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छत्तीसगढ़ का संपूर्ण इतिहास - मास्टर अभ्यास टेस्ट ","intro":"<p><strong>भावी अधिकारियों और छत्तीसगढ़ महतारी के सपूतों, आपका हार्दिक स्वागत है!</strong></p>\n\n<p>छत्तीसगढ़ का इतिहास केवल तिथियों का संग्रह नहीं, बल्कि अदम्य साहस, समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली राजवंशों की गाथा है। दक्षिण कोसल से लेकर आधुनिक छत्तीसगढ़ बनने तक के सफर को समझना हर गंभीर परीक्षार्थी के लिए अनिवार्य है। यह क्विज़ <strong>प्राचीन पांडुवंश, कल्चुरी शासन और वीर नारायण सिंह</strong> जैसे नायकों के बलिदान को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है।</p>\n\n<h4>इस क्विज़ की महत्वपूर्ण जानकारी:</h4>\n<p>• <strong>कुल प्रश्न:</strong> इस डेटाबेस में कुल 50 अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।<br>\n• <strong>स्मार्ट डिस्प्ले:</strong> एकाग्रता बनाए रखने के लिए हर बार केवल 15 रैंडम प्रश्न ही दिखाई देंगे। पेज रिफ्रेश करने पर आपको नए प्रश्न मिलेंगे।<br>\n• <strong>नेगेटिव मार्किंग:</strong> परीक्षा की सुचिता के लिए इसमें 1/3 नेगेटिव मार्किंग रखी गई है।<br>\n• <strong>विशेषता:</strong> प्रत्येक प्रश्न की व्याख्या एक विस्तृत नोट्स की तरह है, ताकि आपको रटने के बजाय ऐतिहासिक घटनाक्रम समझ आए।</p>\n\n<p><strong>लक्ष्य और उपयोगिता:</strong><br>\nयह क्विज़ विशेष रूप से <strong>CGPSC, CG व्यापम, शिक्षक भर्ती और पुलिस भर्ती</strong> परीक्षाओं के लिए तैयार किया गया है। अपनी जड़ों को जानें और सफलता सुनिश्चित करें।</p>\n\n<p><strong>नियम:</strong></p><p>[quiz_rules]</p>","duration":10,"negativeMarking":"1/3","displayCount":15,"questions":[{"text":"<script type="application/ld+json">{"@context":"https:\/\/schema.org","@type":"Quiz","name":"Previous Year Questions","hasPart":[]}</script><div class="pyq-main-container" ><div class="pyq-instruction-box"><strong>निर्देश:</strong> ","options":["प्रश्न: छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद 'वीर नारायण सिंह' को किस तिथि को रायपुर के जयस्तंभ चौक पर फांसी दी गई थी?","10 दिसंबर 1857","10 दिसंबर 1858","15 अगस्त 1857"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"उत्तर: 1\nव्याख्या: सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माने जाते हैं। उन्होंने अकाल के समय गरीबों को अनाज बांटने के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया था। उन्हें 10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जयस्तंभ चौक पर जनता के सामने फांसी दी गई थी।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'कल्चुरी वंश' की स्थापना किसने की थी?","options":["रत्नदेव प्रथम","कमलराज","कलिंगराज","जाज्वल्यदेव"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"छत्तीसगढ़ में कल्चुरी सत्ता की वास्तविक स्थापना लगभग 1000 ईस्वी में कलिंगराज ने की थी। उन्होंने तुम्माण (कोरबा) को अपनी पहली राजधानी बनाया था। कल्चुरी वंश ने छत्तीसगढ़ में सबसे लंबे समय तक (लगभग 800 वर्ष) शासन किया था।"},{"text":"प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ को किस नाम से जाना जाता था?","options":["मत्स्य जनपद","दक्षिण कोसल (Dakshin Kosala)","चेदि जनपद","दंडकारण्य"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"रामायण और महाभारत काल के दौरान छत्तीसगढ़ क्षेत्र को 'दक्षिण कोसल' के नाम से जाना जाता था। इसकी राजधानी 'कुशावती' या 'श्रीपुर' मानी जाती थी। भानुमंत यहाँ के प्रसिद्ध राजा थे जिनकी पुत्री कौशल्या का विवाह अयोध्या के राजा दशरथ से हुआ था।"