छत्तीसगढ़ की जनगणना एवं जनसांख्यिकी (Census and Demographics of Chhattisgarh) छत्तीसगढ़ की जनगणना (2011-2025): नवीनतम आँकड़े, विश्लेषण एवं सम्पूर्ण गाइड

छत्तीसगढ़ की जनगणना एवं जनसांख्यिकी: सम्पूर्ण विश्लेषण (2011 एवं नवीनतम आँकड़े)

किसी भी क्षेत्र के विकास की कहानी उसके आँकड़ों में छिपी होती है, और इन आँकड़ों में सबसे महत्वपूर्ण होते हैं वहाँ के लोगों के आँकड़े। छत्तीसगढ़ की जनसंख्या, साक्षरता दर, और लिंगानुपात सिर्फ़ संख्याएँ नहीं, बल्कि प्रदेश के सामाजिक स्वास्थ्य और भविष्य की दिशा का पैमाना हैं। M S WORLD The WORLD of HOPE में आपका स्वागत है, और आज हम छत्तीसगढ़ की इसी जनसांख्यिकीय तस्वीर का गहन और विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

CGPSC, Vyapam और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह लेख एक “अल्टीमेट गाइड” है। आपकी सुविधा के लिए, हमने पारंपरिक तरीके से हटकर, सबसे पहले **नवीनतम उपलब्ध आधिकारिक अनुमानों** को प्रस्तुत किया है। इसके बाद, हम परीक्षाओं के लिए अनिवार्य, **जनगणना 2011** के हर पहलू का विस्तृत विश्लेषण करेंगे और दोनों की तुलना भी करेंगे।

तो तैयार हो जाइए, छत्तीसगढ़ की जनसंख्या के हर महत्वपूर्ण तथ्य और विश्लेषण को एक ही स्थान पर समझने के लिए। चलिए, इस ज्ञानवर्धक यात्रा की शुरुआत करते हैं!

इस लेख में आप क्या पढ़ेंगे?

  1. एक महत्वपूर्ण नोट: 2021 की जनगणना पर
  2. जनगणना: एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और परिचय
  3. भारतीय जनगणना का ऐतिहासिक सफर
  4. छत्तीसगढ़ की जनसंख्या: नवीनतम आधिकारिक अनुमान
  5. तुलनात्मक विश्लेषण: नवीनतम अनुमान बनाम जनगणना 2011
  6. तुलना: भारत बनाम छत्तीसगढ़ (2011)
  7. जनगणना 2011: एक विस्तृत विश्लेषण (परीक्षा हेतु आधार)
  8. विश्लेषण: जनसंख्या वृद्धि के रुझान
  9. परीक्षा फोकस: प्रीलिम्स vs मेन्स
  10. निष्कर्ष
  11. CGPSC Mains अभ्यास प्रश्न
  12. स्रोत और संदर्भ
  13. ज्ञान की परीक्षा: जनगणना क्विज़
  14. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

एक महत्वपूर्ण नोट: 2021 की जनगणना पर

भारत में प्रत्येक 10 वर्ष में जनगणना आयोजित की जाती है। इस क्रम में, नवीनतम जनगणना 2021 में प्रस्तावित थी। हालांकि, COVID-19 महामारी और अन्य प्रशासनिक कारणों के चलते 2021 की जनगणना की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।

इसीलिए, CGPSC, Vyapam, UPSC सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए, आज भी जनगणना 2011 के आँकड़े ही आधिकारिक और प्रामाणिक आधार माने जाते हैं। इस लेख में, हम 2011 के आँकड़ों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे, साथ ही नवीनतम उपलब्ध आधिकारिक अनुमानों को भी आपके संदर्भ के लिए प्रस्तुत करेंगे।

जनगणना: एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और परिचय

किसी भी राष्ट्र के विकास की योजना बनाने के लिए, यह जानना आवश्यक है कि उसके पास कितने और कैसे संसाधन हैं, और इनमें सबसे महत्वपूर्ण संसाधन हैं वहाँ के लोग। ‘जनगणना’ इसी मानवीय संसाधन का वैज्ञानिक और सांख्यिकीय अध्ययन है।

