नमस्ते दोस्तों! M S WORLD The WORLD of HOPE में आपका स्वागत है। यह लेख हमारी विशेष ‘करंट अफेयर्स + GK‘ सीरीज का एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें हम एक ऐसे वैश्विक सूचकांक का विश्लेषण करेंगे जो सीधे तौर पर मानवता के भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा है।
हाल ही में जारी ‘वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2025’ (Global Hunger Index – GHI) ने एक बार फिर दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह अल्टीमेट गाइड न केवल आपको 2025 की रिपोर्ट में भारत की रैंक और प्रदर्शन से अवगत कराएगी, बल्कि यह भी समझाएगी कि GHI क्या है, इसकी गणना कैसे होती है, और भारत के लिए इसके क्या मायने हैं।
इस सीरीज के अन्य महत्वपूर्ण लेख भी अवश्य पढ़ें:
इस लेख में आप क्या पढ़ेंगे:
- 1. वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2025: मुख्य निष्कर्ष (करंट अफेयर्स)
- 2. Global Hunger Index 2025 (GHI): वैश्विक परिदृश्य – सर्वश्रेष्ठ और सबसे खराब प्रदर्शनकर्ता
- 3. वैश्विक भुखमरी सूचकांक क्या है? (सम्पूर्ण गाइड – GK)
- 4. भारत और GHI: एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
- 5. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए GHI का महत्व
- 6. आगे की राह: भुखमरी से निपटने के लिए सुझाव
- 7. निष्कर्ष
- 8. संदर्भ और स्रोत
- 9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 10. ज्ञान की परीक्षा: GHI क्विज़
1.1. Global Hunger Index 2025 (GHI) में भारत का विस्तृत प्रदर्शन
वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2025 की हाल ही में जारी रिपोर्ट में, भारत का प्रदर्शन कई महत्वपूर्ण संकेतकों पर मिश्रितภาพ प्रस्तुत करता है। हालांकि पिछले कुछ दशकों में भारत ने भुखमरी कम करने में प्रगति की है, लेकिन विशेष रूप से बाल कुपोषण के क्षेत्र में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 123 देशों में भारत को 102वां स्थान प्राप्त हुआ है। भारत का GHI स्कोर 25.8 है, जो इसे ‘गंभीर’ (Serious) भुखमरी की श्रेणी में रखता है। यह स्कोर चार प्रमुख संकेतकों के आधार पर गणना किया गया है, जिनका विश्लेषण नीचे दिया गया है:
- अल्पपोषण (Undernourishment): भारत की कुल जनसंख्या का 12.0% हिस्सा अपर्याप्त कैलोरी सेवन का सामना कर रहा है। यह संकेतक जनसंख्या के एक बड़े हिस्से में खाद्य ऊर्जा की कमी को दर्शाता है।
- चाइल्ड स्टंटिंग (Child Stunting): 5 वर्ष से कम आयु के 32.9% बच्चे अपनी उम्र के अनुसार सही ऊंचाई तक नहीं बढ़ पाए हैं। यह आंकड़ा दीर्घकालिक (chronic) कुपोषण की एक गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है।
- चाइल्ड वेस्टिंग (Child Wasting): 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में 18.7% की दर के साथ, यह भारत के लिए सबसे चिंताजनक संकेतक है। इसका अर्थ है कि इन बच्चों का वजन उनकी ऊंचाई के अनुपात में बहुत कम है, जो तीव्र कुपोषण (acute malnutrition) का संकेत है। भारत में चाइल्ड वेस्टिंग की दर दुनिया में सबसे अधिक में से एक है।
- बाल मृत्यु दर (Child Mortality): इस संकेतक में भारत ने महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है, और यह दर अब 2.8% है। यह 5 वर्ष से कम आयु में मृत्यु दर को मापता है और पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की समग्र स्थिति को दर्शाता है।
भारत का प्रदर्शन: एक नज़र में (2025)
उपरोक्त विश्लेषण को सारांशित करते हुए, यहाँ 2025 के लिए भारत के प्रमुख आँकड़े दिए गए हैं:
| मानदंड (Parameter) | भारत का प्रदर्शन (2025) |
|---|---|
| GHI रैंक (123 देशों में) | 102वां |
| GHI स्कोर | 25.8 |
| गंभीरता का स्तर | गंभीर (Serious) |
| अल्पपोषण (Undernourishment) | 12.0% |
| चाइल्ड स्टंटिंग (Child Stunting) | 32.9% |
| चाइल्ड वेस्टिंग (Child Wasting) | 18.7% |
| बाल मृत्यु दर (Child Mortality) | 2.8% |
1.2. Global Hunger Index 2025 (GHI): भारत बनाम पड़ोसी देश – एक तुलनात्मक विश्लेषण
वैश्विक भुखमरी सूचकांक में किसी देश के प्रदर्शन का सही आकलन अक्सर उसके पड़ोसी और समान सामाजिक-आर्थिक संरचना वाले देशों के साथ तुलना करने पर होता है। 2025 की रिपोर्ट में, दक्षिण एशिया के संदर्भ में भारत की स्थिति मिश्रित तस्वीर पेश करती है, जिसमें कुछ पड़ोसी देश भारत से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कुछ पीछे हैं।
इस साल की रैंकिंग में, श्रीलंका (रैंक 61) और नेपाल (रैंक 72) ने भारत की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया है, जो दर्शाता है कि इन देशों ने पोषण और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रगति की है। बांग्लादेश (रैंक 85) भी भारत से आगे है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान (रैंक 106) और अफगानिस्तान (रैंक 109) जैसे देश भारत से पीछे हैं, जो इन क्षेत्रों में चल रहे आर्थिक और राजनीतिक संकटों को दर्शाता है।
यह तुलना इस बात पर प्रकाश डालती है कि तीव्र आर्थिक विकास के बावजूद, भारत को अपने मानव विकास संकेतकों, विशेष रूप से बाल पोषण पर, और अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है ताकि वह अपने पड़ोसियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके।
दक्षिण एशिया में GHI 2025: एक नज़र में
यहाँ भारत और उसके प्रमुख पड़ोसी देशों की 2025 GHI रैंकिंग और स्कोर की तुलना की गई है:
| देश | GHI रैंक (2025) | GHI स्कोर (2025) | गंभीरता का स्तर |
|---|---|---|---|
| श्रीलंका | 61 | 11.2 | मध्यम (Moderate) |
| नेपाल | 72 | 14.8 | मध्यम (Moderate) |
| बांग्लादेश | 85 | 19.2 | मध्यम (Moderate) |
| भारत | 102 | 25.8 | गंभीर (Serious) |
| पाकिस्तान | 106 | 26.0 | गंभीर (Serious) |
| अफगानिस्तान | 109 | 29.0 | गंभीर (Serious) |
2. Global Hunger Index 2025 (GHI): वैश्विक परिदृश्य – सर्वश्रेष्ठ और सबसे खराब प्रदर्शनकर्ता
वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2025 दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा की एक व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करता है, जिसमें कुछ क्षेत्र उल्लेखनीय प्रगति दर्शाते हैं, जबकि अन्य गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक मंदी जैसे कारक भुखमरी के खिलाफ लड़ाई को कैसे प्रभावित कर रहे हैं।
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले देश
रिपोर्ट के अनुसार, 25 देशों ने 5 से कम का GHI स्कोर प्राप्त किया है, जिसका अर्थ है कि इन देशों में भुखमरी का स्तर ‘निम्न’ (Low) है। इन देशों को व्यक्तिगत रैंक नहीं दी गई है, बल्कि उन्हें सामूहिक रूप से 1-25 रैंक के बीच रखा गया है। इन देशों में मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया और दक्षिण अमेरिका के राष्ट्र शामिल हैं।
इस सफलता का श्रेय अक्सर मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों, स्थिर राजनीतिक वातावरण, टिकाऊ कृषि प्रथाओं और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा में उच्च निवेश को दिया जाता है।
GHI 2025: शीर्ष प्रदर्शनकर्ता (Top Performers)
यहाँ 5 से कम स्कोर वाले कुछ प्रमुख देशों की सूची दी गई है:
| देश | GHI रैंक (2025) | GHI स्कोर (2025) |
|---|---|---|
| बेलारूस | 1-25 | <5 |
| चिली | 1-25 | <5 |
| चीन | 1-25 | <5 |
| क्रोएशिया | 1-25 | <5 |
| कुवैत | 1-25 | <5 |
सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देश
दूसरी ओर, सूचकांक में सबसे नीचे के पायदान पर मौजूद देश मुख्य रूप से उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में स्थित हैं। इन देशों में भुखमरी का स्तर ‘खतरनाक’ (Alarming) या ‘अत्यंत खतरनाक’ (Extremely Alarming) है। इन क्षेत्रों में लंबे समय से चल रहे संघर्ष, राजनीतिक अस्थिरता, चरम जलवायु घटनाएं (जैसे सूखा) और गंभीर गरीबी भुखमरी की स्थिति को और भी बदतर बना देती है।
रिपोर्ट विशेष रूप से उन देशों पर प्रकाश डालती है जहाँ डेटा की कमी के कारण सटीक स्कोर की गणना नहीं की जा सकी, लेकिन मौजूदा साक्ष्य एक गंभीर मानवीय संकट की ओर इशारा करते हैं, जैसे कि यमन और बुरुंडी।
GHI 2025: सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति वाले देश (Bottom Performers)
यहाँ सूचकांक में सबसे नीचे रैंक वाले कुछ देशों की सूची दी गई है:
| देश | GHI रैंक (2025) | GHI स्कोर (2025) | गंभीरता का स्तर |
|---|---|---|---|
| मध्य अफ्रीकी गणराज्य | 116 | 33.4 | खतरनाक |
| नाइजर | 117 | 33.9 | खतरनाक |
| कांगो का इस्वा | 118 | 34.8 | खतरनाक |
| यमन | * | 35-49.9 (अनंतिम) | खतरनाक |
| सोमालिया | 123 | 42.6 | खतरनाक |
(*अंकन का अर्थ है कि डेटा अपूर्ण है और स्कोर अनंतिम रूप से वर्गीकृत है।)
3. वैश्विक भुखमरी सूचकांक क्या है? (सम्पूर्ण गाइड – GK)
वैश्विक भुखमरी सूचकांक (Global Hunger Index – GHI) एक ऐसा उपकरण है जो वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भुखमरी को व्यापक रूप से मापने और ट्रैक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह सिर्फ यह नहीं मापता कि कितने लोगों को पर्याप्त कैलोरी नहीं मिल रही है, बल्कि यह पोषण के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल करता है।
3.1 GHI का इतिहास और उद्देश्य
- शुरुआत: GHI को पहली बार वर्ष 2006 में जारी किया गया था।
- जारीकर्ता संस्थाएं: यह रिपोर्ट प्रतिवर्ष दो यूरोपीय गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार और प्रकाशित की जाती है:
- Concern Worldwide (आयरलैंड स्थित)
- Welthungerhilfe (जर्मनी स्थित)
- मुख्य उद्देश्य: दुनिया भर में भुखमरी के खिलाफ संघर्ष के बारे में जागरूकता बढ़ाना, देशों के बीच भुखमरी के स्तरों की तुलना करने का एक मानकीकृत तरीका प्रदान करना, और उन क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित करना जहाँ भूख उन्मूलन के लिए अतिरिक्त प्रयासों की सबसे अधिक आवश्यकता है।
“भूख” का क्या मतलब है? GHI इसे कैसे मापता है?
GHI रिपोर्ट में “भूख” शब्द का उपयोग एक व्यापक अर्थ में किया गया है। यह सिर्फ खाली पेट रहने (कैलोरी की कमी) तक सीमित नहीं है।
- अल्पपोषण (Undernourishment): यह कैलोरी की कमी को दर्शाता है, यानी पर्याप्त भोजन न मिलना।
- कुपोषण (Malnutrition): यह ऊर्जा, प्रोटीन, और आवश्यक विटामिन और खनिजों (सूक्ष्म पोषक तत्व) में से किसी एक या सभी की कमी को दर्शाता है। एक व्यक्ति पर्याप्त कैलोरी ले सकता है, लेकिन फिर भी यदि उसके भोजन में आवश्यक पोषक तत्व नहीं हैं, तो वह कुपोषित माना जाएगा।
GHI इन दोनों ही पहलुओं को अपने चार संकेतकों के माध्यम से मापता है, जिससे यह भुखमरी की एक अधिक संपूर्ण और बहुआयामी तस्वीर प्रस्तुत करता है।
3.2 GHI के चार संकेतक: गणना का आधार

GHI स्कोर की गणना चार प्रमुख संकेतकों (indicators) के आधार पर की जाती है। इन संकेतकों को इसलिए चुना गया है क्योंकि ये मिलकर भुखमरी की बहुआयामी प्रकृति को दर्शाते हैं।
| संकेतक (Indicator) | विवरण | यह क्यों महत्वपूर्ण है? |
|---|---|---|
| 1. अल्पपोषण | जनसंख्या का वह हिस्सा जिसे अपर्याप्त कैलोरी मिलती है। | यह पूरी आबादी की खाद्य उपलब्धता की स्थिति को दर्शाता है। |
| 2. चाइल्ड स्टंटिंग | 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे जिनकी ऊंचाई उनकी उम्र के हिसाब से कम है। | यह दीर्घकालिक (chronic) कुपोषण को दर्शाता है, जो बच्चों के शारीरिक और संज्ञानात्मक विकास को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है। |
| 3. चाइल्ड वेस्टिंग | 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे जिनका वजन उनकी ऊंचाई के हिसाब से कम है। | यह तीव्र (acute) कुपोषण को दर्शाता है और मृत्यु के जोखिम को बढ़ाता है। |
| 4. बाल मृत्यु दर | 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर। | यह अपर्याप्त पोषण और अस्वास्थ्यकर वातावरण के घातक मिश्रण का सबसे गंभीर परिणाम है। |
याद रखने की ट्रिक (Mnemonic for Exams)
GHI के चार संकेतकों को आसानी से याद रखने के लिए आप “U.S. Wants Meal” (अमेरिका भोजन चाहता है) वाक्य का उपयोग कर सकते हैं, या सीधे “USWM” शब्द याद रख सकते हैं:
- U – Undernourishment (अल्पपोषण)
- S – Stunting (चाइल्ड स्टंटिंग)
- W – Wasting (चाइल्ड वेस्टिंग)
- M – Mortality (बाल मृत्यु दर)
3.3 GHI स्कोर की गणना और गंभीरता का स्तर
GHI स्कोर की गणना एक 3-चरणीय प्रक्रिया के माध्यम से की जाती है:
- डेटा संग्रहण: प्रत्येक देश के लिए चार संकेतकों का डेटा संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों (जैसे FAO, WHO, UNICEF) से लिया जाता है।
- मानकीकरण (Standardization): प्रत्येक संकेतक को 0-100 के पैमाने पर एक मानकीकृत स्कोर दिया जाता है, जहाँ 0 सबसे अच्छा और 100 सबसे खराब होता है।
- एकत्रीकरण (Aggregation): इन मानकीकृत स्कोरों को एक साथ जोड़कर अंतिम GHI स्कोर निकाला जाता है। इसमें अल्पपोषण और बाल मृत्यु दर को 1/3 का भार (weightage) दिया जाता है, जबकि चाइल्ड स्टंटिंग और चाइल्ड वेस्टING प्रत्येक को 1/6 का भार दिया जाता है।
अंतिम GHI स्कोर के आधार पर, भुखमरी की गंभीरता को पांच स्तरों में वर्गीकृत किया जाता है:
GHI गंभीरता पैमाना (GHI Severity Scale)
- ≤ 9.9: निम्न (Low)
- 10.0–19.9: मध्यम (Moderate)
- 20.0–34.9: गंभीर (Serious)
- 35.0–49.9: खतरनाक (Alarming)
- ≥ 50.0: अत्यंत खतरनाक (Extremely Alarming)
GHI और सतत विकास लक्ष्य (SDGs) का गहरा संबंध
वैश्विक भुखमरी सूचकांक सिर्फ एक वार्षिक रिपोर्ट नहीं है, बल्कि यह संयुक्त राष्ट्र के ‘2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ की प्रगति को मापने का एक महत्वपूर्ण उपकरण भी है।
- प्रत्यक्ष संबंध (Direct Link): GHI सीधे तौर पर SDG 2: शून्य भुखमरी (Zero Hunger) को ट्रैक करता है, जिसका लक्ष्य 2030 तक भुखमरी को समाप्त करना और खाद्य सुरक्षा प्राप्त करना है।
- अप्रत्यक्ष संबंध (Indirect Links): भुखमरी का उन्मूलन कई अन्य SDGs से भी जुड़ा हुआ है, जैसे SDG 1 (कोई गरीबी नहीं), SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण), SDG 5 (लैंगिक समानता), और SDG 10 (असमानता में कमी)।
4. भारत और GHI: एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत की रैंकिंग और स्कोर हमेशा से ही गहन चर्चा, विश्लेषण और कभी-कभी विवाद का विषय रहा है। एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, भुखमरी और कुपोषण भारत के लिए लगातार एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
4.1 पिछले वर्षों में भारत का प्रदर्शन (GHI स्कोर ट्रेंड)
GHI रिपोर्ट की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह समय के साथ तुलना करने के लिए मानकीकृत डेटा प्रदान करती है। आपके द्वारा प्रदान किए गए ग्राफ़ के अनुसार, भारत ने पिछले दो दशकों में अपने GHI स्कोर में लगातार सुधार किया है, जो एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, सुधार की गति धीमी रही है।
| वर्ष | GHI स्कोर | गंभीरता का स्तर |
|---|---|---|
| 2000 | 38.1 | खतरनाक (Alarming) |
| 2008 | 34.6 | गंभीर (Serious) |
| 2016 | 29.3 | गंभीर (Serious) |
| 2025 | 25.8 | गंभीर (Serious) |
4.2 सूचकांक पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया और आलोचना
विगत कुछ वर्षों में, भारत सरकार ने GHI की रैंकिंग और कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठाए हैं। सरकार की मुख्य आपत्तियाँ निम्नलिखित हैं:
- त्रुटिपूर्ण कार्यप्रणाली: सरकार का तर्क है कि GHI की गणना का तरीका अवैज्ञानिक है, क्योंकि चार में से तीन संकेतक केवल बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित हैं और पूरी आबादी का सही प्रतिनिधित्व नहीं करते।
- छोटे सैंपल साइज का मुद्दा: सरकार का आरोप है कि ‘अल्पपोषण’ के संकेतक के लिए डेटा FAO द्वारा 3000 लोगों के एक छोटे ओपिनियन पोल पर आधारित है, जो विश्वसनीय नहीं है।
- जानबूझकर छवि खराब करने का प्रयास: सरकार ने इसे भारत की छवि को “खराब करने का एक सतत प्रयास” भी कहा है।
GHI रिपोर्ट स्वयं यह स्पष्ट करती है कि हर साल के स्कोर और रैंकिंग की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जा सकती क्योंकि डेटा स्रोत और कभी-कभी कार्यप्रणाली में बदलाव होते हैं। तुलना केवल उसी रिपोर्ट के भीतर दिए गए ऐतिहासिक डेटा (जैसे 2000, 2008, 2016 के स्कोर) से की जानी चाहिए।
पक्ष और विपक्ष: GHI की बहस – एक संतुलित दृष्टिकोण
GHI की रिपोर्ट पर हर साल होने वाली बहस को समझने के लिए, इसके पक्ष और विपक्ष दोनों के तर्कों पर एक संतुलित नज़र डालना महत्वपूर्ण है। यह विशेष रूप से मुख्य परीक्षाओं में एक विश्लेषणात्मक उत्तर लिखने में मदद करता है।
GHI के पक्ष में तर्क (यह क्यों उपयोगी है?)
- जागरूकता और जवाबदेही: यह भुखमरी के मुद्दे पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है और सरकारों पर कार्रवाई के लिए राजनीतिक दबाव बनाता है।
- बहुआयामी दृष्टिकोण: यह केवल कैलोरी की कमी को नहीं, बल्कि बाल कुपोषण जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों को भी मापता है।
- नीति निर्माण में सहायक: यह उन विशिष्ट क्षेत्रों (जैसे चाइल्ड वेस्टिंग) को उजागर करता है जहाँ तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
- तुलनात्मक विश्लेषण: यह देशों को अपने प्रदर्शन की तुलना दूसरों से करने और सफल नीतियों से सीखने का अवसर देता है।
GHI के विपक्ष में तर्क (सरकार की आपत्तियाँ)
- त्रुटिपूर्ण कार्यप्रणाली: चार में से तीन संकेतकों का केवल बच्चों पर केंद्रित होना पूरी आबादी का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता है।
- अल्पपोषण का छोटा सैंपल: अल्पपोषण का डेटा FAO द्वारा 3000 लोगों के एक सर्वेक्षण पर आधारित है, जिसे सरकार एक बड़े देश के लिए अपर्याप्त मानती है।
- आनुवंशिक कारकों की उपेक्षा: आलोचकों का तर्क है कि स्टंटिंग और वेस्टिंग जैसे संकेतक विभिन्न जातीय समूहों के बीच आनुवंशिक अंतरों को ध्यान में नहीं रखते हैं।
- राजनीतिक पूर्वाग्रह का आरोप: सरकार का मानना है कि इन रैंकिंग का उपयोग अक्सर भारत की छवि को नकारात्मक रूप से चित्रित करने के लिए एक राजनीतिक उपकरण के रूप में किया जाता है।
4.3 भुखमरी से लड़ने के लिए प्रमुख सरकारी योजनाएं
भुखमरी और कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार कई बड़े पैमाने पर योजनाएं और कार्यक्रम चला रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इनमें से कुछ प्रमुख योजनाओं को जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है:
आलोचना के बावजूद महत्व
भले ही सरकार इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, लेकिन अधिकांश विशेषज्ञ और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां GHI को एक महत्वपूर्ण संकेतक मानती हैं। यह उन प्रमुख क्षेत्रों (विशेष रूप से बाल कुपोषण) को उजागर करता है जहाँ नीतिगत ध्यान देने की तत्काल आवश्यकता है।
1. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013
यह दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य लगभग दो-तिहाई भारतीय आबादी को रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। इसके तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) का संचालन होता है।
2. पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan)
2018 में लॉन्च किया गया यह एक व्यापक अभियान है जिसका लक्ष्य स्टंटिंग, अल्पपोषण, एनीमिया और जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों की समस्या को चरणबद्ध तरीके से कम करना है।
3. एकीकृत बाल विकास सेवाएं (ICDS)
यह दुनिया के सबसे बड़े बाल विकास कार्यक्रमों में से एक है। इसके तहत आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरक पोषण, स्वास्थ्य जांच और पूर्व-स्कूली शिक्षा प्रदान की जाती है।
4. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PM-GKAY)
COVID-19 महामारी के दौरान शुरू की गई इस योजना के तहत NFSA के लाभार्थियों को मुफ्त अतिरिक्त खाद्यान्न प्रदान किया जाता है।
5. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए GHI का महत्व
वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI) UPSC (मुख्य परीक्षा में GS पेपर 2 और 3), राज्य PSC, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। यह सीधे तौर पर ‘सामाजिक न्याय’, ‘स्वास्थ्य’, ‘मानव विकास’ और ‘भारत के अंतर्राष्ट्रीय संबंध’ जैसे विषयों से जुड़ता है।
परीक्षा में इस टॉपिक से कैसे प्रश्न बन सकते हैं?
- प्रत्यक्ष तथ्य-आधारित प्रश्न (प्रारंभिक परीक्षा):
- “GHI 2025 में भारत की रैंक क्या है?”
- “वैश्विक भुखमरी सूचकांक कौनसी संस्था जारी करती है?”
- “GHI की गणना में निम्नलिखित में से कौनसा संकेतक शामिल नहीं है?”
- विश्लेषणात्मक प्रश्न (मुख्य परीक्षा):
- “वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत के लगातार खराब प्रदर्शन के क्या कारण हैं? सरकार द्वारा इस चुनौती से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की विवेचना करें।”
- “भारत सरकार GHI की कार्यप्रणाली पर क्यों सवाल उठाती है? इन आपत्तियों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें।”
- “भारत में बाल कुपोषण (स्टंटिंग और वेस्टिंग) की गंभीर समस्या के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करें।”
- निबंध (Essay):
- “भुखमरी मुक्त भारत: चुनौतियाँ और समाधान।”
- “आर्थिक विकास और मानव विकास के बीच असंतुलन।”
6. आगे की राह: भुखमरी से निपटने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण
वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए, केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। एक स्थायी समाधान के लिए एक बहु-आयामी और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। मुख्य परीक्षाओं में उत्तर लेखन के लिए निम्नलिखित सुझाव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
1. कृषि में विविधता और पोषण-सुरक्षा पर ध्यान
केवल खाद्यान्न (चावल और गेहूं) के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, पोषण-युक्त फसलों जैसे बाजरा (श्री अन्न), दालें, और सब्जियों के उत्पादन और खपत को बढ़ावा देना चाहिए।
2. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का सुदृढीकरण
‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ जैसी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ, PDS में केवल अनाज के बजाय दालें, खाद्य तेल और पोषण-युक्त फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों को शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए।
3. महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण
लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर निवेश करना भुखमरी से लड़ने का एक अप्रत्यक्ष लेकिन सबसे प्रभावी तरीका है, क्योंकि शिक्षित माताएं अपने बच्चों के पोषण का बेहतर ध्यान रखती हैं।
4. स्थानीय स्वास्थ्य और पोषण प्रणालियों को मजबूत करना
आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल भोजन वितरण केंद्रों के बजाय पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के जीवंत केंद्रों के रूप में विकसित करना होगा, और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान करने होंगे।
7. निष्कर्ष
वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2025 एक बार फिर यह स्पष्ट करता है कि तीव्र आर्थिक विकास के बावजूद, भुखमरी और कुपोषण (विशेषकर बाल कुपोषण) भारत के लिए एक गंभीर और बहुआयामी चुनौती बने हुए हैं। 25.8 के ‘गंभीर’ स्कोर और 102वीं रैंक के साथ, यह सूचकांक उन क्षेत्रों को उजागर करता है जहाँ नीतिगत हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और पोषण अभियान जैसी मजबूत नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन और जमीनी स्तर पर निगरानी के माध्यम से ही भारत ‘सतत विकास लक्ष्य 2’ (शून्य भुखमरी) को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
8. संदर्भ और स्रोत
इस लेख में प्रस्तुत सभी डेटा और विश्लेषण की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए, हमने निम्नलिखित विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों का उपयोग किया है:
- आधिकारिक GHI वेबसाइट: वैश्विक भुखमरी सूचकांक की आधिकारिक रिपोर्ट, कार्यप्रणाली और डेटा के लिए प्राथमिक स्रोत।
https://www.globalhungerindex.org/ - Concern Worldwide और Welthungerhilfe: रिपोर्ट जारी करने वाली दोनों संस्थाओं की आधिकारिक वेबसाइटें।
- प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), भारत सरकार: GHI रिपोर्ट पर भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और संबंधित योजनाओं की जानकारी के लिए।
9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI) कौन जारी करता है?
GHI दो यूरोपीय गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है: Concern Worldwide (आयरलैंड) और Welthungerhilfe (जर्मनी)।
प्रश्न 2: GHI 2025 में भारत की रैंक और स्कोर क्या है?
GHI 2025 में भारत 123 देशों में 102वें स्थान पर है और उसका स्कोर 25.8 है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
प्रश्न 3: ‘चाइल्ड स्टंटिंग’ और ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ में क्या अंतर है?
स्टंटिंग का अर्थ है उम्र के अनुपात में ऊंचाई का कम होना (दीर्घकालिक कुपोषण)। वेस्टिंग का अर्थ है ऊंचाई के अनुपात में वजन का कम होना (तीव्र कुपोषण)।
प्रश्न 4: GHI 2025 में भारत के लिए सबसे चिंताजनक संकेतक कौनसा है?
भारत के लिए सबसे चिंताजनक संकेतक ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ है, जिसकी दर 18.7% है, जो दुनिया में सबसे अधिक में से एक है।
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