से काम नहीं करते हैं, तो ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे टाइप 1 डायबिटीज, रुमेटीइड गठिया (rheumatoid arthritis), और मल्टीपल स्केलेरोसिस (multiple sclerosis) विकसित होती हैं।
- नए चिकित्सीय रास्ते: Tregs की कार्यप्रणाली को समझकर, अब वैज्ञानिक इन कोशिकाओं की संख्या या कार्य को बढ़ाकर या घटाकर बीमारियों का इलाज करने के तरीके विकसित कर सकते हैं।
भविष्य पर प्रभाव और अनुप्रयोग
Tregs की खोज चिकित्सा के क्षेत्र में परिवर्तनकारी साबित हो रही है:
- ऑटोइम्यून बीमारियों का इलाज: मरीजों से Tregs निकालकर, उन्हें लैब में बढ़ाकर, और फिर उन्हें वापस मरीज में इंजेक्ट करके ऑटोइम्यून हमलों को शांत करने के लिए क्लिनिकल परीक्षण चल रहे हैं।
- अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplantation): प्रत्यारोपित अंगों (जैसे किडनी या लिवर) को अस्वीकार होने से बचाने के लिए Tregs का उपयोग किया जा सकता है, जिससे शक्तिशाली इम्यून-दबाने वाली दवाओं की आवश्यकता कम हो सकती है।
- कैंसर इम्यूनोथेरेपी: कुछ कैंसर Tregs का उपयोग खुद को इम्यून सिस्टम के हमले से बचाने के लिए करते हैं। वैज्ञानिक अब उन दवाओं का विकास कर रहे हैं जो ट्यूमर के भीतर Tregs को ब्लॉक करती हैं, जिससे इम्यून सिस्टम कैंसर को बेहतर ढंग से मार सकता है।
- एलर्जी और अस्थमा: इन स्थितियों में भी Tregs की भूमिका होती है, और भविष्य में इनके आधार पर नए उपचार विकसित किए जा सकते हैं।
चिकित्सा नोबेल 2025: रिविज़न पॉइंट्स
- विजेता: मैरी ब्रुनको, फ्रेड रैमस्डेल, शिमोन साकागुची।
- मुख्य खोज: “रेगुलेटरी टी सेल्स” (Tregs) की खोज और उनकी भूमिका।
- Tregs क्या हैं: इम्यून सिस्टम की ‘शांतिदूत’ कोशिकाएं जो शरीर को अपने ऊपर हमला करने से रोकती हैं।
- सबसे बड़ा प्रभाव: ऑटोइम्यून बीमारियों, अंग प्रत्यारोपण और कैंसर के लिए नए उपचारों का विकास।
3.4 साहित्य (Literature) का नोबेल पुरस्कार 2025: सर्वनाश के बीच कला की प्रतिध्वनि

वर्ष 2025 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार हंगरी के उपन्यासकार और पटकथा लेखक लास्जलो क्रास्ज्नाहोरकाई (László Krasznahorkai) को प्रदान किया गया है। स्वीडिश अकादमी ने उन्हें “उनके आकर्षक और दूरदर्शी साहित्यिक कार्य के लिए, जो सर्वनाशकारी आतंक के बीच भी कला की शक्ति की पुष्टि करता है,” सम्मानित किया। क्रास्ज्नाहोरकाई को समकालीन साहित्य के सबसे मौलिक और चुनौतीपूर्ण लेखकों में से एक माना जाता है।
विजेता कौन हैं?
- नाम: लास्जलो क्रास्ज्नाहोरकाई (László Krasznahorkai)
- जन्म: 5 जनवरी 1954, ग्युला, हंगरी
- राष्ट्रीयता: हंगेरियन
- प्रसिद्धि: अपने गहरे दार्शनिक और अक्सर निराशावादी उपन्यासों के लिए जाने जाते हैं, जिनकी तुलना फ्रांज काफ्का और सैमुअल बेकेट जैसे लेखकों से की जाती है।
उनकी लेखन शैली और विषय क्या हैं?