  • परिभाषा: जनगणना एक देश या किसी सुपरिभाषित हिस्से के सभी व्यक्तियों के आर्थिक, सामाजिक और जनसांख्यिकीय आँकड़ों को एक निश्चित समय पर संकलित करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने की प्रक्रिया है।
  • संवैधानिक आधार: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत, जनगणना संघ का विषय है। यह भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त (Registrar General and Census Commissioner of India) द्वारा आयोजित की जाती है।
  • भारत में शुरुआत: भारत में पहली जनगणना 1872 में ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड मेयो के काल में शुरू हुई। हालांकि, यह पूरे भारत में एक साथ नहीं हुई थी।
  • पहली समकालिक जनगणना: भारत में पहली नियमित और समकालिक (Synchronous) जनगणना 1881 में लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में हुई। तब से, हर 10 साल में नियमित रूप से जनगणना आयोजित की जाती रही है।
  • जनगणना 2011 में शामिल विषय: 2011 की जनगणना में परिवारों से कुल 29 प्रश्न (विषय) पूछे गए थे, जिनमें आवास की स्थिति, साक्षरता, आर्थिक गतिविधि, धर्म, जाति और प्रवासन जैसे विभिन्न पहलू शामिल थे।
भारत में जनगणना के इतिहास को दर्शाती एक विंटेज-शैली की तस्वीर, जिसमें एक ब्रिटिश जनगणना गणक 1881 के दौरान एक ग्रामीण भारतीय परिवार से जानकारी एकत्र कर रहा है।
भारत में नियमित जनगणना की शुरुआत 1881 में हुई, जिसने देश के जनसांख्यिकीय आँकड़ों की नींव रखी।

भारतीय जनगणना का ऐतिहासिक सफर (1872-2011)

प्रत्येक जनगणना अपने समय के भारत की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर प्रस्तुत करती है। यह सारणी अब तक की सभी प्रमुख जनगणनाओं और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को दर्शाती है।

वर्षजनगणना आयुक्त / वायसरायजनसंख्या वृद्धि दर (%)नारा / विषय (Theme) या महत्वपूर्ण तथ्य
1872लॉर्ड मेयो (वायसराय)भारत में प्रथम (गैर-समकालिक) जनगणना का प्रयास।
1881डब्ल्यू. सी. प्लॉडेन / लॉर्ड रिपनभारत में प्रथम नियमित एवं समकालिक जनगणना की शुरुआत।
1891जे. ए. बैनेस+9.4%लगभग पूरी तरह से वर्तमान भारत के क्षेत्रों को कवर किया।
1901एच. एच. रिस्ले+0.2%अकाल और बीमारियों के कारण बहुत धीमी वृद्धि।
1911ई. ए. गेट+5.75%स्वस्थ विकास की वापसी।
1921जे. टी. मार्टन-0.31%‘महा विभाजक वर्ष’ (Year of the Great Divide) – एकमात्र वर्ष जब जनसंख्या घटी।
1931जे. एच. हटन+11.0%‘तीव्र वृद्धि’ का दशक।
1941एम. डब्ल्यू. एम. यीट्स+14.22%द्वितीय विश्व युद्ध के कारण आँकड़े पूरी तरह संसाधित नहीं हुए।
1951आर. ए. गोपालस्वामी+13.31%स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना। विभाजन के प्रभाव का अध्ययन।
1961अशोक मित्रा+21.64%‘जनसंख्या विस्फोट’ के दशक की शुरुआत।
1971ए. चंद्र शेखर+24.80%अब तक की सर्वाधिक दशकीय वृद्धि दर।
1981पी. पद्मनाभ+24.66%परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर जोर।
1991ए. आर. नंदा+23.87%साक्षरता दर पर विशेष ध्यान।
2001जे. के. बंथिया+21.54%पूर्ण रूप से कम्प्यूटरीकृत जनगणना; टेक्नोलॉजी का व्यापक उपयोग।
2011सी. चंद्रमौली+17.7%नारा: ‘हमारी जनगणना, हमारा भविष्य’ (Our Census, Our Future)

छत्तीसगढ़ की जनसंख्या: नवीनतम आधिकारिक अनुमान

हालांकि जनगणना 2011 ही परीक्षाओं का आधार है, विभिन्न सरकारी और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां वर्तमान जनसंख्या के लिए अनुमान जारी करती हैं। ये आँकड़े राज्य की वर्तमान जनसांख्यिकीय स्थिति की एक झलक प्रदान करते हैं।

विवरण (Parameter)नवीनतम अनुमानित आंकड़े (2023-24)स्रोत (Source)
कुल अनुमानित जनसंख्या~3.02 करोड़विभिन्न राष्ट्रीय रिपोर्टों एवं अनुमानों पर आधारित
अनुमानित लिंगानुपात~1004 (प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाएं)राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) 2019-21
अनुमानित साक्षरता दर (7+ वर्ष)~78% (महिला: ~72%, पुरुष: ~84%)राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) सर्वेक्षण, 2022

