क्या आप जानते हैं कि छत्तीसगढ़, जिसे भारत का ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, अपनी धरातलीय बनावट में कितनी विविधता रखता है? यह केवल हरे-भरे मैदानों का प्रदेश नहीं, बल्कि यहाँ ऊँचे पठार, घने जंगल, सीढ़ीनुमा पाट प्रदेश और खनिज संपदा से भरपूर प्राचीन भू-भाग भी हैं। छत्तीसगढ़ की इसी भौगोलिक विविधता , जलवायु और मिट्टी को समझना प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर CGPSC और Vyapam के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह लेख छत्तीसगढ़ का भूगोल समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसे हमने हमारे मुख्य गाइड में भी विस्तार से बताया है।
इस लेख में, हम छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन (Physical Division of Chhattisgarh) बहुत ही सरल और विस्तृत तरीके से समझेंगे। हमारा लक्ष्य आपको एक “अपराजेय गाइड” प्रदान करना है, जिसे पढ़ने के बाद इस विषय से जुड़ा कोई भी सवाल आपसे नहीं छूटेगा। आप हर भौतिक प्रदेश की स्थिति, क्षेत्रफल, भूगर्भिक संरचना, प्रमुख चोटियाँ, खनिज और नदी प्रणालियों (छत्तीसगढ़ में उद्योगों का आधार) को गहराई से जानेंगे। यह विषय छत्तीसगढ़ के इतिहास को भी प्रभावित करता है, जिसके बारे में आप हमारे लेख छत्तीसगढ़ का सम्पूर्ण इतिहास में पढ़ सकते हैं।
विषय सूची [X]
- 1. छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन क्या है? (What is the Physical Division of Chhattisgarh?)
- 2. पूर्वी बघेलखण्ड का पठार (Purvi Baghelkhand ka Pathar)
- स्थिति और विस्तार
- भूगर्भिक संरचना और प्रमुख विशेषताएँ
- प्रमुख उप-विभाग
- खनिज और नदियाँ
- Quick Revision Table: पूर्वी बघेलखण्ड का पठार
- 3. जशपुर-सामरी पाट प्रदेश (Jashpur-Samri Paat Pradesh)
- स्थिति और विस्तार
- भूगर्भिक संरचना और आकृति
- उच्चतम चोटी और प्रमुख पाट
- खनिज और नदियाँ
- Quick Revision Table: जशपुर-सामरी पाट प्रदेश
- 4. छत्तीसगढ़ का मैदान या महानदी बेसिन (Mahanadi Basin)
- स्थिति और विस्तार
- भूगर्भिक संरचना और विशेषताएँ
- छत्तीसगढ़ के मैदान का उप-विभाजन
- खनिज और अपवाह तंत्र
- Quick Revision Table: छत्तीसगढ़ का मैदान
- 5. दण्डकारण्य का पठार (Dandakaranya ka Pathar)
- स्थिति और विस्तार
- भूगर्भिक संरचना और विशेषताएँ
- प्रमुख उप-विभाग (पहाड़ियाँ और पठार)
- खनिज और अपवाह तंत्र
- Quick Revision Table: दण्डकारण्य का पठार
- 6. छत्तीसगढ़ के भौतिक विभाजनों की तुलना (एक नज़र में)
- 7. छत्तीसगढ़ के भौतिक विभाजन को याद करने की ट्रिक
- 8. छत्तीसगढ़ की प्रमुख चोटियाँ और उच्च भूमियाँ (ऊँचाई के घटते क्रम में)
- प्रमुख चोटियों को याद करने की ट्रिक (ऊँचाई के क्रम में)
- तुलनात्मक अध्ययन: मैकल श्रेणी बनाम बैलाडीला की पहाड़ियाँ
- 9. तुलनात्मक अध्ययन: छत्तीसगढ़ का मैदान बनाम दण्डकारण्य का पठार
- इस विषय से जुड़े रोचक और अल्पज्ञात तथ्य
- ज्ञान की परीक्षा: छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन CGPSC PYQ महा-क्विज़ (10 प्रश्न)
- 🔥🎯 अपना स्कोर आँकें: भौतिक विभाजन तैयारी का स्तर
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 11. संदर्भ और स्रोत (References and Sources)
- निष्कर्ष:
- Er. M. S. (Mentor M. S. Sir)
- और भी पढ़ें (You May Also Like) 👇
1. छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन क्या है? (What is the Physical Division of Chhattisgarh?)
