सिहावा नगरी जंगल सत्याग्रह (1922): जानिए कब, क्यों और कैसे हुआ?


छत्तीसगढ़ का जंगल सत्याग्रह (1922-1930): जल-जंगल-ज़मीन की पूरी कहानी

जब 1930 में महात्मा गांधी ने दांडी में नमक बनाकर ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी, तो पूरा भारत सविनय अवज्ञा आंदोलन की आग में कूद पड़ा। लेकिन छत्तीसगढ़ जैसे वनाच्छादित प्रदेश में, जहाँ समुद्र नहीं था, लोगों ने प्रतिरोध का एक अपना ही अनूठा प्रतीक खोज निकाला – जंगल। यहाँ की लड़ाई सिर्फ राजनीतिक आजादी की नहीं थी, बल्कि **जल, जंगल और ज़मीन** पर अपने पारंपरिक अधिकारों को वापस पाने की भी थी। यह था **छत्तीसगढ़ का जंगल सत्याग्रह**।

यह लेख आपको 1922 से 1930 के बीच हुए उन महत्वपूर्ण सभी छत्तीसगढ़ का जंगल सत्याग्रह की पूरी कहानी बताएगा, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के आदिवासियों और किसानों को स्वतंत्रता संग्राम का एक अभिन्न अंग बना दिया। यह हमारी विस्तृत श्रृंखला “छत्तीसगढ़ का संपूर्ण इतिहास” का एक महत्वपूर्ण अध्याय है जो आपको CGPSC परीक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार करेगा।



1. त्वरित रिवीजन: छत्तीसगढ़ के प्रमुख जंगल सत्याग्रह (एक नज़र में)

सत्याग्रहवर्षस्थानप्रमुख नेतृत्वकर्ता
सिहावा-नगरी1922धमतरीपंचम सिंह, शोभाराम साहू, नारायण राव मेधावाले
गट्टासिल्लीजून 1930धमतरीनारायण राव मेधावाले, नत्थूजी जगताप, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव
रुद्री-नवागाँवअगस्त 1930धमतरीबाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, नारायण राव मेधावाले, नत्थूजी जगताप
तमोरा (महासमुंद)सितंबर 1930महासमुंदयति यतन लाल, शंकर राव गनौदवाले
पोड़ी गाँव (सीपत)जुलाई 1930बिलासपुररामाधार दुबे

2. जंगल सत्याग्रह क्यों हुए? विवाद की जड़ और 1878 का वन कानून

इन सभी सत्याग्रहों के मूल में ब्रिटिश सरकार का 1878 का **’भारतीय वन अधिनियम’ (Indian Forest Act)** था। यह कानून सिर्फ एक प्रशासनिक नियम नहीं था, बल्कि यह आदिवासियों और ग्रामीणों की जीवन शैली पर एक सीधा प्रहार था। सदियों से, जंगल इन समुदायों के लिए सिर्फ एक संसाधन नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति, आजीविका और अस्तित्व का आधार थे।

“अंग्रेजों के लिए जंगल केवल इमारती लकड़ी और राजस्व का स्रोत थे, जबकि आदिवासियों के लिए वह उनकी माँ के समान थे। इसी दृष्टिकोण के टकराव ने **छत्तीसगढ़ का जंगल सत्याग्रह** को जन्म दिया।”

वन कानून ने क्या छीना?

  • जीवन का आधार: जंगल से जलावन के लिए लकड़ी इकट्ठा करना, घर बनाने के लिए बांस काटना, और अपने मवेशियों को चराना (चारागाह का अधिकार) – इन सब पर प्रतिबंध लगा दिया गया या उन्हें बहुत सीमित कर दिया गया।
  • आजीविका: लघु वनोपज (जैसे तेंदूपत्ता, महुआ, फल, फूल, जड़ी-बूटियाँ) इकट्ठा करना, जो उनकी आय का मुख्य स्रोत था, उसे अवैध घोषित कर दिया गया।
  • स्वायत्तता: जंगलों को ‘आरक्षित’ और ‘संरक्षित’ श्रेणियों में बांटकर, सरकार ने आदिवासियों को उनकी ही भूमि पर ‘अतिक्रमणकारी’ बना दिया।

जब इन अधिकारों के उल्लंघन पर सरकार ने भारी जुर्माना और क्रूर सजा देना शुरू किया, तो लोगों का असंतोष बढ़ने लगा और उन्होंने गांधीवादी तरीके से अपने अधिकारों के लिए लड़ने का फैसला किया।

3. सिहावा-नगरी जंगल सत्याग्रह (1922): विद्रोह की पहली चिंगारी

यह छत्तीसगढ़ का **प्रथम जंगल सत्याग्रह** माना जाता है, जो असहयोग आंदोलन के दौरान हुआ और इसने भविष्य के सभी आंदोलनों के लिए एक मिसाल कायम की।