तुलनात्मक विश्लेषण: नवीनतम अनुमान बनाम जनगणना 2011

यह सारणी जनगणना 2011 के आधिकारिक आँकड़ों और नवीनतम अनुमानों के बीच एक सीधी तुलना प्रस्तुत करती है, जिससे पिछले दशक में हुए सामाजिक परिवर्तनों को आसानी से समझा जा सकता है।

मानदंड (Metric)जनगणना 2011 (आधिकारिक)नवीनतम अनुमान (2023-24)परिवर्तन का रुझान
कुल जनसंख्या2.55 करोड़~3.02 करोड़ वृद्धि
लिंगानुपात991~1004 सुधार
साक्षरता दर70.28%~78% उल्लेखनीय सुधार

एक नज़र में जनगणना 2011: भारत बनाम छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ की जनसांख्यिकीय स्थिति को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में समझना आवश्यक है। यह सारणी 2011 के आँकड़ों पर भारत और छत्तीसगढ़ की सीधी तुलना करती है।

मानदंड (Metric)भारतछत्तीसगढ़तुलनात्मक स्थिति
दशकीय वृद्धि दर17.7%22.61%छत्तीसगढ़ में जनसंख्या वृद्धि दर अधिक थी।
जनसंख्या घनत्व382189छत्तीसगढ़ में जनसंख्या का घनत्व कम था।
लिंगानुपात943991छत्तीसगढ़ का लिंगानुपात काफी बेहतर था।
शिशु लिंगानुपात (0-6)919969छत्तीसगढ़ की स्थिति बहुत बेहतर थी।
साक्षरता दर73.0%70.28%छत्तीसगढ़ की साक्षरता थोड़ी कम थी।
नगरीय जनसंख्या31.16%23.24%छत्तीसगढ़ अधिक ग्रामीण था।

जनगणना 2011: जिला-वार विस्तृत आँकड़े

यह मास्टर सारणी 2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ के जिलों के सभी महत्वपूर्ण आँकड़ों को एक ही स्थान पर प्रस्तुत करती है, जो रिवीज़न के लिए अत्यंत उपयोगी है।

मानदंड (Metric)सर्वाधिक (Maximum)न्यूनतम (Minimum)
जनसंख्यारायपुरनारायणपुर
दशकीय वृद्धि दर (%)कबीरधाम (कवर्धा)बीजापुर
जनसंख्या घनत्वजांजगीर-चांपानारायणपुर / बीजापुर
लिंगानुपातकोंडागांवरायपुर
शिशु लिंगानुपात (0-6)दंतेवाड़ारायगढ़
साक्षरता दर (%)दुर्गबीजापुर
ST जनसंख्या (%)सुकमारायपुर
SC जनसंख्या (%)जांजगीर-चांपासुकमा

जनगणना 2011: एक विस्तृत विश्लेषण (परीक्षा हेतु आधार)

अब हम जनगणना 2011 के उन विस्तृत आँकड़ों का विश्लेषण करेंगे जो प्रतियोगी परीक्षाओं की नींव हैं। यह भारत की 15वीं और स्वतंत्र भारत की 7वीं जनगणना थी।

जनसंख्या और दशकीय वृद्धि (Population & Decadal Growth)

  • कुल जनसंख्या: 2,55,45,198 (लगभग 2.55 करोड़)
  • भारत की कुल जनसंख्या में हिस्सा: 2.11%
  • दशकीय वृद्धि दर (2001-2011): 22.61% (यह राष्ट्रीय औसत 17.7% से अधिक थी)
  • सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला: रायपुर
  • न्यूनतम जनसंख्या वाला जिला: नारायणपुर

जनसंख्या घनत्व (Population Density)

जनसंख्या घनत्व का अर्थ है प्रति वर्ग किलोमीटर में रहने वाले लोगों की औसत संख्या।

  • छत्तीसगढ़ का जनसंख्या घनत्व: 189 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी.
  • सर्वाधिक घनत्व वाला जिला: जांजगीर-चांपा
  • न्यूनतम घनत्व वाला जिला: बीजापुर और नारायणपुर

लिंगानुपात (Sex Ratio)

लिंगानुपात का अर्थ है प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या।

  • छत्तीसगढ़ का लिंगानुपात: 991 (यह राष्ट्रीय औसत 943 से काफी बेहतर था)
  • शिशु लिंगानुपात (0-6 वर्ष): 969
  • सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला: कोंडागांव
  • न्यूनतम लिंगानुपात वाला जिला: रायपुर

क्या आप जानते हैं?