किसी भी क्षेत्र के भौतिक विभाजन का अर्थ है, वहाँ की धरातलीय बनावट, ऊँचाई-निचाई (उच्चावच), चट्टानों की संरचना और प्राकृतिक विशेषताओं के आधार पर उसे अलग-अलग प्रदेशों या हिस्सों में बाँटना। छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक प्रदेशों का यह वर्गीकरण हमें राज्य की भौगोलिक संरचना को वैज्ञानिक ढंग से समझने में मदद करता है।
विभिन्न भूगर्भिक कालों में हुए परिवर्तनों के आधार पर, छत्तीसगढ़ राज्य को मुख्य रूप से चार भौतिक या प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है। इन चारों प्रदेशों का अध्ययन ही छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन कहलाता है। आइए, इन चारों भागों का विस्तृत अध्ययन करें।
2. पूर्वी बघेलखण्ड का पठार (Purvi Baghelkhand ka Pathar)

यह भौतिक प्रदेश छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से में स्थित है और यह मध्य प्रदेश के बघेलखण्ड पठार का पूर्वी विस्तार है। यह क्षेत्र अपनी कोयला खदानों, घने वनों और विशिष्ट भू-आकृतियों के लिए जाना जाता है। छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन यहीं से उत्तर में प्रारंभ होता है।
स्थिति और विस्तार
पूर्वी बघेलखण्ड का पठार छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग में 23° 37′ से 24° 5′ उत्तरी अक्षांश तथा 82° 20′ से 84° पूर्वी देशांतर के मध्य फैला हुआ है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 21,863 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 16.16% हिस्सा है। इस क्षेत्र के अंतर्गत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर, सरगुजा और कोरबा जिले के उत्तरी भाग शामिल हैं।
भूगर्भिक संरचना और प्रमुख विशेषताएँ
इस पठार की भूगर्भिक संरचना मुख्य रूप से गोंडवाना शैल समूह की चट्टानों से हुई है। यही कारण है कि यह क्षेत्र कोयले के विशाल भंडार के लिए प्रसिद्ध है। इसकी सामान्य ढाल उत्तर की ओर है, जिसके कारण यहाँ की अधिकांश नदियाँ उत्तर दिशा में बहती हैं। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह पठार महानदी अपवाह तंत्र और गंगा अपवाह तंत्र के बीच एक ‘जल विभाजक’ (Water Divide) के रूप में कार्य करता है।
प्रमुख उप-विभाग
- चांगभखार-देवगढ़ की पहाड़ियाँ: यह इस पठार का सबसे ऊँचा हिस्सा है, जो कोरिया और सूरजपुर जिलों में फैला है। इस पहाड़ी श्रृंखला की सबसे ऊँची चोटी देवगढ़ (Devgarh) है, जिसकी ऊँचाई 1033 मीटर है।
- कन्हार बेसिन: यह बलरामपुर जिले के पूर्वी भाग में स्थित एक निचला मैदानी क्षेत्र है।
- सरगुजा बेसिन: यह प्रदेश के मध्य में स्थित एक विस्तृत बेसिन है जहाँ से रिहन्द और उसकी सहायक नदियाँ बहती हैं।
- हसदो-रामपुर बेसिन: यह पठार का दक्षिणी हिस्सा है जो कोरबा और कोरिया जिले में विस्तृत है। यह क्षेत्र भी कोयला उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
- रामगढ़ की पहाड़ियाँ: सरगुजा जिले में स्थित ये पहाड़ियाँ ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यहाँ विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला ‘सीता बेंगरा’ और ‘जोगीमारा’ की गुफाएँ स्थित हैं, जो मौर्यकालीन मानी जाती हैं।
खनिज और नदियाँ
खनिज: गोंडवाना चट्टानों की उपस्थिति के कारण यहाँ का प्रमुख खनिज कोयला है।
नदियाँ: इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ रिहन्द, हसदो, बनास, गोपद और कन्हार हैं, जो सोन-गंगा अपवाह तंत्र का हिस्सा हैं।
Quick Revision Table: पूर्वी बघेलखण्ड का पठार
| कुल क्षेत्रफल | ~ 21,863 वर्ग किमी (राज्य का 16.16%) |
| प्रमुख शैल समूह | गोंडवाना |
