पंडित रविशंकर शुक्ल: आधुनिक मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के निर्माता (Complete Biography for CGPSC)

पंडित रविशंकर शुक्ल: आधुनिक मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के निर्माता (Complete Biography for CGPSC)

📝 पुरोधा व्यक्तित्व: पं. रविशंकर शुक्ल
छत्तीसगढ़ के इतिहास में यदि किसी व्यक्ति को **”भागीरथ”** कहा जा सकता है, तो वे पंडित रविशंकर शुक्ल हैं। जिस प्रकार भागीरथ गंगा को धरती पर लाए थे, उसी प्रकार शुक्ल जी **महात्मा गांधी** को पहली बार (1920 में) छत्तीसगढ़ लेकर आए थे।वे **मध्य प्रांत एवं बरार (CP & Berar)** के प्रधानमंत्री और अविभाजित **मध्य प्रदेश (1956)** के पहले मुख्यमंत्री बने। एक शिक्षक के रूप में करियर शुरू करने वाले शुक्ल जी ने कैसे भारतीय राजनीति के शिखर को छुआ, यह गाथा हर प्रशासनिक अधिकारी बनने वाले अभ्यर्थी के लिए प्रेरणादायक है।

इस विस्तृत जीवनी में आप क्या पढ़ेंगे:

विषय सूची [x]

🔥 परीक्षा की दृष्टि से महत्व (Exam Relevance)
  • प्रारंभिक परीक्षा (Pre): जन्म स्थान, ‘कान्यकुब्ज’ पत्रिका, ‘विद्या मंदिर योजना’ (1937), और गांधीजी के आगमन की तिथि।
  • मुख्य परीक्षा (Mains): Paper-03 (इतिहास) और Paper-05 (अर्थव्यवस्था/शिक्षा)। प्रश्न: “रियासतों के विलीनीकरण में पं. रविशंकर शुक्ल की भूमिका” या “विद्या मंदिर योजना का शिक्षा में योगदान”।

1. जीवन परिचय: सागर से रायपुर तक का सफर

यद्यपि उनका जन्म वर्तमान मध्य प्रदेश में हुआ, लेकिन उनकी कर्मभूमि (Workplace) छत्तीसगढ़ ही रही।
विवरणजानकारी
पूरा नामपंडित रविशंकर शुक्ल
जन्म तिथि2 अगस्त, 1877
जन्म स्थानसागर (मध्य प्रदेश)
पितापं. जगन्नाथ शुक्ल
माताश्रीमती तुलसी देवी
शिक्षामैट्रिक (रायपुर), इंटरमीडिएट (जबलपुर), B.A. (नागपुर – मॉरिस कॉलेज)
कर्मभूमिराजनांदगांव (शिक्षक के रूप में) और रायपुर (वकील के रूप में)
निधन31 दिसंबर, 1956 (नई दिल्ली)
समाधि स्थलरविशकर शुक्ल नगर, रायपुर

शिक्षा और शिक्षक जीवन (Early Career)

शुक्ल जी के जीवन का यह पहलू अक्सर कम चर्चित रहता है, लेकिन यह महत्वपूर्ण है।
  • राजनांदगांव में शिक्षक: अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे राजनांदगांव स्टेट हाई स्कूल में शिक्षक बने।
  • प्रसिद्ध शिष्य: डॉ. खूबचंद बघेल (छत्तीसगढ़ स्वप्नदृष्टा) उनके ही शिष्य थे।
  • वकालत: बाद में उन्होंने कानून (Law) की पढ़ाई की और 1908 में रायपुर में वकालत शुरू की।

2. राष्ट्रीय आंदोलन में प्रवेश (The Beginning)

शुक्ल जी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत ‘नरम दल’ नहीं, बल्कि ‘गरम दल’ के विचारों से प्रभावित होकर हुई थी।