लिंगानुपात के मामले में, छत्तीसगढ़ देश के शीर्ष राज्यों में से एक है। 2011 की जनगणना के अनुसार, ग्रामीण लिंगानुपात 1001 था, जिसका अर्थ है कि गाँवों में पुरुषों से अधिक महिलाएं थीं, जो राज्य के सकारात्मक सामाजिक स्वास्थ्य का प्रतीक है।

साक्षरता दर (Literacy Rate)

साक्षरता दर (7 वर्ष और उससे अधिक आयु) के आँकड़े राज्य की शैक्षिक प्रगति को दर्शाते हैं।

  • कुल साक्षरता: 70.28%
  • पुरुष साक्षरता: 80.27%
  • महिला साक्षरता: 60.24%
  • सर्वाधिक साक्षरता वाला जिला: दुर्ग
  • न्यूनतम साक्षरता वाला जिला: बीजापुर

नगरीय एवं ग्रामीण जनसंख्या

  • ग्रामीण जनसंख्या: 76.76%
  • नगरीय (शहरी) जनसंख्या: 23.24%
  • सर्वाधिक नगरीय जनसंख्या वाला जिला: दुर्ग

अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की जनसंख्या

छत्तीसगढ़ अपनी जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है, जो यहाँ की जनसंख्या संरचना में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

वर्गजनसंख्या (2011)राज्य की कुल जनसंख्या में प्रतिशतसर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला
अनुसूचित जनजाति (ST)78,22,90230.62%सरगुजा
अनुसूचित जाति (SC)32,74,26912.82%जांजगीर-चांपा

छत्तीसगढ़ के जनसांख्यिकीय आँकड़े कुछ महत्वपूर्ण रुझानों की ओर इशारा करते हैं जो राज्य के भविष्य को आकार देंगे:

  • उच्च दशकीय वृद्धि: 2001-2011 के दौरान राज्य की 22.61% की दशकीय वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक थी, जो तीव्र जनसंख्या वृद्धि का संकेत है। हालांकि, नवीनतम अनुमानों से पता चलता है कि यह दर अब धीमी हो रही है।
  • सकारात्मक लिंगानुपात: राष्ट्रीय औसत से बेहतर लिंगानुपात (विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में) राज्य के लिए एक सकारात्मक सामाजिक संकेतक है, जो महिलाओं की बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
  • साक्षरता में सुधार: महिला और पुरुष साक्षरता के बीच का अंतर अभी भी एक चुनौती है, लेकिन नवीनतम सर्वेक्षणों से पता चलता है कि इस खाई को पाटने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
  • जनजातीय पहचान: राज्य की लगभग एक-तिहाई आबादी का जनजातीय होना, छत्तीसगढ़ की नीतियों और विकास योजनाओं में सांस्कृतिक संरक्षण को एक महत्वपूर्ण कारक बनाता है।

परीक्षा फोकस: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए क्या याद रखें?

प्रीलिम्स (Prelims) के लिए मुख्य तथ्य:

  • जनगणना 2011 के आँकड़े: कुल जनसंख्या (2.55 करोड़), घनत्व (189), लिंगानुपात (991), साक्षरता (70.28%), और दशकीय वृद्धि (22.61%) कंठस्थ कर लें।
  • “सर्वाधिक” और “न्यूनतम”: जनसंख्या (रायपुर/नारायणपुर), घनत्व (जांजगीर/बीजापुर), लिंगानुपात (कोंडागांव/रायपुर), और साक्षरता (दुर्ग/बीजापुर) वाले जिलों की सूची याद रखें।
  • SC/ST प्रतिशत: ST (30.62%) और SC (12.82%) का प्रतिशत अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • नवीनतम अनुमान: कुल अनुमानित जनसंख्या (~3.02 करोड़) और NFHS-5 का लिंगानुपात (~1004) याद रखें।

मेन्स (Mains) के लिए मुख्य अवधारणाएं:

  • जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend): विश्लेषण करें कि छत्तीसगढ़ अपनी युवा आबादी का उपयोग आर्थिक विकास के लिए कैसे कर सकता है।
  • सामाजिक विकास के संकेतक: लिंगानुपात और साक्षरता दर के आँकड़ों का उपयोग करके राज्य के सामाजिक विकास पर टिप्पणी करें।
  • जनजातीय विकास: चर्चा करें कि राज्य की विकास नीतियों को जनजातीय जनसंख्या की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के साथ कैसे संतुलित किया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

