Post Title: छत्तीसगढ़ में पर्यटन: प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का सम्पूर्ण विश्वकोश (Ultimate Guide)
छत्तीसगढ़: भारत का पर्यटन 'पावर हाउस' (Full of Surprises)
“गढ़बो नवा छत्तीसगढ़” की परिकल्पना पर्यटन के बिना अधूरी है। छत्तीसगढ़ को प्रकृति ने मुक्त हस्त से संवारा है। यहाँ **चित्रकोट** जैसा भारत का नियाग्रा है, तो **मैनपाट** जैसा शिमला। **सिरपुर** का ऐतिहासिक वैभव है, तो **बस्तर** की आदिम संस्कृति।लंबे समय तक नक्सलवाद की छाया में रहने के कारण छत्तीसगढ़ की पर्यटन क्षमता छिपी रही, लेकिन अब यह राज्य **”Full of Surprises”** के रूप में विश्व पटल पर उभर रहा है। यह लेख 5000+ शब्दों का एक ‘जीवंत दस्तावेज’ है, जो CGPSC और व्यापम के अभ्यर्थियों को राज्य के हर उस कोने की सैर कराएगा जो परीक्षा और ज्ञान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
इस विस्तृत विश्वकोश (Encyclopedia) में आप क्या पढ़ेंगे:
विषय सूची [x]
- Post Title: छत्तीसगढ़ में पर्यटन: प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का सम्पूर्ण विश्वकोश (Ultimate Guide)
- 1. छत्तीसगढ़ पर्यटन: प्रशासनिक ढांचा और नीतियां
- (A) छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल (CTB)
- (B) पर्यटन नीति और उद्योग का दर्जा
- 2. प्राकृतिक पर्यटन: जलप्रपातों का सौंदर्य (Waterfalls)
- (A) बस्तर संभाग: जलप्रपातों का गढ़
- (B) सरगुजा संभाग: उत्तर छत्तीसगढ़ का सौंदर्य
- (C) जशपुर: पाट प्रदेश के झरने
- 3. रहस्यमयी गुफाएं: पाताल लोक का रोमांच (Caves)
- (A) कुटुंबसर गुफा (Kutumsar Cave)
- (B) कैलाश गुफा (Kailash Gufa)
- (C) सरगुजा की ऐतिहासिक गुफाएं (Ramgarh Hills)
- (D) राज्य की अन्य प्रमुख गुफाएं (Quick List)
- 4. हिल स्टेशन और घाटियाँ: बादलों से बातें (Hill Stations)
- (A) मैनपाट: छत्तीसगढ़ का शिमला (Mainpat)
- (B) चैतुरगढ़: छत्तीसगढ़ का कश्मीर (Chaiturgarh)
- (C) चिल्फी घाटी (Chilphi Valley)
- (D) केशकाल घाटी (Keshkal Valley)
- प्राकृतिक गीजर: तातापानी (Hot Spring)
- 5. धार्मिक और पुरातात्विक पर्यटन: आस्था और इतिहास का संगम
- (A) सिरपुर: विश्व धरोहर की ओर (Sirpur)
- (B) भोरमदेव: छत्तीसगढ़ का खजुराहो (Bhoramdev)
- (C) राजिम: छत्तीसगढ़ का प्रयाग (Rajim)
- (D) राम वन गमन पर्यटन परिपथ (Ram Van Gaman Path)
- (E) प्रमुख देवी शक्तिपीठ (Shaktipeeths)
- 6. वन्यजीव और ईको-टूरिज्म: प्रकृति की गोद में (Wildlife)
- (A) राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)
- (B) प्रमुख वन्यजीव अभ्यारण्य (Sanctuaries)
- (C) नंदनवन जंगल सफारी (Jungle Safari)
- (D) सतरेंगा: छत्तीसगढ़ का मॉरीशस
- छत्तीसगढ़ की ‘फूलों की घाटी’ (Valley of Flowers)
- 7. आदिवासी एवं सांस्कृतिक पर्यटन (Ethnic Tourism)
- (A) बस्तर का दशहरा: विश्व का सबसे लंबा पर्व
- (B) ट्राइबल टूरिज्म सर्किट (Tribal Circuit)
- 8. छत्तीसगढ़ के प्रमुख संग्रहालय (Museums)
- 9. छत्तीसगढ़ में पर्यटन: संभावनाएं और चुनौतियां (Mains Analysis)
- 10. प्रमुख पर्यटन महोत्सव (Fairs & Festivals)
- क्विक रिवीजन: छत्तीसगढ़ पर्यटन के ‘सुपरलेटिव्स’ (Highest, Largest, Oldest)
- 11. अपनी तैयारी परखें (Practice Quiz)
- 12. निष्कर्ष और आगे की राह
- 13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
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परीक्षा की दृष्टि से महत्व (Exam Relevance)