| प्रमुख खनिज | कोयला |
| उच्चतम चोटी | देवगढ़ (1033 मीटर) |
| प्रमुख नदी तंत्र | सोन-गंगा अपवाह तंत्र |
3. जशपुर-सामरी पाट प्रदेश (Jashpur-Samri Paat Pradesh)

‘पाट’ का स्थानीय अर्थ होता है – ऊँचा, सपाट पठारी भू-भाग। यह प्रदेश छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा क्षेत्र है और अपनी अनूठी स्थलाकृति, बॉक्साइट के भंडारों और মনোরম जलवायु के लिए विख्यात है।
स्थिति और विस्तार
जशपुर-सामरी पाट प्रदेश राज्य के उत्तर-पूर्वी सीमांत क्षेत्र में स्थित है। यह विशाल छोटा नागपुर पठार का एक पश्चिमी हिस्सा है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 6,208 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 4.59% है। यह क्षेत्रफल की दृष्टि से छत्तीसगढ़ का सबसे छोटा भौतिक प्रदेश है, लेकिन औसत ऊँचाई में सबसे ऊँचा है। इसके अंतर्गत जशपुर, बलरामपुर और सरगुजा जिले के हिस्से आते हैं।
भूगर्भिक संरचना और आकृति
इस प्रदेश का निर्माण मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप (Deccan Trap) की लावा निर्मित बेसाल्ट चट्टानों से हुआ है। इन चट्टानों के अपरदन से लेटराइट मिट्टी का निर्माण हुआ है, जिसमें बॉक्साइट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसकी आकृति सीढ़ीनुमा है, जिसका ऊपरी भाग सपाट और किनारे तीव्र ढाल वाले होते हैं, जो इसे एक टेबल-लैंड का स्वरूप प्रदान करते हैं।
उच्चतम चोटी और प्रमुख पाट
यह प्रदेश छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटियों का घर है। बलरामपुर जिले के सामरीपाट में स्थित गौरलाटा (Gaurlata) चोटी, 1225 मीटर की ऊँचाई के साथ, छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी है। इस क्षेत्र के अन्य प्रमुख पाटों में शामिल हैं:
- सामरीपाट और जमीरपाट (बलरामपुर): ये प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित हैं और बॉक्साइट के लिए प्रसिद्ध हैं।
- जशपुर पाट (जशपुर): यह इस भौतिक प्रदेश का सबसे बड़ा और सबसे लंबा पाट क्षेत्र है।
- मैनपाट (सरगुजा): 1152 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इसे ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ भी कहा जाता है। 1962 में यहाँ तिब्बती शरणार्थियों को बसाया गया था। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बॉक्साइट खदानों के लिए जाना जाता है।
खनिज और नदियाँ
खनिज: दक्कन ट्रैप की चट्टानों के कारण यहाँ का सर्वप्रमुख खनिज बॉक्साइट है, जिससे एल्युमिनियम प्राप्त होता है।
नदियाँ: इस क्षेत्र से निकलने वाली प्रमुख नदियाँ ईब और कन्हार हैं।
Quick Revision Table: जशपुर-सामरी पाट प्रदेश
| कुल क्षेत्रफल | ~ 6,208 वर्ग किमी (राज्य का 4.59%) |
| प्रमुख शैल समूह | दक्कन ट्रैप |
| प्रमुख खनिज | बॉक्साइट |
| उच्चतम चोटी | गौरलाटा (1225 मीटर) |
| प्रमुख नदी | ईब, कन्हार |
4. छत्तीसगढ़ का मैदान या महानदी बेसिन (Mahanadi Basin)

यह राज्य के मध्य में स्थित सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण भौतिक प्रदेश है। अपनी उपजाऊ भूमि और व्यापक धान की खेती के कारण, यह क्षेत्र सही मायनों में छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” बनाता है। छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन समझने के लिए इस केंद्रीय मैदान का अध्ययन सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। यह प्रदेश न केवल भौगोलिक बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी छत्तीसगढ़ का हृदय रहा है। प्राचीन काल में यहाँ पांडु वंश ने सिरपुर को अपनी राजधानी बनाया और बाद में कल्चुरि वंश ने रतनपुर से इस क्षेत्र पर शासन किया।
