इस लेख को सुनें (शिक्षक वॉइस मोड)
⏱️ सुनने का समय: ~23 मिनट (2764 शब्द)
छत्तीसगढ़ का संपूर्ण इतिहास: महा-अभ्यास प्रश्नावली (CG History MCQ)","intro":"<p>भावी प्रशासनिक अधिकारियों, छत्तीसगढ़ की माटी का इतिहास शौर्य और बलिदान की गाथाओं से भरा है। <strong>CGPSC और व्यापम</strong> की परीक्षाओं में सफलता सुनिश्चित करने के लिए इतिहास खंड पर मजबूत पकड़ होना अनिवार्य है। यह क्विज़ आपकी तैयारी को सटीक दिशा देने के लिए तैयार की गई है।</p><p>[quiz_rules]</p>","duration":10,"negativeMarking":"1/3","displayCount":15,"questions":[{"text":"छत्तीसगढ़ में 'कल्चुरी वंश' की स्थापना किसने की थी?","options":["कलिंगराज","कमलराज","रत्नदेव प्रथम","जाज्वल्यदेव"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"छत्तीसगढ़ में कल्चुरी सत्ता का वास्तविक संस्थापक कलिंगराज को माना जाता है। उन्होंने लगभग 1000 ईस्वी में दक्षिण कोसल पर अधिकार किया और अपनी पहली राजधानी 'तुम्माण' (कोरबा) को बनाया। इसके बाद कल्चुरियों ने यहाँ लगभग 800 वर्षों तक शासन किया।"},{"text":"'छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे' किसे कहा जाता है?","options":["वीर नारायण सिंह","गेंद सिंह","हनुमान सिंह","सुरेंद्र साय"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"रायपुर मैगजीन लश्कर के सिपाही हनुमान सिंह को छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे कहा जाता है। उन्होंने 18 जनवरी 1858 को ब्रिटिश सार्जेंट मेजर सिडवेल की हत्या कर विद्रोह कर दिया था। हनुमान सिंह कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आए, जबकि उनके 17 साथियों को फांसी दे दी गई थी।"},{"text":"बस्तर का प्रसिद्ध 'भूमकाल विद्रोह' किस वर्ष हुआ था?","options":["1857 में","1876 में","1910 में","1924 में"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"बस्तर के इतिहास का सबसे व्यापक विद्रोह 'भूमकाल विद्रोह' वर्ष 1910 में हुआ था। इसका नेतृत्व धुर्वा जनजाति के नेता गुंडाधुर ने किया था। विद्रोह का मुख्य कारण ब्रिटिश प्रशासन का शोषण और वनों पर आदिवासियों के अधिकारों का हनन था।"},{"text":"'छत्तीसगढ़ का गांधी' किसे कहा जाता है?","options":["पंडित रविशंकर शुक्ल","ठाकुर प्यारेलाल सिंह","पंडित सुंदरलाल शर्मा","यति यतनलाल"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"पंडित सुंदरलाल शर्मा को छत्तीसगढ़ का गांधी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने गांधीजी के आगमन से पूर्व ही यहाँ 'कंडेल नहर सत्याग्रह' (1920) और अछूतोद्धार का कार्य शुरू कर दिया था। गांधीजी ने स्वयं उन्हें अपना 'अग्रणी' माना था।"},{"text":"समुद्रगुप्त के 'दक्षिणापथ अभियान' के समय कोसल का राजा कौन था?","options":["महेंद्र","व्याघ्रराज","रुद्रसेन","कलिंगराज"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"हरिषेण द्वारा रचित 'प्रयाग प्रशस्ति' के अनुसार, गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त ने अपने दक्षिणापथ अभियान के दौरान कोसल के राजा 'महेंद्र' को पराजित किया था। समुद्रगुप्त ने यहाँ 'ग्रहण-मोक्षानुग्रह' नीति अपनाई थी, अर्थात् राज्य जीतकर पुनः वापस कर दिया था।"