क्रास्ज्नाहोरकाई का लेखन आम पाठकों के लिए नहीं है। उनकी शैली की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं:
- लंबे और जटिल वाक्य: उनके उपन्यास अक्सर ऐसे वाक्यों से बने होते हैं जो पृष्ठों तक चल सकते हैं। यह शैली पाठक को एक ऐसी दुनिया में खींच लेती है जिससे बाहर निकलना मुश्किल होता है, और यह पात्रों की भ्रमित और जुनूनी मानसिक स्थिति को दर्शाती है।
- निराशावादी और सर्वनाशकारी थीम: उनके कार्यों में अक्सर सामाजिक विघटन, अर्थहीनता, नौकरशाही का पागलपन और मानवीय स्थिति की निराशा को दर्शाया जाता है। उनके पात्र अक्सर एक ऐसी दुनिया में फंसे होते हैं जो ढह रही है, और वे किसी प्रकार के उद्धार या अर्थ की तलाश में होते हैं जो कभी नहीं मिलता।
- दर्शन और आध्यात्मिकता: निराशा के बावजूद, उनके उपन्यासों में सौंदर्य, कला और आध्यात्मिकता की एक गहन खोज होती है। उनके पात्र अक्सर किसी उच्च सत्य की तलाश में होते हैं, भले ही वह मायावी हो।
- धीमी गति: उनकी कहानियाँ धीरे-धीरे सामने आती हैं, जो एक तनावपूर्ण और रहस्यमय माहौल बनाती हैं।
प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ (Major Works)
क्रास्ज्नाहोरकाई की कुछ सबसे प्रसिद्ध कृतियाँ, जिनका अंग्रेजी में अनुवाद हो चुका है, निम्नलिखित हैं:
- सैटानटैंगो (Satantango, 1985): उनका पहला और सबसे प्रसिद्ध उपन्यास। यह एक ढहते हुए हंगेरियन कृषि सामूहिक की कहानी है, जहाँ एक करिश्माई लेकिन खतरनाक व्यक्ति के आगमन से निवासियों की आखिरी उम्मीदें भी खत्म हो जाती हैं।
- द मेलानकली ऑफ रेसिस्टेंस (The Melancholy of Resistance, 1989): एक छोटे से हंगेरियन शहर में एक रहस्यमयी सर्कस के आगमन की कहानी है, जिसके साथ एक विशाल व्हेल का शव और एक हिंसक भीड़ आती है, जो शहर में अराजकता फैला देती है।
- वॉर एंड वॉर (War and War, 1999): एक हंगेरियन अभिलेखागार की कहानी है जो एक रहस्यमयी पांडुलिपि की खोज करता है और उसे सर्वनाश से बचाने के लिए न्यूयॉर्क शहर के केंद्र में इंटरनेट पर टाइप करने के लिए जुनूनी हो जाता है।
यह पुरस्कार क्यों महत्वपूर्ण है?
लास्जलो क्रास्ज्नाहोरकाई को साहित्य का नोबेल पुरस्कार देना कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
- गैर-मुख्यधारा साहित्य को मान्यता: यह पुरस्कार व्यावसायिक रूप से सफल या आसानी से पढ़े जाने वाले साहित्य के बजाय कलात्मक रूप से साहसी और बौद्धिक रूप से चुनौतीपूर्ण लेखन को मान्यता देता है।
- मध्य यूरोपीय आवाज़: यह पुरस्कार दुनिया का ध्यान हंगरी और मध्य यूरोप के समृद्ध और जटिल साहित्यिक परिदृश्य की ओर आकर्षित करता है।
- मानवीय स्थिति का अन्वेषण: एक ऐसे युग में जहाँ अक्सर सरल उत्तर दिए जाते हैं, क्रास्ज्नाहोरकाई का काम हमें आधुनिक जीवन की जटिलताओं, अनिश्चितताओं और नैतिक दुविधाओं का सामना करने के लिए मजबूर करता है।
साहित्य नोबेल 2025: रिविज़न पॉइंट्स
- विजेता: लास्जलो क्रास्ज्नाहोरकाई।
- देश: हंगरी।
- क्यों मिला: उनके गहन, दूरदर्शी और चुनौतीपूर्ण साहित्यिक कार्यों के लिए।
- लेखन शैली: लंबे, जटिल वाक्य; सर्वनाशकारी और दार्शनिक थीम।
- प्रसिद्ध कृति: सैटानटैंगो (Satantango)।
3.5 शांति (Peace) का नोबेल पुरस्कार 2025: तानाशाही के खिलाफ लोकतंत्र की निडर आवाज

वर्ष 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की एक साहसी राजनेता और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता मारिया कोरिना मचाडो (María Corina Machado) को प्रदान किया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने “वेनेजुएला में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की बहाली के लिए उनके अथक और साहसी संघर्ष” के लिए उन्हें सम्मानित किया है। यह पुरस्कार एक ऐसे व्यक्ति को मान्यता देता है जिसने व्यक्तिगत जोखिम और दमन के सामने झुकने से इनकार कर दिया है।
विजेता कौन हैं?
- नाम: मारिया कोरिना मचाडो (María Corina Machado)
- जन्म: 7 अक्टूबर 1967, काराकस, वेनेजुएला
- राष्ट्रीयता: वेनेजुएलाई
- पहचान: वेनेजुएला में विपक्षी आंदोलन की सबसे प्रमुख और मुखर नेताओं में से एक। वह नागरिक अधिकार संगठन ‘सुमाते’ (Súmate) की संस्थापक और पूर्व सदस्य हैं और नेशनल असेंबली की पूर्व सदस्य भी रही हैं।
उनका संघर्ष और योगदान क्या है?