स्थिति और विस्तार
छत्तीसगढ़ का मैदान राज्य के हृदय स्थल में एक विशाल पंखे के आकार में फैला हुआ है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 68,064 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का सर्वाधिक, यानी 50.34% है। यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा भौतिक प्रदेश है। इसके अंतर्गत बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकांश जिले शामिल हैं।
भूगर्भिक संरचना और विशेषताएँ
इस मैदान का निर्माण मुख्य रूप से आर्कियन युग की प्राचीन चट्टानों के ऊपर अवसाद के जमाव से बनी कड़प्पा शैल समूह (Cuddapah Rock System) की चट्टानों से हुआ है। ये चट्टानें चूना पत्थर और डोलोमाइट जैसे खनिजों से समृद्ध हैं। इस मैदान की औसत ऊँचाई लगभग 300 मीटर है और इसका सामान्य ढाल पूर्व की ओर है। महानदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी के कारण यह क्षेत्र कृषि, विशेषकर धान की खेती के लिए अत्यधिक उपयुक्त है।
छत्तीसगढ़ के मैदान का उप-विभाजन
इस विशाल मैदान को भी दो मुख्य भागों और सीमांत उच्च भूमियों में बांटा गया है:
- केंद्रीय मैदान (महानदी-शिवनाथ दोआब): यह मैदान का सबसे निचला और उपजाऊ हिस्सा है, जो महानदी और शिवनाथ नदी के बीच स्थित है। रायपुर, दुर्ग, और बिलासपुर इसी क्षेत्र में आते हैं।
- सीमांत उच्च भूमियाँ (Bordering Highlands):
- पश्चिमी उच्च भूमि (मैकल श्रेणी): यह सतपुड़ा पर्वत का पूर्वी विस्तार है और कवर्धा, राजनांदगांव जिलों में फैली है। यह महानदी बेसिन और नर्मदा बेसिन के बीच जल विभाजक का कार्य करती है। इसकी सबसे ऊँची चोटी बदरगढ़ (1176 मीटर) है।
- उत्तरी उच्च भूमि (छुरी-उदयपुर और पेंड्रा-लोरमी का पठार): ये कोरबा, सरगुजा, रायगढ़ और GPM जिलों में विस्तृत हैं।
- पूर्वी उच्च भूमि (धमतरी-महासमुंद उच्च भूमि और सिहावा पर्वत): यह महानदी का उद्गम स्थल है और धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद जिलों में फैला है।
इस क्षेत्र में कई ऐतिहासिक स्थल हैं जैसे रतनपुर और सिरपुर, जो इसकी सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं।
खनिज और अपवाह तंत्र
खनिज: कड़प्पा शैल समूह की प्रधानता के कारण यहाँ चूना पत्थर (Limestone) और डोलोमाइट प्रमुख खनिज हैं, जो सीमेंट उद्योग का आधार हैं।
अपवाह तंत्र: इस क्षेत्र का जीवन महानदी और उसकी विशाल सहायक नदी प्रणाली पर निर्भर है, जिसमें शिवनाथ, हसदेव, खारुन, जोंक, पैरी, और मांड प्रमुख हैं।
Quick Revision Table: छत्तीसगढ़ का मैदान
| कुल क्षेत्रफल | ~ 68,064 वर्ग किमी (राज्य का 50.34%) |
| प्रमुख शैल समूह | कड़प्पा |
| प्रमुख खनिज | चूना पत्थर, डोलोमाइट |
| प्रमुख उच्च भूमि | मैकल श्रेणी (उच्चतम चोटी: बदरगढ़ 1176 मी) |
| प्रमुख नदी तंत्र | महानदी अपवाह तंत्र |
5. दण्डकारण्य का पठार (Dandakaranya ka Pathar)

यह छत्तीसगढ़ का दक्षिणी भाग है, जिसे बस्तर पठार के नाम से भी जाना जाता है। यह क्षेत्र अपनी प्राचीन चट्टानों, समृद्ध लौह-अयस्क भंडारों, घने वनों और विशिष्ट जनजातीय संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन इस दक्षिणी पठार के बिना अधूरा है, जिसका अपना एक अलग ऐतिहासिक महत्व भी है। यहाँ पर काकतीय वंश का लंबा शासन रहा और विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की शुरुआत हुई। यहाँ हुए जंगल सत्याग्रह भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
स्थिति और विस्तार
