छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र: नदियों, संगमों और परियोजनाओं का संपूर्ण विश्लेषण

क्या आप जानते हैं कि छत्तीसगढ़ का भौतिक विभाजन किस आधार पर हुआ? कौन सी नदी पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में मिलती है? या ‘छत्तीसगढ़ का प्रयाग’ किन तीन नदियों के संगम पर बसा है? ये सिर्फ रोचक तथ्य नहीं, बल्कि CGPSC और Vyapam परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न हैं। वन और नदियाँ किसी भी क्षेत्र की जीवन रेखा होती हैं, और छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र (Drainage System of Chhattisgarh) राज्य की भौगोलिक संरचना और अपार खनिज संसाधन को समझने की कुंजी है। यह हमारी विस्तृत “छत्तीसगढ़ का भूगोल” श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण क्लस्टर पोस्ट है। यह लेख आपको छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र के हर पहलू की गहराई से जानकारी देगा, इसके साथ आपको छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव अभ्यारण के बारे में भी जानना चाहिए जो आपकी परीक्षा की तैयारी को निर्णायक बढ़त दिलाएगी।

इस लेख में आप पढ़ेंगे (Table of Contents)

Quick Revision: छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र के रामबाण तथ्य

  • सबसे बड़ा अपवाह तंत्र: महानदी (56.15%)
  • सबसे छोटा अपवाह तंत्र: नर्मदा (0.55%)
  • छत्तीसगढ़ की सबसे लंबी नदी: महानदी (कुल 858 किमी)
  • छत्तीसगढ़ में बहने वाली सबसे लंबी नदी: शिवनाथ (290 किमी)
  • छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा: महानदी
  • बस्तर की जीवन रेखा: इंद्रावती
  • सरगुजा की जीवन रेखा: रिहन्द
  • सबसे ऊँचा बांध: मिनीमाता बांगो बांध (हसदेव नदी पर)
  • एकमात्र नदी जो अरब सागर में गिरती है (तंत्र): नर्मदा
  • रायपुर किस नदी के किनारे है: खारुन नदी
  • बिलासपुर किस नदी के किनारे है: अरपा नदी

भ्रम और तथ्य: वो गलतियाँ जो छात्र अक्सर करते हैं

भ्रम: महानदी छत्तीसगढ़ की सबसे लंबी नदी है।
तथ्य: नहीं! महानदी छत्तीसगढ़ से होकर बहने वाली सबसे बड़ी नदी है, लेकिन राज्य की सीमा के अंदर बहने वाली सबसे लंबी नदी शिवनाथ (290 किमी) है।


भ्रम: दक्षिण गंगा और दक्षिण कोसल की गंगा एक ही हैं।
तथ्य: नहीं! गोदावरी को ‘दक्षिण गंगा’ कहा जाता है, जबकि महानदी को ‘छत्तीसगढ़ या दक्षिण कोसल की गंगा’ कहा जाता है।


भ्रम: राजिम छत्तीसगढ़ का एकमात्र त्रिवेणी संगम है।
तथ्य: नहीं! राजिम सबसे प्रसिद्ध है, लेकिन शिवरीनारायण और चंद्रपुर भी महत्वपूर्ण त्रिवेणी संगम हैं।

1. एक नज़र में: छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र का वर्गीकरण

छत्तीसगढ़ की भौगोलिक ढाल के आधार पर, यहाँ के संपूर्ण नदी प्रवाह प्रणाली को मुख्य रूप से चार भागों में बांटा गया है। **छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र** का यह वर्गीकरण परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:

अपवाह तंत्रक्षेत्रफल (%)ढाल की दिशाप्रमुख नदीविसर्जन
महानदी अपवाह तंत्र56.15% (सबसे बड़ा)पूर्व की ओरमहानदीबंगाल की खाड़ी
गोदावरी अपवाह तंत्र28.64%दक्षिण की ओरइंद्रावतीबंगाल की खाड़ी
सोन-गंगा अपवाह तंत्र13.63%उत्तर की ओरसोन (रिहन्द, बनास)गंगा नदी में
नर्मदा अपवाह तंत्र0.55% (सबसे छोटा)पश्चिम की ओरनर्मदा (बंजर, ताड़ा)अरब सागर

प्रमुख नदियों का जलग्रहण क्षेत्र (छत्तीसगढ़ में)

जलग्रहण क्षेत्र उस कुल भूमि को कहते हैं जहाँ से वर्षा का जल बहकर किसी एक नदी में एकत्रित होता है।