},{"text":"राजिम के 'राजीव लोचन मंदिर' का निर्माण किस राजवंश के शासक ने करवाया था?","options":["कल्चुरी वंश","नल वंश","पांडु वंश","शरभपुरीय वंश"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"राजिम स्थित राजीव लोचन मंदिर का निर्माण नलवंशी शासक 'विलासतुंग' ने 7वीं-8वीं शताब्दी के दौरान करवाया था। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी पंचायतन स्थापत्य शैली के लिए विश्व प्रसिद्ध है। नल वंश की राजधानी कोरापुट (पुष्करी) थी।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'मराठा शासन' की स्थापना किस वर्ष हुई थी?","options":["1741 ई.","1758 ई.","1787 ई.","1818 ई."],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"मराठा सेनापति भास्कर पंत ने 1741 में कल्चुरी शासक रघुनाथ सिंह को पराजित कर छत्तीसगढ़ पर मराठा प्रभुत्व स्थापित किया था। हालांकि, प्रत्यक्ष मराठा शासन 1758 में बिम्बाजी भोंसले के आगमन के साथ शुरू हुआ, जिन्होंने रतनपुर को अपनी राजधानी बनाया।"},{"text":"'सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर' का निर्माण किसने पूर्ण करवाया था?","options":["रानी वासटा","महासिवगुप्त बालार्जुन","हर्षगुप्त","तीवरदेव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"सिरपुर के प्रसिद्ध लाल ईंटों के लक्ष्मण मंदिर का निर्माण पांडुवंशी राजा हर्षगुप्त की स्मृति में उनकी पत्नी रानी वासटा ने शुरू करवाया था। इस भव्य मंदिर के निर्माण कार्य को उनके पुत्र 'महासिवगुप्त बालार्जुन' के काल में पूर्ण किया गया।"},{"text":"मराठा काल में 'परगना पद्धति' का जन्मदाता कौन था?","options":["बिम्बाजी भोंसले","व्यंकोजी भोंसले","विट्ठलराव दिनकर","महीपतराव दिनकर"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधार के लिए सूबेदार विट्ठलराव दिनकर ने 'परगना पद्धति' की शुरुआत की थी। उन्होंने संपूर्ण छत्तीसगढ़ को 27 परगनों में विभाजित किया था। परगना का प्रमुख अधिकारी 'कमाविसदार' कहलाता था, जो राजस्व और प्रशासन देखता था।"},{"text":"'छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद' किसे माना जाता है?","options":["हनुमान सिंह","सुरेंद्र साय","वीर नारायण सिंह","गेंद सिंह"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह को छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद माना जाता है। उन्होंने 1856 के अकाल में गरीबों की मदद के लिए अंग्रेजों का विरोध किया। उन्हें 10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जयस्तंभ चौक पर फांसी दी गई थी।"},{"text":"किस काकतीय शासक ने अपनी राजधानी मंदोता से 'जगदलपुर' स्थानांतरित की थी?","options":["अन्नम देव","दलपत देव","पुरुषोत्तम देव","प्रवीर चंद्र भंजदेव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"काकतीय राजा दलपत देव ने 18वीं शताब्दी में अपनी राजधानी मंदोता से स्थानांतरित कर जगदलपुर बनाई थी। उन्होंने ही जगदलपुर में प्रसिद्ध 'दलपत सागर' तालाब का निर्माण करवाया था, जो राज्य का सबसे बड़ा कृत्रिम तालाब माना जाता है।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'सुबा शासन' के दौरान कुल कितने सूबेदार नियुक्त हुए थे?","options":["5","8","10","12"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"मराठा शासक व्यंकोजी भोंसले ने छत्तीसगढ़ में 'सुबा पद्धति' शुरू की थी। 1787 से 1818 के बीच कुल 8 सूबेदार नियुक्त हुए। पहले सूबेदार 'महीपतराव दिनकर' थे और अंतिम 'यादवराव दिवाकर' थे। इस काल को आर्थिक शोषण का काल माना जाता है।"