दण्डकारण्य का पठार राज्य के दक्षिणी भाग (बस्तर संभाग) में फैला हुआ है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 39,060 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 28.91% है। इसके अंतर्गत कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले आते हैं।
भूगर्भिक संरचना और विशेषताएँ
यह एक अत्यंत प्राचीन भू-भाग है जिसका निर्माण आर्कियन, धारवाड़, और ग्रेनाइट/नीस जैसी प्राचीनतम चट्टानों से हुआ है। धारवाड़ क्रम की चट्टानें धात्विक खनिजों, विशेषकर लौह-अयस्क की दृष्टि से अत्यधिक समृद्ध होती हैं। यह एक ऊबड़-खाबड़ और असमतल पठारी क्षेत्र है, जिसका सामान्य ढाल दक्षिण की ओर है।
प्रमुख उप-विभाग (पहाड़ियाँ और पठार)
- बैलाडीला की पहाड़ियाँ: दंतेवाड़ा में स्थित ये पहाड़ियाँ विश्व प्रसिद्ध उच्च गुणवत्ता वाले लौह-अयस्क के भंडार के लिए जानी जाती हैं। इसकी सबसे ऊँची चोटी नंदीराज (1210 मीटर) है।
- अबूझमाड़ की पहाड़ियाँ: नारायणपुर जिले में स्थित यह क्षेत्र घने वनों से आच्छादित है और इसे ‘छत्तीसगढ़ का चेरापूंजी’ भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ राज्य में सर्वाधिक वर्षा होती है।
- केशकाल घाटी: यह घाटी छत्तीसगढ़ के मैदान और बस्तर पठार के बीच सीमा बनाती है। अपने 12 सुंदर मोड़ों वाले घुमावदार रास्ते के लिए प्रसिद्ध इस घाटी को ‘बस्तर का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है।
- बस्तर का पठार और मैदान: इसमें इंद्रावती नदी के आसपास का क्षेत्र शामिल है, जो अपेक्षाकृत समतल है।
खनिज और अपवाह तंत्र
खनिज: धारवाड़ चट्टानों के कारण यह क्षेत्र लौह-अयस्क, टिन, और कोरंडम जैसे बहुमूल्य खनिजों का भंडार है।
अपवाह तंत्र: इस क्षेत्र की जीवन रेखा गोदावरी नदी और उसकी सहायक नदियाँ हैं, जिनमें इंद्रावती, शबरी, कोटरी, डंकिनी और शंखिनी प्रमुख हैं। यह गोदावरी अपवाह तंत्र का हिस्सा है।
Quick Revision Table: दण्डकारण्य का पठार
| कुल क्षेत्रफल | ~ 39,060 वर्ग किमी (राज्य का 28.91%) |
| प्रमुख शैल समूह | धारवाड़, आर्कियन |
| प्रमुख खनिज | लौह-अयस्क, टिन, कोरंडम |
| प्रमुख स्थलाकृति | बैलाडीला की पहाड़ी, अबूझमाड़, केशकाल घाटी |
| प्रमुख नदी तंत्र | गोदावरी अपवाह तंत्र |
6. छत्तीसगढ़ के भौतिक विभाजनों की तुलना (एक नज़र में)
आइए, परीक्षा की दृष्टि से इन चारों भौतिक प्रदेशों की एक त्वरित तुलनात्मक सारणी देखें ताकि छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य आसानी से याद हो सकें।
| विशेषता | पूर्वी बघेलखण्ड का पठार | जशपुर-सामरी पाट प्रदेश | छत्तीसगढ़ का मैदान (महानदी बेसिन) | दण्डकारण्य का पठार |
|---|---|---|---|---|
| क्षेत्रफल (%) | 16.16% | 4.59% (सबसे छोटा) | 50.34% (सबसे बड़ा) | 28.91% |
| औसत ऊँचाई | मध्यम (300-700 मी) | सर्वाधिक ऊँचा (>1000 मी) | सबसे कम (<300 मी) | ऊँचा (300-900 मी) |
| प्रमुख शैल समूह | गोंडवाना | दक्कन ट्रैप | कड़प्पा | धारवाड़/आर्कियन |
| प्रमुख खनिज | कोयला | बॉक्साइट | चूना पत्थर, डोलोमाइट | लौह-अयस्क, टिन |
| उच्चतम चोटी | देवगढ़ (1033 मी) | गौरलाटा (1225 मी) | बदरगढ़ (1176 मी, मैकल श्रेणी) | नंदीराज (1210 मी, बैलाडीला) |
| मुख्य नदी तंत्र | सोन-गंगा / महानदी | महानदी | महानदी | गोदावरी |
| अन्य नाम/विशेषता | गंगा-महानदी जल विभाजक | छत्तीसगढ़ का बगीचा, सबसे ऊँचा भाग | धान का कटोरा, हृदय स्थल | बस्तर का पठार, खनिजों का भंडार |
7. छत्तीसगढ़ के भौतिक विभाजन को याद करने की ट्रिक
छत्तीसगढ़ के चारों भौतिक प्रदेशों को उत्तर से दक्षिण के क्रम में याद रखना कई बार कन्फ्यूजिंग हो सकता है। इसके लिए एक बहुत ही आसान ट्रिक है:
“बाग में JASH ने महान दण्ड दिया।”
- बाग = पूर्वी बघेलखण्ड का पठार (सबसे उत्तर में)