निष्कर्षतः, छत्तीसगढ़ की जनसांख्यिकी एक गतिशील और विकासशील राज्य की कहानी कहती है। जनगणना 2011 के आँकड़े हमें एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं, वहीं नवीनतम अनुमान लिंगानुपात और साक्षरता जैसे क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक बदलावों को दर्शाते हैं। एक बड़ी जनजातीय आबादी, एक बेहतर लिंगानुपात और एक युवा कार्यबल के साथ, छत्तीसगढ़ सामाजिक और आर्थिक विकास के एक रोमांचक मोड़ पर खड़ा है। इन आँकड़ों की गहरी समझ न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए, बल्कि राज्य के भविष्य को समझने के लिए भी अनिवार्य है।

CGPSC Mains अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: “जनगणना 2011 के आँकड़ों के आधार पर छत्तीसगढ़ की जनसांख्यिकीय विशेषताओं का वर्णन करें। राज्य के सामाजिक विकास के संदर्भ में लिंगानुपात और साक्षरता दर के महत्व का विश्लेषण करें।”

उत्तर लिखने की संरचना:

  1. भूमिका: 2011 की जनगणना के प्रमुख आँकड़ों (जनसंख्या, घनत्व, वृद्धि दर) का उल्लेख करते हुए परिचय दें।
  2. जनसांख्यिकीय विशेषताएं:
    • उच्च जनजातीय जनसंख्या (30.62%) और उसके सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालें।
    • उच्च ग्रामीण जनसंख्या (76.76%) और अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को बताएं।
  3. सामाजिक विकास का विश्लेषण:
    • लिंगानुपात (991): इसकी राष्ट्रीय औसत से तुलना करें और इसके सकारात्मक सामाजिक प्रभावों (महिला सशक्तिकरण) पर चर्चा करें।
    • साक्षरता दर (70.28%): पुरुष (80.27%) और महिला (60.24%) साक्षरता के बीच के अंतर को उजागर करें और इस खाई को पाटने के लिए सरकारी योजनाओं के महत्व को बताएं।
  4. निष्कर्ष: यह बताते हुए समाप्त करें कि कैसे इन जनसांख्यिकीय विशेषताओं को समझना राज्य के लिए समावेशी और सतत विकास की नीतियां बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।

स्रोत और संदर्भ (Sources & References)

इस लेख में प्रस्तुत जानकारी विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित है। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए आप निम्नलिखित लिंक देख सकते हैं:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए हमें किस जनगणना के आँकड़ों का उपयोग करना चाहिए – 2011 या नवीनतम अनुमान?

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC, Vyapam, UPSC) के लिए, जनगणना 2011 के आँकड़े ही आधिकारिक और प्रामाणिक आधार हैं। नवीनतम अनुमानों का उपयोग केवल संदर्भ और तुलनात्मक विश्लेषण के लिए किया जाना चाहिए, जब तक कि प्रश्न में विशेष रूप से “नवीनतम अनुमान” न पूछा जाए।

प्रश्न 2: जनगणना 2011 के अनुसार छत्तीसगढ़ का सबसे साक्षर जिला कौन सा था?

2011 की जनगणना के अनुसार, दुर्ग जिला छत्तीसगढ़ का सबसे साक्षर जिला था, जिसकी साक्षरता दर सबसे अधिक थी। इसके विपरीत, बीजापुर जिले की साक्षरता दर सबसे कम थी।

प्रश्न 3: छत्तीसगढ़ के लिंगानुपात (991) का राष्ट्रीय औसत (943) से बेहतर होने का क्या महत्व है?

राष्ट्रीय औसत से बेहतर लिंगानुपात एक सकारात्मक सामाजिक संकेतक है। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है और समाज में लैंगिक समानता की जड़ें गहरी हैं। विशेषकर ग्रामीण लिंगानुपात (1001) इस तथ्य को और मजबूत करता है।

प्रश्न 4: छत्तीसगढ़ की जनसंख्या में जनजातियों (ST) का क्या प्रतिशत है?

जनगणना 2011 के अनुसार, छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों (ST) का हिस्सा 30.62% है। यह राज्य की एक प्रमुख जनसांख्यिकीय विशेषता है और इसकी नीतियों और संस्कृति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है।

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