},{"text":"बस्तर के 'छिंदक नागवंश' का संस्थापक कौन था?","options":["सोमेश्वर देव","नृपति भूषण","कन्हर देव","अन्नम देव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"बस्तर क्षेत्र में 11वीं शताब्दी के दौरान छिंदक नागवंश का शासन था। इस वंश के संस्थापक नृपति भूषण थे (1023 ई.)। इनकी राजधानी चक्रकोट (बारसूर) थी। बाद में काकतीय वंश ने इन्हें पराजित कर बस्तर पर अधिकार किया था।"},{"text":"'छत्तीसगढ़ का गांधी' किसे कहा जाता है?","options":["पंडित सुंदरलाल शर्मा","ठाकुर प्यारेलाल सिंह","डॉ. खूबचंद बघेल","यति यतनलाल"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"पंडित सुंदरलाल शर्मा को छत्तीसगढ़ का गांधी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने गांधीजी के आगमन से पूर्व ही यहाँ 'कंडेल नहर सत्याग्रह' (1920) और अछूतोद्धार का कार्य शुरू कर दिया था। गांधीजी ने स्वयं उन्हें अपना 'अग्रणी' (Precursor) माना था।"},{"text":"राजिम के प्रसिद्ध 'राजीव लोचन मंदिर' का निर्माण किस वंश के शासक ने करवाया था?","options":["कल्चुरी वंश","नल वंश (Nala Dynasty)","पांडु वंश","शरभपुरीय वंश"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"राजिम के राजीव लोचन मंदिर का निर्माण नलवंशी शासक 'विलासतुंग' ने 7वीं-8वीं शताब्दी के दौरान करवाया था। यह मंदिर विष्णु जी को समर्पित है और पंचायतन शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। नल वंश की राजधानी कोरापुट (पुष्करी) थी।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'मराठा शासन' की स्थापना किस वर्ष हुई थी?","options":["1741 ई.","1758 ई.","1787 ई.","1818 ई."],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"मराठा सेनापति भास्कर पंत ने 1741 में कल्चुरी शासक रघुनाथ सिंह को पराजित कर छत्तीसगढ़ पर मराठा प्रभुत्व स्थापित किया था। हालांकि, प्रत्यक्ष मराठा शासन 1758 में बिम्बाजी भोंसले के आगमन के साथ शुरू हुआ, जिन्होंने रतनपुर को अपनी राजधानी बनाया।"},{"text":"'सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर' का निर्माण किसने पूर्ण करवाया था?","options":["महासिवगुप्त बालार्जुन","रानी वासटा (Rani Vasata)","हर्षगुप्त","तीवरदेव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"सिरपुर (महासमुंद) के प्रसिद्ध लाल ईंटों के लक्ष्मण मंदिर का निर्माण पांडुवंशी राजा हर्षगुप्त की स्मृति में उनकी पत्नी रानी वासटा ने शुरू करवाया था। इसे महासिवगुप्त बालार्जुन के काल में पूर्ण किया गया। यह मंदिर गुप्तकालीन स्थापत्य कला का सुंदर नमूना है।"},{"text":"'प्रयाग प्रशस्ति' में छत्तीसगढ़ के किस राजा का उल्लेख समुद्रगुप्त के विजय अभियान के दौरान मिलता है?","options":["महेंद्र (Mahendra)","व्याघ्रराज","रुद्रसेन","कलिंगराज"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार, गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त ने अपने दक्षिणापथ अभियान के दौरान कोसल के राजा 'महेंद्र' और महाकांतार के राजा 'व्याघ्रराज' को पराजित किया था। समुद्रगुप्त ने इन्हें 'ग्रहण-मोक्षानुग्रह' नीति के तहत राज्य वापस कर दिया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस स्थान को 'प्राचीन काल का काशी' या 'चौराहों का शहर' कहा जाता है?","options":["राजिम","खरोद (Kharod)","सिरपुर","आरंग"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"खरोद (जांजगीर-चांपा) को छत्तीसगढ़ का काशी कहा जाता है। यहाँ का लक्ष्मणेश्वर मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। खरोद पांडुवंशी और कल्चुरी काल में शिक्षा और धर्म का एक प्रमुख केंद्र था। (नोट: रायपुर को चौराहों का शहर कहा जाता है, प्रश्न के विकल्प के अनुसार खरोद काशी के लिए सटीक है)।"},{"text":"मराठा काल में 'परगना पद्धति' का जन्मदाता कौन था?","options":["बिम्बाजी भोंसले","व्यंकोजी भोंसले","विट्ठलराव दिनकर","महीपतराव दिनकर"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधार के लिए सूबेदार विट्ठलराव दिनकर ने 'परगना पद्धति' की शुरुआत की थी। उन्होंने संपूर्ण छत्तीसगढ़ को 27 परगनों में विभाजित किया था। परगना का प्रमुख अधिकारी 'कमाविसदार' कहलाता था।"