  • स्थान: धमतरी जिले का सिहावा-नगरी क्षेत्र, जो अपनी घनी आदिवासी आबादी के लिए जाना जाता है।
  • तात्कालिक कारण: वन विभाग द्वारा मवेशियों के चराई अधिकारों को पूरी तरह से समाप्त कर देना।
  • घटनाक्रम: 21 जनवरी 1922 को, हजारों आदिवासियों ने सरकारी आदेशों का उल्लंघन करते हुए अपने मवेशियों को आरक्षित जंगल में चराना शुरू कर दिया। यह एक शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ अवज्ञा थी। सरकार ने दमन चक्र चलाया और कई स्थानीय नेताओं (पंचम सिंह, शोभाराम साहू, हरखराम सोम आदि) को गिरफ्तार कर लिया।
  • नेतृत्व: यद्यपि इसकी शुरुआत स्थानीय आदिवासियों ने की, लेकिन इसे संगठित रूप और राजनीतिक मार्गदर्शन **पं. सुंदरलाल शर्मा, नारायण राव मेधावाले और बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव** जैसे राष्ट्रवादी नेताओं ने प्रदान किया।
Quick Facts: पहला छत्तीसगढ़ का जंगल सत्याग्रह कौन सा था? – **सिहावा-नगरी जंगल सत्याग्रह (1922)**, जो असहयोग आंदोलन का हिस्सा था।

4. सविनय अवज्ञा आंदोलन और सत्याग्रहों की लहर (1930)

जब 1930 में गांधीजी ने नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया, तो छत्तीसगढ़ में जंगल कानून तोड़ना ही प्रतिरोध का मुख्य प्रतीक बन गया। इस दौरान हुए सत्याग्रह अधिक संगठित और व्यापक थे।

गट्टासिल्ली सत्याग्रह (जून 1930)

  • स्थान: धमतरी।
  • नेतृत्व: नारायण राव मेधावाले, नत्थूजी जगताप, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव।
  • विशेषता: यह आंदोलन इतना उग्र हो गया कि पुलिस द्वारा गोलीबारी भी की गई, जिसमें एक सत्याग्रही **’सिंधु कुमार’** की मृत्यु हो गई और दूसरे सत्याग्रही ‘बालकदे’ घायल हुए। यह घटनाक्रम आंदोलन को और तीव्र कर गया।

रुद्री-नवागाँव सत्याग्रह (अगस्त 1930)

  • स्थान: धमतरी, रुद्री के पास नवागाँव में।
  • नेतृत्व: बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव।
  • विशेषता: यह छत्तीसगढ़ का सबसे प्रचंड और प्रभावशाली जंगल सत्याग्रह माना जाता है। यहाँ पुलिस की गोलीबारी में **’मिलूराम गोंड’** और **’रुलू गोंड’** शहीद हुए थे। इस घटना ने पूरे मध्य प्रांत में सनसनी फैला दी थी।

तमोरा (महासमुंद) सत्याग्रह (सितंबर 1930)

  • स्थान: महासमुंद के पास तमोरा गाँव।
  • नेतृत्व: शंकर राव गनौदवाले और यति यतन लाल।
  • विशेषता: इस सत्याग्रह में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय थी, जिसका नेतृत्व बालिका **दयावती** ने किया था। उसने वन अधिकारी को थप्पड़ मारा था, जो ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ आम लोगों के साहस का एक बड़ा प्रतीक बन गया।

अन्य प्रमुख छत्तीसगढ़ का जंगल सत्याग्रह (1930)

इनके अलावा, बिलासपुर के पास पोड़ी-सीपत (नेतृत्व: रामाधार दुबे), बेमेतरा में मोहभट्ठा, और दुर्ग में बढ़ई-चारभाठा में भी महत्वपूर्ण जंगल सत्याग्रह हुए, जो यह दर्शाते हैं कि यह आंदोलन पूरे छत्तीसगढ़ में फैल चुका था।

💡 याद रखने की ट्रिक: 1930 के प्रमुख सत्याग्रह

1930 में हुए प्रमुख जंगल सत्याग्रहों को क्रम में याद रखने के लिए इस लाइन को याद रखें:

र्म रूकिये में पोलो।”

  • ट्टासिल्ली सत्याग्रह (जून)
  • रूरुद्री-नवागाँव सत्याग्रह (अगस्त)
  • मोरा सत्याग्रह (सितंबर)
  • पोपोड़ी गाँव सत्याग्रह (जुलाई) – (नोट: यह क्रम में थोड़ा अलग है, पर मुख्य तीन को याद रखने के लिए यह ट्रिक प्रभावी है।)

✨ जंगल सत्याग्रह के अनछुए पहलू और रोचक तथ्य

  • “पच्चीस रुपये का जंगल”: गट्टासिल्ली सत्याग्रह के दौरान, जब पुलिस ने जंगल को घेर लिया, तो सत्याग्रहियों ने चतुराई दिखाते हुए पास के एक निजी जंगल के मालिक से 25 रुपये में जंगल ही खरीद लिया और वहाँ घास काटकर कानून तोड़ा, जिससे अंग्रेज अधिकारी चकित रह गए।
  • “दयावती” का पूरा नाम: तमोरा सत्याग्रह की वीरांगना बालिका का पूरा नाम **दयावती बाई** था। उन्होंने न केवल अधिकारी को थप्पड़ मारा, बल्कि महिलाओं के एक बड़े जत्थे का नेतृत्व भी किया, जो उस युग में महिला सशक्तिकरण का एक अद्भुत उदाहरण है।
  • गांधीजी की प्रेरणा: यद्यपि गांधीजी इन सत्याग्रहों में शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं थे, लेकिन उनकी प्रेरणा हर जगह थी। सत्याग्रही अक्सर **”महात्मा गांधी की जय”** के नारे लगाते हुए ही वन कानून तोड़ते थे।
  • क्यों धमतरी ही केंद्र बना?: धमतरी उस समय राष्ट्रवादी गतिविधियों का एक बड़ा गढ़ था, जिसका मुख्य कारण पं. सुंदरलाल शर्मा, नारायण राव मेधावाले और बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव जैसे बड़े नेताओं का इसी क्षेत्र से होना था। इसी वजह से अधिकांश बड़े सत्याग्रह यहीं हुए।

5. इन सत्याग्रहों का महत्व और विरासत (CGPSC Mains के लिए विश्लेषण)

छत्तीसगढ़ का जंगल सत्याग्रह सिर्फ कानून तोड़ने की घटनाएं नहीं थीं; इनके गहरे और स्थायी प्रभाव हुए, जो मुख्य परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

विश्लेषण: जंगल सत्याग्रहों का प्रभाव

  • राष्ट्रीय आंदोलन का स्थानीयकरण: इन सत्याग्रहों ने गांधीजी के राष्ट्रीय आंदोलन (असहयोग और सविनय अवज्ञा) को एक स्थानीय मुद्दा – ‘जल, जंगल, ज़मीन’ – प्रदान किया। इससे छत्तीसगढ़ के आम आदिवासी और किसान, जो शायद ‘स्वराज’ का गहरा अर्थ नहीं समझते थे, स्वतंत्रता संग्राम से भावनात्मक रूप से जुड़ गए।
  • स्थानीय नेतृत्व का उदय: इन आंदोलनों ने पं. सुंदरलाल शर्मा, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, नारायण राव मेधावाले, यति यतन लाल जैसे कई बड़े स्थानीय नेताओं को तैयार किया, जिन्होंने भविष्य में छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता संग्राम की कमान संभाली।
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  • **आत्मविश्वास में वृद्धि:** इन सत्याग्रहों ने लोगों में यह आत्मविश्वास पैदा किया कि वे अहिंसक तरीके से भी शक्तिशाली ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दे सकते हैं।
  • **आदिवासी चेतना का प्रतीक:** ये सत्याग्रह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और उनके अधिकारों के संघर्ष का प्रतीक बन गए, जिसकी गूंज आज भी छत्तीसगढ़ के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में सुनाई देती है।

विश्लेषण: छत्तीसगढ़ का जंगल सत्याग्रह – सफलता और विफलता के कारक

यह समझना महत्वपूर्ण है कि कुछ सत्याग्रह सफल क्यों हुए और कुछ को बेरहमी से क्यों कुचल दिया गया।

  • सफलता के कारण: आंदोलनों की सफलता अक्सर मजबूत और संगठित नेतृत्व (जैसे धमतरी में), अहिंसक तरीकों के अनुशासित पालन और राष्ट्रीय आंदोलन से मिले नैतिक बल पर निर्भर करती थी।
  • दमन के कारण: जिन आंदोलनों में नेतृत्व को जल्दी गिरफ्तार कर लिया गया या जहाँ आंदोलन ने थोड़ा भी हिंसक रूप लिया, वहाँ अंग्रेजों ने कठोर दमन की नीति अपनाई, जिसमें गोलीबारी और सामूहिक गिरफ्तारियाँ शामिल थीं।

इसके बावजूद, हर एक सत्याग्रह, चाहे सफल हो या दबा दिया गया हो, ने छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता की ज्वाला को जलाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ का जंगल सत्याग्रह की गूंज आज भी