(A) 1905 का बंग-भंग आंदोलन और स्वदेशी

नागपुर में पढ़ते समय वे ‘स्वदेशी आंदोलन’ से प्रभावित हुए।
पहला कदम: उन्होंने 1905 में विदेशी कपड़ों की होली जलाई और खादी पहनना शुरू किया।

(B) 1907 का ‘वंदे मातरम्’ पर्चा कांड (Sedition Case)

यह उनके जीवन का पहला बड़ा संघर्ष था।
📌 महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य
रायपुर में कांग्रेस के प्रांतीय सम्मेलन (1907) से ठीक पहले, रविशंकर शुक्ल ने ‘वंदे मातरम्’ शीर्षक से एक पर्चा (Pamphlet) छपवाया और बांटा।
परिणाम: अंग्रेजों ने इसे राजद्रोह माना। यह उनके खिलाफ दर्ज पहला राजद्रोह का मामला था। हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में वे बरी हो गए, लेकिन इसने उन्हें अंग्रेजों की ‘हिट लिस्ट’ में ला दिया।

(C) कान्यकुब्ज सभा और समाज सुधार (1912)

1912 में उन्होंने ‘कान्यकुब्ज सभा’ की स्थापना की।
उद्देश्य: ब्राह्मण समाज में व्याप्त कुरीतियों (दहेज प्रथा, बाल विवाह) को समाप्त करना।
पत्रिका: उन्होंने ‘कान्यकुब्ज’ नामक मासिक पत्रिका का संपादन और प्रकाशन शुरू किया। (यह प्रीलिम्स का हॉट टॉपिक है)।

3. गांधी युग का सूत्रपात: कंडेल नहर सत्याग्रह (1920)

यह घटना छत्तीसगढ़ के इतिहास का ‘टर्निंग पॉइंट’ थी।
🔥 कंडेल नहर सत्याग्रह और शुक्ल जी
धमतरी के कंडेल गांव में अंग्रेजों ने किसानों पर अवैध सिंचाई कर लगाया था। बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के नेतृत्व में सत्याग्रह चल रहा था।

शुक्ल जी की भूमिका: आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए पं. सुंदरलाल शर्मा और पं. रविशंकर शुक्ल कलकत्ता गए और महात्मा गांधी को छत्तीसगढ़ आने का निमंत्रण दिया।

गांधीजी का प्रथम आगमन (20 दिसंबर 1920)

शुक्ल जी के प्रयासों से ही गांधीजी पहली बार रायपुर रेलवे स्टेशन पर उतरे।
प्रभाव: गांधीजी के आने की खबर मात्र से अंग्रेजों ने बिना शर्त किसानों का जुर्माना माफ कर दिया। यह शुक्ल जी की पहली बड़ी कूटनीतिक जीत थी।
तिथिघटनाशुक्ल जी की भूमिका
20 दिसंबर 1920गांधीजी का आगमनगांधीजी के साथ कलकत्ता से रायपुर आए (मुख्य सूत्रधार)
1921असहयोग आंदोलनवकालत का त्याग किया और पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने
1922जिला परिषद अध्यक्षरायपुर जिला परिषद के अध्यक्ष चुने गए

इसे भी पढ़ें: कंडेल नहर सत्याग्रह और गांधीजी का आगमन (विस्तृत इतिहास)

3. स्वराज दल और काकीनाड़ा पदयात्रा (1923)

असहयोग आंदोलन (1920-22) की समाप्ति के बाद जब कांग्रेस में निराशा थी, तब मोतीलाल नेहरू और सी.आर. दास ने ‘स्वराज पार्टी’ का गठन किया। शुक्ल जी छत्तीसगढ़ में इसके प्रमुख स्तंभ बने।

(A) काकीनाड़ा अधिवेशन की ऐतिहासिक पदयात्रा

यह घटना छत्तीसगढ़ के इतिहास में साहस की एक मिसाल है।
संदर्भ: 1923 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन काकीनाड़ा (आंध्र प्रदेश) में होना था।
शुक्ल जी का संकल्प: उन्होंने रायपुर से काकीनाड़ा तक **पैदल यात्रा** करने का निर्णय लिया।
मार्ग: वे अपने सहयोगियों (नारायण राव मेघावाले, महंत लक्ष्मीनारायण दास आदि) के साथ **बस्तर के दुर्गम जंगलों** से होकर गुजरे।
महत्व: इस यात्रा ने बस्तर के आदिवासियों में पहली बार राष्ट्रीय चेतना का संचार किया।

(B) विधान परिषद में प्रवेश (1923-26)

स्वराज पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर वे **’मध्य प्रांत एवं बरार’ (CP & Berar)** की विधान परिषद के सदस्य बने।
कार्य: उन्होंने परिषद के भीतर अंग्रेजी सरकार की नीतियों का कड़ा विरोध किया और ‘द्वैध शासन’ (Dyarchy) को विफल करने में अहम भूमिका निभाई।

4. सविनय अवज्ञा आंदोलन और नमक सत्याग्रह (1930)

1930 में जब गांधीजी ने दांडी मार्च शुरू किया, तो छत्तीसगढ़ में समुद्र न होने के बावजूद शुक्ल जी ने अनोखा तरीका निकाला।
📌 रोचक तथ्य: रायपुर में नमक कैसे बना?
चूंकि रायपुर में समुद्र नहीं था, इसलिए रविशंकर शुक्ल ने एक वैज्ञानिक तरीका अपनाया।
उन्होंने **हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl)** और **सोडा ऐश (Soda Ash)** को मिलाकर रासायनिक प्रक्रिया से नमक बनाया और कानून तोड़ा।
स्थान: रायपुर का गांधी चौक।
परिणाम: उन्हें गिरफ्तार कर जबलपुर जेल भेज दिया गया।

द्वितीय सविनय अवज्ञा और ‘डिक्टेटर’ की भूमिका (1932)

1932 में जब आंदोलन दोबारा शुरू हुआ, तो उन्हें **’महाकौशल प्रांत का प्रथम डिक्टेटर’** (सर्वाधिकार संपन्न नेता) नियुक्त किया गया। उन्होंने विदेशी कपड़ों और शराब की दुकानों पर पिकेटिंग (धरना) का नेतृत्व किया।

5. 1937 का चुनाव और शिक्षा मंत्री का कार्यकाल

भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत 1937 में प्रांतीय चुनाव हुए। यह शुक्ल जी के जीवन का एक नया अध्याय था – **’एक प्रशासक’ (Administrator)** के रूप में।
घटनाविवरण
चुनाव1937 का प्रांतीय चुनाव (मध्य प्रांत एवं बरार)
परिणामकांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला
मुख्यमंत्री (तब प्रधानमंत्री)डॉ. एन.बी. खरे (N.B. Khare)
शुक्ल जी का पदशिक्षा मंत्री (Education Minister)

(A) विद्या मंदिर योजना (Vidya Mandir Scheme) – सबसे महत्वपूर्ण

शिक्षा मंत्री बनते ही उन्होंने 1937 में यह क्रांतिकारी योजना लागू की। गांधीजी ने वर्धा शिक्षा सम्मेलन में इसकी भूरी-भूरी प्रशंसा की थी।
🔥 विद्या मंदिर योजना का ब्लू-प्रिंट
  • उद्देश्य: शिक्षा को आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता फैलाना।
  • अवधारणा: स्कूलों को सरकारी अनुदान पर निर्भर न रखकर, उन्हें भूमि (Land) दान में दी गई। इस भूमि की उपज (खेती) से स्कूल का खर्च और शिक्षक का वेतन निकलता था।
  • प्रबंधन: स्कूलों का नाम ‘विद्या मंदिर’ रखा गया।
  • महत्व: यह ‘बुनियादी शिक्षा’ (Basic Education) की दिशा में देश का पहला बड़ा प्रयोग था।

6. मध्य प्रांत के प्रधानमंत्री (Premier) बनना (1938-39)

1938 में डॉ. एन.बी. खरे ने इस्तीफा दे दिया (त्रिपुरी संकट और आंतरिक कलह के कारण)। इसके बाद इतिहास रचा गया।
29 जुलाई 1938: ऐतिहासिक दिन
पंडित रविशंकर शुक्ल **मध्य प्रांत एवं बरार (CP & Berar)** के **प्रधानमंत्री (Premier)** बने।
(नोट: उस समय मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहा जाता था।)

उनका मंत्रिमंडल (Cabinet):
1. पं. रविशंकर शुक्ल (प्रधानमंत्री + गृह विभाग)
2. पं. द्वारका प्रसाद मिश्र (स्वायत्त शासन)
3. डी.के. मेहता (वित्त)
4. एस.वी. गोखले (राजस्व)

इस्तीफा (1939)

द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को बिना सहमति के शामिल करने के विरोध में, कांग्रेस हाईकमान के आदेश पर शुक्ल जी ने **नवंबर 1939** में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।

7. व्यक्तिगत सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन (1940-42)

सत्ता त्यागने के बाद वे पुनः संघर्ष के मैदान में कूद पड़े।
  • व्यक्तिगत सत्याग्रह (1940): वे रायपुर से चुने गए प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही थे। (विनोबा भावे देश के पहले थे, शुक्ल जी रायपुर के पहले थे)।
  • भारत छोड़ो आंदोलन (1942): 9 अगस्त 1942 को बॉम्बे से लौटते समय उन्हें मलकापुर (महाराष्ट्र) में गिरफ्तार कर लिया गया और पूरे आंदोलन के दौरान वे जेल में रहे।

8. स्वतंत्रता और रियासतों का विलीनीकरण (1947-48)

1946 में हुए चुनावों में कांग्रेस को फिर से भारी बहुमत मिला और पं. रविशंकर शुक्ल पुनः मध्य प्रांत (CP & Berar) के प्रधानमंत्री बने। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, लेकिन असली चुनौती थी—**देशी रियासतों का भारत में विलय**।
🔥 सरदार पटेल के 'दाहिने हाथ'
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने पूरे भारत की रियासतों को एक करने का बीड़ा उठाया था। मध्य भारत और छत्तीसगढ़ की रियासतों को साधने की जिम्मेदारी उन्होंने पं. रविशंकर शुक्ल को सौंपी थी।

नागपुर बैठक (15 दिसंबर 1947): शुक्ल जी ने सरदार पटेल के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ की 14 और विदर्भ की रियासतों के राजाओं की बैठक नागपुर में करवाई। उनके कूटनीतिक दबाव और समझाइश का ही नतीजा था कि 1 जनवरी 1948 को छत्तीसगढ़ की सभी 14 रियासतों का भारत संघ (मध्य प्रांत) में विलय हो गया।

9. नवीन मध्य प्रदेश का गठन और प्रथम मुख्यमंत्री (1956)

राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग) की सिफारिशों के आधार पर भारत का नक्शा बदला जा रहा था।

1 नवंबर 1956: ऐतिहासिक दिन

मध्य प्रांत एवं बरार, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल स्टेट को मिलाकर एक विशाल राज्य **’मध्य प्रदेश’** का गठन किया गया।
चुनौती: इतने बड़े और विविधतापूर्ण राज्य को संभालने के लिए एक अनुभवी नेता की जरूरत थी।
नेतृत्व: सर्वसम्मति से पंडित रविशंकर शुक्ल को इस नए राज्य का नेता चुना गया।
घटनाक्रमविवरण
शपथ ग्रहण1 नवंबर 1956 (भोपाल के मिंटो हॉल में)
पदमध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री
कार्यकाल1 नवंबर 1956 से 31 दिसंबर 1956 (केवल 2 माह)
विशेषउन्होंने 80 वर्ष की आयु में यह जिम्मेदारी संभाली थी।

10. महाप्रयाण (Death)

नियति को कुछ और ही मंजूर था। मुख्यमंत्री बनने के मात्र दो महीने बाद ही उनका निधन हो गया।
तिथि: 31 दिसंबर 1956
स्थान: नई दिल्ली
कारण: वे राज्य के विकास कार्यों के सिलसिले में दिल्ली गए थे, जहाँ उनका आकस्मिक निधन हुआ। उनकी अंत्येष्टि रायपुर में की गई।

11. पं. रविशंकर शुक्ल की विरासत (Legacy)

आधुनिक छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश उनके योगदान का ऋणी है।

(A) प्रमुख संस्थाएं और नामकरण

उनके सम्मान में कई प्रमुख संस्थानों का नामकरण किया गया है:
  • पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU), रायपुर: राज्य का सबसे बड़ा और पुराना विश्वविद्यालय (स्था. 1964)।
  • रविशंकर सागर परियोजना: गंगरेल बांध (धमतरी) का आधिकारिक नाम।
  • रविशंकर स्टेडियम: दुर्ग जिले में स्थित प्रमुख खेल मैदान।

(B) औद्योगिक विजन (Industrial Vision)

भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) की नींव
भले ही भिलाई स्टील प्लांट का उद्घाटन उनके निधन के बाद हुआ, लेकिन इसकी परिकल्पना और इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य शुक्ल जी के कार्यकाल में ही शुरू हुआ था। वे छत्तीसगढ़ को औद्योगिक रूप से समृद्ध देखना चाहते थे।

संविधान निर्माण में योगदान

बहुत कम लोग जानते हैं कि पं. रविशंकर शुक्ल भारत की **संविधान सभा (Constituent Assembly)** के सदस्य भी थे।
🔥 महत्वपूर्ण तथ्य
  • प्रतिनिधित्व: वे ‘मध्य प्रांत एवं बरार’ (CP & Berar) से संविधान सभा के लिए चुने गए थे।
  • भूमिका: उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा/राजभाषा बनाने के मुद्दे पर संविधान सभा में जोरदार वकालत की थी।
  • हस्ताक्षर: भारतीय संविधान की मूल प्रति पर हस्ताक्षर करने वाले विभूतियों में उनका नाम शामिल है।

पत्रकारिता के पुरोधा: ‘महाकौशल’ का जन्म

शुक्ल जी ने राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए कलम का सहारा लिया।
पत्र/पत्रिकावर्षस्थानविशेष
कान्यकुब्ज1912नागपुर/रायपुरसामाजिक सुधार हेतु मासिक पत्रिका
महाकौशल1936नागपुर (बाद में रायपुर)यह छत्तीसगढ़ का पहला दैनिक समाचार पत्र बना (1951 से रायपुर से प्रकाशित)।
📌 याद रखें
‘महाकौशल’ पत्र की स्थापना उन्होंने नागपुर में की थी, लेकिन बाद में इसे रायपुर स्थानांतरित किया गया। यह आजादी की लड़ाई का प्रमुख मुखपत्र था।

शुक्ल वंश: एक वटवृक्ष

पं. रविशंकर शुक्ल की राजनीतिक विरासत उनके पुत्रों ने संभाली, जिनका भारतीय राजनीति में बड़ा कद रहा।
पुत्रों का योगदान
  1. पं. श्यामाचरण शुक्ल: वे मध्य प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। वे अपने पिता की तरह ही सौम्य और विकास पुरुष माने जाते थे।
  2. विद्याचरण शुक्ल (V.C. Shukla): वे केंद्र सरकार में कद्दावर मंत्री रहे। 1975 के आपातकाल (Emergency) के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में उनकी भूमिका इतिहास में दर्ज है।

क्विक रिवीजन: जीवन के प्रमुख पड़ाव (Timeline)

वर्षघटना
1877जन्म (सागर)
1907वंदे मातरम् पर्चा कांड (प्रथम राजद्रोह मामला)
1912कान्यकुब्ज सभा और पत्रिका की स्थापना
1920गांधीजी को रायपुर लेकर आए (कंडेल सत्याग्रह)
1923काकीनाड़ा पदयात्रा
1930रायपुर में रासायनिक नमक बनाया
1937शिक्षा मंत्री बने (विद्या मंदिर योजना)
1938CP & Berar के प्रधानमंत्री बने
1947रियासतों के विलीनीकरण में नेतृत्व
1956मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने

12. CGPSC Mains विशेष: विश्लेषणात्मक प्रश्न

📝 प्रश्न: पं. रविशंकर शुक्ल को 'आधुनिक म.प्र. का निर्माता' क्यों कहा जाता है?
उत्तर की रूपरेखा:
1. प्रशासनिक एकीकरण: उन्होंने भाषाई और सांस्कृतिक विविधताओं वाले चार अलग-अलग क्षेत्रों (CP, मध्य भारत, विंध्य, भोपाल) को एक सूत्र में पिरोया।
2. शिक्षा में नवाचार: उनकी ‘विद्या मंदिर योजना’ ने बुनियादी शिक्षा को नई दिशा दी।
3. रियासतों का विलय: रक्तहीन क्रांति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की रियासतों का विलय कराया।
4. धर्मनिरपेक्षता: 1947 के दंगों के दौरान उन्होंने प्रशासनिक कठोरता से शांति व्यवस्था बनाए रखी।

13. अपनी तैयारी परखें (Practice Quiz)

पं. रविशंकर शुक्ल ने 1923 में किस स्थान के लिए ऐतिहासिक पदयात्रा की थी?

  • विकल्प 1: नागपुर
  • विकल्प 2: काकीनाड़ा
  • विकल्प 3: दांडी
  • विकल्प 4: त्रिपुरी

पं. रविशंकर शुक्ल द्वारा संपादित पत्रिका का नाम क्या था?

  • विकल्प 1: महाकौशल
  • विकल्प 2: कर्मवीर
  • विकल्प 3: कान्यकुब्ज
  • विकल्प 4: राष्ट्रबंधु

‘विद्या मंदिर योजना’ किस वर्ष लागू की गई थी?

  • विकल्प 1: 1920
  • विकल्प 2: 1930
  • विकल्प 3: 1937
  • विकल्प 4: 1942

नवगठित मध्य प्रदेश (1956) के प्रथम मुख्यमंत्री कौन थे?

  • विकल्प 1: पं. सुंदरलाल शर्मा
  • विकल्प 2: पं. रविशंकर शुक्ल
  • विकल्प 3: कैलाश नाथ काटजू
  • विकल्प 4: भगवंत राव मंडलोई

रायपुर में नमक कानून तोड़ने के लिए शुक्ल जी ने किस विधि का प्रयोग किया?

  • विकल्प 1: समुद्री जल से
  • विकल्प 2: मिट्टी के पानी से
  • विकल्प 3: HCl और सोडा ऐश मिलाकर
  • विकल्प 4: सांभर झील के नमक से

14. निष्कर्ष (Conclusion)

सारांश
पंडित रविशंकर शुक्ल का जीवन ‘संघर्ष और निर्माण’ की एक महागाथा है। एक शिक्षक के रूप में शुरू हुआ उनका सफर एक राष्ट्र-निर्माता के रूप में पूर्ण हुआ। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास को समझने के लिए उनके व्यक्तित्व को पढ़ना अनिवार्य है। उनकी प्रशासनिक दक्षता और दूरदर्शिता ने ही आज के विकसित छत्तीसगढ़ की नींव रखी थी।
🔥 संदर्भ (References)
  • ग्रंथ: ‘मध्य प्रदेश के निर्माता: पं. रविशंकर शुक्ल’ (जीवनी)।
  • हिंदी ग्रंथ अकादमी: छत्तीसगढ़ का इतिहास।
  • आलेख: हरिभूमि और नईदुनिया के संपादकीय लेख।

अगला लेख पढ़ें: छत्तीसगढ़ के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और उनका योगदान

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