},{"text":"1910 के प्रसिद्ध 'भूमकाल विद्रोह' का नेतृत्व किसने किया था?","options":["गुंडाधुर (Gunda Dhur)","वीर नारायण सिंह","गेंद सिंह","हनुमान सिंह"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"बस्तर के इतिहास में 1910 का भूमकाल विद्रोह सबसे व्यापक था। इसका नेतृत्व धुर्वा जनजाति के नेता गुंडाधुर ने किया था। इस विद्रोह का प्रतीक 'लाल मिर्च और आम की टहनी' थी। विद्रोह का मुख्य कारण ब्रिटिश प्रशासन का शोषण और वन अधिकारों का हनन था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'कलचुरी वंश' की कुलदेवी कौन थी?","options":["माँ दंतेश्वरी","महालक्ष्मी","गजलक्ष्मी (Gajlakshmi)","माँ बमलेश्वरी"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"कल्चुरी वंश के राजा भगवान शिव के उपासक थे, लेकिन उनकी कुलदेवी 'गजलक्ष्मी' थी। उनके सिक्कों पर भी गजलक्ष्मी की आकृति अंकित मिलती है। कल्चुरी शासकों ने रतनपुर में अनेक भव्य मंदिरों का निर्माण कराया था।"},{"text":"किस शासक ने अपनी राजधानी सिरपुर से बदलकर 'विनीतपुर' (सोनपुर) की थी?","options":["तीवरदेव","महासिवगुप्त बालार्जुन","महाभवगुप्त जनमेजय (Somvanshi)","हर्षगुप्त"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"सोमवंशी शासक महाभवगुप्त जनमेजय ने कोसल क्षेत्र पर अधिकार करने के बाद अपनी राजधानी विनीतपुर स्थानांतरित की थी। सोमवंशियों को 'पांडुवंश' की ही एक शाखा माना जाता है जिन्होंने बाद में ओडिशा क्षेत्र तक अपना विस्तार किया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'जंगल सत्याग्रह' के दौरान 1930 में 'तमोरा' सत्याग्रह का नेतृत्व किसने किया था?","options":["यति यतनलाल (Yati Yatanlal)","सुंदरलाल शर्मा","रविशंकर शुक्ल","शंकरराव गनोदवाले"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) के दौरान छत्तीसगढ़ में कई जंगल सत्याग्रह हुए। महासमुंद के 'तमोरा' में यति यतनलाल और अरिमर्दन गिरि ने नेतृत्व किया था। यहाँ एक बालिका 'दयावती' ने अंग्रेज अधिकारी को थप्पड़ मारकर अदम्य साहस का परिचय दिया था।"},{"text":"'महासिवगुप्त बालार्जुन' के शासनकाल को छत्तीसगढ़ का क्या कहा जाता है?","options":["अंधकार युग","स्वर्ण युग (Golden Age)","मराठा युग","क्रांतिकारी युग"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"पांडुवंशी शासक महासिवगुप्त बालार्जुन के शासनकाल (लगभग 595-655 ई.) को छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास का 'स्वर्ण युग' माना जाता है। उनके काल में सिरपुर में कला, स्थापत्य और धर्म (बौद्ध, हिंदू, जैन) का अभूतपूर्व विकास हुआ था। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग भी इसी समय सिरपुर आया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस प्रसिद्ध व्यक्ति ने 'गोंडवाना शोध संस्थान' की स्थापना की थी?","options":["ठाकुर प्यारेलाल सिंह","डॉ. खूबचंद बघेल","पंडित सुंदरलाल शर्मा","रविशंकर शुक्ल"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"डॉ. खूबचंद बघेल छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के प्रणेता थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ी संस्कृति और अस्मिता को जगाने के लिए 'गोंडवाना शोध संस्थान' की स्थापना की थी। उन्होंने 'छत्तीसगढ़ भ्रातृ संघ' (1967) का भी गठन किया था।"},{"text":"प्राचीन राजवंश 'शरभपुरीय' की राजधानी क्या थी?","options":["सिरपुर","शरभपुर (Sharabhpur)","प्रसन्नपुर","मल्हार"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"शरभपुरीय वंश के संस्थापक शरभराज थे और उनकी राजधानी शरभपुर थी। इस वंश के प्रतापी राजा प्रसन्नमात्र ने निडिला नदी के तट पर 'प्रसन्नपुर' नगर बसाया था। इनके सिक्कों पर 'गजलक्ष्मी' और 'शंख-चक्र' के चिन्ह मिलते हैं।"