- JASH = जशपुर-सामरी पाट प्रदेश (उत्तर-पूर्व में)
- महान = महानदी का मैदान (मध्य में)
- दण्ड = दण्डकारण्य का पठार (सबसे दक्षिण में)
8. छत्तीसगढ़ की प्रमुख चोटियाँ और उच्च भूमियाँ (ऊँचाई के घटते क्रम में)
छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन केवल पठारों और मैदानों तक सीमित नहीं है, इसमें कई महत्वपूर्ण पर्वत चोटियाँ भी शामिल हैं जो अक्सर परीक्षाओं में पूछी जाती हैं।
| चोटी का नाम | ऊँचाई (मीटर में) | भौतिक प्रदेश | स्थान (जिला) | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|---|
| गौरलाटा | 1225 | जशपुर-सामरी पाट प्रदेश | बलरामपुर | छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी |
| नंदीराज | 1210 | दण्डकारण्य का पठार | दंतेवाड़ा | बैलाडीला पहाड़ी की सबसे ऊँची चोटी |
| बदरगढ़ | 1176 | छत्तीसगढ़ का मैदान (मैकल श्रेणी) | कवर्धा (कबीरधाम) | मैकल श्रेणी की सबसे ऊँची चोटी |
| मैनपाट | 1152 | जशपुर-सामरी पाट प्रदेश | सरगुजा | ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ कहा जाता है |
| पलमागढ़ | 1080 | छत्तीसगढ़ का मैदान (पेंड्रा-लोरमी पठार) | कोरबा | पेंड्रा-लोरमी पठार की ऊँची चोटी |
| अबूझमाड़ | 1076 | दण्डकारण्य का पठार | नारायणपुर | सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र |
| लाफागढ़ | 1048 | छत्तीसगढ़ का मैदान (छुरी-उदयपुर पहाड़ी) | कोरबा | ‘छत्तीसगढ़ का चित्तौड़’ कहा जाता है |
| देवगढ़ | 1033 | पूर्वी बघेलखण्ड का पठार | कोरिया/सूरजपुर | पूर्वी बघेलखण्ड पठार की सबसे ऊँची चोटी |
| धजारी | 899 | छत्तीसगढ़ का मैदान (मैकल श्रेणी) | राजनांदगांव | डोंगरगढ़ पहाड़ी का हिस्सा |
प्रमुख चोटियों को याद करने की ट्रिक (ऊँचाई के क्रम में)
छत्तीसगढ़ की 4 सबसे ऊँची चोटियों को घटते क्रम में याद रखने के लिए यह वाक्य याद रखें:
“गौरव (Gaur) ने नंदी (Nandi) को बहुत (Badar) मारा (Main)।”
- गौरव = गौरलाटा (1225 मी)
- नंदी = नंदीराज (1210 मी)
- बहुत = बदरगढ़ (1176 मी)
- मारा = मैनपाट (1152 मी)
तुलनात्मक अध्ययन: मैकल श्रेणी बनाम बैलाडीला की पहाड़ियाँ
| विशेषता | मैकल श्रेणी | बैलाडीला की पहाड़ियाँ |
|---|---|---|
| भौतिक प्रदेश | छत्तीसगढ़ का मैदान (पश्चिमी सीमांत) | दण्डकारण्य का पठार |
| पर्वत का हिस्सा | सतपुड़ा पर्वत का पूर्वी विस्तार | दण्डकारण्य पठार की स्वतंत्र श्रृंखला |
| उच्चतम चोटी | बदरगढ़ (1176 मीटर) | नंदीराज (1210 मीटर) |
| प्रमुख शैल समूह | कड़प्पा और दक्कन ट्रैप | धारवाड़ |
| प्रमुख खनिज | बॉक्साइट, कुछ मात्रा में लौह-अयस्क | विश्व प्रसिद्ध उच्च गुणवत्ता का लौह-अयस्क |
| अपवाह तंत्र पर प्रभाव | महानदी और नर्मदा के बीच जल विभाजक | गोदावरी अपवाह तंत्र का हिस्सा |
9. तुलनात्मक अध्ययन: छत्तीसगढ़ का मैदान बनाम दण्डकारण्य का पठार
राज्य के दो सबसे बड़े भौतिक प्रदेशों के बीच का अंतर समझना बहुत महत्वपूर्ण है।
| विशेषता | छत्तीसगढ़ का मैदान (महानदी बेसिन) | दण्डकारण्य का पठार |
|---|---|---|
| भूगर्भिक संरचना | मुख्य रूप से कड़प्पा शैल समूह | मुख्य रूप से धारवाड़ और आर्कियन शैल समूह |
| प्रमुख खनिज | अधात्विक (चूना पत्थर, डोलोमाइट) | धात्विक (लौह-अयस्क, टिन, कोरंडम) |
| औसत ऊँचाई | कम (~300 मीटर) | अधिक और असमतल (~600-900 मीटर) |
| कृषि | अत्यधिक उपजाऊ, धान की खेती प्रमुख | अपेक्षाकृत कम उपजाऊ, मोटे अनाज और वनोपज |
| अपवाह तंत्र | महानदी और उसकी सहायक नदियाँ | गोदावरी और उसकी सहायक नदियाँ |
| आर्थिक आधार | कृषि और सीमेंट उद्योग | खनिज उत्खनन और वनोपज |
इस विषय से जुड़े रोचक और अल्पज्ञात तथ्य
क्या आप जानते हैं?
- केशकाल घाटी का दूसरा नाम: केशकाल घाटी को मनमोहक फूलों की विविधता के कारण “छत्तीसगढ़ की फूलों की घाटी” भी कहा जाता है। यह तथ्य इसकी प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाता है।
- मैनपाट की उछलती धरती: मैनपाट में ‘जलजली’ नामक एक ऐसी जगह है, जहाँ की जमीन पर कूदने से वह स्प्रिंग की तरह हिलती और उछलती है। यह एक दुर्लभ भौगोलिक घटना है जो नीचे दलदली भूमि और पानी के कारण होती है।
- चट्टानों का भूगर्भिक काल: दण्डकारण्य की धारवाड़ चट्टानें पृथ्वी की सबसे प्राचीन ‘प्री-कैम्ब्रियन’ युग की हैं, जबकि छत्तीसगढ़ के मैदान की कड़प्पा चट्टानें उसके बाद के ‘प्रोटेरोज़ोइक’ युग की हैं। यह दिखाता है कि बस्तर का पठार, मैदान से कहीं ज़्यादा पुराना है।
- भूगोल का संस्कृति पर प्रभाव: अबूझमाड़ की पहाड़ियाँ इतनी घनी और दुर्गम हैं कि यह क्षेत्र बाहरी दुनिया से लगभग कटा हुआ रहा। इसी भौगोलिक अलगाव के कारण यहाँ की ‘अबूझमाड़िया’ जनजाति आज भी अपनी आदिम और अनूठी संस्कृति को संरक्षित किए हुए है।
ज्ञान की परीक्षा: छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन CGPSC PYQ महा-क्विज़ (10 प्रश्न)
पूर्वी बघेलखंड पठार, जसपुर-सामरी पाट प्रदेश, महानदी बेसिन और दंडकारण्य पठार से जुड़े 10 प्रामाणिक प्रश्नों का अभ्यास करें:
[CGPSC Prelims] छत्तीसगढ़ को मुख्य रूप से चार प्राकृतिक भौतिक प्रदेशों में बांटा गया है, इनमें से सबसे बड़े भूभाग (लगभग 50.34 प्रतिशत) पर कौन सा प्रदेश विस्तृत है?
[CG Vyapam Patwari] छत्तीसगढ़ राज्य की सर्वोच्च पर्वत चोटी ‘गौरलाटा’ (1225 मीटर) किस पाट प्रदेश और जिले में स्थित है?
[CGPSC SSE] बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले दंडकारण्य पठार की सबसे ऊंची चोटी ‘नंदीराज’ (1210 मीटर) किस पर्वत श्रृंखला में स्थित है?
[CG Forest Exam] छत्तीसगढ़ का सबसे छोटा भौतिक प्रदेश कौन सा है जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का मात्र 4.59 प्रतिशत भाग घेरे हुए है?
[CG Vyapam Food Inspector] छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले ‘मैनपाट’ की औसत ऊंचाई कितनी है और यह किस जिले में स्थित है?
[CGPSC State Engineering] छत्तीसगढ़ के पश्चिमी सीमांत पर स्थित ‘मैकल पर्वत श्रेणी’ की ढाल किस ओर है जिसके कारण कवर्धा जिला वृष्टि छाया क्षेत्र में आता है?
[CG Vyapam RI] पूर्वी बघेलखंड के पठार की सबसे ऊंची चोटी ‘देवगढ़ की पहाड़ी’ (1033 मीटर) किस जिले के अंतर्गत आती है?