छत्तीसगढ़ के जंगल सत्याग्रह केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं हैं, बल्कि ये एक जीवंत विरासत हैं। इन आंदोलनों ने वन अधिकारों की जो चेतना जगाई, उसकी गूंज स्वतंत्र भारत की नीतियों में भी सुनाई देती है।

भारत सरकार द्वारा बाद में बनाए गए कानून, जैसे **पेसा एक्ट (PESA Act, 1996)** और **वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act, 2006)**, जो ग्राम सभाओं और आदिवासियों को उनके पारंपरिक वन क्षेत्रों पर अधिकार देते हैं, कहीं न कहीं इन्हीं सत्याग्रहों की देन हैं। यह दिखाता है कि 1922 और 1930 में छत्तीसगढ़ के आदिवासियों और किसानों द्वारा शुरू किया गया संघर्ष आज भी प्रासंगिक है और उसने देश की नीतियों को आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

6. तुलनात्मक सारणी: छत्तीसगढ़ के प्रमुख जंगल सत्याग्रह

यह सारणी परीक्षा में त्वरित रिवीजन के लिए अत्यंत उपयोगी है:

सत्याग्रहवर्ष और संबद्ध आंदोलनस्थाननेतृत्वमुख्य घटना / शहीद
सिहावा-नगरी1922 (असहयोग आंदोलन)धमतरीस्थानीय आदिवासी, पं. सुंदरलाल शर्माछत्तीसगढ़ का प्रथम जंगल सत्याग्रह।
गट्टासिल्ली1930 (सविनय अवज्ञा)धमतरीनारायण राव मेधावाले, नत्थूजी जगतापगोलीबारी में ‘सिंधु कुमार’ की शहादत।
रुद्री-नवागाँव1930 (सविनय अवज्ञा)धमतरीबाबू छोटेलाल श्रीवास्तवसबसे प्रचंड सत्याग्रह, ‘मिलूराम’ और ‘रुलू’ शहीद हुए।
तमोरा1930 (सविनय अवज्ञा)महासमुंदयति यतन लाल, शंकर राव गनौदवालेबालिका दयावती का साहसिक प्रतिरोध।

छत्तीसगढ़ के इतिहास की पूरी तस्वीर समझने और अपने ज्ञान को परखने के लिए, हमारे इन विशेष लेखों को भी पढ़ें:

छत्तीसगढ़ का संपूर्ण इतिहास (मुख्य गाइड)
छत्तीसगढ़ इतिहास MCQ क्विज़
पांडु वंश का स्वर्ण काल

8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

जंगल सत्याग्रह का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: इसका मुख्य कारण ब्रिटिश सरकार का 1878 का वन कानून था, जिसने आदिवासियों और ग्रामीणों को जंगल पर उनके पारंपरिक अधिकारों (जैसे लकड़ी काटना, चराई, लघु वनोपज संग्रह) से वंचित कर दिया था।
छत्तीसगढ़ का प्रथम जंगल सत्याग्रह कौन सा था?
उत्तर: 1922 में धमतरी के सिहावा-नगरी में हुआ सत्याग्रह छत्तीसगढ़ का पहला संगठित जंगल सत्याग्रह माना जाता है।
रुद्री-नवागाँव जंगल सत्याग्रह क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर: यह 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान हुआ सबसे प्रचंड जंगल सत्याग्रह था। इसका नेतृत्व बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव ने किया था और इसमें पुलिस की गोलीबारी में सत्याग्रही शहीद भी हुए थे।
किस जंगल सत्याग्रह में एक बालिका ने वन अधिकारी को थप्पड़ मारा था?
उत्तर: महासमुंद के तमोरा जंगल सत्याग्रह (1930) के दौरान, बालिका दयावती ने एक ब्रिटिश अधिकारी को थप्पड़ मारकर प्रतिरोध का एक साहसिक उदाहरण प्रस्तुत किया था।
जंगल सत्याग्रह किस राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा थे?
उत्तर: सिहावा-नगरी सत्याग्रह (1922) असहयोग आंदोलन का हिस्सा था, जबकि 1930 में हुए अधिकांश जंगल सत्याग्रह (जैसे गट्टासिल्ली, रुद्री-नवागाँव) सविनय अवज्ञा आंदोलन का हिस्सा थे।



ऐतिहासिक स्रोत और संदर्भ

इस लेख में प्रस्तुत जानकारी छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम पर लिखे गए प्रतिष्ठित ऐतिहासिक ग्रंथों, जैसे डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र और डॉ. प्यारेलाल गुप्त के कार्यों, तथा विभिन्न अकादमिक शोध-पत्रों पर आधारित है। हमारा उद्देश्य आप तक सबसे प्रामाणिक और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना है।

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