किसी भी क्षेत्र की आत्मा को समझना हो तो उसके साहित्य को पढ़ना आवश्यक है। साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज का आईना, इतिहास का साक्षी और भविष्य का दिशा-निर्देशक होता है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में यह बात और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जहाँ के साहित्यकारों ने न केवल अपनी लेखनी से कला को समृद्ध किया, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाई, सामाजिक सुधारों की नींव रखी और एक पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की पहचान को आकार दिया।
M S WORLD The WORLD of HOPE के इस महापर्व में, हम छत्तीसगढ़ के उन ‘कलम के सिपाहियों’ की यात्रा पर निकलेंगे जिन्होंने अपनी रचनाओं से इस भूमि को अमर बना दिया। यह लेख केवल साहित्यकारों और उनकी रचनाओं की एक सूची नहीं है, बल्कि यह उनकी विचारधारा, उनके संघर्ष और छत्तीसगढ़ के निर्माण में उनके योगदान का एक गहन विश्लेषण है। 3000 से अधिक शब्दों के इस विस्तृत गाइड को विशेष रूप से CGPSC और Vyapam के अभ्यर्थियों के लिए तैयार किया गया है, ताकि वे इस विषय की जड़ों तक पहुँच सकें और परीक्षा में हर प्रश्न का सामना करने के लिए तैयार हों।
इस लेख में आप क्या पढ़ेंगे?
- परीक्षा फोकस: CGPSC प्रीलिम्स vs. मेन्स
- छत्तीसगढ़ी साहित्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- आधुनिक साहित्य के पुरोधा और स्तंभ
- छत्तीसगढ़ी बोली के प्रमुख साहित्यकार
- प्रमुख समकालीन साहित्यकार (संक्षिप्त परिचय)
- साहित्य का योगदान: एक विश्लेषणात्मक दृष्टि
- प्रमुख साहित्यकार एवं रचनाएं (रिवीजन तालिका)
- CGPSC मेन्स अभ्यास प्रश्न
- निष्कर्ष
- M S WORLD पर और अन्वेषण करें
- स्रोत और संदर्भ
- ज्ञान की परीक्षा: साहित्यकार क्विज़
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
परीक्षा फोकस: CGPSC प्रीलिम्स vs. मेन्स
यह टॉपिक CGPSC के सिलेबस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे तैयार करने की रणनीति प्रीलिम्स और मेन्स के लिए अलग-अलग होनी चाहिए:
- प्रीलिम्स (Prelims) के लिए: यह खंड तथ्यों का खजाना है। सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं, जैसे – ‘छत्तीसगढ़ का गांधी’ किसे कहा जाता है? ‘कुररी के प्रति’ किसकी रचना है? ‘अरपा पैरी के धार’ के रचयिता कौन हैं? प्रमुख रचनाओं के नाम, साहित्यकारों को मिली उपाधियाँ (जैसे- पाणिनि, व्यास) और उनके उपनाम कंठस्थ होने चाहिए।
- मेन्स (Mains) के लिए: यहाँ विश्लेषणात्मक क्षमता की परख होती है। प्रश्न इस प्रकार हो सकते हैं – “छत्तीसगढ़ में सामाजिक चेतना के विकास में पं. सुंदरलाल शर्मा के साहित्यिक योगदान का मूल्यांकन करें।” या “छत्तीसगढ़ी बोली को साहित्य में स्थापित करने वाले प्रमुख लेखकों की भूमिका पर प्रकाश डालिए।” यहाँ आपको तथ्यों के साथ-साथ उनके प्रभाव का भी विश्लेषण करना होगा।
छत्तीसगढ़ी साहित्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ी साहित्य की जड़ें बहुत गहरी हैं, जिसका विकास लोककथाओं, लोकगीतों और गाथाओं से हुआ। हालाँकि, लिखित साहित्य को एक व्यवस्थित रूप देने का श्रेय आधुनिक काल के साहित्यकारों को जाता है। 20वीं सदी की शुरुआत में, जब भारत में स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधार की लहर चल रही थी, छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों ने अपनी कलम को हथियार बनाया। उन्होंने न केवल हिंदी साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि पहली बार छत्तीसगढ़ी बोली को साहित्यिक सम्मान दिलाया और उसे जन-जन की अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। इस युग के लेखक केवल साहित्यकार नहीं, बल्कि समाज सुधारक, इतिहासकार और दूरदर्शी नेता भी थे।
आधुनिक साहित्य के पुरोधा और स्तंभ
इस काल के चार प्रमुख साहित्यकार, जिन्हें ‘पाण्डेय बन्धु’ और उनके समकालीन के रूप में जाना जाता है, छत्तीसगढ़ी साहित्य के आधार स्तंभ माने जाते हैं। आइए, हम इनमें से प्रत्येक का विस्तृत अध्ययन करें।
छत्तीसगढ़ी बोली के प्रमुख साहित्यकार
आधुनिक साहित्य के पुरोधाओं ने जहाँ हिंदी में उत्कृष्ट लेखन कर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाई, वहीं एक समानांतर धारा उन साहित्यकारों की थी जिन्होंने छत्तीसगढ़ी बोली की मिठास और शक्ति को पहचाना। उन्होंने इसे ‘गंवारू’ समझे जाने की भ्रांति को तोड़ा और इसमें महाकाव्यों, व्याकरण और गीतों की रचना कर इसे साहित्यिक भाषा का दर्जा दिलाया।
कपिलनाथ कश्यप: छत्तीसगढ़ के व्यास (1906-1985)
कपिलनाथ कश्यप जी को छत्तीसगढ़ी भाषा में उनके महाकाव्यीय योगदान के लिए श्रद्धा से ‘छत्तीसगढ़ के व्यास’ के रूप में जाना जाता है। जिस प्रकार महर्षि व्यास ने महाभारत को संस्कृत में रचा, उसी प्रकार कश्यप जी ने रामायण और महाभारत की कथाओं को छत्तीसगढ़ी में प्रस्तुत कर उन्हें जन-जन तक पहुँचाया।
साहित्यिक योगदान
उन्होंने प्रबंध काव्य और खंडकाव्य की रचना कर छत्तीसगढ़ी साहित्य को समृद्ध किया। उनकी भाषा सरल, सहज और गेय होती थी, जिससे आम लोग भी आसानी से जुड़ जाते थे।
- महाकाव्य: श्री रामकथा, श्री कृष्णकथा, श्री महाभारत कथा।
- खंडकाव्य: अभिमन्यु वध, सीता की अग्निपरीक्षा, सुंदरकांड।
- नाटक (Plays): हीरा कुमार, अंधियार।
उनका सबसे बड़ा योगदान यह है कि उन्होंने जटिल पौराणिक कथाओं को छत्तीसगढ़ी के सरल दोहा-चौपाई शैली में प्रस्तुत किया, जिससे यह कथाएं गांवों में अत्यंत लोकप्रिय हुईं।
प्यारेलाल गुप्त: छत्तीसगढ़ के पाणिनि (1891-1985)
प्यारेलाल गुप्त जी एक महान साहित्यकार होने के साथ-साथ एक उत्कृष्ट इतिहासकार और भाषाविद् भी थे। छत्तीसगढ़ी भाषा को व्याकरण के नियमों में बांधने और उसका वैज्ञानिक अध्ययन करने के कारण उन्हें सम्मानपूर्वक ‘छत्तीसगढ़ के पाणिनि’ कहा जाता है (पाणिनि, जिन्होंने संस्कृत का व्याकरण ‘अष्टाध्यायी’ रचा था)।
साहित्यिक और ऐतिहासिक योगदान
उन्होंने छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- ऐतिहासिक ग्रंथ: प्राचीन छत्तीसगढ़। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास पर लिखा गया एक प्रामाणिक और महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
- भाषा विज्ञान: छत्तीसगढ़ी व्याकरण। इस कृति के माध्यम से उन्होंने छत्तीसगढ़ी बोली को एक व्यवस्थित व्याकरणिक ढाँचा प्रदान किया।
- अन्य रचनाएँ: लवंग लता (उपन्यास), पुष्पहार, एक दिन।
गुप्त जी के योगदान ने छत्तीसगढ़ी को एक बोली से भाषा के रूप में स्थापित होने की मजबूत नींव प्रदान की।
हरि ठाकुर: एक सांस्कृतिक योद्धा (1927-2012)
हरि ठाकुर जी केवल एक कवि या लेखक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और संस्कृति के एक सजग प्रहरी थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति के उत्थान और पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के लिए समर्पित कर दी। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ के प्रति गहरा प्रेम और स्वाभिमान झलकता है।
साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान
उनकी कविताएं ओजपूर्ण और प्रेरणादायक होती थीं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के इतिहास पर भी गहन शोध और लेखन किया।
- कविता संग्रह: सुरता के चंदन, लोहे का नगर, बस्तर का इतिहास, छत्तीसगढ़ी गीत और कविता।
- ऐतिहासिक कृतियाँ: छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक इतिहास, छत्तीसगढ़ के रत्न।
- संपादन: उन्होंने ‘छत्तीसगढ़ी मित्र’ और ‘छत्तीसगढ़ी’ जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया।
पृथक छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है।
नरेंद्र देव वर्मा: ‘अरपा पैरी के धार’ के रचयिता (1939-1979)
डॉ. नरेंद्र देव वर्मा एक भाषाविद्, चिंतक, उपन्यासकार और गीतकार थे। भले ही उनका जीवनकाल छोटा रहा, लेकिन वे छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐसी अमर रचना छोड़ गए जो आज हर छत्तीसगढ़िया के दिल में बसती है – हमारा राजगीत ‘अरपा पैरी के धार’।
साहित्यिक योगदान
उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा और उसके ध्वनिशास्त्र पर गहन शोध किया। उनका लेखन छत्तीसगढ़ की आत्मा को छूता है।
- राजगीत: अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार…। यह गीत छत्तीसगढ़ की नदियों, संस्कृति और गौरव का एक अद्भुत संगीतमय वर्णन है, जिसे 2019 में छत्तीसगढ़ के आधिकारिक राजगीत का दर्जा दिया गया।
- उपन्यास: सुबह की तलाश।
- गीत संग्रह: मोला गुरु बनाई लेते, अपूर्वा।
- शोध ग्रंथ: छत्तीसगढ़ी भाषा का उद्विकास।
रिवीजन बॉक्स: प्रमुख उपाधियाँ और पहचान
परीक्षा के लिए इन उपाधियों को अवश्य याद रखें:
- छत्तीसगढ़ के गांधी: पं. सुंदरलाल शर्मा
- छायावाद के जनक: पं. मुकुटधर पाण्डेय
- छत्तीसगढ़ के व्यास: कपिलनाथ कश्यप
- छत्तीसगढ़ के पाणिनि: प्यारेलाल गुप्त
- ‘अरपा पैरी के धार’ के रचयिता: डॉ. नरेंद्र देव वर्मा
प्रमुख समकालीन साहित्यकार (संक्षिप्त परिचय)
छत्तीसगढ़ की साहित्यिक परंपरा आज भी जीवंत और प्रवाहमान है। कई समकालीन लेखकों ने हिंदी और छत्तीसगढ़ी दोनों में लिखकर इस विरासत को आगे बढ़ाया है। यहाँ कुछ प्रमुख नामों का संक्षिप्त परिचय दिया जा रहा है:
| साहित्यकार का नाम | प्रमुख रचना/योगदान |
|---|---|
| विनोद कुमार शुक्ल | ‘नौकर की कमीज’ और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ जैसे प्रसिद्ध उपन्यासों के लिए जाने जाते हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। |
| लाला जगदलपुरी | बस्तर के प्रमुख साहित्यकार, जिन्होंने हल्बी और छत्तीसगढ़ी में लेखन किया। ‘हल्बी लोककथाएं’ इनकी प्रसिद्ध कृति है। |
| डॉ. पालेश्वर शर्मा | एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार और कहानीकार। ‘प्रबंध पटल’ और ‘सुसक झन कुररी’ इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। |
| जीवन यदु | छत्तीसगढ़ी के एक सशक्त कवि और गीतकार। ‘धान के कटोरा’ इनकी एक प्रसिद्ध रचना है। |
| डॉ. विनय कुमार पाठक | इन्होंने छत्तीसगढ़ के इतिहास और संस्कृति पर व्यापक शोध और लेखन किया है। ‘छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक इतिहास’ इनकी महत्वपूर्ण कृति है। |
साहित्य का योगदान: एक विश्लेषणात्मक दृष्टि
छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों का योगदान केवल किताबें लिखने तक सीमित नहीं था। उनकी लेखनी ने समाज और राज्य की दिशा तय करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे मेन्स की परीक्षा के लिए समझना अत्यंत आवश्यक है।
1. स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय चेतना का प्रसार
पं. सुंदरलाल शर्मा, पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय और प्यारेलाल गुप्त जैसे साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाई। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लिखने के लिए प्रतीकात्मक नाटकों और कविताओं का सहारा लिया। जेल से ‘कृष्ण जन्मस्थान पत्रिका’ का प्रकाशन इसका एक ज्वलंत उदाहरण है।
2. सामाजिक सुधार और कुरीतियों पर प्रहार
साहित्य समाज का दर्पण होता है, और छत्तीसगढ़ के लेखकों ने इस दर्पण में समाज की कुरीतियों जैसे छुआछूत, बाल विवाह और अंधविश्वास को स्पष्ट रूप से दिखाया। पं. सुंदरलाल शर्मा का अछूतोद्धार आंदोलन उनके साहित्यिक दर्शन का ही एक व्यावहारिक रूप था।
3. छत्तीसगढ़ी अस्मिता और राज्य निर्माण की नींव
प्यारेलाल गुप्त द्वारा ‘प्राचीन छत्तीसगढ़’ का लेखन हो या हरि ठाकुर द्वारा छत्तीसगढ़ी स्वाभिमान की कविताएं, इन सभी ने एक पृथक सांस्कृतिक पहचान की भावना को मजबूत किया। डॉ. नरेंद्र देव वर्मा का गीत ‘अरपा पैरी के धार’ इसी सांस्कृतिक अस्मिता का संगीतमय घोषणापत्र बन गया, जिसने अंततः पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण की नींव को और पुख्ता किया।
4. छत्तीसगढ़ी बोली को साहित्यिक सम्मान
कपिलनाथ कश्यप और प्यारेलाल गुप्त जैसे विद्वानों ने छत्तीसगढ़ी को व्याकरण के नियमों में बांधकर और उसमें महाकाव्यों की रचना कर यह सिद्ध कर दिया कि यह केवल एक बोली नहीं, बल्कि एक समृद्ध भाषा है। इसने भविष्य के लेखकों को अपनी मातृभाषा में लिखने के लिए प्रेरित किया।
प्रमुख साहित्यकार एवं रचनाएं (रिवीजन तालिका)
आइए, परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण साहित्यकारों और उनकी रचनाओं को एक त्वरित रिवीजन तालिका में देखें।
| साहित्यकार | प्रमुख उपाधि/पहचान | सबसे महत्वपूर्ण रचना | विधा |
|---|---|---|---|
| पं. सुंदरलाल शर्मा | छत्तीसगढ़ के गांधी | छत्तीसगढ़ी दानलीला | प्रबंध काव्य |
| पं. मुकुटधर पाण्डेय | छायावाद के जनक (पद्मश्री) | कुररी के प्रति | कविता |
| पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय | साहित्य वाचस्पति | मेवाड़ गाथा, दो मित्र | कविता, उपन्यास |
| पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी | ‘सरस्वती’ के संपादक | क्या लिखूं?, झलमला | निबंध, कहानी |
| कपिलनाथ कश्यप | छत्तीसगढ़ के व्यास | श्री रामकथा | महाकाव्य |
| प्यारेलाल गुप्त | छत्तीसगढ़ के पाणिनि | प्राचीन छत्तीसगढ़ | ऐतिहासिक ग्रंथ |
| हरि ठाकुर | सांस्कृतिक योद्धा | सुरता के चंदन | कविता संग्रह |
| डॉ. नरेंद्र देव वर्मा | राजगीत के रचयिता | अरपा पैरी के धार | गीत |
| विनोद कुमार शुक्ल | साहित्य अकादमी पुरस्कार | नौकर की कमीज | उपन्यास |
CGPSC मेन्स अभ्यास प्रश्न
इस विषय पर अपनी विश्लेषणात्मक क्षमता को परखने के लिए, निम्नलिखित प्रश्नों पर उत्तर लिखने का प्रयास करें:
- प्रश्न 1: “पं. सुंदरलाल शर्मा केवल साहित्यकार नहीं, बल्कि एक समाज सुधारक भी थे।” इस कथन की विवेचना उनके साहित्यिक और सामाजिक योगदानों के संदर्भ में कीजिए। (125 शब्द)
- प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ी बोली को एक साहित्यिक भाषा के रूप में स्थापित करने में कपिलनाथ कश्यप और प्यारेलाल गुप्त के योगदान का मूल्यांकन करें। (100 शब्द)
- प्रश्न 3: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता को गढ़ने में यहाँ के साहित्यकारों की क्या भूमिका रही है? उदाहरण सहित समझाइए। (175 शब्द)
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के साहित्यकार केवल लेखक नहीं, बल्कि वे इस भूमि के निर्माता और संरक्षक रहे हैं। उन्होंने अपनी कलम की शक्ति से समाज को जगाया, इतिहास को सहेजा और एक गौरवशाली भविष्य की नींव रखी। पं. सुंदरलाल शर्मा के सामाजिक सुधारों से लेकर डॉ. नरेंद्र देव वर्मा के राजगीत तक, यह साहित्यिक यात्रा छत्तीसगढ़ की आत्मा की यात्रा है। एक अभ्यर्थी के लिए इन साहित्यकारों को जानना केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि उस राज्य की वैचारिक और सांस्कृतिक जड़ों को समझने के लिए भी अनिवार्य है, जिसकी सेवा का वे स्वप्न देखते हैं। यह समृद्ध विरासत आज भी नए लेखकों को प्रेरित कर रही है और छत्तीसगढ़ के साहित्यिक आकाश को निरंतर प्रकाशमान बनाए हुए है।
M S WORLD पर और अन्वेषण करें
छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान की अपनी तैयारी को और मज़बूत करने के लिए, हमारे अन्य महत्वपूर्ण विषयों को भी पढ़ें:
- छत्तीसगढ़ का इतिहास – प्राचीन काल से लेकर आधुनिक इतिहास तक की पूरी जानकारी।
- छत्तीसगढ़ का भूगोल – भौतिक विभाजन, नदियाँ, खनिज और बहुत कुछ।
- कला एवं संस्कृति – जनजातियाँ, लोकनृत्य, पर्व और त्यौहारों का गहन अध्ययन।
- समसामयिकी (Current Affairs) – नवीनतम राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और छत्तीसगढ़ की घटनाओं का विश्लेषण।
- MCQs क्विज़ – अपनी तैयारी को परखने के लिए विषय-वार क्विज़।
- मॉक टेस्ट और PYQ – पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों पर आधारित ऑनलाइन मॉक टेस्ट।
स्रोत और संदर्भ
इस लेख में दी गई जानकारी विश्वसनीय और प्रामाणिक स्रोतों पर आधारित है:
- छत्तीसगढ़ वृहद संदर्भ – डॉ. पी.सी. लाल यादव एवं डॉ. आर. एन. मिश्र
- छत्तीसगढ़ का समग्र इतिहास – डॉ. सुरेश चंद्र शुक्ला
- बाहरी स्रोत: छत्तीसगढ़ शासन, संस्कृति विभाग
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: CGPSC परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण साहित्यकार कौन हैं?
वैसे तो सभी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन पं. सुंदरलाल शर्मा, पं. मुकुटधर पाण्डेय, प्यारेलाल गुप्त, कपिलनाथ कश्यप और डॉ. नरेंद्र देव वर्मा से सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। इनकी उपाधियाँ और प्रमुख रचनाएँ याद रखना अनिवार्य है।
प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ी का पहला प्रबंध काव्य कौन सा माना जाता है?
पं. सुंदरलाल शर्मा द्वारा रचित ‘छत्तीसगढ़ी दानलीला’ को छत्तीसगढ़ी बोली का प्रथम प्रबंध काव्य होने का गौरव प्राप्त है।
प्रश्न 3: ‘पाण्डेय बन्धु’ किन्हें कहा जाता है?
बालपुर (जांजगीर-चांपा) के पाण्डेय परिवार के साहित्यकारों को ‘पाण्डेय बन्धु’ कहा जाता है, जिनमें पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय और पं. मुकुटधर पाण्डेय सबसे प्रसिद्ध हैं।
प्रश्न 4: पद्मश्री से सम्मानित होने वाले छत्तीसगढ़ के प्रथम साहित्यकार कौन थे?
पं. मुकुटधर पाण्डेय 1976 में पद्मश्री से सम्मानित होने वाले छत्तीसगढ़ के प्रथम व्यक्ति (और साहित्यकार) थे।
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1 thought on “छत्तीसगढ़ के साहित्यकार: कलम के सिपाही और उनकी अमर रचनाएं”