[CGPSC Assistant Registrar] बस्तर पठार और छत्तीसगढ़ के मैदान के बीच प्राकृतिक विभाजक के रूप में कौन सी प्रसिद्ध घाटी स्थित है जिसे ‘बस्तर का प्रवेश द्वार’ कहा जाता है?
[CGPSC Prelims] छत्तीसगढ़ बेसिन की भौगोलिक आकृति सामान्य रूप से किस प्रकार की दिखाई देती है?
[CG Vyapam Hostel Warden] बॉक्साइट के विशाल भंडारों के कारण किस पाट प्रदेश को ‘बॉक्साइट की राजधानी’ कहा जाता है?
🎯 अपना स्कोर आँकें: भौतिक विभाजन तैयारी का स्तर
कुल प्रश्न: 10 | सही उत्तरों के आधार पर भौतिक भूगोल ज्ञान का मूल्यांकन करें:
- 🏆 10 में से 10 सही (टॉपर स्तर): उत्कृष्ट! चोटियों की ऊंचाई (गौरलाटा, नंदीराज), पाठ प्रदेशों और भौतिक प्रतिशत पर आपकी पकड़ बेजोड़ है।
- 🥈 10 में से 8-9 सही (उत्कृष्ट स्तर): बहुत बढ़िया! केवल मैकल श्रेणी और देवगढ़ पहाड़ी के जिलों का रिविजन कर लें।
- 🥉 10 में से 6-7 सही (औसत स्तर): बुनियादी समझ ठीक है, लेकिन चारों प्राकृतिक प्रदेशों के क्षेत्रफल प्रतिशत को दोबारा याद करें।
- ⚠️ 6 से कम सही (रिवीजन आवश्यक): पोस्ट में ऊपर दिए गए त्वरित रिविजन फ़्लैशकार्ड्स और थ्योरी का अध्ययन अवश्य करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
11. संदर्भ और स्रोत (References and Sources)
इस लेख में दी गई जानकारी को सत्यापित करने और विषय पर अधिक गहराई से अध्ययन करने के लिए, हमने निम्नलिखित विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों का संदर्भ लिया है। ये लिंक आपको संबंधित सरकारी विभागों और पोर्टलों पर ले जाएँगे, जहाँ आप अतिरिक्त जानकारी प्राप्त कर सकते हैं:
- जनसंपर्क विभाग, छत्तीसगढ़ शासन: राज्य के आधिकारिक नक्शे और भौगोलिक जानकारी के लिए एक प्रामाणिक स्रोत।
- वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन: यह वेबसाइट राज्य के वनों, राष्ट्रीय उद्यानों और भौगोलिक संरचना के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।
- भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI): भारत की भूगर्भिक संरचना, चट्टानों और खनिजों पर सबसे प्रामाणिक जानकारी के लिए यह राष्ट्रीय एजेंसी है।
- राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, छत्तीसगढ़: राज्य की भौगोलिक स्थिति पर आधिकारिक जानकारी के लिए एक और महत्वपूर्ण सरकारी स्रोत।
निष्कर्ष:
संक्षेप में, छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन हमें यह दिखाता है कि यह राज्य केवल एक मैदानी क्षेत्र नहीं, बल्कि चार विशिष्ट भौगोलिक प्रदेशों का एक सुंदर संगम है। उत्तर में कोयला संपन्न बघेलखण्ड पठार से लेकर उत्तर-पूर्व के बॉक्साइट युक्त ऊँचे पाट प्रदेशों तक, मध्य में उपजाऊ महानदी बेसिन से लेकर दक्षिण के खनिज समृद्ध दण्डकारण्य पठार तक, हर क्षेत्र की अपनी अनूठी पहचान, संसाधन और महत्व है। हमें उम्मीद है कि यह विस्तृत गाइड आपको इस महत्वपूर्ण विषय को पूरी तरह से समझने में मदद करेगी। यदि आपके कोई प्रश्न या सुझाव हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें।
🚀 हमसे सोशल मीडिया पर जुड़ें
लेटेस्ट अपडेट्स और फ्री नोट्स के लिए फॉलो करें:
क्या आप इस लेख को ऑफलाइन पढ़ना चाहते हैं?
📥 लेख को PDF में सेव करें

अपनी तैयारी को नई उड़ान दें!
ज्ञान और मार्गदर्शन के इस सफर में अकेला महसूस न करें। हमारे समुदाय से जुड़ें:
