नमस्ते दोस्तों! M S WORLD The WORLD of HOPE में आपका स्वागत है। यह लेख हमारी विशेष ‘करंट अफेयर्स + GK’ सीरीज का एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें हम एक ऐसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन का विश्लेषण करेंगे जो वैश्विक राजनीति और सुरक्षा में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रहा है।
हाल ही में चीन के तियानजिन शहर में आयोजित 25वां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन 2025 संपन्न हुआ। यह शिखर सम्मेलन न केवल संगठन की 25वीं वर्षगांठ के कारण विशेष था, बल्कि आतंकवाद, आर्थिक सहयोग और बदलते वैश्विक परिदृश्य पर हुई महत्वपूर्ण चर्चाओं के लिए भी यह अत्यंत प्रासंगिक है। UPSC, CGPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए SCO एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
इस अल्टीमेट गाइड में, हम न केवल 2025 शिखर सम्मेलन के मुख्य परिणामों को जानेंगे, बल्कि SCO के इतिहास, इसके सदस्य देशों, भारत के लिए इसके महत्व और हर उस पहलू को समझेंगे जो आपकी तैयारी के लिए आवश्यक है।
इस सीरीज के अन्य महत्वपूर्ण लेख भी अवश्य पढ़ें:
इस लेख में आप क्या पढ़ेंगे:
- 1. 25वां SCO शिखर सम्मेलन 2025: मुख्य बातें (करंट अफेयर्स)
- 2. शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है? (सम्पूर्ण गाइड – GK)
- 3. भारत और SCO: एक गहरा विश्लेषण
- 4. SCO बनाम NATO बनाम BRICS: एक रणनीतिक तुलना
- 5. पिछले 5 SCO शिखर सम्मेलनों का सारांश
- 6.SCO जैसे अन्य प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठन: एक तुलनात्मक दृष्टि
- 7. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए SCO का महत्व
- 8. निष्कर्ष
- 9. संदर्भ और स्रोत
- 10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 11. ज्ञान की परीक्षा: SCO क्विज़
1. 25वां SCO शिखर सम्मेलन 2025: मुख्य बातें (करंट अफेयर्स)
1 सितंबर, 2025 को चीन के तियानजिन शहर में आयोजित 25वें SCO शिखर सम्मेलन ने एक बार फिर यूरेशियाई क्षेत्र में संगठन की बढ़ती प्रासंगिकता को स्थापित किया। संगठन की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित इस शिखर सम्मेलन में आतंकवाद, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
1.1 सम्मेलन एक नज़र में
SCO शिखर सम्मेलन 2025: महत्वपूर्ण तथ्य
- आयोजन स्थल: तियानजिन, चीन।
- अध्यक्षता: चीन (2024-25 के कार्यकाल में)।
- थीम / ध्येय: शंघाई भावना को आगे बढ़ाना: SCO की कार्यवाही (Advancing the Shanghai Spirit: SCO in Action)।
- विशेषता: यह संगठन की 25वीं वर्षगांठ थी।
- मुख्य घोषणा: सम्मेलन के अंत में “तियानजिन घोषणापत्र” पर हस्ताक्षर किए गए।
- अगला सम्मेलन (2026): अगला SCO शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान में आयोजित किया जाएगा।
1.2 तियानजिन घोषणापत्र: प्रमुख परिणाम और घोषणाएं
शिखर सम्मेलन के अंत में जारी किए गए घोषणापत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों की साझा सहमति पर प्रकाश डाला गया:
- आतंकवाद पर रुख: हाल ही में पाकिस्तान में हुए पहलगम और खुजदार विस्फोटों की निंदा की गई। घोषणापत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि आतंकवाद अब केवल एक क्षेत्रीय समस्या नहीं, बल्कि एक वैश्विक चुनौती है। सीमा-पार आतंकवाद के वित्तपोषण और हथियारों की आपूर्ति को रोकने पर सहमति बनी।
- आर्थिक सहयोग: सदस्य देशों ने एक SCO विकास बैंक (Development Bank) स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की। इसके अलावा, आपसी व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग को प्राथमिकता दी गई।
- क्षेत्रीय संकटों पर रुख:
- अफगानिस्तान: सभी सदस्यों ने एक समावेशी और प्रतिनिधिमूलक सरकार की आवश्यकता पर बल दिया।
- पश्चिम एशिया: द्वि-राष्ट्र समाधान (Two-state solution) का समर्थन किया गया।