मारिया कोरिना मचाडो दो दशकों से भी अधिक समय से वेनेजुएला की सत्तावादी सरकारों के खिलाफ एक प्रमुख आवाज रही हैं। उनका संघर्ष कई मोर्चों पर फैला हुआ है:
- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की वकालत: मचाडो ने लगातार वेनेजुएला में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की मांग की है। उन्होंने चुनावी धोखाधड़ी का दस्तावेजीकरण किया है और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की उपस्थिति के लिए अभियान चलाया है।
- मानवाधिकारों का संरक्षण: उन्होंने राजनीतिक कैदियों, प्रताड़ित पीड़ितों और उन परिवारों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई है जिनके सदस्य सरकारी बलों द्वारा मारे गए हैं। उन्होंने सरकारी दमन के खिलाफ निडर होकर बोला है।
- नागरिक समाज को संगठित करना: ‘सुमाते’ जैसे संगठनों के माध्यम से, उन्होंने नागरिकों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के बारे में शिक्षित करने और उन्हें शांतिपूर्ण विरोध के लिए संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- सरकारी दमन का सामना: अपने काम के कारण, मचाडो को लगातार उत्पीड़न, धमकियों, शारीरिक हमलों और राजनीतिक आरोपों का सामना करना पड़ा है। सरकार ने उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया है और उन्हें सार्वजनिक पद संभालने से प्रतिबंधित कर दिया है, लेकिन उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा है।
2023-24 में, उन्होंने विपक्षी राष्ट्रपति पद के प्राइमरी चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल की, जिससे तानाशाही के खिलाफ उनकी व्यापक लोकप्रियता का पता चलता है, भले ही सरकार ने उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया हो।
यह पुरस्कार क्यों महत्वपूर्ण है?
- तानाशाही के खिलाफ संघर्ष को वैश्विक मान्यता: यह पुरस्कार केवल मचाडो का ही नहीं, बल्कि वेनेजुएला के उन लाखों लोगों का सम्मान है जो दमनकारी शासन के तहत लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
- महिलाओं के नेतृत्व को सलाम: यह पुरस्कार राजनीति और मानवाधिकारों के क्षेत्र में महिलाओं के साहसी नेतृत्व को उजागर करता है। मचाडो दुनिया भर की उन महिलाओं के लिए एक प्रेरणा हैं जो अन्याय के खिलाफ लड़ रही हैं।
- अहिंसक प्रतिरोध का समर्थन: नोबेल समिति ने मचाडो के शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीकों पर जोर देकर यह संदेश दिया है कि लोकतंत्र की लड़ाई हथियारों से नहीं, बल्कि नागरिक अवज्ञा और दृढ़ संकल्प से लड़ी जानी चाहिए।
- वेनेजुएला के संकट पर ध्यान केंद्रित करना: यह पुरस्कार वेनेजुएला के गंभीर मानवीय और राजनीतिक संकट की ओर दुनिया का ध्यान फिर से आकर्षित करता है, जिससे देश पर लोकतांत्रिक सुधारों के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है।
शांति नोबेल 2025: रिविज़न पॉइंट्स
- विजेता: मारिया कोरिना मचाडो।
- देश: वेनेजुएला।
- क्यों मिला: वेनेजुएला में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए उनके साहसी और अहिंसक संघर्ष के लिए।
- मुख्य योगदान: स्वतंत्र चुनावों की वकालत, सरकारी दमन का विरोध, और नागरिक समाज को संगठित करना।
- पुरस्कार का संदेश: तानाशाही के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध और महिला नेतृत्व को वैश्विक समर्थन।
3.6 अर्थशास्त्र (Economic Sciences) का नोबेल पुरस्कार 2025: समृद्धि का नवाचार इंजन
वर्ष 2025 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार तीन अर्थशास्त्रियों – जोएल मोकिर, फिलिप अघियन, और पीटर हॉविट – को संयुक्त रूप से “नवाचार-संचालित आर्थिक विकास (Innovation-Driven Economic Growth) की व्याख्या करने” के लिए प्रदान किया गया है। उनके शोध ने इस मौलिक सवाल का जवाब दिया है कि क्यों कुछ अर्थव्यवस्थाएं लगातार समृद्ध होती हैं जबकि अन्य पिछड़ जाती हैं।
विजेता कौन हैं?
- जोएल मोकिर (Joel Mokyr): नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी, अमेरिका में प्रोफेसर। (डच-इजरायली-अमेरिकी नागरिक)
- फिलिप अघियन (Philippe Aghion): कॉलेज डी फ्रांस, INSEAD और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से जुड़े हैं। (फ्रांसीसी नागरिक)
- पीटर हॉविट (Peter Howitt): ब्राउन यूनिवर्सिटी, अमेरिका में प्रोफेसर। (कनाडाई नागरिक)
उनकी अभूतपूर्व खोज क्या है (सरल भाषा में)?
इन तीनों अर्थशास्त्रियों ने यह समझाया है कि किसी भी देश की दीर्घकालिक समृद्धि का सबसे बड़ा इंजन **लगातार होने वाला नवाचार (Innovation)** है।
जोएल मोकिर ने एक आर्थिक इतिहासकार के रूप में, ऐतिहासिक साक्ष्यों का उपयोग करके यह दिखाया कि औद्योगिक क्रांति के बाद समाज आर्थिक ठहराव से निकलकर निरंतर विकास की ओर कैसे बढ़े। उन्होंने तर्क दिया कि यह केवल नई मशीनों के कारण नहीं, बल्कि ज्ञान, प्रयोग और नए विचारों के प्रति खुलेपन की संस्कृति के कारण संभव हुआ।
वहीं, फिलिप अघियन और पीटर हॉविट ने “रचनात्मक विनाश” (Creative Destruction) की अवधारणा को एक शक्तिशाली गणितीय मॉडल में बदल दिया। उनका सिद्धांत कहता है कि आर्थिक विकास एक चक्र में होता है:
- एक नया आविष्कार (जैसे स्मार्टफोन) बाजार में आता है।
- यह पुरानी तकनीक (जैसे कीपैड वाले फोन) और उससे जुड़ी कंपनियों को विस्थापित कर देता है (यह ‘विनाश’ है)।
- यह प्रक्रिया नई नौकरियों, नए बाजारों और उच्च उत्पादकता को जन्म देती है (यह ‘रचना’ है)।
यह खोज नोबेल पुरस्कार के योग्य क्यों है?