},{"text":"'ह्वेनसांग' ने सिरपुर की यात्रा किस वर्ष की थी?","options":["629 ई.","639 ई.","645 ई.","712 ई."],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग 639 ईस्वी में सिरपुर (श्रीपुर) आया था। उसने अपनी पुस्तक 'सी-यू-की' में इस क्षेत्र को 'किया-सो-लो' नाम से संबोधित किया था। उसने सिरपुर को बौद्ध धर्म और शिक्षा का एक समृद्ध केंद्र बताया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ की किस जमींदारी में 'परलकोट विद्रोह' (1825) हुआ था?","options":["बस्तर","कांकेर","सोनाखान","सरगुजा"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"परलकोट विद्रोह 1825 में बस्तर क्षेत्र की परलकोट जमींदारी में हुआ था। इसका नेतृत्व 'गेंद सिंह' ने किया था। विद्रोह का उद्देश्य बाहरी हस्तक्षेप को रोकना और अबूझमाड़ियों की स्वतंत्रता को बचाए रखना था। गेंद सिंह को इस विद्रोह के कारण फांसी दी गई थी।"},{"text":"किस कल्चुरी शासक ने 'स्वर्ण सिक्के' जारी किए थे जिन पर 'श्रीमद्जाज्वल्यदेव' अंकित था?","options":["रत्नदेव प्रथम","जाज्वल्यदेव प्रथम","पृथ्वीदेव द्वितीय","बाहर साय"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"जाज्वल्यदेव प्रथम कल्चुरी वंश के सबसे प्रतापी राजा थे। उन्होंने अपनी शक्ति के प्रदर्शन के लिए स्वर्ण सिक्के जारी किए। उन्होंने 'जाज्वल्यपुर' (वर्तमान जांजगीर) नगर बसाया और वहां एक विशाल मंदिर और तालाब का निर्माण करवाया।"},{"text":"'कंडेल नहर सत्याग्रह' (1920) का नेतृत्व किसने किया था?","options":["पंडित सुंदरलाल शर्मा","बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव","नत्थूजी जगताप","उपरोक्त सभी"],"correctAnswerIndex":"3","explanation":"धमतरी के कंडेल गाँव के किसानों पर अंग्रेजों द्वारा लगाए गए पानी जुर्माने के विरोध में 1920 में यह सत्याग्रह हुआ था। इसका नेतृत्व पंडित सुंदरलाल शर्मा, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव और नत्थूजी जगताप ने किया था। इसी आंदोलन के कारण गांधीजी पहली बार छत्तीसगढ़ आए थे।"},{"text":"छत्तीसगढ़ की 'रियासतों' का भारत संघ में विलय कब हुआ?","options":["15 अगस्त 1947","1 जनवरी 1948","26 जनवरी 1950","1 नवंबर 1956"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"छत्तीसगढ़ की कुल 14 रियासतों का भारत संघ में औपचारिक विलय 1 जनवरी 1948 को हुआ था। सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से खैरागढ़, बस्तर, सरगुजा आदि रियासतों ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।"},{"text":"प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल 'मल्हार' किस नदी के तट पर स्थित है?","options":["महानदी","शिवनाथ नदी","लीलागर नदी","अरपा नदी"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"बिलासपुर जिले का मल्हार (प्राचीन नाम- प्रसन्नपुर) लीलागर नदी के तट पर स्थित है। यहाँ से सातवाहन, शरभपुरीय और कल्चुरी कालीन महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए हैं। 'डिढनेश्वरी देवी' का मंदिर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है।"