- यूक्रेन संकट: रूस का समर्थन करते हुए, सभी पक्षों से बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान खोजने का आग्रह किया गया।
- वैश्विक व्यवस्था और सुरक्षा: अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया गया और एक बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World Order) की स्थापना पर जोर दिया गया।
1.3 भारत की भूमिका और प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
इस शिखर सम्मेलन में भारत ने एक संतुलित और रचनात्मक भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए:
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के मुख्य बिंदु:
- आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता: पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद का कोई “दोहरा मापदंड” नहीं होना चाहिए और अच्छे या बुरे आतंकवाद में कोई भेद नहीं किया जा सकता।
- कनेक्टिविटी और संप्रभुता: भारत ने मध्य एशिया के साथ कनेक्टिविटी परियोजनाओं (जैसे- INSTC, चाबहार बंदरगाह) का समर्थन किया, लेकिन साथ ही यह भी जोर दिया कि ऐसी परियोजनाएं सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें (चीन के BRI/CPEC पर एक अप्रत्यक्ष संकेत)।
- भारत की ‘ब्रिज नेशन’ की भूमिका: भारत ने खुद को एक ‘ब्रिज नेशन’ के रूप में प्रस्तुत किया, जो विकासशील देशों (Global South) की आवाज को SCO जैसे मंचों पर उठा सकता है और पूर्व और पश्चिम के बीच एक सेतु का काम कर सकता है।
- द्विपक्षीय वार्ताएं: शिखर सम्मेलन के दौरान, भारत ने रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा सहयोग तथा ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह परियोजना पर महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चाएं कीं।
2. शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है? (सम्पूर्ण गाइड – GK)
शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation – SCO) एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। यह एक यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन है, जिसे अक्सर पश्चिम के NATO के जवाब में “पूर्व का नाटो (NATO of the East)” भी कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, मैत्री और अच्छे-पड़ोसी संबंधों को मजबूत करना है।
2.1 SCO का इतिहास: ‘शंघाई फाइव’ से SCO तक
SCO की जड़ें 1990 के दशक में चीन और उसके पड़ोसी पूर्व-सोवियत गणराज्यों के बीच सीमा विवादों को सुलझाने के प्रयासों में निहित हैं।
- 1996 – शंघाई फाइव (Shanghai Five): 26 अप्रैल 1996 को, चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान के नेताओं ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य विश्वास बढ़ाने के लिए शंघाई में एक संधि पर हस्ताक्षर किए। इसी समूह को “शंघाई फाइव” के नाम से जाना गया।
- 2001 – SCO का गठन: 15 जून 2001 को, ‘शंघाई फाइव’ के सदस्य देशों ने उज्बेकिस्तान को समूह में शामिल किया और शंघाई में एक नए संगठन, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना की घोषणा की।
- 2017 – भारत और पाकिस्तान का प्रवेश: SCO का सबसे महत्वपूर्ण विस्तार 2017 में हुआ जब भारत और पाकिस्तान को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
- 2023-2024 – ईरान और बेलारूस: 2023 में ईरान नौवां पूर्ण सदस्य बना और 2024 में बेलारूस दसवां पूर्ण सदस्य बना, जिससे संगठन का विस्तार और महत्व और भी बढ़ गया।
2.2 SCO के सदस्य देश (पूर्ण, पर्यवेक्षक, संवाद भागीदार)
SCO अपने सदस्यों को तीन श्रेणियों में विभाजित करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इन तीनों श्रेणियों के देशों को जानना महत्वपूर्ण है।
पूर्ण सदस्य (10 देश)
ये वे देश हैं जिनके पास संगठन में पूर्ण मतदान अधिकार हैं।
चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस।
SCO के 10 सदस्य देशों को याद रखने की ट्रिक
इन 10 देशों को याद रखने के लिए आप इस कहानी-आधारित वाक्य का उपयोग कर सकते हैं:
“India और Pakistan ने Iran से TRUCK खरीदा और उसे Kyrgyzstan-Belarus भेजा।”
- I – India (भारत)
- P – Pakistan (पाकिस्तान)
- I – Iran (ईरान)
- T.R.U.C.K – Tajikistan, Russia, Uzbekistan, China, Kazakhstan
- K – Kyrgyzstan (किर्गिस्तान)
- B – Belarus (बेलारूस)
पर्यवेक्षक देश (Observer States)
ये देश भविष्य में पूर्ण सदस्य बन सकते हैं और बैठकों में भाग ले सकते हैं, लेकिन मतदान नहीं कर सकते।
अफगानिस्तान, मंगोलिया।
संवाद भागीदार (Dialogue Partners)
ये देश संगठन के साथ विशिष्ट क्षेत्रों में सहयोग करते हैं।
आर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया, नेपाल, श्रीलंका, तुर्की, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), म्यांमार, मालदीव।
2.3 SCO के उद्देश्य और “शंघाई स्पिरिट”
SCO चार्टर में संगठन के मुख्य उद्देश्य और सिद्धांत परिभाषित किए गए हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से “शंघाई स्पिरिट” कहा जाता है।
- मुख्य उद्देश्य:
- सदस्य देशों के बीच शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना और मजबूत करना।
- आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद (तीन बुराइयों – Three Evils) से निपटना।
- आर्थिक सहयोग, व्यापार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और संस्कृति में सहयोग को बढ़ावा देना।
- एक लोकतांत्रिक, निष्पक्ष और तर्कसंगत नई अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था की स्थापना में योगदान देना।
- “शंघाई स्पिरिट”: यह SCO का मूल दर्शन है, जिसमें आपसी विश्वास, आपसी लाभ, समानता, परामर्श, सांस्कृतिक विविधता का सम्मान और साझा विकास की तलाश शामिल है।
2.4 SCO की संरचना और प्रमुख निकाय
SCO का कामकाज दो स्थायी निकायों के माध्यम से होता है:
- SCO सचिवालय (SCO Secretariat): यह बीजिंग, चीन में स्थित है। यह संगठन का मुख्य कार्यकारी निकाय है जो संगठनात्मक और सूचनात्मक सहायता प्रदान करता है।
- क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorist Structure – RATS):
- मुख्यालय: ताशकंद, उज्बेकिस्तान।
- कार्य: यह आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त अभियानों के समन्वय के लिए जिम्मेदार है। यह SCO का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, विशेषकर भारत के लिए।
संगठन में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था राष्ट्र प्रमुखों की परिषद (Heads of State Council) है, जिसकी बैठक हर साल शिखर सम्मेलन में होती है।
3. भारत और SCO: एक गहरा विश्लेषण
भारत 2005 से SCO में एक पर्यवेक्षक देश था और 9 जून, 2017 को अस्ताना शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के साथ पूर्ण सदस्य बना। SCO की पूर्ण सदस्यता भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भारत को अपने विस्तारित पड़ोस, विशेष रूप से मध्य एशिया के साथ जुड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
3.1 भारत के लिए SCO का महत्व
SCO की सदस्यता भारत के लिए कई रणनीतिक लाभ प्रदान करती है:
1. क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद का मुकाबला
SCO का RATS (क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना) तंत्र भारत को पाकिस्तान और अफगानिस्तान से उत्पन्न होने वाले सीमा-पार आतंकवाद और कट्टरपंथ पर खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त कार्रवाई करने का एक मंच प्रदान करता है।
2. मध्य एशिया तक रणनीतिक पहुँच (कनेक्टIVITY)
SCO भारत को ऊर्जा-समृद्ध मध्य एशियाई गणराज्यों (कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान) के साथ सीधे जुड़ने का अवसर देता है। यह भारत की कनेक्टिविटी परियोजनाओं, जैसे अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) और चाबहार बंदरगाह, के लिए महत्वपूर्ण है।
3. ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security)
रूस और मध्य एशियाई देश तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार हैं। SCO भारत को इन देशों के साथ सीधे ऊर्जा सौदों और पाइपलाइन परियोजनाओं (जैसे TAPI) पर चर्चा करने का एक मंच प्रदान करता है।
4. चीन और पाकिस्तान को संतुलित करना
SCO एकमात्र प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मंच है जहाँ भारत, चीन और पाकिस्तान के साथ एक मेज पर बैठता है। यह भारत को इन दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय तनावों को कम करने और सीमा मुद्दों पर बातचीत करने का एक अवसर प्रदान करता है, भले ही इसकी सफलता सीमित रही हो।
5. बहुध्रुवीय विश्व में भूमिका
SCO एक उभरते हुए बहुध्रुवीय विश्व में एक महत्वपूर्ण गैर-पश्चिमी संगठन है। इसमें भारत की उपस्थिति यह सुनिश्चित करती है कि संगठन पूरी तरह से चीन-केंद्रित न हो जाए और भारत यूरेशियाई क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बना रहे।
3.2 SCO में भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
लाभों के बावजूद, भारत को SCO के भीतर कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है:
- चीन का बढ़ता प्रभाव: SCO पर चीन का आर्थिक और रणनीतिक प्रभुत्व है। चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को बढ़ावा देने के लिए इस मंच का उपयोग करता है, जिसका भारत संप्रभुता के कारणों (CPEC के कारण) से विरोध करता है।
- भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय तनाव: आतंकवाद और कश्मीर जैसे मुद्दों पर भारत और पाकिस्तान के बीच गहरे मतभेदों का असर अक्सर SCO की प्रभावशीलता पर पड़ता है।
- रूस-चीन की बढ़ती निकटता: यूक्रेन संकट के बाद, रूस और चीन के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई है। यह भारत के लिए एक चिंता का विषय है, क्योंकि भारत के रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, जबकि चीन के साथ सीमा पर तनाव है।
- पश्चिमी देशों के साथ संतुलन: भारत QUAD जैसे पश्चिमी नेतृत्व वाले गठबंधनों का भी सदस्य है। SCO और QUAD दोनों में एक साथ सक्रिय भागीदारी भारत के लिए एक जटिल संतुलनकारी कार्य है।
4.SCO बनाम NATO बनाम BRICS: एक रणनीतिक तुलना
SCO को अक्सर “पूर्व का नाटो” कहा जाता है, जबकि इसकी तुलना BRICS जैसे गैर-पश्चिमी समूहों से भी की जाती है। इन संगठनों के बीच के अंतर को समझना अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की गहरी समझ के लिए आवश्यक है।
| तुलना का आधार | SCO (शंघाई सहयोग संगठन) | NATO (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) | BRICS |
|---|---|---|---|
| प्रकृति | यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन। | पश्चिमी देशों का एक औपचारिक सैन्य गठबंधन। | उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक भू-राजनीतिक और आर्थिक समूह। |
| मुख्य फोकस | क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद का मुकाबला, और आर्थिक सहयोग। | सामूहिक रक्षा (Collective Defense) – एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। | आर्थिक सहयोग, वैश्विक शासन में सुधार, और पश्चिमी प्रभुत्व को संतुलित करना। |
| नेतृत्व | मुख्य रूप से चीन और रूस द्वारा संचालित। | मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) द्वारा संचालित। | कोई एक प्रमुख नेता नहीं, सभी सदस्य (विशेषकर चीन और भारत) महत्वपूर्ण हैं। |
| भौगोलिक केंद्र | यूरेशिया और मध्य एशिया। | उत्तरी अमेरिका और यूरोप (उत्तर अटलांटिक)। | वैश्विक (Global) – सदस्य विभिन्न महाद्वीपों से हैं। |
5. पिछले 5 SCO शिखर सम्मेलनों का सारांश
SCO की वर्तमान प्राथमिकताओं और विकास को समझने के लिए, पिछले कुछ शिखर सम्मेलनों पर एक नज़र डालना उपयोगी है। यह तालिका प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए त्वरित रिविज़न हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है।
| वर्ष (सम्मेलन संख्या) | मेजबान देश (शहर) | थीम / मुख्य फोकस | मुख्य परिणाम |
|---|---|---|---|
| 2025 (25वां) | चीन (तियानजिन) | शंघाई भावना को आगे बढ़ाना | तियानजिन घोषणापत्र जारी; आतंकवाद और आर्थिक सहयोग पर जोर। |
| 2024 (24वां) | कजाकिस्तान (अस्ताना) | – (पर्यावरण और कनेक्टिविटी) | बेलारूस 10वें पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुआ। |
| 2023 (23वां) | भारत (नई दिल्ली, वर्चुअल) | एक सुरक्षित SCO की ओर (Towards a SECURE SCO) | ईरान 9वें पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुआ। नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाया गया। |
| 2022 (22वां) | उज्बेकिस्तान (समरकंद) | – (क्षेत्रीय सुरक्षा और कनेक्टिविटी) | समरकंद घोषणापत्र जारी; वाराणसी को पहली SCO पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी घोषित किया गया। |
| 2021 (21वां) | ताजिकिस्तान (दुशांबे, हाइब्रिड) | – (संगठन की 20वीं वर्षगांठ) | ईरान को पूर्ण सदस्य के रूप में स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। |
6.SCO जैसे अन्य प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठन: एक तुलनात्मक दृष्टि
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) को बेहतर ढंग से समझने के लिए, इसकी तुलना दुनिया के अन्य प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक संगठनों से करना महत्वपूर्ण है। यह तालिका प्रतियोगी परीक्षाओं के GK खंड के लिए अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि इन संगठनों के मुख्यालय, स्थापना वर्ष और प्रमुखों के बारे में अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।
| संगठन (पूरा नाम) | स्थापना | सदस्य | मुख्यालय | प्रमुख / महासचिव (अक्टूबर 2025 तक) | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|---|---|---|
| SAARC (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) | 1985 | 8 | काठमांडू, नेपाल | गोलाम सरवर | दक्षिण एशिया में आर्थिक और क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देना। |
| ASEAN (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन) | 1967 | 10 | जकार्ता, इंडोनेशिया | काओ किम होर्न | आर्थिक, राजनीतिक, सुरक्षा और सामाजिक-सांस्कृतिक सहयोग। |
| BIMSTEC (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल) | 1997 | 7 | ढाका, बांग्लादेश | इंद्र मणि पाण्डेय | दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच तकनीकी और आर्थिक सहयोग। |
| BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका…) | 2009 | 9+ | शंघाई, चीन (NDB का मुख्यालय) | (कोई स्थायी सचिवालय या प्रमुख नहीं, अध्यक्षता वार्षिक रूप से बदलती है) | उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और वैश्विक शासन में सुधार। |
| NATO (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) | 1949 | 32 | ब्रुसेल्स, बेल्जियम | मार्क रूट | सामूहिक रक्षा और सदस्य देशों की स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी। |
| UN (संयुक्त राष्ट्र) | 1945 | 193 | न्यूयॉर्क, USA | एंटोनियो गुटेरेस | अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना, और राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना। |
ध्यान दें: उपरोक्त तालिका में महासचिव/प्रमुख के नाम अक्टूबर 2025 की स्थिति के अनुसार हैं और समय के साथ बदल सकते हैं। परीक्षा से पहले नवीनतम जानकारी की पुष्टि करना हमेशा एक अच्छी रणनीति है।
7. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए SCO का महत्व
UPSC, CGPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के ‘अंतर्राष्ट्रीय संबंध’ खंड के लिए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाओं में इससे प्रश्न पूछे जाने की प्रबल संभावना होती है।
परीक्षा में इस टॉपिक से कैसे प्रश्न बन सकते हैं?
- प्रत्यक्ष तथ्य-आधारित प्रश्न (प्रारंभिक परीक्षा):
- “SCO का 25वां शिखर सम्मेलन कहाँ आयोजित हुआ?” (उत्तर: तियानजिन, चीन)
- “निम्नलिखित में से कौनसा देश SCO का पूर्ण सदस्य नहीं है?”
- “SCO की RATS का मुख्यालय कहाँ स्थित है?” (उत्तर: ताशकंद)
- “भारत किस वर्ष SCO का पूर्ण सदस्य बना?” (उत्तर: 2017)
- विश्लेषणात्मक प्रश्न (मुख्य परीक्षा):
- “शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के क्या उद्देश्य हैं? भारत के लिए इसके रणनीतिक महत्व का विश्लेषण करें।”
- “SCO में भारत के समक्ष मौजूद प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करें। इन चुनौतियों के बावजूद भारत को संगठन में सक्रिय क्यों बने रहना चाहिए?”
- “क्या आप इस मत से सहमत हैं कि SCO ‘पूर्व के नाटो’ के रूप में उभर रहा है? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दें।”
8. निष्कर्ष
25वां SCO शिखर सम्मेलन 2025 इस बात का प्रतीक है कि यह संगठन अब केवल एक क्षेत्रीय सुरक्षा ब्लॉक नहीं रहा, बल्कि एक महत्वपूर्ण वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है जो दुनिया की 40% से अधिक आबादी और वैश्विक GDP के लगभग एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करता है।
भारत के लिए, SCO एक जटिल मंच है जो अवसर और चुनौतियाँ दोनों प्रस्तुत करता है। एक ओर जहाँ यह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और मध्य एशिया के साथ जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, वहीं दूसरी ओर चीन-पाकिस्तान की धुरी और BRI जैसे मुद्दों पर गहरे मतभेद भी मौजूद हैं।
इन चुनौतियों के बावजूद, एक बहुध्रुवीय विश्व में अपनी भूमिका को मजबूत करने और अपने विस्तारित पड़ोस में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भारत की सक्रिय भागीदारी SCO में अनिवार्य बनी रहेगी।
9.संदर्भ और स्रोत (References and Sources)
इस लेख में प्रस्तुत सभी जानकारी की सटीकता, प्रामाणिकता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए, हमने निम्नलिखित विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों का उपयोग किया है।
-
SCO की आधिकारिक वेबसाइट: शिखर सम्मेलन की घोषणाओं, घोषणापत्रों और संगठन की संरचना के लिए प्राथमिक स्रोत।
http://eng.sectsco.org/ - विदेश मंत्रालय, भारत सरकार (MEA): SCO में भारत की भागीदारी, प्रधानमंत्री के भाषणों और द्विपक्षीय बैठकों पर आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों के लिए।
10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: SCO का पूरा नाम क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?
SCO का पूरा नाम शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) है। इसकी स्थापना 15 जून, 2001 को हुई थी।
प्रश्न 2: भारत SCO का पूर्ण सदस्य कब बना?
भारत, पाकिस्तान के साथ, 9 जून, 2017 को अस्ताना शिखर सम्मेलन में SCO का पूर्ण सदस्य बना।
प्रश्न 3: SCO में कितने पूर्ण सदस्य देश हैं?
वर्तमान में SCO में 10 पूर्ण सदस्य देश हैं: चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस।
प्रश्न 4: SCO की RATS का क्या कार्य है और इसका मुख्यालय कहाँ है?
RATS का पूरा नाम क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorist Structure) है। इसका मुख्य कार्य आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटना है। इसका मुख्यालय ताशकंद, उज्बेकिस्तान में है।
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