- प्रारंभिक परीक्षा (Pre): जलप्रपातों की नदी और जिला (Match the Column), गुफाओं की अवस्थिति, मंदिर निर्माणकर्ता वंश, और पर्यटन नीति।
- मुख्य परीक्षा (Mains): Paper-05 (भूगोल/अर्थव्यवस्था) और Paper-07। प्रश्न का स्वरूप: “छत्तीसगढ़ में ईको-टूरिज्म की संभावनाएं” या “पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने के आर्थिक निहितार्थ”।
1. छत्तीसगढ़ पर्यटन: प्रशासनिक ढांचा और नीतियां
पर्यटन केवल घूमने का नाम नहीं है, यह राज्य की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ (Pillar) है।(A) छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल (CTB)
राज्य में पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए एक नोडल एजेंसी कार्यरत है।| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थापना | 18 जनवरी 2002 |
| मुख्यालय | रायपुर |
| वर्तमान टैगलाइन | “Full of Surprises” (विस्मय से भरा) |
| पूर्व टैगलाइन | “Credible Chhattisgarh” (विश्वसनीय छत्तीसगढ़) |
| प्रतीक चिन्ह (Logo) | इसमें राज्य के राजकीय पशु (वनभैंसा), वास्तुकला और प्रकृति का समावेश है। |
(B) पर्यटन नीति और उद्योग का दर्जा
मुख्य परीक्षा के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है। पर्यटन को 'उद्योग' का दर्जा
राज्य सरकार ने पर्यटन नीति 2020 के तहत पर्यटन को औपचारिक रूप से ‘उद्योग’ (Industry) का दर्जा दिया है।
इसका क्या फायदा है?
होटल, रिसॉर्ट और मोटल संचालकों को अब बिजली और पानी ‘व्यावसायिक दरों’ (Commercial Rates) के बजाय ‘औद्योगिक दरों’ (Industrial Rates) पर मिलेगा, जो सस्ता होता है। इससे निजी निवेश बढ़ेगा।
इसका क्या फायदा है?
होटल, रिसॉर्ट और मोटल संचालकों को अब बिजली और पानी ‘व्यावसायिक दरों’ (Commercial Rates) के बजाय ‘औद्योगिक दरों’ (Industrial Rates) पर मिलेगा, जो सस्ता होता है। इससे निजी निवेश बढ़ेगा।
2. प्राकृतिक पर्यटन: जलप्रपातों का सौंदर्य (Waterfalls)
छत्तीसगढ़ को ‘जलप्रपातों का राज्य’ कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहाँ उत्तर से दक्षिण तक सैकड़ों जलप्रपात हैं। अध्ययन की सुविधा के लिए हम इन्हें **संभागवार (Zone wise)** बांटेंगे।(A) बस्तर संभाग: जलप्रपातों का गढ़
बस्तर को “छत्तीसगढ़ का स्विट्जरलैंड” कहा जाता है और यहाँ सबसे ज्यादा झरने हैं। 1. चित्रकोट जलप्रपात (The Niagara of India)
- नदी: इन्द्रावती नदी
- जिला: बस्तर (जगदलपुर)
- आकार: घोड़े की नाल (Horse-shoe) जैसा।
- विशेषता: यह भारत का सबसे चौड़ा (Widest) जलप्रपात है (लगभग 300 फीट)। मानसून में इसकी भव्यता देखते ही बनती है। इसे भारत का नियाग्रा भी कहते हैं।
2. तीरथगढ़ जलप्रपात
- नदी: मुनगा बहार (कांगेर नदी की सहायक)
- जिला: बस्तर (कांगेर घाटी नेशनल पार्क के अंदर)
- विशेषता: यह सीढ़ीनुमा (Stepped) जलप्रपात है। पानी कई चरणों में नीचे गिरता है। इसकी ऊंचाई लगभग 300 फीट है।
बस्तर के अन्य प्रमुख जलप्रपात (Quick Table)
यह टेबल ‘सही जोड़ी मिलाओ’ (Match the Following) के लिए रामवाण है।| जलप्रपात | नदी | जिला | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| चित्रधारा | – | बस्तर | एक मौसमी झरना है |
| मंडवा | – | बस्तर | – |
| तामड़ा घूमर | – | बस्तर | इसे ‘मिनी नियाग्रा’ भी कहते हैं (स्थान: विनता घाटी) |
| मेंद्री घूमर | – | बस्तर | इसे ‘हाथी दरहा’ भी कहते हैं |
| सातधारा | इन्द्रावती | दंतेवाड़ा/बीजापुर | इन्द्रावती नदी यहाँ 7 धाराओं में बंटती है (शिवधारा, शिवचित्र आदि) |
| मलगेर इन्दुल | मलगेर | सुकमा | – |