},{"text":"'छत्तीसगढ़ मित्र' समाचार पत्र के संपादक कौन थे?","options":["माधवराव सप्रे","वामनराव लाखे","पंडित सुंदरलाल शर्मा","गजाधर साव"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"छत्तीसगढ़ का पहला समाचार पत्र 'छत्तीसगढ़ मित्र' वर्ष 1900 में पेंड्रा रोड (बिलासपुर) से प्रकाशित हुआ था। इसके संपादक माधवराव सप्रे थे। इस पत्र ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता और राजनीतिक चेतना की नींव रखी थी।"},{"text":"'भोरमदेव मंदिर' का निर्माण किस राजवंश के काल में हुआ था?","options":["कल्चुरी वंश","फणि नागवंश","नल वंश","पांडु वंश"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"कवर्धा (कबीरधाम) के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर का निर्माण फणि नागवंशी राजा 'गोपाल देव' ने 11वीं शताब्दी (1089 ई.) में करवाया था। इसे अपनी स्थापत्य शैली के कारण 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' कहा जाता है।"},{"text":"1930 के 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' के दौरान छत्तीसगढ़ में कौन सा सत्याग्रह सर्वाधिक प्रसिद्ध हुआ?","options":["नमक सत्याग्रह","जंगल सत्याग्रह","कर बंदी आंदोलन","ध्वज सत्याग्रह"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"छत्तीसगढ़ में समुद्र तट न होने के कारण नमक कानून तोड़ना संभव नहीं था, इसलिए यहाँ सविनय अवज्ञा आंदोलन 'जंगल सत्याग्रह' के रूप में हुआ। गट्टासिल्ली, रुद्रि-नवागांव और तमोरा के जंगल सत्याग्रहों ने ब्रिटिश प्रशासन को हिला दिया था।"},{"text":"'रायपुर' नगर की स्थापना किसने की थी?","options":["रत्नदेव प्रथम","रामचंद्र देव","ब्रह्मदेव राय","कलिंगराज"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"कल्चुरी वंश की रायपुर शाखा के राजा रामचंद्र देव ने 14वीं शताब्दी में रायपुर नगर बसाया था। उन्होंने अपने पुत्र 'ब्रह्मदेव राय' के नाम पर इसका नाम रायपुर रखा। बाद में ब्रह्मदेव राय ने इसे अपनी राजधानी बनाया।"},{"text":"'छत्तीसगढ़ का तात्या टोपे' किसे कहा जाता है?","options":["हनुमान सिंह","सुरेंद्र साय","गुंडाधुर","वीर नारायण सिंह"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"संबलपुर के वीर सुरेंद्र साय को छत्तीसगढ़ का तात्या टोपे कहा जाता है। उन्होंने 1857 की क्रांति के बाद भी लंबे समय तक अंग्रेजों के खिलाफ छापामार युद्ध जारी रखा था। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम 20 वर्ष असीरगढ़ के किले में कैदी के रूप में बिताए।"},{"text":"'सिंघनपुर' की गुफाएं किस जिले में स्थित हैं जो शैलचित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं?","options":["बस्तर","रायगढ़","सरगुजा","धमतरी"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"रायगढ़ जिला अपनी प्रागैतिहासिक शैलचित्र कला के कारण विश्व प्रसिद्ध है। सिंघनपुर की गुफाओं में पूर्व पाषाण कालीन मानवों द्वारा बनाए गए लाल रंग के चित्र मिले हैं। यहाँ मानव आकृतियों और पशुओं के शिकार के दृश्य अंकित हैं।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस राजवंश को 'अमरार्य कुल' भी कहा जाता है?","options":["कल्चुरी वंश","शरभपुरीय वंश","नल वंश","पांडु वंश"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"शरभपुरीय राजवंश के शासक स्वयं को 'अमरार्य कुल' का वंशज मानते थे। इस वंश के संस्थापक शरभराज थे। इनकी राजमुद्रा पर 'गजलक्ष्मी' का चित्र अंकित होता था और इन्होंने 'शरभपुर' को अपनी राजधानी बनाया था।"