- एक मौलिक सिद्धांत की स्थापना: उन्होंने आर्थिक विकास के सबसे महत्वपूर्ण कारक – नवाचार – को औपचारिक आर्थिक सिद्धांतों के केंद्र में रखा।
- ऐतिहासिक और गणितीय दृष्टिकोण का संगम: मोकिर के ऐतिहासिक विश्लेषण और अघियन-हॉविट के गणितीय मॉडल ने मिलकर इस सिद्धांत को एक मजबूत और व्यापक आधार प्रदान किया।
- नीति-निर्माण के लिए महत्वपूर्ण: उनके काम ने दुनिया भर की सरकारों को यह समझने में मदद की है कि आर्थिक विकास के लिए केवल पूंजी और श्रम ही नहीं, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाली नीतियां बनाना क्यों महत्वपूर्ण है।
अर्थशास्त्र नोबेल 2025: रिविज़न पॉइंट्स
- विजेता: जोएल मोकिर, फिलिप अघियन, और पीटर हॉविट।
- मुख्य खोज: यह समझाना कि ‘नवाचार’ (Innovation) ही दीर्घकालिक आर्थिक विकास की कुंजी है।
- मुख्य अवधारणाएं: तकनीकी प्रगति के लिए सांस्कृतिक खुलापन (मोकिर) और ‘रचनात्मक विनाश’ (अघियन और हॉविट)।
- सबसे बड़ा प्रभाव: नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाली आर्थिक नीतियों को आकार देना।
4. नोबेल पुरस्कार का गौरवशाली इतिहास: सब कुछ जो आपको जानना चाहिए
नोबेल पुरस्कार की कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही नाटकीय भी। यह एक ऐसे व्यक्ति की विरासत है जिसे दुनिया “मौत के सौदागर” के रूप में याद नहीं रखना चाहती थी। यह कहानी है अल्फ्रेड नोबेल की, डायनामाइट के आविष्कारक की, जिनकी अंतिम इच्छा ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार को जन्म दिया।
अल्फ्रेड नोबेल कौन थे? (1833-1896)
अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल स्वीडन के स्टॉकहोम में जन्मे एक रसायनज्ञ, इंजीनियर, आविष्कारक और उद्यमी थे। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और अपने जीवनकाल में उन्होंने 355 पेटेंट अपने नाम किए, जिनमें सबसे प्रसिद्ध डायनामाइट का आविष्कार था। डायनामाइट ने निर्माण और खनन जैसे उद्योगों में क्रांति ला दी, जिससे सुरंगें बनाना, नहरें खोदना और खदानों से अयस्क निकालना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित हो गया।
इस आविष्कार और अन्य रासायनिक नवाचारों (जैसे गेलिग्नाइट और बैलिस्टाइट) ने उन्हें अपार धन-संपत्ति दिलाई। उन्होंने दुनिया भर में 90 से अधिक हथियार कारखाने और कंपनियां स्थापित कीं।
वह घटना जिसने सब कुछ बदल दिया
1888 में, अल्फ्रेड के भाई लुडविग की मृत्यु हो गई। लेकिन एक फ्रांसीसी अखबार ने गलती से अल्फ्रेड नोबेल के मरने की खबर छाप दी। उस शोक संदेश का शीर्षक था, “Le marchand de la mort est mort” (मौत का सौदागर मर चुका है)। लेख में इस बात की आलोचना की गई थी कि कैसे नोबेल ने लोगों को पहले से कहीं अधिक तेजी से मारने के तरीकों का आविष्कार करके अपनी संपत्ति बनाई। इस घटना ने अल्फ्रेड नोबेल को अंदर तक झकझोर दिया। वह यह सोचकर भयभीत हो गए कि इतिहास उन्हें केवल एक विध्वंसक के रूप में याद रखेगा।
एक क्रांतिकारी वसीयत और नोबेल पुरस्कार की स्थापना
अपनी विरासत को बदलने की इच्छा से प्रेरित होकर, अल्फ्रेड नोबेल ने 27 नवंबर, 1895 को अपनी तीसरी और अंतिम वसीयत लिखी। इस वसीयत ने उनके रिश्तेदारों को चौंका दिया, क्योंकि उन्होंने अपनी विशाल संपत्ति का लगभग 94% हिस्सा (उस समय 31 मिलियन स्वीडिश क्रोनर) एक ट्रस्ट स्थापित करने के लिए समर्पित कर दिया।
उनकी इच्छा थी कि इस ट्रस्ट के ब्याज से हर साल पांच क्षेत्रों में उन व्यक्तियों को पुरस्कार दिए जाएं जिन्होंने “मानव जाति को सबसे बड़ा लाभ” पहुँचाया हो:
- भौतिकी (Physics)
- रसायन विज्ञान (Chemistry)
- चिकित्सा (Physiology or Medicine)
- साहित्य (Literature)
- शांति (Peace)
काफी विवादों और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद, उनकी इच्छा का सम्मान किया गया और नोबेल फाउंडेशन की स्थापना की गई ताकि पुरस्कारों का प्रबंधन किया जा सके। पहला नोबेल पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर, 1901 को, अल्फ्रेड नोबेल की मृत्यु की पांचवीं वर्षगांठ पर आयोजित किया गया।