| गुप्तेश्वर | शबरी | सुकमा | – |
| रानी दरहा | शबरी | सुकमा | – |
(B) सरगुजा संभाग: उत्तर छत्तीसगढ़ का सौंदर्य
उत्तरी छत्तीसगढ़ भी जलप्रपातों के मामले में समृद्ध है।| जलप्रपात | नदी | जिला | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| अमृतधारा | हसदेव | मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) | यहाँ तपसी बाबा का आश्रम है। महाशिवरात्रि पर मेला लगता है। |
| गावर घाट | हसदेव | MCB | – |
| रकसगंडा | रिहन्द | सूरजपुर | यह एक संकरा कुंड जैसा है। |
| कोठली | कन्हार | बलरामपुर | – |
| पवई | चनान | बलरामपुर | – |
| सरभंजा | मांड | सरगुजा | इसे ‘टाइगर प्वाइंट’ (मैनपाट) के पास देखा जा सकता है। |
| केन्दई | केन्दई | कोरबा | बिलासपुर-अंबिकापुर हाइवे पर स्थित (पिकनिक स्पॉट) |
याद रखने की ट्रिक (Waterfall Trick)
अमृत हसदेव: “अमृत पीकर सब हँस (हसदेव) दिए।”
रकस रिहन्द: “राक्षस (रकस) को रिहा (रिहन्द) कर दिया।”
रानी vs रानी:
रकस रिहन्द: “राक्षस (रकस) को रिहा (रिहन्द) कर दिया।”
रानी vs रानी:
- रानी दरहा: सुकमा (शबरी नदी)
- रानी दाह: जशपुर (आत्मदाह की कहानी से जुड़ा)
(C) जशपुर: पाट प्रदेश के झरने
जशपुर जिले में ईब और उसकी सहायक नदियों पर कई झरने हैं।| जलप्रपात | नदी | विवरण |
|---|---|---|
| रानीदाह | – | ओडिशा सीमा के पास |
| राजपुरी | – | पिकनिक स्पॉट |
| दमेरा | – | – |
| खुड़िया रानी | – | यहाँ खुड़िया रानी (लोक देवी) का मंदिर भी है |
3. रहस्यमयी गुफाएं: पाताल लोक का रोमांच (Caves)
छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, अपनी प्राकृतिक चूना पत्थर (Limestone) की गुफाओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। ये गुफाएं कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Kanger Valley National Park) के भीतर स्थित हैं।(A) कुटुंबसर गुफा (Kutumsar Cave)
यह राज्य की सबसे प्रसिद्ध और पर्यटकों की पहली पसंद है। कुटुंबसर गुफा: एक गहरा अध्ययन
- स्थान: कांगेर घाटी नेशनल पार्क, बस्तर (जगदलपुर से लगभग 40 किमी)।
- खोज: 1950 के दशक में प्रसिद्ध भूगोलविद् प्रो. शंकर तिवारी ने इसकी खोज की थी।
- संरचना: यह एक चूना पत्थर (Limestone) निर्मित गुफा है। इसके अंदर ‘स्टैलेक्टाइट’ (Stalactite – छत से लटकती संरचना) और ‘स्टैलेग्माइट’ (Stalagmite – जमीन से उठती संरचना) की अद्भुत आकृतियाँ हैं, जो शिवलिंग जैसी प्रतीत होती हैं।
- विशिष्ट जीव: यहाँ सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती, इसलिए यहाँ एक विशेष प्रकार की ‘अंधी मछलियां’ पाई जाती हैं।
(नोट: इन मछलियों का वैज्ञानिक नाम प्रो. शंकर तिवारी के सम्मान में ‘केम्पियोला शंकरी’ रखा गया है।)
(B) कैलाश गुफा (Kailash Gufa)
- स्थान: कांगेर घाटी, बस्तर।
- खोज: 22 मार्च 1993 को वन विभाग द्वारा।
- विशेषता: इसके अंदर चूना पत्थर की ऐसी संरचनाएं हैं जो वाद्य यंत्रों (Musical Instruments) की तरह बजती हैं। यहाँ ‘ड्रिपस्टोन’ से बनी शिवलिंग जैसी आकृति है।
(C) सरगुजा की ऐतिहासिक गुफाएं (Ramgarh Hills)
जहाँ बस्तर की गुफाएं प्राकृतिक हैं, वहीं सरगुजा की रामगढ़ पहाड़ियों की गुफाएं ऐतिहासिक और सांस्कृतिक हैं।| गुफा का नाम | महत्व | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| सीता बेंगरा | प्राचीन नाट्यशाला | इसे ‘विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशाला’ (Theater) माना जाता है। वनवास काल में माता सीता यहाँ रही थीं। |
| जोगीमारा | मौर्यकालीन अभिलेख | यहाँ अशोक के काल के शिलालेख और चित्र मिले हैं। यह देवदासी सुतनुका और देवदीन की प्रेम गाथा के लिए प्रसिद्ध है। |
| लक्ष्मण बेंगरा | – | – |
रोचक तथ्य: मेघदूतम् की रचना
माना जाता है कि महाकवि कालिदास ने रामगढ़ की इन्हीं पहाड़ियों पर बैठकर अपने महाकाव्य ‘मेघदूतम्’ की रचना की थी। आषाढ़ के पहले दिन यहाँ बादलों का दृश्य अद्भुत होता है।
(D) राज्य की अन्य प्रमुख गुफाएं (Quick List)
| गुफा | जिला | विवरण |
|---|---|---|
| दंडक गुफा | बस्तर | कांगेर घाटी में स्थित |
| अरण्यक गुफा | बस्तर | – |
| देवगिरी गुफा | बस्तर | – |
| सिंघनपुर गुफा | रायगढ़ | पाषाणकालीन शैलचित्रों (Rock Paintings) के लिए प्रसिद्ध |
| कबराम पहाड़ | रायगढ़ | सर्वाधिक शैलचित्र यहीं मिले हैं |
| मंदराजी खोल | राजनांदगांव | – |
4. हिल स्टेशन और घाटियाँ: बादलों से बातें (Hill Stations)
छत्तीसगढ़ के पठारी और पहाड़ी इलाकों में कुछ ऐसे स्थान हैं जहाँ साल भर मौसम सुहावना रहता है।(A) मैनपाट: छत्तीसगढ़ का शिमला (Mainpat)
सरगुजा जिले में स्थित मैनपाट राज्य का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। मैनपाट की खासियतें
- उपनाम: छत्तीसगढ़ का शिमला (The Shimla of Chhattisgarh)।
- तिब्बती संस्कृति: 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद यहाँ तिब्बती शरणार्थियों को बसाया गया था। इसलिए इसे ‘छोटा तिब्बत’ भी कहते हैं। यहाँ बौद्ध मंदिर और मठ दर्शनीय हैं।
- फसल: यह टाऊ (एक प्रकार का अनाज) और आलू की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
- प्रमुख प्वाइंट्स:
1. टाइगर प्वाइंट: एक सुंदर जलप्रपात।
2. उल्टा पानी (Ulta Pani): यहाँ पानी ढलान के विपरीत (नीचे से ऊपर) बहता हुआ प्रतीत होता है (Magnetic Hill जैसा भ्रम)।
3. दलदली (Daldali): यहाँ की जमीन स्पंज की तरह है, जिस पर कूदने से जमीन हिलती है (Bouncing Land)।
(B) चैतुरगढ़: छत्तीसगढ़ का कश्मीर (Chaiturgarh)
- स्थान: कोरबा जिला (लाफागढ़ की पहाड़ी)।
- उपनाम: इसे ‘छत्तीसगढ़ का कश्मीर’ कहा जाता है। (कारण: यहाँ की जलवायु और किले की अभेद्यता)।
- दर्शनीय स्थल: यहाँ पहाड़ी के ऊपर प्रसिद्ध ‘महिषासुर मर्दिनी’ का मंदिर है। यह एक प्राकृतिक किला भी है जिसके तीन मुख्य द्वार हैं – मेनका, हुमकारा और सिंहद्वार।
(C) चिल्फी घाटी (Chilphi Valley)
- स्थान: कबीरधाम (कवर्धा) जिला।
- महत्व: यह छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। इसे मैकल पर्वत श्रेणी का प्रवेश द्वार माना जाता है।
- बैगा संस्कृति: यहाँ विशेष पिछड़ी जनजाति ‘बैगा’ निवास करती है। यहाँ का ‘सरोदा दादर’ रिसॉर्ट प्रसिद्ध है।
(D) केशकाल घाटी (Keshkal Valley)
बस्तर का प्रवेश द्वार (Gateway to Bastar)
कोंडागांव जिले में स्थित केशकाल घाटी अपनी 12 सर्पिलाकार मोड़ों (12 Bends) के लिए प्रसिद्ध है।
तेलीन सती मंदिर: घाटी के ऊपर माता तेलीन सती का मंदिर है, जो राहगीरों की रक्षा करती हैं।
तेलीन सती मंदिर: घाटी के ऊपर माता तेलीन सती का मंदिर है, जो राहगीरों की रक्षा करती हैं।
प्राकृतिक गीजर: तातापानी (Hot Spring)
तातापानी (बलरामपुर)
- क्या है: यहाँ जमीन से प्राकृतिक रूप से खौलता हुआ गर्म पानी निकलता है।
- कारण: भू-गर्भीय हलचल और सल्फर (गंधक) की उपस्थिति। यह चर्म रोगों के लिए लाभकारी माना जाता है।
- विशेष: यहाँ राज्य का पहला ‘जियो-थर्मल पावर प्लांट’ (भू-तापीय विद्युत संयंत्र) लगाने का प्रस्ताव है।
कंफ्यूजन पॉइंट: उपनामों का खेल
परीक्षा में अक्सर कंफ्यूजन होता है, इसे रट लें:
1. छत्तीसगढ़ का शिमला: मैनपाट (सरगुजा)
2. छत्तीसगढ़ का कश्मीर: चैतुरगढ़ (कोरबा)
3. छत्तीसगढ़ का स्विट्जरलैंड: बस्तर (सन्ना या खुड़िया का पठार जशपुर को भी कभी-कभी उपमा दी जाती है, लेकिन मुख्य रूप से बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रयोग होता है)।
4. छत्तीसगढ़ का खजुराहो: भोरमदेव (कवर्धा)
5. छत्तीसगढ़ का प्रयाग: राजिम (गरियाबंद)
1. छत्तीसगढ़ का शिमला: मैनपाट (सरगुजा)
2. छत्तीसगढ़ का कश्मीर: चैतुरगढ़ (कोरबा)
3. छत्तीसगढ़ का स्विट्जरलैंड: बस्तर (सन्ना या खुड़िया का पठार जशपुर को भी कभी-कभी उपमा दी जाती है, लेकिन मुख्य रूप से बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रयोग होता है)।
4. छत्तीसगढ़ का खजुराहो: भोरमदेव (कवर्धा)
5. छत्तीसगढ़ का प्रयाग: राजिम (गरियाबंद)
5. धार्मिक और पुरातात्विक पर्यटन: आस्था और इतिहास का संगम
छत्तीसगढ़ न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का धनी है, बल्कि यहाँ प्राचीन काल से शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन धर्मों का अद्भुत संगम रहा है।(A) सिरपुर: विश्व धरोहर की ओर (Sirpur)
महानदी के तट पर बसा सिरपुर (महासमुंद जिला) प्राचीन दक्षिण कौशल की राजधानी था। यह **बौद्ध, शैव, वैष्णव और जैन** धर्मों का केंद्र रहा है। लक्ष्मण मंदिर: वास्तुकला का बेजोड़ नमूना
- निर्माण: 7वीं शताब्दी (पाण्डु वंश)।
- निर्माता: रानी वसाटा देवी (राजा हर्षगुप्त की स्मृति में)।
- विशेषता: यह भारत के ईंटों से बने (Brick Temple) सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इसकी नक्काशी इतनी बारीक है कि ईंटें पत्थर जैसी लगती हैं।
- भगवान: नाम ‘लक्ष्मण’ है, लेकिन यह वास्तव में भगवान विष्णु को समर्पित है।
(B) भोरमदेव: छत्तीसगढ़ का खजुराहो (Bhoramdev)
कबीरधाम (कवर्धा) जिले में सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर वास्तुकला का रत्न है।| पहलू | विवरण |
|---|---|
| निर्माण काल | 1089 ई. (11वीं शताब्दी) |
| निर्माता | फणि नागवंशी शासक गोपाल देव |
| शैली | नागर शैली (Nagara Style) |
| उपनाम | छत्तीसगढ़ का खजुराहो |
| कारण | इसकी बाहरी दीवारों पर खजुराहो (MP) की तरह कामुक (Erotic) मूर्तियां उकेरी गई हैं। |
| आदिवासी देवता | यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें गोंड आदिवासी ‘भोरमदेव’ के रूप में पूजते हैं। |
(C) राजिम: छत्तीसगढ़ का प्रयाग (Rajim)
गरियाबंद जिले में स्थित राजिम को राज्य का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है। त्रिवेणी संगम और माघी पुन्नी मेला
- संगम: यहाँ तीन नदियों – महानदी, पैरी और सोंढूर – का संगम होता है।
- राजीव लोचन मंदिर: नलवंशी शासक विलासतुंग द्वारा 7वीं-8वीं सदी में निर्मित भगवान विष्णु का मंदिर।
- कुलेश्वर महादेव: संगम के बीचोबीच स्थित प्राचीन शिव मंदिर।
- मेला: यहाँ माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक विशाल ‘राजिम माघी पुन्नी मेला’ (जिसे राजिम कुंभ भी कहा जाता था) लगता है।
(D) राम वन गमन पर्यटन परिपथ (Ram Van Gaman Path)
मान्यता है कि भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में से लगभग 10 वर्ष छत्तीसगढ़ (दंडकारण्य) में बिताए। सरकार ने उनके पगचिन्हों को पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित किया है।| प्रमुख स्थल (उत्तर से दक्षिण) | जिला | महत्व |
|---|---|---|
| 1. सीतामढ़ी हरचौका | MCB (कोरिया) | राम का छत्तीसगढ़ में प्रवेश द्वार |
| 2. रामगढ़ | सरगुजा | सीता बेंगरा गुफा |
| 3. शिवरीनारायण | जांजगीर-चांपा | शबरी के जूठे बेर खाने का प्रसंग (नर-नारायण मंदिर) |
| 4. तुरतुरिया | बलौदाबाजार | वाल्मीकि आश्रम (लव-कुश की जन्मस्थली) |
| 5. चंदखुरी | रायपुर | माता कौशल्या का मंदिर (विश्व का एकमात्र) |
| 6. राजिम | गरियाबंद | लोमश ऋषि आश्रम |
| 7. सिहावा | धमतरी | सप्त ऋषियों का आश्रम (महानदी का उद्गम) |
| 8. जगदलपुर | बस्तर | चित्रकोट क्षेत्र |
| 9. रामाराम | सुकमा | दक्षिण में अंतिम पड़ाव |
याद रखें (Exam Fact)
चंदखुरी (रायपुर) इस परिपथ का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ जलसेन तालाब के बीच में माता कौशल्या का भव्य मंदिर है। यह दुनिया का अपनी तरह का एकमात्र मंदिर है।
(E) प्रमुख देवी शक्तिपीठ (Shaktipeeths)
नवरात्रि के दौरान यहाँ लाखों श्रद्धालु आते हैं।| मंदिर | जिला | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| माँ बम्लेश्वरी | डोंगरगढ़ (राजनांदगांव) | 1600 फीट ऊंची पहाड़ी पर। यहाँ राज्य का एकमात्र रोप-वे (Ropeway) संचालित है। |
| माँ दंतेश्वरी | दंतेवाड़ा | 52 शक्तिपीठों में से एक। यहाँ सती का दांत गिरा था। यह शंखिनी-डंकिनी नदी के संगम पर है। |
| माँ महामाया | रतनपुर (बिलासपुर) | कलचुरी राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा निर्मित। |
| माँ चंद्रहासिनी | चंद्रपुर (सक्ती) | महानदी के तट पर स्थित। |
6. वन्यजीव और ईको-टूरिज्म: प्रकृति की गोद में (Wildlife)
छत्तीसगढ़ का लगभग 44% हिस्सा वनों से ढका है। यहाँ 3 राष्ट्रीय उद्यान और 11 वन्यजीव अभ्यारण्य हैं।(A) राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)
राज्य में कुल 3 राष्ट्रीय उद्यान हैं।| नाम | जिला | क्षेत्रफल | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान | MCB/कोरिया/सूरजपुर | 1441 वर्ग किमी | यह राज्य का सबसे बड़ा नेशनल पार्क है। इसे ‘टाइगर रिजर्व’ बनाने की प्रक्रिया चल रही है। (पूर्व नाम: संजय गांधी) |
| इन्द्रावती राष्ट्रीय उद्यान | बीजापुर | 1258 वर्ग किमी | यह राज्य का एकमात्र ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ (Tiger Reserve) क्षेत्र था (अब अचानकमार और उदंती भी हैं)। यहाँ जंगली भैंसा पाया जाता है। |
| कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान | बस्तर | 200 वर्ग किमी | यह राज्य का सबसे छोटा नेशनल पार्क है। यहाँ पहाड़ी मैना और उड़न गिलहरी पाई जाती है। |
(B) प्रमुख वन्यजीव अभ्यारण्य (Sanctuaries)
यद्यपि 11 अभ्यारण्य हैं, लेकिन पर्यटन की दृष्टि से ये महत्वपूर्ण हैं: 1. अचानकमार टाइगर रिजर्व (मुंगेली)
यह देश का 14वां ‘बायोस्फियर रिजर्व’ (Biosphere Reserve) है। यहाँ साल (Sal) के घने वन हैं। अमरकंटक जाने वाले पर्यटक यहाँ जरूर रुकते हैं।
2. बारनवापारा (बलौदाबाजार)
रायपुर के सबसे करीब होने के कारण यह पर्यटकों की पहली पसंद है। यहाँ गौर (Bison), चीतल और सांभर आसानी से देखे जा सकते हैं।
(C) नंदनवन जंगल सफारी (Jungle Safari)
नया रायपुर में स्थित यह एशिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित (Man-made) जंगल सफारी है।| खंड (Zone) | विवरण |
|---|---|
| हर्बीवोर सफारी | हिरण, चीतल, नीलगाय (शाकाहारी जानवर) |
| बियर सफारी | भालू के लिए विशेष क्षेत्र |
| टाइगर/लयन सफारी | बाघ और शेर को खुले में देखने का रोमांच |
| क्रोकोडायल पार्क | मगरमच्छों के लिए |
(D) सतरेंगा: छत्तीसगढ़ का मॉरीशस
कोरबा जिले में हसदेव नदी के डूब क्षेत्र (Bango Dam) में विकसित ‘सतरेंगा’ (Satrenga) अब राज्य का सबसे बड़ा **’वाटर टूरिज्म हब’** बन गया है।विशेषता: यहाँ का नीला पानी और छोटे-छोटे टापू इसे मॉरीशस जैसा लुक देते हैं। यहाँ क्रूज, फ्लोटिंग कॉटेज और वाटर स्पोर्ट्स की सुविधा है।
छत्तीसगढ़ की ‘फूलों की घाटी’ (Valley of Flowers)
उत्तराखंड की तरह छत्तीसगढ़ में भी कुछ घाटियां फूलों के लिए प्रसिद्ध हैं।| नाम | स्थान | उपनाम |
|---|---|---|
| लोरो घाटी (Loro Ghati) | जशपुर | ‘फूलों की घाटी’ (यहाँ रानुबेला के फूल खिलते हैं) |
| केशकाल घाटी | कोंडागांव | ‘बस्तर का प्रवेश द्वार’ (और फूलों की घाटी भी) |
7. आदिवासी एवं सांस्कृतिक पर्यटन (Ethnic Tourism)
छत्तीसगढ़ की पहचान यहाँ की जनजातीय संस्कृति है। विदेशी पर्यटक मुख्य रूप से इसी संस्कृति को देखने बस्तर आते हैं।(A) बस्तर का दशहरा: विश्व का सबसे लंबा पर्व
यह सामान्य दशहरा से बिल्कुल अलग है। बस्तर दशहरा की विशिष्टताएं
- अवधि: यह पूरे 75 दिनों तक चलता है (विश्व में सर्वाधिक)।
- नो रावण दहन: इसमें रावण का पुतला नहीं जलाया जाता।
- आराध्य: यह पर्व ‘माँ दंतेश्वरी’ (बस्तर की कुलदेवी) को समर्पित है।
- प्रमुख रस्में:
1. पाट जात्रा: रथ निर्माण के लिए लकड़ी लाने की रस्म।
2. मुरिया दरबार: राजा और प्रजा (आदिवासियों) का सम्मेलन।
3. मावली परघाव: मावली देवी का स्वागत।
(B) ट्राइबल टूरिज्म सर्किट (Tribal Circuit)
भारत सरकार की ‘स्वदेश दर्शन योजना’ के तहत इसे विकसित किया गया है।मार्ग: जशपुर – कुनकुरी – मैनपाट – कमलेश्वरपुर – महेशपुर – कुरदर – सरोदा दादर – गंगरेल – कोंडागांव – जगदलपुर – चित्रकोट – तीरथगढ़।
अनुभव: पर्यटक यहाँ आदिवासियों के हाट-बाजार, घोटुल (युवा गृह) और डोकरा आर्ट (बेल मेटल) को करीब से देख सकते हैं।
8. छत्तीसगढ़ के प्रमुख संग्रहालय (Museums)
इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए:| नाम | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय | रायपुर | राज्य का सबसे पुराना और बड़ा (1875 में स्थापित)। |
| पुरखौती मुक्तांगन | नया रायपुर | यह एक ‘खुला संग्रहालय’ (Open Air Museum) है जहाँ राज्य की पूरी संस्कृति एक ही जगह प्रदर्शित है। |
| नृजातीय संग्रहालय (Anthropological) | जगदलपुर | बस्तर की जनजातियों के जीवन पर आधारित। |
9. छत्तीसगढ़ में पर्यटन: संभावनाएं और चुनौतियां (Mains Analysis)
मुख्य परीक्षा (Paper-05 और 07) में पर्यटन को एक आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाता है। विश्लेषणात्मक प्रश्न: पर्यटन उद्योग का भविष्य
प्रश्न: “छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं होने के बावजूद यह अपेक्षित विकास क्यों नहीं कर पाया? कारण और निवारण बताएं।”
चुनौतियां (Challenges):
चुनौतियां (Challenges):
- नक्सल छवि (Perception): मीडिया में राज्य की छवि केवल ‘नक्सल प्रभावित’ के रूप में बनी है, जिससे पर्यटक (विशेषकर विदेशी) आने से कतराते हैं, जबकि पर्यटन स्थल (जैसे चित्रकोट, मैनपाट) पूरी तरह सुरक्षित हैं।
- कनेक्टिविटी: बस्तर और सरगुजा के कई पर्यटन स्थलों तक सीधी रेल या वायु सेवा की कमी (हालांकि जगदलपुर और अंबिकापुर एयरपोर्ट से सुधार हो रहा है)।
- मार्केटिंग का अभाव: केरल (God’s Own Country) या एमपी (Hindustan Ka Dil) की तरह आक्रामक ब्रांडिंग की कमी रही है।
- ट्राइबल सर्किट: बस्तर की संस्कृति को ‘एडवेंचर टूरिज्म’ के रूप में प्रमोट करना।
- राम वन गमन पथ: धार्मिक पर्यटन के जरिए घरेलू पर्यटकों को आकर्षित करना।
- होम-스테 (Home Stay): आदिवासी गांवों में पर्यटकों के रहने की व्यवस्था करना (इको-टूरिज्म)।
10. प्रमुख पर्यटन महोत्सव (Fairs & Festivals)
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई वार्षिक महोत्सव आयोजित करती है।| महोत्सव | स्थान | समय | विशेष |
|---|---|---|---|
| चक्रधर समारोह | रायगढ़ | गणेश चतुर्थी | शास्त्रीय संगीत और नृत्य का महाकुंभ |
| सिरपुर महोत्सव | सिरपुर | फरवरी (माघ पूर्णिमा) | बौद्ध और लोक कला संस्कृति |
| भोरमदेव महोत्सव | कवर्धा | मार्च (चैत्र) | आदिवासी और शास्त्रीय कला |
| बस्तर लोकोत्सव | जगदलपुर | दशहरा के बाद | जनजातीय संस्कृति का प्रदर्शन |
| मैनपाट कार्निवल | मैनपाट (सरगुजा) | फरवरी | तिब्बती और छत्तीसगढ़ी संस्कृति |
| तातापानी महोत्सव | बलरामपुर | मकर संक्रांति | गर्म पानी के कुंड (Hot Spring) के पास |
क्विक रिवीजन: छत्तीसगढ़ पर्यटन के ‘सुपरलेटिव्स’ (Highest, Largest, Oldest)
| श्रेणी | स्थान/नाम | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| सबसे ऊंचा जलप्रपात | तीरथगढ़ (बस्तर) | लगभग 300 फीट (मुनगा बहार नदी पर) |
| सबसे चौड़ा जलप्रपात | चित्रकोट (बस्तर) | 300 फीट चौड़ा (भारत का नियाग्रा) |
| सबसे ऊंची चोटी | गौरलाटा (सामरी पाठ) | 1225 मीटर (बलरामपुर जिला) |
| सबसे बड़ा नेशनल पार्क | गुरु घासीदास | 1441 वर्ग किमी |
| सबसे छोटा नेशनल पार्क | कांगेर घाटी | 200 वर्ग किमी |
| सबसे प्राचीन मंदिर | देवरानी-जेठानी मंदिर | तालागाँव (बिलासपुर) – 5वीं-6वीं सदी |
| ईंटों का सबसे प्राचीन मंदिर | लक्ष्मण मंदिर | सिरपुर (महासमुंद) |
| सबसे बड़ी गुफा | कुटुंबसर गुफा | बस्तर (330 मीटर लंबी) |
| सबसे बड़ा संग्रहालय | महंत घासीदास संग्रहालय | रायपुर (1875) |
कैसे पहुंचें? (Connectivity)
- वायु मार्ग: स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट (रायपुर), माँ महामाया एयरपोर्ट (बिलासपुर), और माँ दंतेश्वरी एयरपोर्ट (जगदलपुर)।
- रेल मार्ग: बिलासपुर जोन (SECR) देश का सबसे अधिक राजस्व देने वाला जोन है। वंदे भारत एक्सप्रेस (बिलासपुर-नागपुर) अब पर्यटकों के लिए उपलब्ध है।
11. अपनी तैयारी परखें (Practice Quiz)
भारत का नियाग्रा (Niagara of India) किस जलप्रपात को कहा जाता है?
छत्तीसगढ़ का ‘शिमला’ किसे कहा जाता है?
प्रसिद्ध ‘कुटुंबसर गुफा’ किस राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है?
‘भोरमदेव मंदिर’ का निर्माण किस शैली में हुआ है?
एशिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित (Man-made) जंगल सफारी कहाँ स्थित है?
12. निष्कर्ष और आगे की राह
निष्कर्ष (Conclusion)
छत्तीसगढ़ पर्यटन के क्षेत्र में एक ‘सोता हुआ शेर’ (Sleeping Giant) है। प्रकृति, संस्कृति और इतिहास का जैसा संगम यहाँ है, वैसा दुर्लभ है। पर्यटन नीति 2020 और नई शक्तिपीठ परियोजना के माध्यम से राज्य सरकार इसे एक प्रमुख आर्थिक इंजन बनाने की दिशा में अग्रसर है। एक अभ्यर्थी के रूप में आपको यहाँ की भौगोलिक स्थिति और सांस्कृतिक महत्व को गहराई से समझने की आवश्यकता है, क्योंकि यही ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ की असली पहचान है।
13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
संदर्भ और विश्वसनीय स्रोत
- छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल: (chhattisgarhtourism.in)
- जिला प्रशासन वेबसाइट्स: बस्तर और सरगुजा।
- ग्रन्थ अकादमी: छत्तीसगढ़ का इतिहास और संस्कृति।
अगला लेख पढ़ें: छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ और उनकी अद्भुत संस्कृति
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