नदीजलग्रहण क्षेत्र (वर्ग किमी में)कुल अपवाह तंत्र का प्रतिशत
महानदी~ 77,432 वर्ग किमी56.15%
गोदावरी~ 39,490 वर्ग किमी28.64%
सोन-गंगा~ 18,800 वर्ग किमी13.63%
नर्मदा~ 760 वर्ग किमी0.55%

2. प्रमुख नदियों के प्राचीन नाम (परीक्षा विशेष)

आधुनिक नामप्राचीन नामविशेष तथ्य
महानदीचित्रोत्पला, नीलोत्पला, महानंदासतयुग में नीलोत्पला, द्वापरयुग में चित्रोत्पला कहा गया।
शिवनाथशिवा, सून्नी नदी
इंद्रावतीमंदाकिनी
लीलागरनिडिला
रिहन्दरेणु, रेणुका, रेंड
मांडमंदगा, मंदवाहिनी

रोचक तथ्य: नदियों से जुड़ी पौराणिक कथाएं

छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र में नदियों का सिर्फ भौगोलिक ही नहीं, बल्कि गहरा पौराणिक महत्व भी है। लोककथाओं के अनुसार, महानदी का उद्गम धमतरी के सिहावा पर्वत पर स्थित श्रृंगी ऋषि के आश्रम से उनके कमंडल से हुआ था। इसका प्राचीन नाम ‘चित्रोत्पला’ महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है। इसी तरह, इंद्रावती को बस्तर की जनजातीय संस्कृति में एक पवित्र देवी का दर्जा प्राप्त है। ये कथाएं छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र और इन नदियों को सिर्फ जलधारा नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र बनाती हैं।

3. महानदी अपवाह तंत्र (छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा तंत्र)

यह छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो राज्य के लगभग 56% हिस्से को कवर करता है और छत्तीसगढ़ के मैदान को जीवन देता है।

महानदी: छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा

  • प्राचीन नाम: चित्रोत्पला, नीलोत्पला, महानंदा।
  • उद्गम: सिहावा पर्वत, फरसिया गाँव (धमतरी जिला)।
  • कुल लंबाई: 858 किमी।
  • छत्तीसगढ़ में लंबाई: 286 किमी।
  • संगम/विसर्जन: कटक (ओडिशा) के पास बंगाल की खाड़ी में।
  • प्रमुख सहायक नदियाँ (उत्तर से): शिवनाथ, हसदेव, मांड, बोरई, केलो, ईब।
  • प्रमुख सहायक नदियाँ (दक्षिण से): दूध नदी, पैरी, सोंढूर, सूखा, जोंक, लात।
  • किनारे बसे शहर/तीर्थ: राजिम, सिरपुर, शिवरीनारायण, चंद्रपुर।
  • प्रमुख परियोजनाएं: रुद्री बैराज (1915), गंगरेल बांध (पं. रविशंकर शुक्ल जलाशय), हीराकुंड बांध (ओडिशा)।

💡 शॉर्ट ट्रिक: महानदी की सहायक नदियाँ याद रखें

उत्तर से मिलने वाली नदियाँ: “शिव ने हस कर बोर्ड में केला खाया और ईंट फेंकी।”
(शिवनाथ, हसदेव, बोरई, मांड, केलो, ईब)

दक्षिण से मिलने वाली नदियाँ: “दूध पीकर सूखा जोंक लात मारा।”
(दूध, पैरी, सोंढूर, सूखा, जोंक, लात)

शिवनाथ नदी

  • उद्गम: पानाबरस पहाड़ी, (मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला)।
  • कुल लंबाई: 290 किमी।
  • संगम: शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा) में महानदी से मिलती है।
  • प्रमुख सहायक नदियाँ: मनियारी, अरपा, लीलागर, हाफ, आमनेर, सकरी, तांदुला, खारुन।
  • विशेषता: यह छत्तीसगढ़ में बहने वाली सबसे लंबी नदी है और महानदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
Quick Facts: छत्तीसगढ़ में बहने वाली सबसे लंबी नदी – शिवनाथ (290 किमी)। छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी नदी – महानदी (जल भराव के आधार पर)।

हसदेव नदी

  • उद्गम: सोनहत पठार, कैमूर पर्वत (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला)।
  • कुल लंबाई: 176 किमी।
  • संगम: केरा-सिलादेही (जांजगीर-चांपा) के पास महानदी में।
  • प्रमुख सहायक नदियाँ: गेज, तान, झींग, उत्तेन्ग।
  • प्रमुख परियोजना: मिनीमाता बांगो बांध (छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा बांध और प्रथम बहुउद्देशीय परियोजना)।