अर्थशास्त्र पुरस्कार का जुड़ाव
यह एक आम गलतफहमी है कि अर्थशास्त्र का पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की मूल वसीयत का हिस्सा था। वास्तव में, यह पुरस्कार बहुत बाद में स्थापित किया गया था।
- नाम: The Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences in Memory of Alfred Nobel (अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान में स्वेरिजेस रिक्सबैंक पुरस्कार)।
- स्थापना: 1968 में स्वीडन के केंद्रीय बैंक, स्वेरिजेस रिक्सबैंक ने अपनी 300वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस पुरस्कार की स्थापना की।
- पहला पुरस्कार: 1969 में प्रदान किया गया।
हालांकि यह तकनीकी रूप से “नोबेल पुरस्कार” नहीं है, लेकिन इसे नोबेल फाउंडेशन द्वारा प्रशासित किया जाता है और विजेताओं का चयन रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा उसी सिद्धांत पर किया जाता है। इसे नोबेल पुरस्कारों के साथ ही प्रदान किया जाता है और इसे व्यापक रूप से अर्थशास्त्र का नोबेल ही माना जाता है।
पुरस्कार में क्या-क्या शामिल होता है?
प्रत्येक नोबेल पुरस्कार विजेता, जिन्हें ‘लॉरेट’ (Laureate) कहा जाता है, को तीन मुख्य चीजें प्रदान की जाती हैं:
- एक नोबेल पदक (A Nobel Medal): प्रत्येक पुरस्कार के लिए पदक का डिज़ाइन थोड़ा अलग होता है, लेकिन सभी में अल्फ्रेड नोबेल का चित्र अंकित होता है। यह 18 कैरेट ग्रीन गोल्ड से बना होता है और इस पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ी होती है।
- एक नोबेल डिप्लोमा (A Nobel Diploma): यह अपने आप में कला का एक अनूठा काम होता है। प्रत्येक डिप्लोमा विजेता के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया जाता है, जिसमें विजेता का नाम और उनके योगदान का संक्षिप्त विवरण (citation) लिखा होता है।
- एक मौद्रिक पुरस्कार (A Monetary Award): यह पुरस्कार की सबसे चर्चित चीज होती है। राशि हर साल नोबेल फाउंडेशन की कमाई के आधार पर बदल सकती है।
पुरस्कार राशि कितनी होती है और इसका बँटवारा कैसे होता है?
नोबेल फाउंडेशन ने 2024 के लिए पुरस्कार राशि **11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (SEK)** निर्धारित की है। यह राशि भारतीय रुपये में लगभग **₹8.9 करोड़** और अमेरिकी डॉलर में लगभग **$1 मिलियन** के बराबर होती है।
राशि का बँटवारा नोबेल फाउंडेशन के नियमों के अनुसार होता है:
- एक विजेता: यदि किसी श्रेणी में केवल एक विजेता है, तो उसे पूरी राशि मिलती है।
- दो विजेता: यदि दो विजेता हैं, तो राशि दोनों में बराबर-बराबर बाँट दी जाती है।
- तीन विजेता: यदि तीन विजेता हैं, तो पुरस्कार देने वाली समिति के पास दो विकल्प होते हैं:
- राशि को तीनों में बराबर-बराबर (1/3 प्रत्येक) बाँट दिया जाए।
- एक विजेता को आधी राशि (1/2) और बाकी दो को एक-चौथाई (1/4 प्रत्येक) राशि दी जाए।
महत्वपूर्ण नियम
नोबेल फाउंडेशन के नियमों के अनुसार, किसी भी एक पुरस्कार को तीन से अधिक लोगों के बीच साझा नहीं किया जा सकता है। हालांकि, शांति पुरस्कार जो किसी संगठन को दिया जाता है, उसमें तीन से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।
5. नोबेल पुरस्कार के आश्चर्यजनक तथ्य और आँकड़े (परीक्षा विशेष)
नोबेल पुरस्कारों का 120 से अधिक वर्षों का इतिहास अनगिनत रोचक कहानियों और आश्चर्यजनक आँकड़ों से भरा पड़ा है। यह खंड प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ से अक्सर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
आयु के रिकॉर्ड (Age Records)
- सबसे कम उम्र के विजेता:
- मलाला यूसुफजई (Malala Yousafzai) – 17 वर्ष की आयु में शांति का नोबेल (2014) जीता।
- सबसे वृद्ध विजेता:
- जॉन बी. गुडइनफ (John B. Goodenough) – 97 वर्ष की आयु में रसायन विज्ञान का नोबेल (2019) जीता।
एक से अधिक बार नोबेल जीतने वाले (Multiple Laureates)
यह सम्मान केवल कुछ चुनिंदा व्यक्तियों और संगठनों को ही मिला है:
- मैरी क्यूरी (Marie Curie): अकेली महिला जिन्होंने दो बार और दो अलग-अलग वैज्ञानिक क्षेत्रों में यह पुरस्कार जीता।
- भौतिकी (1903): रेडियोधर्मिता की खोज के लिए (अपने पति पियरे क्यूरी और हेनरी बेकरेल के साथ साझा)।
- रसायन विज्ञान (1911): रेडियम और पोलोनियम के शुद्धिकरण के लिए।
- लिनस पॉलिंग (Linus Pauling): एकमात्र व्यक्ति जिसने दो अलग-अलग क्षेत्रों में दो अविभाजित पुरस्कार जीते हैं।
- रसायन विज्ञान (1954): रासायनिक बंधन की प्रकृति पर अपने शोध के लिए।
- शांति (1962): परमाणु हथियारों के परीक्षण के खिलाफ अपने अभियान के लिए।
- जॉन बारडीन (John Bardeen): एकमात्र व्यक्ति जिसने दो बार भौतिकी का नोबेल पुरस्कार जीता।
- भौतिकी (1956): ट्रांजिस्टर के आविष्कार के लिए।
- भौतिकी (1972): अतिचालकता (superconductivity) के सिद्धांत के लिए।
- फ्रेडरिक सेंगर (Frederick Sanger): एकमात्र व्यक्ति जिसने दो बार रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार जीता।
- रसायन विज्ञान (1958): इंसुलिन की संरचना का निर्धारण करने के लिए।
- रसायन विज्ञान (1980): डीएनए को अनुक्रमित करने की एक विधि का आविष्कार करने के लिए।
संगठन:
- रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति (ICRC) ने तीन बार (1917, 1944, 1963) शांति का नोबेल पुरस्कार जीता है।
- शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त (UNHCR) ने दो बार (1954, 1981) शांति का नोबेल पुरस्कार जीता है।
परीक्षा के लिए विशेष तथ्य
- परिवार में नोबेल: क्यूरी परिवार सबसे प्रसिद्ध ‘नोबेल परिवार’ है, जिसमें मैरी क्यूरी (2), उनके पति पियरे क्यूरी (1), और उनकी बेटी आइरीन जोलियट-क्यूरी और दामाद फ्रेडरिक जोलियट (दोनों ने 1935 में रसायन विज्ञान का नोबेल साझा किया) शामिल हैं। कुल मिलाकर 5 नोबेल पुरस्कार।
- मरणोपरांत पुरस्कार (Posthumous Awards): 1974 में, नोबेल फाउंडेशन ने नियम बनाया कि पुरस्कार किसी को मरणोपरांत नहीं दिया जाएगा, जब तक कि विजेता की मृत्यु पुरस्कार की घोषणा के बाद न हुई हो। इससे पहले, केवल दो लोगों को मरणोपरांत यह पुरस्कार मिला था: एरिक एक्सेल कार्लफेल्ड (साहित्य, 1931) और डैग हैमरस्कजोल्ड (शांति, 1961)।
- पुरस्कार अस्वीकार करने वाले:
- ज्यां-पाल सार्त्र (Jean-Paul Sartre): 1964 में साहित्य का नोबेल स्वेच्छा से अस्वीकार कर दिया, क्योंकि वे किसी भी आधिकारिक सम्मान को स्वीकार नहीं करते थे।
- ले डक थो (Le Duc Tho): 1973 में वियतनाम युद्ध विराम समझौते के लिए हेनरी किसिंजर के साथ शांति पुरस्कार की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि उनका मानना था कि वियतनाम में अभी तक शांति स्थापित नहीं हुई थी।
- एडॉल्फ हिटलर ने तीन जर्मन विजेताओं को अपने पुरस्कार स्वीकार करने से रोक दिया था।
- गांधीजी और नोबेल: महात्मा गांधी को 5 बार नामांकित किया गया था, लेकिन उन्हें कभी भी शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला, जिसे नोबेल समिति की सबसे बड़ी चूकों में से एक माना जाता है।
नोबेल पुरस्कार विजेताओं के आँकड़े (1901-2024 तक) – एक नज़र में
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल पुरस्कार (1901-2024) | लगभग 621 पुरस्कार |
| कुल विजेता (Laureates) | लगभग 989 व्यक्ति और 27 संगठन |
| महिला विजेता | 65 (मैरी क्यूरी दो बार गिनी गईं) |
| सबसे आम जन्मदिन | 21 मई और 28 फरवरी |
6. भारत और नोबेल पुरस्कार: एक समर्पित गाइड
भारत का नोबेल पुरस्कारों के साथ एक गौरवशाली और प्रेरणादायक इतिहास रहा है। साहित्य और विज्ञान से लेकर शांति और अर्थशास्त्र तक, भारतीय और भारतीय मूल के विद्वानों ने मानवता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आइए, उन सभी महान हस्तियों को जानें जिन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया है।
नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय नागरिक (Indian Citizens)
ये वे विजेता हैं जिन्हें पुरस्कार मिलते समय वे भारत के नागरिक थे।
| विजेता का नाम | वर्ष | क्षेत्र | योगदान |
|---|---|---|---|
| रबीन्द्रनाथ टैगोर | 1913 | साहित्य | उनकी काव्य-कृति ‘गीतांजलि’ के लिए, जो अत्यंत संवेदनशील, नवीन और सुंदर कविता है। वह यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय और पहले भारतीय थे। |
| सर चंद्रशेखर वेंकट रमन (सी.वी. रमन) | 1930 | भौतिकी | प्रकाश के प्रकीर्णन (scattering of light) पर उनके कार्य और ‘रमन प्रभाव’ (Raman Effect) की खोज के लिए। यह विज्ञान में भारत का पहला नोबेल था। |
| मदर टेरेसा | 1979 | शांति | पीड़ित मानवता की मदद के लिए उनके अथक कार्य के लिए। उन्होंने कोलकाता में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की स्थापना की। (वह अल्बानियाई मूल की थीं लेकिन भारतीय नागरिक थीं)। |
| अमर्त्य सेन | 1998 | अर्थशास्त्र | कल्याणकारी अर्थशास्त्र (Welfare Economics) और सामाजिक पसंद के सिद्धांत (Social Choice Theory) में उनके योगदान के लिए। उन्होंने अकाल के कारणों पर गहन अध्ययन किया। |
| कैलाश सत्यार्थी | 2014 | शांति | बच्चों और युवाओं के दमन के खिलाफ और सभी बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए उनके संघर्ष के लिए। उन्होंने यह पुरस्कार मलाला यूसुफजई के साथ साझा किया। |
भारतीय मूल के नोबेल पुरस्कार विजेता (Laureates of Indian Origin)
ये वे विजेता हैं जिनका जन्म भारत में हुआ था या जिनके माता-पिता भारतीय थे, लेकिन पुरस्कार प्राप्त करते समय वे किसी अन्य देश के नागरिक थे।
- हर गोबिंद खोराना (1968, चिकित्सा): उन्होंने यह समझने में मदद की कि डीएनए में न्यूक्लियोटाइड का क्रम प्रोटीन के संश्लेषण को कैसे नियंत्रित करता है। वह पुरस्कार के समय एक अमेरिकी नागरिक थे।
- सुब्रह्मण्यन् चंद्रशेखर (1983, भौतिकी): तारों की संरचना और विकास पर उनके सैद्धांतिक अध्ययन के लिए, विशेष रूप से ‘चंद्रशेखर सीमा’ (Chandrasekhar Limit) की खोज के लिए। वह एक अमेरिकी नागरिक थे।
- वेंकटरमन “वेंकी” रामकृष्णन (2009, रसायन विज्ञान): राइबोसोम की संरचना और कार्य के अध्ययन के लिए। राइबोसोम कोशिकाओं में प्रोटीन का उत्पादन करते हैं। वह एक ब्रिटिश और अमेरिकी नागरिक हैं।
- अभिजीत बनर्जी (2019, अर्थशास्त्र): वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए उनके प्रयोगात्मक दृष्टिकोण के लिए। उन्होंने यह पुरस्कार अपनी पत्नी एस्थर डुफ्लो और माइकल क्रेमर के साथ साझा किया। वह एक अमेरिकी नागरिक हैं।
भारत और नोबेल: रिविज़न पॉइंट्स
- पहला भारतीय नोबेल विजेता: रबीन्द्रनाथ टैगोर (1913)।
- विज्ञान में पहला भारतीय नोबेल विजेता: सी.वी. रमन (1930)।
- शांति पुरस्कार विजेता भारतीय: मदर टेरेसा (1979) और कैलाश सत्यार्थी (2014)।
- अर्थशास्त्र में भारतीय विजेता: अमर्त्य सेन (1998) और अभिजीत बनर्जी (भारतीय मूल, 2019)।
7. विश्व के कुछ अन्य प्रमुख नोबेल विजेता (संक्षिप्त परिचय)
नोबेल पुरस्कारों ने इतिहास के कुछ महानतम दिमागों और मानवतावादियों को सम्मानित किया है। भारतीय विजेताओं के अलावा, यहाँ कुछ ऐसे विश्व-प्रसिद्ध विजेता हैं जिनके योगदान ने हमारी दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया।
अल्बर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein)
पुरस्कार: भौतिकी, 1921
योगदान: “सैद्धांतिक भौतिकी के लिए उनकी सेवाओं, और विशेष रूप से फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव (Photoelectric Effect) के नियम की खोज के लिए।” दिलचस्प बात यह है कि उन्हें उनके सबसे प्रसिद्ध काम, सापेक्षता के सिद्धांत (Theory of Relativity) के लिए सीधे तौर पर पुरस्कार नहीं मिला, क्योंकि उस समय यह बहुत विवादास्पद माना जाता था।
अलेक्जेंडर फ्लेमिंग (Alexander Fleming)
पुरस्कार: चिकित्सा, 1945 (अर्न्स्ट चेन और हावर्ड फ्लोरे के साथ साझा)
योगदान: “पेनिसिलिन (Penicillin) की खोज और विभिन्न संक्रामक रोगों में इसके उपचारात्मक प्रभाव के लिए।” पेनिसिलिन की खोज ने एंटीबायोटिक क्रांति की शुरुआत की और लाखों लोगों की जान बचाई।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर (Martin Luther King Jr.)
पुरस्कार: शांति, 1964
योगदान: “संयुक्त राज्य अमेरिका में नस्लीय असमानता को समाप्त करने के लिए उनके अहिंसक संघर्ष के लिए।” 35 वर्ष की आयु में, वह उस समय शांति पुरस्कार प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे।
नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela)
पुरस्कार: शांति, 1994 (एफ. डब्ल्यू. डी क्लार्क के साथ साझा)
योगदान: “दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद (Apartheid) की व्यवस्था को शांतिपूर्वक समाप्त करने और एक नए लोकतांत्रिक दक्षिण अफ्रीका की नींव रखने के लिए उनके काम के लिए।”
विलियम कॉनराड रॉन्टगन (Wilhelm Conrad Röntgen)
पुरस्कार: भौतिकी, 1901
योगदान: “एक्स-रे (X-rays) की खोज के लिए।” वह भौतिकी में पहले नोबेल पुरस्कार विजेता थे, और उनकी खोज ने चिकित्सा निदान में एक क्रांति ला दी।
8. निष्कर्ष
नोबेल पुरस्कार केवल सोने के पदक और नकद राशि का सम्मान नहीं है; यह मानवीय भावना, अथक जिज्ञासा और एक बेहतर दुनिया बनाने के सामूहिक संकल्प का उत्सव है। नोबेल पुरस्कार 2025 विजेता सूची हमें एक बार फिर उन असाधारण व्यक्तियों से मिलवाती है जिन्होंने ज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाया है, न्याय के लिए निडर होकर संघर्ष किया है, और कला के माध्यम से हमारी आत्मा को समृद्ध किया है।
क्वांटम कंप्यूटर की नींव रखने से लेकर जलवायु परिवर्तन का समाधान खोजने तक, और तानाशाही के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज बुलंद करने से लेकर हमारे अपने शरीर के रहस्यों को उजागर करने तक, 2025 के विजेता हमें याद दिलाते हैं कि मानवता की सबसे बड़ी चुनौतियाँ नवाचार, साहस और सहयोग से दूर की जा सकती हैं।
हमें उम्मीद है कि यह “अल्टीमेट गाइड” न केवल आपको प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने में मदद करेगी, बल्कि आपको इन महान उपलब्धियों से प्रेरणा भी देगी।
आपको 2025 के किस विजेता की खोज या कार्य सबसे अधिक प्रेरणादायक लगा? नीचे टिप्पणी अनुभाग में अपने विचार साझा करें!
संदर्भ और स्रोत (References and Sources)
इस लेख में प्रस्तुत सभी जानकारी की सटीकता, प्रामाणिकता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए, हमने निम्नलिखित विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों का उपयोग किया है। हमारा उद्देश्य अपने पाठकों को सबसे प्रामाणिक जानकारी प्रदान करना है।
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नोबेल पुरस्कार की आधिकारिक वेबसाइट: सभी विजेताओं, उनके योगदानों और ऐतिहासिक डेटा के लिए प्राथमिक स्रोत।
https://www.nobelprize.org/ - विश्व की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसियां: घोषणाओं और विश्लेषण के लिए रॉयटर्स, एसोसिएटेड प्रेस (AP), और बीबीसी जैसे वैश्विक समाचार आउटलेट्स द्वारा प्रदान की गई जानकारी।
हम 13 अक्टूबर, 2025 को अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद इस लेख को तुरंत अपडेट करने के लिए भी इन्हीं स्रोतों का उपयोग करेंगे।
10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: 2025 का शांति नोबेल पुरस्कार किसे मिला?
2025 का शांति नोबेल पुरस्कार वेनेजुएला की राजनेता मारिया कोरिना मचाडो को लोकतंत्र की बहाली के लिए उनके शांतिपूर्ण और साहसी संघर्ष के लिए दिया गया है।
प्रश्न 2: नोबेल पुरस्कार की शुरुआत कब और किसने की?
नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1901 में डायनामाइट के आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार की गई थी, जिन्होंने अपनी विरासत मानवता को लाभ पहुँचाने वाले कार्यों को सम्मानित करने के लिए समर्पित कर दी।
प्रश्न 3: नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला कौन थीं?
मैरी क्यूरी 1903 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने 1911 में रसायन विज्ञान में भी यह पुरस्कार जीता, जिससे वह दो अलग-अलग वैज्ञानिक क्षेत्रों में पुरस्कार जीतने वाली एकमात्र महिला बन गईं।
प्रश्न 4: अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार कब जोड़ा गया?
अर्थशास्त्र का पुरस्कार मूल नोबेल पुरस्कारों का हिस्सा नहीं था। इसे 1968 में स्वीडन के केंद्रीय बैंक (स्वेरिजेस रिक्सबैंक) द्वारा अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में स्थापित किया गया था और पहली बार 1969 में प्रदान किया गया।
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