},{"text":"1923 के 'रायपुर ध्वज सत्याग्रह' का नेतृत्व किसने किया था?","options":["ठाकुर प्यारेलाल सिंह","पंडित सुंदरलाल शर्मा","रविशंकर शुक्ल","महंत लक्ष्मी नारायण"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"नागपुर के झंडा सत्याग्रह की तर्ज पर रायपुर में भी 'ध्वज सत्याग्रह' हुआ था। इसका प्रमुख नेतृत्व ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने किया था। इस आंदोलन में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियों ने तिरंगे के सम्मान के लिए गिरफ्तारी दी थी।"},{"text":"कल्चुरी प्रशासन में 'राजस्व विभाग' का मुख्य अधिकारी क्या कहलाता था?","options":["महाप्रतिहार","महाप्रमातृ","महासंधिविग्रहिक","महाक्षपटलिक"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"कल्चुरी शासनकाल में 'महाप्रमातृ' राजस्व विभाग का प्रमुख होता था, जिसका कार्य भूमि का मापन और लगान वसूल करना था। 'महासंधिविग्रहिक' विदेश विभाग का प्रमुख होता था और 'महाक्षपटलिक' रिकॉर्ड कीपर (दस्तावेज़ रक्षक) होता था।"},{"text":"बस्तर के 'छिंदक नागवंश' की राजधानी क्या थी?","options":["बारसूर (चक्रकोट)","जगदलपुर","दंतेवाड़ा","कांकेर"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"बस्तर क्षेत्र में 11वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान छिंदक नागवंश का शासन था। इनकी राजधानी चक्रकोट (वर्तमान बारसूर) थी। इस वंश के प्रसिद्ध राजा सोमेश्वर देव थे, जिन्हें कल्चुरी राजा जाज्वल्यदेव प्रथम ने पराजित किया था।"},{"text":"'छत्तीसगढ़' नाम का प्रयोग सर्वप्रथम किस साहित्यकार ने अपनी रचना में किया था?","options":["गोपाल मिश्र","रेवाराम","दलपत राव","लक्ष्मण कवि"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"खैरागढ़ रियासत के राजा लक्ष्मी निधि राय के दरबारी कवि दलपत राव ने 1494 ईस्वी में अपनी एक कविता में सर्वप्रथम 'छत्तीसगढ़' शब्द का लिखित प्रयोग किया था। उन्होंने लिखा था- \"लक्ष्मी निधि राय राना, छत्तीसगढ़ गढ़ गढ़ियाना।\""},{"text":"1940 के 'व्यक्तिगत सत्याग्रह' में छत्तीसगढ़ से प्रथम सत्याग्रही कौन थे?","options":["पंडित रविशंकर शुक्ल","यति यतनलाल","पंडित सुंदरलाल शर्मा","ठाकुर प्यारेलाल सिंह"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"गांधीजी द्वारा शुरू किए गए व्यक्तिगत सत्याग्रह के दौरान छत्तीसगढ़ से पंडित रविशंकर शुक्ल को प्रथम सत्याग्रही चुना गया था। उन्हें रायपुर से गिरफ्तार कर लिया गया था। शुक्ल जी आधुनिक छत्तीसगढ़ के प्रमुख निर्माता माने जाते हैं।"},{"text":"'तालागांव' के प्रसिद्ध 'रुद्र शिव' की प्रतिमा किस काल की मानी जाती है?","options":["कल्चुरी काल","शरभपुरीय काल","पांडु काल","नल काल"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"बिलासपुर के पास तालागांव में स्थित देवरानी-जेठानी मंदिर और वहां प्राप्त 'रुद्र शिव' की विलक्षण प्रतिमा शरभपुरीय काल (5वीं-6वीं शताब्दी) की मानी जाती है। इस प्रतिमा के अंग विभिन्न जीव-जंतुओं के चेहरों से निर्मित हैं।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'डिप्टी कमिश्नर' पद की शुरुआत किस वर्ष हुई थी?","options":["1818 ई.","1854 ई.","1861 ई.","1905 ई."],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"1854 में जब नागपुर रियासत के साथ छत्तीसगढ़ को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया, तब यहाँ प्रशासनिक व्यवस्था के लिए 'डिप्टी कमिश्नर' की नियुक्ति शुरू हुई। छत्तीसगढ़ के पहले डिप्टी कमिश्नर 'चार्ल्स इलियट' थे।"},{"text":"'कवर्धा' का प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर किस भगवान को समर्पित है?","options":["विष्णु","शिव","ब्रह्मा","सूर्य"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"भोरमदेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसका नाम गोंड जनजाति के उपास्य देव 'भोरमदेव' के नाम पर पड़ा है। यह मंदिर नागर शैली और कामुक मूर्तिकला का अद्भुत संगम है, जिसे फणि नागवंशी राजाओं ने बनवाया था।"},{"text":"'रत्नपुर के कल्चुरी' और 'रायपुर के कल्चुरी' के बीच विभाजक रेखा कौन सी नदी थी?","options":["महानदी","शिवनाथ नदी","हसदेव नदी","अरपा नदी"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"मध्यकाल में कल्चुरी साम्राज्य दो शाखाओं में बंटा था। शिवनाथ नदी इन दोनों प्रशासनिक इकाइयों की सीमा निर्धारित करती थी। नदी के उत्तर का भाग 'रत्नपुर' शाखा के अधीन था और दक्षिण का भाग 'रायपुर' शाखा के अधीन था।"},{"text":"बस्तर में 'रथ यात्रा' (गोंचा पर्व) की शुरुआत किस शासक ने की थी?","options":["अन्नम देव","पुरुषोत्तम देव","प्रताप रुद्र देव","भैरम देव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"काकतीय राजा पुरुषोत्तम देव जगन्नाथ पुरी (ओडिशा) की यात्रा पर गए थे, जहाँ उन्हें 'रथ-पति' की उपाधि दी गई थी। वापस आकर उन्होंने बस्तर में 1408 ईस्वी में 'गोंचा पर्व' और रथ यात्रा की शुरुआत की, जो आज भी बस्तर की संस्कृति का हिस्सा है।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के इतिहास का 'स्वर्ण युग' किस शासक के काल को कहा जाता है?","options":["रत्नदेव प्रथम","महासिवगुप्त बालार्जुन","कलिंगराज","बिम्बाजी भोंसले"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"पांडुवंशी शासक महासिवगुप्त बालार्जुन के शासनकाल (लगभग 595-655 ई.) को छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास का 'स्वर्ण युग' माना जाता है। उनके काल में कला, स्थापत्य और धर्म (बौद्ध, हिंदू, जैन) का अभूतपूर्व विकास हुआ था।"},{"text":"'दुर्ग' जिले में 1910 के किसान आंदोलन का नेतृत्व किसने किया था?","options":["डॉ. खूबचंद बघेल","ठाकुर प्यारेलाल सिंह","पंडित सुंदरलाल शर्मा","नरसिंह प्रसाद अग्रवाल"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"ठाकुर प्यारेलाल सिंह छत्तीसगढ़ में श्रमिक और किसान आंदोलनों के प्रणेता थे। उन्होंने राजनांदगांव और दुर्ग क्षेत्र में किसानों व मिल मज़दूरों को संगठित कर उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने ही प्रसिद्ध 'BNC मिल आंदोलन' का सफल नेतृत्व किया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस स्थान से 'सातवाहन कालीन' काष्ठ स्तंभ प्राप्त हुआ है?","options":["मल्हार","किरारी","आरंग","सिरपुर"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"जांजगीर-चांपा के 'किरारी' गाँव से सातवाहन कालीन एक लकड़ी का स्तंभ (काष्ठ स्तंभ) प्राप्त हुआ है। इस पर तत्कालीन राजकीय अधिकारियों के पदनाम उत्कीर्ण हैं। यह छत्तीसगढ़ में सातवाहन शासन के प्रशासनिक ढांचे की महत्वपूर्ण जानकारी देता है।"},{"text":"1905 के 'बंगाल विभाजन' के समय छत्तीसगढ़ में कौन सी 5 रियासतें शामिल की गई थीं?","options":["बस्तर, कांकेर, रायगढ़, सारंगढ़, सक्ती","सरगुजा, जशपुर, उदयपुर, कोरिया, चांगभखार","खैरागढ़, छुईखदान, कवर्धा, राजनांदगांव, दुर्ग","उपरोक्त में से कोई नहीं"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"1905 में भाषाई आधार पर सीमाओं के पुनर्गठन के दौरान संबलपुर क्षेत्र को बंगाल प्रांत में भेज दिया गया और छोटा नागपुर क्षेत्र की 5 रियासतें (सरगुजा क्षेत्र) छत्तीसगढ़ में शामिल की गई थीं। इसी समय छत्तीसगढ़ का वर्तमान मानचित्र पहली बार स्पष्ट हुआ।"},{"text":"'बस्तर का मुक्ति संग्राम' (Great Liberation War) किस विद्रोह को कहा जाता है?","options":["भूमकाल विद्रोह","तारापुर विद्रोह","लिंगागिरि विद्रोह","मेेरिया विद्रोह"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"1856-57 के दौरान हुए लिंगागिरि विद्रोह को 'बस्तर का मुक्ति संग्राम' कहा जाता है। इसका नेतृत्व 'धुर्वाराम माड़िया' ने किया था। यह विद्रोह अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध बस्तर को स्वतंत्र कराने का एक महान प्रयास था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'सुबा पद्धति' का अंत किस वर्ष हुआ था?","options":["1787 ई.","1818 ई.","1830 ई.","1854 ई."],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"1818 में मराठों और अंग्रेजों के बीच हुए समझौते के बाद छत्तीसगढ़ ब्रिटिश संरक्षण में आ गया। इसके साथ ही भ्रष्ट 'सुबा पद्धति' का अंत हुआ और छत्तीसगढ़ का प्रशासन ब्रिटिश अधीक्षकों (Superintendents) के हाथों में चला गया। पहले अधीक्षक कैप्टन एडमंड थे।"},{"text":"'अनीकडोटल रिकॉर्ड' (Anecdotal Record) में मुख्य रूप से क्या दर्ज किया जाता है?","options":["छात्र के अंक","छात्र के व्यवहार की विशिष्ट घटना का संक्षिप्त वर्णन","छात्र के घर का पता","केवल उपस्थिति"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"शिक्षक जब किसी छात्र के व्यवहार की किसी खास घटना (जैसे किसी की मदद करना या झगड़ा सुलझाना) का वर्णनात्मक विवरण लिखता है, तो उसे अनीकडोटल रिकॉर्ड कहते हैं। यह छात्र के गुणात्मक विकास को मापने का साधन है।"},{"text":"'नल वंश' के किस शासक ने स्वर्ण सिक्के जारी किए थे जिन पर 'सिंह' की आकृति थी?","options":["भवदत्त वर्मन","अर्थपति भट्टारक","वराहराज","स्कंदवर्मन"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"नलवंशी शासक वराहराज के 29 स्वर्ण सिक्के कोंडागांव के 'एडेंगा' गाँव से प्राप्त हुए हैं। इन सिक्कों से सिद्ध होता है कि बस्तर क्षेत्र में नल वंश एक शक्तिशाली और समृद्ध राजवंश था। इनकी राजधानी 'पुष्करी' थी।"},{"text":"'विक्रमपुर' (वर्तमान बेलपान) नगर की स्थापना किस कल्चुरी शासक ने की थी?","options":["रत्नदेव प्रथम","पृथ्वीदेव द्वितीय","जाज्वल्यदेव द्वितीय","बाहेर साय"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"रत्नदेव प्रथम ने अपनी राजधानी तुम्माण से रतनपुर स्थानांतरित की थी (1050 ई.)। उन्होंने ही 'विक्रमपुर' और 'रत्नपुर' जैसे नगरों को विकसित किया था। उनके काल में रतनपुर को 'कुबेरपुर' की उपमा दी जाती थी क्योंकि वह अत्यंत समृद्ध नगर था।"