},{"text":"'काकतीय वंश' का अंतिम शासक कौन था जिसने भारतीय संघ में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे?","options":["अन्नम देव","पुरुषोत्तम देव","प्रवीर चंद्र भंजदेव (Pravir Chandra Bhanj Deo)","प्रताप रुद्र देव"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"बस्तर के काकतीय वंश के अंतिम शासक महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव थे। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय उन्होंने बस्तर रियासत का भारत संघ में विलय किया था। वे बस्तर की जनता के बीच 'लोकप्रिय देवता' के समान पूजे जाते थे।"},{"text":"1857 की क्रांति के दौरान छत्तीसगढ़ में 'मंगल पांडे' किसे कहा जाता है?","options":["वीर नारायण सिंह","गेंद सिंह","हनुमान सिंह (Hanuman Singh)","सुरेंद्र साय"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"रायपुर मैगजीन लश्कर के सिपाही हनुमान सिंह को 'छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे' कहा जाता है। उन्होंने 18 जनवरी 1858 को ब्रिटिश सार्जेंट मेजर सिडवेल की हत्या कर विद्रोह का बिगुल फूंका था। उनके 17 साथियों को फांसी दे दी गई थी, लेकिन हनुमान सिंह कभी पकड़े नहीं गए।"},{"text":"'रत्नपुर के कल्चुरी' वंश के किस शासक ने अपनी राजधानी रतनपुर से 'कोसगई' स्थानांतरित की थी?","options":["रत्नदेव द्वितीय","जाज्वल्यदेव प्रथम","बाहर साय (Bahar Sai)","कल्याण साय"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"कल्चुरी शासक बाहर साय ने सुरक्षा की दृष्टि से अपनी राजधानी रतनपुर से बदलकर कोसगई (कोरबा) की थी। उन्होंने कोसगई में किला और मंदिर का निर्माण भी करवाया था। इनके समय तक छत्तीसगढ़ में कल्चुरी सत्ता धीरे-धीरे कमजोर होने लगी थी।"},{"text":"'भोरमदेव मंदिर' का निर्माण किस राजवंश के काल में हुआ था?","options":["कल्चुरी वंश","फणि नागवंश (Phani Nagvanshi)","नल वंश","पांडु वंश"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"कवर्धा (कबीरधाम) के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर का निर्माण फणि नागवंशी राजा 'गोपाल देव' ने 11वीं शताब्दी (1089 ई.) में करवाया था। इस मंदिर को अपनी कामुक मूर्तिकला और स्थापत्य के कारण 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' कहा जाता है।"},{"text":"महात्मा गांधी का छत्तीसगढ़ में 'प्रथम आगमन' किस तिथि को हुआ था?","options":["20 दिसंबर 1920","20 दिसंबर 1921","20 नवंबर 1920","26 जनवरी 1920"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"गांधीजी पहली बार 20 दिसंबर 1920 को धमतरी के 'कंडेल नहर सत्याग्रह' में शामिल होने रायपुर आए थे। उनके साथ मौलाना शौकत अली भी थे। गांधीजी का यह दौरा छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने में मील का पत्थर साबित हुआ था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ की 'रियासतों' का भारत संघ में विलय किस वर्ष पूर्ण हुआ था?","options":["15 अगस्त 1947","1 जनवरी 1948 (January 1, 1948)","26 जनवरी 1950","1 नवंबर 1956"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"छत्तीसगढ़ की कुल 14 रियासतों (जैसे बस्तर, सरगुजा, रायगढ़ आदि) का भारत संघ में औपचारिक विलय 1 जनवरी 1948 को हुआ था। सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से इन रियासतों ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।"},{"text":"'शिशुपाल पर्वत' छत्तीसगढ़ के किस जिले में स्थित है जिसका संबंध ऐतिहासिक युद्धों से रहा है?","options":["बस्तर","महासमुंद (Mahasamund)","सरगुजा","कोरिया"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"शिशुपाल पर्वत महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र में स्थित है। लोक कथाओं के अनुसार, यहाँ राजा शिशुपाल का शासन था। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्त्व के कारण जाना जाता है।"},{"text":"चीनी यात्री 'ह्वेनसांग' (Hiuen Tsang) ने अपनी पुस्तक में छत्तीसगढ़ (कोसल) के लिए किस शब्द का प्रयोग किया है?","options":["कोसला","किया-सो-लो (Kia-lo-lo)","दक्खिन पथ","चेदिगढ़"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"7वीं शताब्दी में जब ह्वेनसांग सिरपुर आया था, तब उसने अपनी यात्रा वृत्तांत 'सी-यू-की' में इस क्षेत्र को 'किया-सो-लो' (Kia-lo-lo) नाम से संबोधित किया था। उसने सिरपुर को बौद्ध शिक्षा का एक समृद्ध केंद्र बताया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के 'नल वंश' और 'वाकाटक वंश' के बीच लंबे समय तक चले संघर्ष का उल्लेख किस अभिलेख में मिलता है?","options":["प्रयाग प्रशस्ति","ऐहोल अभिलेख","रिद्धिपुर अभिलेख (Riddhapur Plates)","राजिम अभिलेख"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"नलवंशी शासक भवदत्त वर्मन के 'रिद्धिपुर ताम्रपत्र' और वाकाटक नरेश पृथ्वीसेन के अभिलेखों से पता चलता है कि इन दोनों वंशों के बीच बस्तर क्षेत्र को लेकर भीषण संघर्ष हुआ था। एक समय नलवंशियों ने वाकाटकों की राजधानी नंदीवर्धन तक पर अधिकार कर लिया था।"},{"text":"'सातवाहन काल' के महत्वपूर्ण साक्ष्य 'काष्ठ स्तंभ' छत्तीसगढ़ के किस स्थान से प्राप्त हुए हैं?","options":["मल्हार","किरारी (Kirari)","आरंग","सिरपुर"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"जांजगीर-चांपा के 'किरारी' गाँव से सातवाहन कालीन एक लकड़ी का स्तंभ (काष्ठ स्तंभ) प्राप्त हुआ है। इस पर तत्कालीन राजकीय अधिकारियों के पदनाम उत्कीर्ण हैं। यह छत्तीसगढ़ में सातवाहन शासन के प्रशासनिक ढांचे की महत्वपूर्ण जानकारी देता है।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'डिप्टी कमिश्नर' पद की शुरुआत किस वर्ष हुई थी?","options":["1818 ई.","1854 ई. (1854 AD)","1861 ई.","1905 ई."],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"1854 में जब नागपुर रियासत के साथ छत्तीसगढ़ को भी 'लैप्स की नीति' के तहत ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया, तब यहाँ प्रशासनिक व्यवस्था के लिए 'डिप्टी कमिश्नर' की नियुक्ति शुरू हुई। छत्तीसगढ़ के पहले डिप्टी कमिश्नर 'चार्ल्स इलियट' थे।"},{"text":"कल्चुरी शासक 'जाज्वल्यदेव प्रथम' ने किस नगर की स्थापना की थी और वहां एक विशाल तालाब बनवाया था?","options":["रतनपुर","पाली","जांजगीर (Janjgir)","खरोद"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"जाज्वल्यदेव प्रथम कल्चुरी वंश के सबसे प्रतापी राजा थे। उन्होंने अपने नाम पर 'जाज्वल्यपुर' (वर्तमान जांजगीर) नगर बसाया था। उन्होंने वहां एक विशाल मंदिर और तालाब का निर्माण भी करवाया था। उन्होंने ही सबसे पहले 'स्वर्ण सिक्के' जारी किए थे जिन पर 'श्रीमद्जाज्वल्यदेव' अंकित था।"},{"text":"1923 के 'रायपुर ध्वज सत्याग्रह' का नेतृत्व किसने किया था?","options":["पंडित सुंदरलाल शर्मा","ठाकुर प्यारेलाल सिंह","पंडित रविशंकर शुक्ल","उपरोक्त सभी"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"नागपुर के झंडा सत्याग्रह की तर्ज पर रायपुर में भी 'ध्वज सत्याग्रह' हुआ था। इसका प्रमुख नेतृत्व ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने किया था। इस आंदोलन में छत्तीसगढ़ के युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था और तिरंगे के सम्मान के लिए जेल यात्राएं की थीं।"},{"text":"'बस्तर का मुक्ति संग्राम' (Great Liberation War of Bastar) किसे कहा जाता है?","options":["भूमकाल विद्रोह","तारापुर विद्रोह (Tarapur Rebellion)","लिंगागिरि विद्रोह","मेेरिया विद्रोह"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"1856-57 के दौरान हुए लिंगागिरि विद्रोह को 'बस्तर का मुक्ति संग्राम' कहा जाता है। इसका नेतृत्व 'धुर्वाराम माड़िया' ने किया था। यह विद्रोह अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध बस्तर को स्वतंत्र कराने का एक महान प्रयास था।"},{"text":"'छत्तीसगढ़ का तात्या टोपे' किसे कहा जाता है?","options":["हनुमान सिंह","सुरेंद्र साय","गुंडाधुर","वीर नारायण सिंह"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"संबलपुर के वीर सुरेंद्र साय को 'छत्तीसगढ़ का तात्या टोपे' कहा जाता है। उन्होंने 1857 की क्रांति के दौरान और उसके बाद भी लंबे समय तक अंग्रेजों के खिलाफ छापामार युद्ध जारी रखा था। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम 20 वर्ष असीरगढ़ के किले में बिताए थे।"},{"text":"'विक्रमपुर' (वर्तमान बेलपान) नगर की स्थापना किस कल्चुरी शासक ने की थी?","options":["रत्नदेव प्रथम","पृथ्वीदेव द्वितीय","जाज्वल्यदेव द्वितीय","बाहेर साय"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"रत्नदेव प्रथम ने अपनी राजधानी तुम्माण से रतनपुर स्थानांतरित की थी (1050 ई.)। उन्होंने ही 'विक्रमपुर' और 'रत्नपुर' जैसे नगरों को विकसित किया था। उनके काल में रतनपुर को 'कुबेरपुर' की उपमा दी जाती थी क्योंकि वह अत्यंत समृद्ध नगर था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के 'पांडु वंश' के किस शासक ने 'सकल कौसलाधिपति' की उपाधि धारण की थी?","options":["नन्नदेव","तीवरदेव (Tivardev)","चंद्रगुप्त","हर्षगुप्त"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"पांडुवंशी राजा तीवरदेव एक महान विजेता थे। उन्होंने संपूर्ण कोसल क्षेत्र को जीतकर 'सकल कौसलाधिपति' की उपाधि धारण की थी। वे वैष्णव धर्म के अनुयायी थे और उन्होंने श्रीपुर (सिरपुर) को अपनी शक्ति का केंद्र बनाया था।"},{"text":"'पंडित रविशंकर शुक्ल' छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री किस वर्ष बने?","options":["1947 में","1950 में","1952 में (After first general election)","1956 में"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"1952 के पहले आम चुनावों के बाद पंडित रविशंकर शुक्ल 'मध्य प्रदेश' (पुराना C.P. and Berar) के मुख्यमंत्री बने, जिसमें छत्तीसगढ़ भी शामिल था। 1 नवंबर 1956 को जब नवीन मध्य प्रदेश बना, तब भी वे इसके पहले मुख्यमंत्री बने। उन्हें आधुनिक छत्तीसगढ़ का निर्माता भी कहा जाता है।"},{"text":"'कल्चुरी और मराठों' के बीच शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण किस राजा के समय हुआ था?","options":["राजसिंह","रघुनाथ सिंह (Raghunath Singh)","मोहन सिंह","अमर सिंह"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"1741 में जब भास्कर पंत ने आक्रमण किया, तब कल्चुरी शासक रघुनाथ सिंह वृद्ध थे और पुत्र शोक में डूबे थे। उन्होंने बिना किसी बड़े प्रतिरोध के मराठों की अधीनता स्वीकार कर ली थी। इस प्रकार रतनपुर में कल्चुरी सत्ता का अंत और मराठा प्रभाव शुरू हुआ।"},{"text":"प्राचीन काल में 'बस्तर' को किस नाम से जाना जाता था?","options":["चक्रकोट","महाकांतार (Mahakantar)","दंडकारण्य","उपरोक्त सभी"],"correctAnswerIndex":"3","explanation":"बस्तर क्षेत्र के विभिन्न कालखंडों में अलग-अलग नाम रहे हैं। रामायण काल में इसे 'दंडकारण्य' कहा गया, महाभारत काल में 'कांतार' और गुप्त काल में इसे 'महाकांतार' कहा गया। मध्यकाल में नागवंशी शासकों के समय इसे 'चक्रकोट' या 'भ्रमरकोट' के नाम से जाना जाता था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'होमरूल लीग' आंदोलन के प्रमुख नेता कौन थे?","options":["पंडित रविशंकर शुक्ल","ई. राघवेंद्र राव","घनश्याम सिंह गुप्त","उपरोक्त सभी"],"correctAnswerIndex":"3","explanation":"1916-17 के दौरान एनी बेसेंट और तिलक के होमरूल लीग आंदोलन का प्रभाव छत्तीसगढ़ में भी रहा। रायपुर में रविशंकर शुक्ल, बिलासपुर में ई. राघवेंद्र राव और दुर्ग में घनश्याम सिंह गुप्त ने इसकी शाखाएं खोली थीं और जनजागरूकता फैलाई थी।"},{"text":"'दुर्ग' में 1930 के 'दही सत्याग्रह' का नेतृत्व किसने किया था?","options":["नरसिंह प्रसाद अग्रवाल (Narsingh Prasad Agrawal)","रविशंकर शुक्ल","महंत लक्ष्मी नारायण","सुंदरलाल शर्मा"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान दुर्ग जिले में 'दही सत्याग्रह' हुआ था, जिसका नेतृत्व नरसिंह प्रसाद अग्रवाल ने किया था। यह आंदोलन स्थानीय स्तर पर सरकारी करों और नीतियों के विरोध का एक अनोखा तरीका था।"},{"text":"प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल 'मल्हार' किन नदियों के संगम पर स्थित है?","options":["महानदी और शिवनाथ","अरपा, पैरी और महानदी","लीलागर (Maniari/Arpa context)","महानदी और हसदेव"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"बिलासपुर जिले का मल्हार (प्राचीन नाम- प्रसन्नपुर) लीलागर नदी के तट पर स्थित है। यहाँ से सातवाहन, शरभपुरीय और कल्चुरी कालीन महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए हैं। 'डिढनेश्वरी देवी' का मंदिर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'सुबा शासन' के दौरान कुल कितने सूबेदार नियुक्त हुए थे?","options":["5","8 (Eight Subedars)","10","12"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"मराठा शासक व्यंकोजी भोंसले ने छत्तीसगढ़ में 'सुबा पद्धति' शुरू की थी। 1787 से 1818 के बीच कुल 8 सूबेदार नियुक्त हुए। पहले सूबेदार 'महीपतराव दिनकर' थे और अंतिम 'यादवराव दिवाकर' थे। इस काल को छत्तीसगढ़ के इतिहास का 'शोषणकारी युग' माना जाता है।"},{"text":"'बिलासपुर' शहर का नाम किस महिला के नाम पर रखा गया माना जाता है?","options":["बिलासा बाई केंवटिन (Bilasa Bai Kewatin)","रानी वासटा","मोंटेसरी देवी","बमलेश्वरी देवी"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"जनश्रुतियों के अनुसार, बिलासपुर का नाम 'बिलासा बाई केंवटिन' नामक एक साहसी मछुआरा महिला के नाम पर पड़ा। वह कल्चुरी काल के दौरान अपनी वीरता के लिए जानी जाती थी। छत्तीसगढ़ सरकार उनके सम्मान में मत्स्य पालन के क्षेत्र में पुरस्कार भी देती है।"},{"text":"1937 में गठित 'मध्य प्रांत और बरार' की विधानसभा के अध्यक्ष कौन चुने गए थे?","options":["रविशंकर शुक्ल","ई. राघवेंद्र राव","घनश्याम सिंह गुप्त (Ghanshyam Singh Gupta)","सुंदरलाल शर्मा"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"दुर्ग के प्रसिद्ध नेता घनश्याम सिंह गुप्त को 1937 में प्रांतीय विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया था। उन्हें 'विधान पुरुष' के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने भारतीय संविधान के हिंदी अनुवाद समिति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।"},{"text":"'छत्तीसगढ़ मित्र' नामक राज्य का प्रथम समाचार पत्र किस वर्ष प्रकाशित हुआ था?","options":["1889 ई.","1900 ई. (1900 AD)","1920 ई.","1935 ई."],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"छत्तीसगढ़ का पहला समाचार पत्र 'छत्तीसगढ़ मित्र' वर्ष 1900 में पेंड्रा रोड (बिलासपुर) से प्रकाशित हुआ था। इसके संपादक 'माधवराव सप्रे' थे। इस पत्र ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता और राजनीतिक चेतना की नींव रखी थी।"},{"text":"'पांडु वंश' के बाद छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से पर किस वंश का शासन रहा?","options":["बाण वंश (Bana Dynasty)","मुगल वंश","मौर्य वंश","शुंग वंश"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"9वीं शताब्दी के दौरान पाली (कोरबा) क्षेत्र में 'बाण वंश' का शासन था। इस वंश के राजा 'विक्रमादित्य' ने पाली के प्रसिद्ध शिव मंदिर का निर्माण करवाया था। बाद में कल्चुरी शासक शंकरगण द्वितीय ने इन्हें पराजित कर इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'कंडेल नहर सत्याग्रह' (1920) का मुख्य कारण क्या था?","options":["अंग्रेजों द्वारा सिंचाई पर लगाया गया भारी जुर्माना","जंगलों की कटाई","जमीन हड़पना","नमक कानून"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"धमतरी के कंडेल गाँव के किसानों पर अंग्रेजों ने 'नहर का पानी चोरी' करने का झूठा आरोप लगाकर भारी जुर्माना लगा दिया था। इसके विरोध में बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव और सुंदरलाल शर्मा ने सत्याग्रह किया। इसी आंदोलन के कारण गांधीजी का पहली बार छत्तीसगढ़ आगमन हुआ था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस स्थान से 'मौर्य कालीन' सिक्के और साक्ष्य प्राप्त हुए हैं?","options":["अकलतरा और ठठारी","तारापुर और बारसुर","सिरपुर और राजिम","मल्हार और आरंग"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"मौर्य सम्राट अशोक के शासन के साक्ष्य छत्तीसगढ़ में मिलते हैं। जांजगीर-चांपा के अकलतरा, ठठारी और रायगढ़ के 'बार' से मौर्यकालीन आहत सिक्के (Punch marked coins) प्राप्त हुए हैं। सरगुजा की रामगढ़ पहाड़ियों (जोगीमारा गुफा) में मौर्यकालीन शिलालेख भी मिले हैं।"},{"text":"'हड़प्पा सभ्यता' के समकालीन साक्ष्य छत्तीसगढ़ के किस स्थान से प्राप्त होते हैं?","options":["छत्तीसगढ़ में हड़प्पा के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं।","बस्तर से","रायगढ़ की गुफाओं से (पाषाण काल साक्ष्य)","रायपुर से"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"तकनीकी रूप से छत्तीसगढ़ में सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा) के कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले हैं। हालाँकि, रायगढ़ जिले के सिंघनपुर और कबरा पहाड़ से 'पाषाण काल' (Stone Age) के शैलचित्र प्राप्त हुए हैं, जो हड़प्पा से भी प्राचीन माने जाते हैं।"},{"text":"छत्तीसगढ़ राज्य का गठन भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत हुआ है?","options":["अनुच्छेद 1","अनुच्छेद 3 (Article 3)","अनुच्छेद 12","अनुच्छेद 370"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्यों के गठन, नाम परिवर्तन और सीमा परिवर्तन की शक्ति प्रदान करता है। इसी अनुच्छेद के तहत 'मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000' पारित कर 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश का 26वां राज्य बना।\n</div></div>"}],"feedbackHigh":"<h4>अतुलनीय ऐतिहासिक ज्ञान!</h4><p>बधाई हो! छत्तीसगढ़ के इतिहास पर आपकी पकड़ बहुत मजबूत है। आप निश्चित रूप से एक सफल प्रशासनिक अधिकारी बनने की योग्यता रखते हैं।</p>","feedbackMedium":"<h4>सराहनीय प्रयास, रिविज़न बढ़ाएं!</h4><p>आपका प्रदर्शन अच्छा है, लेकिन कुछ विशिष्ट राजवंशों और तिथियों में सुधार की जरूरत है। व्याख्याओं को ध्यान से नोट करें, वे आपके नोट्स का काम करेंगी।</p>","feedbackLow":"<h4>निरंतर अध्ययन की आवश्यकता!</h4><p>हताश न हों! इतिहास एक विस्तृत विषय है। यूआरएल में दिए गए संपूर्ण इतिहास के नोट्स को पुनः गहराई से पढ़ें और दोबारा इस टेस्ट को दें।</p>","nextSteps":"<h4>अपनी तैयारी को और बेहतर बनाएं</h4>\n<p>इस टेस्ट के बाद, नीचे दिए गए लेखों को पढ़कर अपने ज्ञान को और गहरा करें:</p>\n<ul>\n <li><a href=\"https://msworldhindi.com/chhattisgarh-general-knowledge-notes-hindi/\">छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान: सम्पूर्ण नोट्स</a></li>\n <li><a href=\"https://msworldhindi.com/chhattisgarh-tribes-culture-notes-hindi/\">छत्तीसगढ़ की जनजातियां एवं संस्कृति</a></li>\n <li><a href=\"https://msworldhindi.com/chhattisgarh-geography-river-system-hindi/\">छत्तीसगढ़ का भूगोल और नदी अपवाह तंत्र</a></li>\n <li><a href=\"https://msworldhindi.com/chhattisgarh-panchayati-raj-notes-hindi/\">छत्तीसगढ़ पंचायती राज एवं नगरीय निकाय</a></li>\n</ul>"}" class="wp-block-msworld-practice-quiz">
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