पैरी नदी

  • उद्गम: भातृगढ़ पहाड़ी (गरियाबंद)।
  • संगम: राजिम में महानदी से मिलती है।
  • विशेषता: इसकी सहायक नदी सोंढूर के साथ मिलकर यह राजिम में त्रिवेणी संगम का निर्माण करती है।

अरपा नदी

  • उद्गम: खोडरी-खोंगसरा (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही)।
  • संगम: मानिकचौरा (जांजगीर-चांपा) के पास शिवनाथ नदी में।
  • विशेषता: बिलासपुर शहर इसी नदी के किनारे बसा है।

खारुन नदी

  • उद्गम: पेटेचुआ पहाड़ी (बालोद)।
  • संगम: सोमनाथ (बलौदाबाजार) के पास शिवनाथ नदी में।
  • विशेषता: रायपुर और दुर्ग शहर इसी नदी के तट पर स्थित हैं।

4. गोदावरी अपवाह तंत्र (बस्तर की जीवन रेखा)

यह छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र के अंतर्गत दूसरा सबसे बड़ा तंत्र है, जो मुख्य रूप से बस्तर संभाग में फैला हुआ है। गोदावरी नदी को ‘दक्षिण गंगा’ भी कहा जाता है और छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र में इसका दक्षिणी प्रवाह महत्वपूर्ण है।

इंद्रावती नदी: बस्तर की जीवन रेखा

  • प्राचीन नाम: मंदाकिनी।
  • उद्गम: मुंगेर पर्वत, कालाहांडी (ओडिशा)।
  • छत्तीसगढ़ में लंबाई: 264 किमी।
  • संगम/विसर्जन: भद्रकाली (बीजापुर) के पास गोदावरी नदी में।
  • प्रमुख सहायक नदियाँ: कोटरी, निबरा, गुडरा, बोर्डिग, नारंगी, डंकिनी, शंखिनी।
  • सांस्कृतिक महत्व: इस नदी का बस्तर के काकतीय वंश के इतिहास से गहरा संबंध है।
  • प्रमुख जलप्रपात: चित्रकोट जलप्रपात (भारत का नियाग्रा)।

5. सोन-गंगा अपवाह तंत्र

यह राज्य के उत्तरी भाग (पूर्वी बघेलखण्ड का पठार) में फैला हुआ है। यहाँ की नदियों का जल सोन नदी के माध्यम से गंगा में मिलता है, जो छत्तीसगढ़ के अपवाह तंत्र को राष्ट्रीय नदी प्रणाली से जोड़ता है।

रिहन्द नदी

  • उद्गम: मतिरिंगा पहाड़ी, मैनपाट (सरगुजा)।
  • कुल लंबाई: 145 किमी।
  • संगम: उत्तर प्रदेश में सोन नदी से मिलती है।
  • विशेषता: इसे ‘सरगुजा की जीवन रेखा’ कहा जाता है।

6. नर्मदा अपवाह तंत्र (सबसे छोटा तंत्र)

यह राज्य का सबसे छोटा अपवाह तंत्र है, जो छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र की विविधता को दर्शाता है।

  • विशेषता: यह एकमात्र तंत्र है जिसका जल पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरता है।
  • प्रमुख नदियाँ: बंजर और ताड़ा, जो नर्मदा की सहायक नदियाँ हैं और मैकल पर्वत श्रेणी से निकलती हैं।

यह भी जानें: एक छोटा मगर महत्वपूर्ण अपवाह तंत्र

हमने ऊपर छत्तीसगढ़ के चार मुख्य अपवाह तंत्रों की विस्तृत चर्चा की है। हालांकि, परीक्षा की दृष्टि से एक पांचवें, बहुत छोटे तंत्र को जानना भी अनिवार्य है, जिसे अक्सर एक अलग बिंदु के रूप में पूछा जाता है।

ब्राह्मणी अपवाह तंत्र (~1.03%)

  • प्रमुख नदी: शंख नदी
  • उद्गम क्षेत्र: जशपुर जिले का पंडरापाट क्षेत्र।
  • प्रवाह दिशा: उत्तर-पूर्व की ओर (झारखंड/ओडिशा की तरफ)।
  • विशेष तथ्य: यह नदी छत्तीसगढ़ से निकलकर ओडिशा में प्रवेश करती है और दक्षिणी कोयल नदी के साथ मिलकर ब्राह्मणी नदी बनाती है, जो बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

क्यों महत्वपूर्ण है? – क्योंकि यह बहुत छोटा है, छात्र अक्सर इसे छोड़ देते हैं और यहीं से प्रश्न बनाकर उन्हें फंसाया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ की नदियों और जलप्रपातों का एक शक्तिशाली दृश्य
चित्र: छत्तीसगढ़ की नदियाँ और जलप्रपात, जो राज्य के भूगोल को आकार देते हैं।

7. छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्रिवेणी संगम और परियोजनाएं

छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र में कई पवित्र संगम स्थल हैं जहाँ तीन नदियाँ मिलती हैं। इनमें से प्रमुख हैं:

संगम स्थलनदियाँजिला
राजिममहानदी, पैरी, सोंढूरगरियाबंद
शिवरीनारायणमहानदी, शिवनाथ, जोंकजांजगीर-चांपा
चंद्रपुरमहानदी, मांड, लातसक्ती
सोमनाथमहानदी, शिवनाथ, खारुनबलौदाबाजार

छत्तीसगढ़ की प्रमुख जल परियोजनाएं

परियोजना / बांध का नामनदीजिला
मिनीमाता हसदेव बांगो बांधहसदेवकोरबा
गंगरेल बांध (रविशंकर शुक्ल जलाशय)महानदीधमतरी
तांदुला बांधतांदुलाबालोद
दुधावा जलाशयमहानदीकांकेर
खोंडलाइट जलाशय (सिकासार बांध)पैरीगरियाबंद
खारंग जलाशय (संजय गांधी जलाशय)खारंगबिलासपुर

8. नदियों से जुड़े प्रमुख जलप्रपात और विवाद

प्रमुख नदियों पर स्थित जलप्रपात

  • इंद्रावती नदी: चित्रकोट जलप्रपात (जगदलपुर)
  • कांगेर नदी (सबरी की सहायक): तीरथगढ़ जलप्रपात (बस्तर)
  • मुनगाबहार नदी: तामड़ा घूमर जलप्रपात (बस्तर)
  • हसदेव नदी: अमृतधारा जलप्रपात (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर)
  • रिहन्द नदी: रक्सगण्डा जलप्रपात (सूरजपुर)

अंतर्राज्यीय जल विवाद: महानदी जल विवाद

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के जल के उपयोग को लेकर एक लंबे समय से विवाद चल रहा है। छत्तीसगढ़ द्वारा महानदी की सहायक नदियों (जैसे केलो, अरपा) पर बनाए जा रहे बैराज और औद्योगिक उपयोग के कारण ओडिशा को जल प्रवाह कम होने की चिंता है। यह मामला वर्तमान में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (Mahanadi Water Disputes Tribunal) के समक्ष विचाराधीन है। यह तथ्य मुख्य परीक्षा (Mains Exam) के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

9. विश्लेषणात्मक तुलना: महानदी तंत्र बनाम गोदावरी तंत्र

सिर्फ नदियों के नाम जानना काफी नहीं है, उनकी प्रकृति और प्रभाव को समझना आपको दूसरों से आगे रखेगा। आइए, छत्तीसगढ़ के दो सबसे बड़े अपवाह तंत्रों की एक गहरी तुलना करें:

तुलना का आधारमहानदी अपवाह तंत्रगोदावरी अपवाह तंत्र
भौगोलिक क्षेत्रमुख्यतः छत्तीसगढ़ का समतल मैदानी भागमुख्यतः बस्तर का पठारी और वनाच्छादित क्षेत्र
आर्थिक प्रभावकृषि आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ (धान का कटोरा), सिंचाई परियोजनाएंवन और खनिज आधारित अर्थव्यवस्था, जलविद्युत की अपार संभावनाएं
नदियों की प्रकृतिचौड़ी और अपेक्षाकृत धीमी गति, वर्षा पर अधिक निर्भरसंकीर्ण घाटियों में तीव्र प्रवाह, पठारी संरचना के कारण कई जलप्रपात बनाती हैं
सांस्कृतिक जुड़ावमैदानी छत्तीसगढ़ की संस्कृति का केंद्र (राजिम कुंभ, शिवरीनारायण मेला)बस्तर की जनजातीय संस्कृति की जीवन रेखा (दंतेश्वरी मंदिर, चित्रकोट महोत्सव)
प्रमुख चुनौतीऔद्योगिक प्रदूषण (कोरबा, रायगढ़) और ओडिशा के साथ जल विवाददुर्गम क्षेत्र होने के कारण संसाधनों का सीमित उपयोग, नक्सल प्रभावित क्षेत्र

10. नदियों का आर्थिक महत्व: सिंचाई से उद्योग और जीवनयापन तक

छत्तीसगढ़ की नदियाँ सिर्फ खेतों को ही नहीं सींचतीं, बल्कि राज्य के औद्योगिक पहिये को भी गति देती हैं।

उद्योगों की जीवन रेखा

  • ऊर्जा राजधानी कोरबा: हसदेव नदी का पानी कोरबा के पावर प्लांट्स को ठंडा रखने के लिए अनिवार्य है। इसके बिना ऊर्जा उत्पादन संभव नहीं है।
  • इस्पात नगरी भिलाई: खारुन और शिवनाथ नदी भिलाई स्टील प्लांट (BSP) और आस-पास के उद्योगों के लिए जल का प्रमुख स्रोत हैं।
  • सीमेंट हब बलौदाबाजार: इस क्षेत्र के सीमेंट प्लांट्स भी स्थानीय नदियों पर ही निर्भर हैं।

मत्स्य पालन और स्थानीय आजीविका

महानदी और उसकी सहायक नदियाँ हजारों केवट और ढीमर समुदायों के लिए आजीविका का मुख्य साधन हैं। राज्य की मत्स्य पालन अर्थव्यवस्था इन्हीं नदियों पर टिकी हुई है।

11. पर्यावरण और संरक्षण: चुनौतियाँ और समाधान

विकास के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की नदियाँ प्रदूषण और अतिक्रमण जैसी चुनौतियों का भी सामना कर रही हैं।

  • औद्योगिक प्रदूषण: हसदेव नदी कोरबा के औद्योगिक कचरे से और खारुन नदी रायपुर के शहरी कचरे से गंभीर रूप से प्रदूषित है।
  • अवैध रेत खनन: महानदी और शिवनाथ के तटों पर अवैध रेत खनन एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या है, जिससे नदी का पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ रहा है और छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टियों को प्रभावित कर रहा है।
  • संरक्षण के प्रयास: छत्तीसगढ़ सरकार की “नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी” योजना का ‘नरवा’ घटक सीधे तौर पर नदियों और नालों के पुनर्जीवन और संरक्षण पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य भूजल स्तर को बढ़ाना और सतही जल प्रवाह को साल भर बनाए रखना है।

12. छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र से संबंधित मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न और उत्तर की रूपरेखा

प्रश्न: “छत्तीसगढ़ के अपवाह तंत्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए, इसके आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व का विश्लेषण करें।” (125 शब्द)


उत्तर की रूपरेखा (Model Answer Framework):

  1. भूमिका (Introduction): छत्तीसगढ़ में चार प्रमुख अपवाह तंत्रों (महानदी, गोदावरी, सोन, नर्मदा) का उल्लेख करें, जो राज्य की ढाल संरचना को दर्शाते हैं।
  2. भौगोलिक विशेषताएँ (Features):
    • वृक्षकार प्रतिरूप: अधिकांश नदियाँ वृक्षकार अपवाह प्रतिरूप बनाती हैं।
    • ढाल का प्रभाव: राज्य का केंद्रीय ढाल पूर्व की ओर (महानदी), उत्तरी ढाल उत्तर की ओर (सोन), और दक्षिणी ढाल दक्षिण की ओर (गोदावरी) है।
    • जीवन रेखाएँ: महानदी को ‘छत्तीसगढ़ की गंगा’ और इंद्रावती को ‘बस्तर की जीवन रेखा’ के रूप में उल्लेख करें।
  3. आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्व (Economic & Cultural Importance):
    • आर्थिक: कृषि (धान का कटोरा), उद्योग (कोरबा, भिलाई), मत्स्य पालन और जलविद्युत की नींव।
    • सांस्कृतिक: प्रमुख संगम स्थल (राजिम, शिवरीनारायण) और पुरातात्विक स्थल (सिरपुर) नदियों के किनारे विकसित हुए।
  4. निष्कर्ष (Conclusion): संक्षेप में बताएं कि नदियाँ राज्य की भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान की धुरी हैं।

छत्तीसगढ़ के इतिहास और भूगोल की पूरी तस्वीर समझने और अपने ज्ञान को परखने के लिए, हमारे इन विशेष लेखों को भी पढ़ें:

कलचुरि वंश का इतिहास
मराठा काल का इतिहास

अपने ज्ञान को परखने के लिए, हमारा यह विशेष क्विज़ हल करें: छत्तीसगढ़ का इतिहास: 50 महत्वपूर्ण MCQ क्विज़

14. संदर्भ और स्रोत (References and Sources)

इस लेख में प्रस्तुत जानकारी को विभिन्न विश्वसनीय सरकारी वेबसाइटों, रिपोर्टों और अकादमिक प्रकाशनों से सत्यापित किया गया है ताकि आपको सबसे सटीक और अद्यतन जानकारी मिल सके।

वेबसाइट एवं पोर्टल (Websites & Portals)

  • पर्यावरण संरक्षण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन:
    (हरी श्रेणी उद्योगों एवं परियोजनाओं के आधिकारिक आंकड़ों के लिए)
    [आधिकारिक वेबसाइट]
  • इंडिया-WRIS पोर्टल (जल संसाधन सूचना प्रणाली):
    (भारत सरकार द्वारा प्रबंधित, नदी बेसिन और हाइड्रोलॉजिकल डेटा के लिए एक व्यापक मंच)
    [पोर्टल पर जाएं]
  • सीजी ENVIS केंद्र (पर्यावरण सूचना प्रणाली):
    (छत्तीसगढ़ की नदियों की पर्यावरणीय स्थिति और पारिस्थितिकी पर डेटा के लिए)
    [वेबसाइट देखें]

पुस्तकें एवं प्रकाशन (Books & Publications)

  • छत्तीसगढ़ वृहत संदर्भ (छत्तीसगढ़ हिंदी ग्रंथ अकादमी):
    (छत्तीसगढ़ के भूगोल और इतिहास पर सबसे प्रामाणिक प्रकाशनों में से एक) – यह एक भौतिक प्रकाशन है।
  • भारत का भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की रिपोर्टें:
    (राज्य की भूगर्भीय संरचना और अपवाह तंत्र के पैटर्न को समझने के लिए)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

छत्तीसगढ़ में बहने वाली सबसे लंबी नदी कौन सी है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ में बहने वाली सबसे लंबी नदी शिवनाथ है, जिसकी लंबाई 290 किमी है। हालांकि, छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण नदी महानदी है (छत्तीसगढ़ में लंबाई 286 किमी)।
‘छत्तीसगढ़ का प्रयाग’ किसे कहा जाता है?
उत्तर: राजिम को ‘छत्तीसगढ़ का प्रयाग’ कहा जाता है क्योंकि यहाँ तीन नदियों – महानदी, पैरी और सोंढूर – का संगम होता है।
दंतेवाड़ा शहर किन दो नदियों के संगम पर बसा है?
उत्तर: दंतेवाड़ा शहर डंकिनी और शंखिनी नदियों के संगम पर बसा है।
चित्रकोट जलप्रपात किस नदी पर है?
उत्तर: भारत का नियाग्रा कहा जाने वाला प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात बस्तर में इंद्रावती नदी पर स्थित है।
छत्तीसगढ़ का सबसे छोटा अपवाह तंत्र कौन सा है?
उत्तर: नर्मदा अपवाह तंत्र छत्तीसगढ़ का सबसे छोटा अपवाह तंत्र है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का मात्र 0.55% है।
छत्तीसगढ़ में ब्राह्मणी अपवाह तंत्र का क्या महत्व है?
उत्तर: ब्राह्मणी अपवाह तंत्र छत्तीसगढ़ का एक छोटा (~1.03%) लेकिन महत्वपूर्ण सीमांत अपवाह तंत्र है। जशपुर जिले से निकलने वाली शंख नदी इसका हिस्सा है, जो आगे जाकर ब्राह्मणी नदी प्रणाली बनाती है। यह अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है।

📲 इस लेख को शेयर करें:

🚀 हमसे सोशल मीडिया पर जुड़ें

लेटेस्ट अपडेट्स और फ्री नोट्स के लिए फॉलो करें:

अपनी तैयारी को नई उड़ान दें!

ज्ञान और मार्गदर्शन के इस सफर में अकेला महसूस न करें। हमारे समुदाय से जुड़ें:

हमारे अन्य उपयोगी ब्लॉग्स:

Paisa Blueprint | Desh Samvad

2 thoughts on “छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र: नदियों, संगमों और परियोजनाओं का संपूर्ण विश्लेषण”

Leave a Comment