},{"text":"'समान प्रतिमान का सिद्धांत' (Uniform Pattern) क्या स्पष्ट करता है?","options":["सब बच्चे एक जैसे होते हैं।","एक ही जाति के सभी प्राणियों का विकास क्रम एक समान होता है।","विकास कभी नहीं रुकता।","विकास केवल विद्यालय में होता है।"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"इस सिद्धांत के अनुसार, एक ही प्रजाति (जैसे मानव) के सभी बालकों के विकास का एक निश्चित क्रम होता है। चाहे बच्चा भारत का हो या अमेरिका का, वह पहले खिसकना, फिर बैठना और फिर चलना ही सीखेगा। हालाँकि, विकास की 'गति' अलग-अलग हो सकती है।"},{"text":"'टोली की आयु' (Gang Age) और 'गंदी अवस्था' किस काल को कहा जाता है?","options":["शैशवावस्था","बाल्यावस्था","किशोरावस्था","प्रौढ़ावस्था"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"6 से 12 वर्ष की आयु (बाल्यावस्था) को गैंग एज कहा जाता है क्योंकि इस दौरान बालक हमउम्र साथियों के साथ समूह बनाना पसंद करता है। इसे 'गंदी अवस्था' इसलिए कहते हैं क्योंकि खेल-कूद की सक्रियता के कारण बालक अपनी स्वच्छता के प्रति लापरवाह होता है।"},{"text":"\"मनोविज्ञान व्यवहार और अनुभव का विज्ञान है\" - यह परिभाषा किसकी है?","options":["स्किनर","वाटसन","वूडवर्थ","बिने"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"स्किनर ने इस परिभाषा में 'अनुभव' शब्द को जोड़कर मनोविज्ञान के क्षेत्र को व्यापक बनाया। उनका मानना था कि हमारा व्यवहार न केवल बाहरी उद्दीपकों से, बल्कि हमारे संचित अनुभवों से भी निर्धारित होता है।"},{"text":"'बाल विकास' की कौन सी अवस्था 'अपराध प्रवृत्ति' के विकास का नाजुक समय मानी जाती है?","options":["शैशवावस्था","बाल्यावस्था","किशोरावस्था","प्रौढ़ावस्था"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"वैलेंटाइन के अनुसार, किशोरावस्था वह समय है जब किशोर संवेगात्मक उथल-पुथल के कारण बहुत जल्दी गलत संगति या अपराध की ओर आकर्षित हो सकते हैं। यदि इस समय उन्हें सही मार्गदर्शन न मिले, तो वे भटक सकते हैं, इसीलिए इसे 'नाजुक समय' कहा गया है।"},{"text":"\"मनोविज्ञान आत्मा का विज्ञान है\" - यह किस काल की परिभाषा है?","options":["आधुनिक काल","16वीं शताब्दी","18वीं शताब्दी","20वीं शताब्दी"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"सबसे पहले अरस्तू और प्लेटो ने मनोविज्ञान को 'आत्मा का विज्ञान' (Study of Soul) माना था। बाद में इसे 'मन का विज्ञान' (17वीं सदी), 'चेतना का विज्ञान' (19वीं सदी) और अंततः 'व्यवहार का विज्ञान' (20वीं सदी) माना गया।\n[/pyq_quiz]"}],"feedbackHigh":"<h4>असाधारण प्रदर्शन!</h4><p>बधाई हो! आपकी इस विषय पर पकड़ उत्कृष्ट है।</p>","feedbackMedium":"<h4>बहुत अच्छा प्रयास!</h4><p>आपका प्रदर्शन सराहनीय है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में सुधार की गुंजाइश है।</p>","feedbackLow":"<h4>अभ्यास जारी रखें!</h4><p>निराश न हों। गलत हुए प्रश्नों की व्याख्याओं को ध्यान से पढ़ें और फिर से प्रयास करें।</p>","nextSteps":"<h4>आगे क्या पढ़ें?</h4><ul><li><a href=\"#\">संबंधित लेख 1</a></li></ul>"}" class="wp-block-msworld-practice-quiz">
🚀 हमसे सोशल मीडिया पर जुड़ें
लेटेस्ट अपडेट्स और फ्री नोट्स के लिए फॉलो करें:
क्या आप इस लेख को ऑफलाइन पढ़ना चाहते हैं?
📥 लेख को PDF में सेव करें

अपनी तैयारी को नई उड़ान दें!
ज्ञान और मार्गदर्शन के इस सफर में अकेला महसूस न करें। हमारे समुदाय से जुड़ें:
