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छत्तीसगढ़ का संपूर्ण इतिहास: महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्नावली","intro":"<p>भावी अधिकारियों, छत्तीसगढ़ की गौरवशाली धरा का इतिहास साहस और संघर्ष की अनूठी मिसाल है। <strong>CGPSC और व्यापम</strong> की आगामी परीक्षाओं में अपनी सफलता सुनिश्चित करने के लिए इतिहास के इन महत्वपूर्ण तथ्यों पर पकड़ बनाना अनिवार्य है। यह प्रश्नावली आपके तार्किक कौशल और स्मृतियों को परखने के लिए तैयार की गई है।</p>\n\n<h4>क्विज़ की महत्वपूर्ण जानकारी:</h4>\n<p>• इस मास्टर डेटाबेस में कुल <strong>50 अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न</strong> शामिल हैं।<br>\n• आपकी तैयारी को प्रभावी बनाने के लिए हर बार केवल <strong>15 रैंडम प्रश्न</strong> ही स्क्रीन पर आएंगे (रिफ्रेश करने पर नए प्रश्न मिलेंगे)।<br>\n• वास्तविक परीक्षा के अनुभव के लिए इसमें <strong>1/3 की नेगेटिव मार्किंग</strong> रखी गई है।<br>\n• प्रत्येक प्रश्न के बाद दी गई <strong>विस्तृत व्याख्या</strong> को ध्यान से पढ़ें, यह आपके रिविज़न नोट्स का कार्य करेगी।</p>\n\n<p><strong>नियम:</strong></p><p>[quiz_rules]</p>","duration":10,"negativeMarking":"1/3","displayCount":15,"questions":[{"text":"बस्तर का प्रसिद्ध 'हल्बा विद्रोह' (1774-79) किस शासक के काल में हुआ था?","options":["अन्नम देव","अजमेर सिंह","दरिया देव","भैरम देव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"हल्बा विद्रोह बस्तर के उत्तराधिकार के संघर्ष का परिणाम था। अजमेर सिंह ने हल्बा आदिवासियों के सहयोग से अपने भाई दरिया देव के विरुद्ध विद्रोह किया था। अजमेर सिंह को 'बस्तर का प्रथम क्रांतिकारी' भी माना जाता है। इस विद्रोह के बाद बस्तर में मराठा और अंग्रेजों का हस्तक्षेप बढ़ गया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस स्थान को 'मूर्तिकला का द्वीप' या 'पुरातात्विक स्वर्ग' कहा जाता है?","options":["सिरपुर","मल्हार","तालागांव","दीपडीह"],"correctAnswerIndex":"3","explanation":"बलरामपुर जिले के कन्हार और गलफुला नदियों के संगम पर स्थित 'दीपडीह' को पुरातात्विक महत्व के कारण मूर्तिकला का स्वर्ग कहा जाता है। यहाँ पंचायतन शैली के मंदिरों और भगवान शिव व शक्ति की अनेक खंडित प्रतिमाओं के अवशेष मिले हैं।"},{"text":"1857 की क्रांति के दौरान 'रायपुर सैन्य विद्रोह' का नेतृत्व किसने किया था?","options":["वीर नारायण सिंह","हनुमान सिंह","गेंद सिंह","सुरेंद्र साय"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"रायपुर मैगजीन लश्कर के सिपाही हनुमान सिंह ने 18 जनवरी 1858 को ब्रिटिश सार्जेंट मेजर सिडवेल की हत्या कर सैन्य विद्रोह किया था। उन्हें 'छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे' कहा जाता है। उनके 17 साथियों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी, लेकिन हनुमान सिंह कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आए।"},{"text":"'छत्तीसगढ़ का गांधी' कहे जाने वाले पंडित सुंदरलाल शर्मा ने 'कंडेल नहर सत्याग्रह' किस वर्ष किया था?","options":["1917 में","1920 में","1922 में","1930 में"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"धमतरी जिले के कंडेल गाँव के किसानों पर अंग्रेजों द्वारा लगाए गए पानी जुर्माने के विरोध में वर्ष 1920 में 'कंडेल नहर सत्याग्रह' हुआ था। इसका सफल नेतृत्व पंडित सुंदरलाल शर्मा, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव और नत्थूजी जगताप ने किया था। इसी आंदोलन ने गांधीजी को पहली बार छत्तीसगढ़ आने के लिए प्रेरित किया।"},{"text":"समुद्रगुप्त की 'प्रयाग प्रशस्ति' में छत्तीसगढ़ के किस राजा को 'व्याघ्रराज' के नाम से संबोधित किया गया है?","options":["कोसल का राजा","महाकांतार का राजा","दक्षिण कोसल का राजा","दंडकारण्य का राजा"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"प्रयाग प्रशस्ति के लेखक हरिषेण के अनुसार, समुद्रगुप्त ने अपने दक्षिणापथ अभियान के दौरान महाकांतार (वर्तमान बस्तर क्षेत्र) के राजा 'व्याघ्रराज' को पराजित किया था। वहीं कोसल के राजा का नाम 'महेंद्र' बताया गया है। समुद्रगुप्त ने इन राज्यों को जीतकर वापस कर दिया था।"},{"text":"राजिम के प्रसिद्ध 'कुलेश्वर महादेव मंदिर' का निर्माण किस राजवंश के समय हुआ था?","options":["नल वंश","कल्चुरी वंश","सोम वंश","शरभपुरीय वंश"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण सोमवंशी शासकों के काल में हुआ माना जाता है। यह मंदिर अपनी प्राचीन बनावट और धार्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है। राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग भी कहा जाता है।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'मराठा शासन' के दौरान 'परगना पद्धति' की शुरुआत किसने की थी?","options":["बिम्बाजी भोंसले","व्यंकोजी भोंसले","विट्ठलराव दिनकर","महीपतराव दिनकर"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों के लिए सूबेदार विट्ठलराव दिनकर ने परगना पद्धति की शुरुआत की थी। उन्होंने संपूर्ण छत्तीसगढ़ को 27 परगनों में विभाजित किया था। परगना का प्रमुख अधिकारी 'कमाविसदार' कहलाता था, जिसे राजस्व और न्याय दोनों शक्तियाँ प्राप्त थीं।"},{"text":"'सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर' का निर्माण लाल ईंटों से किसने करवाया था?","options":["महासिवगुप्त बालार्जुन","रानी वासटा","हर्षगुप्त","तीवरदेव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"महासमुंद जिले के सिरपुर में स्थित प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर का निर्माण पांडुवंशी राजा हर्षगुप्त की स्मृति में उनकी पत्नी 'रानी वासटा' ने 7वीं शताब्दी में करवाया था। यह मंदिर गुप्तकालीन स्थापत्य कला और लाल ईंटों के बेहतरीन उपयोग के लिए जाना जाता है।"},{"text":"1910 के प्रसिद्ध 'भूमकाल विद्रोह' का प्रतीक चिन्ह क्या था?","options":["लाल मिर्च और आम की टहनी","तीर और कमान","कमल का फूल","ढाल और तलवार"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"बस्तर के इतिहास का सबसे व्यापक विद्रोह 'भूमकाल' (1910) था। इसका नेतृत्व गुंडाधुर ने किया था। विद्रोह की सूचना एक गाँव से दूसरे गाँव तक पहुँचाने के लिए 'लाल मिर्च और आम की टहनी' का प्रयोग किया जाता था। इस विद्रोह का नारा 'बस्तर बस्तरियों का है' था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ की किस जमींदारी से 'परलकोट विद्रोह' (1825) संबंधित है?","options":["सोनाखान","कांकेर","बस्तर","सरगुजा"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"परलकोट विद्रोह 1825 में बस्तर क्षेत्र में हुआ था। इसका नेतृत्व परलकोट के जमींदार 'गेंद सिंह' ने किया था। विद्रोह का मुख्य उद्देश्य मराठों और अंग्रेजों के बढ़ते हस्तक्षेप को रोकना और आदिवासियों की स्वायत्तता बचाना था। गेंद सिंह को 20 जनवरी 1825 को फांसी दे दी गई थी।"},{"text":"'छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद' किसे माना जाता है जिन्होंने 1857 की क्रांति में हिस्सा लिया था?","options":["हनुमान सिंह","वीर नारायण सिंह","सुरेंद्र साय","धीरज सिंह"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"बलौदाबाजार के सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह को छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद माना जाता है। उन्होंने अकाल पीड़ितों के लिए अंग्रेजों का विरोध किया। उन्हें 10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जयस्तंभ चौक पर फांसी दी गई थी। छत्तीसगढ़ सरकार उनके सम्मान में वीरता पुरस्कार भी देती है।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'सुबा शासन' का अंत किस वर्ष हुआ था?","options":["1741 ई.","1787 ई.","1818 ई.","1830 ई."],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"वर्ष 1818 में नागपुर के भोंसले राजा और अंग्रेजों के बीच हुई सहायक संधि के बाद छत्तीसगढ़ ब्रिटिश संरक्षण में आ गया। इसके साथ ही भ्रष्टाचार के लिए बदनाम 'सुबा पद्धति' का अंत हुआ और छत्तीसगढ़ का प्रशासन ब्रिटिश अधीक्षकों (Superintendents) के हाथों में चला गया।"},{"text":"'काकतीय वंश' के संस्थापक अन्नम देव ने अपनी पहली राजधानी कहाँ बनाई थी?","options":["जगदलपुर","मंदोता","बारसूर","दंतेवाड़ा"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"वारंगल से आए काकतीय राजकुमार अन्नम देव ने 1324 ईस्वी में बस्तर में काकतीय वंश की नींव रखी। उन्होंने अपनी पहली राजधानी 'मंदोता' को बनाया था। बाद में पुरुषोत्तम देव और अन्य राजाओं के समय राजधानी बदलती रही और अंत में दलपत देव ने जगदलपुर को राजधानी बनाया।"},{"text":"प्रसिद्ध चीनी यात्री 'ह्वेनसांग' (Hiuen Tsang) ने सिरपुर की यात्रा किस शासक के काल में की थी?","options":["तीवरदेव","महासिवगुप्त बालार्जुन","हर्षगुप्त","नन्नदेव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"चीनी यात्री ह्वेनसांग वर्ष 639 ईस्वी में सिरपुर (प्राचीन नाम श्रीपुर) आया था। उस समय वहाँ पांडुवंशी राजा 'महासिवगुप्त बालार्जुन' का शासन था। ह्वेनसांग ने अपनी पुस्तक 'सी-यू-की' में सिरपुर को बौद्ध शिक्षा और संस्कृति का एक समृद्ध केंद्र बताया था।"},{"text":"कल्चुरी वंश के किस राजा ने 'जांजगीर' नगर की स्थापना की थी?","options":["रत्नदेव प्रथम","पृथ्वीदेव द्वितीय","जाज्वल्यदेव प्रथम","जाज्वल्यदेव द्वितीय"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"कल्चुरी वंश के सबसे प्रतापी राजा जाज्वल्यदेव प्रथम ने अपने नाम पर 'जाज्वल्यपुर' (वर्तमान जांजगीर) नगर बसाया था। उन्होंने वहां एक विशाल विष्णु मंदिर का निर्माण भी करवाया था। उन्होंने ही सबसे पहले सोने के सिक्के जारी किए थे, जिन पर 'श्रीमद्जाज्वल्यदेव' अंकित था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'प्रेस के पितामह' कहे जाने वाले माधवराव सप्रे ने 'छत्तीसगढ़ मित्र' का प्रकाशन कहाँ से शुरू किया था?","options":["रायपुर","बिलासपुर","पेंड्रा रोड","राजनांदगांव"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"छत्तीसगढ़ का पहला समाचार पत्र 'छत्तीसगढ़ मित्र' वर्ष 1900 में बिलासपुर जिले के 'पेंड्रा रोड' से प्रकाशित होना शुरू हुआ था। इसके संपादक माधवराव सप्रे थे और सहयोगी रामराव चिंचोलकर थे। इस पत्र ने छत्तीसगढ़ में राजनीतिक चेतना की नींव रखी थी।"},{"text":"'राजिम शिलालेख' का संबंध कल्चुरी वंश के किस शासक के सेनापति से है?","options":["रत्नदेव प्रथम","पृथ्वीदेव द्वितीय","जाज्वल्यदेव प्रथम","बाहेर साय"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"राजिम का प्रसिद्ध शिलालेख कल्चुरी राजा पृथ्वीदेव द्वितीय के सेनापति 'जगतपाल' का है। इस शिलालेख से पता चलता है कि जगतपाल ने राजीव लोचन मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था और कल्चुरी साम्राज्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।"},{"text":"'बस्तर का मुक्ति संग्राम' (Great Liberation War) किस जनजातीय विद्रोह को कहा जाता है?","options":["मुरिया विद्रोह","लिंगागिरि विद्रोह","तारापुर विद्रोह","भूमकाल विद्रोह"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"वर्ष 1856-57 के दौरान हुए लिंगागिरि विद्रोह को बस्तर का मुक्ति संग्राम कहा जाता है। इसका नेतृत्व 'धुर्वाराम माड़िया' ने किया था। यह विद्रोह अंग्रेजों की नीतियों के विरुद्ध बस्तर को स्वतंत्र कराने का एक महान प्रयास था, जिसमें धुर्वाराम को फांसी दी गई थी।"},{"text":"'रायपुर षड्यंत्र केस' (1942) के मुख्य सूत्रधार कौन थे?","options":["पंडित रविशंकर शुक्ल","परशराम सोनी","हनुमान सिंह","ठाकुर प्यारेलाल सिंह"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान रायपुर में परशराम सोनी और उनके साथियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध बम और हथियार बनाने की योजना बनाई थी। इसे ही 'रायपुर षड्यंत्र केस' कहा जाता है। इस केस में परशराम सोनी को लंबी जेल की सजा हुई थी।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस राजवंश को 'अमरार्य कुल' का माना जाता है?","options":["शरभपुरीय वंश","पांडु वंश","नल वंश","पर्वतद्वारक वंश"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"शरभपुरीय वंश के शासक स्वयं को 'अमरार्य कुल' का कहते थे। इस वंश के संस्थापक शरभराज थे। इनकी राजमुद्रा पर 'गजलक्ष्मी' का चिन्ह अंकित होता था। इन्होंने छत्तीसगढ़ में वैष्णव धर्म को बढ़ावा दिया और शरभपुर को अपनी राजधानी बनाया था।"},{"text":"'बिलासपुर' शहर का नाम किसके नाम पर रखा गया माना जाता है?","options":["बिलासा बाई केंवटिन","रानी वासटा","माता बमलेश्वरी","मोंटेसरी देवी"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"लोक मान्यताओं के अनुसार, बिलासपुर शहर का नाम 'बिलासा बाई केंवटिन' नामक एक साहसी मछुआरा महिला के नाम पर पड़ा। वह कल्चुरी काल के दौरान अपनी वीरता और लोक कल्याण के लिए प्रसिद्ध थी। छत्तीसगढ़ सरकार उनके सम्मान में मत्स्य पालन का पुरस्कार भी देती है।"},{"text":"किस कल्चुरी शासक ने अपनी राजधानी तुम्माण से 'रत्नपुर' स्थानांतरित की थी?","options":["कलिंगराज","कमलराज","रत्नदेव प्रथम","पृथ्वीदेव प्रथम"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"रत्नदेव प्रथम ने वर्ष 1050 ईस्वी में 'रत्नपुर' नगर बसाया और इसे कल्चुरी साम्राज्य की नई राजधानी बनाया। उनके काल में रतनपुर की समृद्धि के कारण इसे 'कुबेरपुर' की उपमा दी गई थी। रत्नदेव प्रथम ने ही महामाया मंदिर का निर्माण करवाया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'डिप्टी कमिश्नर' की नियुक्ति किस वर्ष शुरू हुई थी?","options":["1818 ई.","1854 ई.","1861 ई.","1905 ई."],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"वर्ष 1854 में नागपुर रियासत के साथ छत्तीसगढ़ को भी 'लैप्स की नीति' के तहत ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया। इसके बाद यहाँ प्रशासनिक व्यवस्था के लिए 'डिप्टी कमिश्नर' का पद बनाया गया। छत्तीसगढ़ के पहले डिप्टी कमिश्नर 'चार्ल्स इलियट' थे।"},{"text":"'दही सत्याग्रह' (1930) छत्तीसगढ़ के किस जिले में हुआ था?","options":["रायपुर","बिलासपुर","दुर्ग","धमतरी"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान दुर्ग जिले में 'दही सत्याग्रह' हुआ था। इसका नेतृत्व नरसिंह प्रसाद अग्रवाल ने किया था। यह आंदोलन स्थानीय स्तर पर सरकारी करों और नीतियों के विरोध का एक अनूठा और अहिंसक तरीका था।"},{"text":"बस्तर में 'रथ यात्रा' (गोंचा पर्व) की शुरुआत किस राजा ने की थी?","options":["अन्नम देव","पुरुषोत्तम देव","दलपत देव","प्रताप रुद्र देव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"काकतीय राजा पुरुषोत्तम देव जगन्नाथ पुरी की यात्रा पर गए थे, जहाँ उन्हें 'रथ-पति' की उपाधि मिली थी। वापस आकर उन्होंने वर्ष 1408 ईस्वी में बस्तर में 'गोंचा पर्व' और रथ यात्रा की शुरुआत की, जो आज भी बस्तर की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अंग है।"},{"text":"'छत्तीसगढ़ का तात्या टोपे' किसे कहा जाता है?","options":["हनुमान सिंह","वीर नारायण सिंह","सुरेंद्र साय","गुंडाधुर"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"संबलपुर के वीर सुरेंद्र साय को छत्तीसगढ़ का तात्या टोपे कहा जाता है। उन्होंने 1857 की क्रांति के दौरान और उसके बाद भी कई वर्षों तक अंग्रेजों के खिलाफ छापामार युद्ध जारी रखा था। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिन असीरगढ़ के किले में बिताए थे।"},{"text":"प्राचीन काल में 'बस्तर' को किस नाम से जाना जाता था?","options":["दक्षिण कोसल","महाकांतार","चेदिगढ़","मत्स्य जनपद"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"गुप्त काल के दौरान बस्तर के घने जंगलों वाले क्षेत्र को 'महाकांतार' कहा जाता था। रामायण काल में इसे 'दंडकारण्य' और मध्यकाल में नागवंशी शासकों के समय 'चक्रकोट' या 'भ्रमरकोट' के नाम से जाना जाता था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'होमरूल लीग' (1917) की शाखा बिलासपुर में किसने स्थापित की थी?","options":["पंडित रविशंकर शुक्ल","ई. राघवेंद्र राव","घनश्याम सिंह गुप्त","ठाकुर प्यारेलाल सिंह"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"एनी बेसेंट और तिलक के होमरूल आंदोलन से प्रभावित होकर बिलासपुर में ई. राघवेंद्र राव ने इसकी शाखा खोली थी। वहीं रायपुर में पंडित रविशंकर शुक्ल और दुर्ग में घनश्याम सिंह गुप्त ने आंदोलन का नेतृत्व कर राष्ट्रीय चेतना का प्रसार किया था।"},{"text":"प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल 'तालागांव' (मनियारी नदी के तट पर) किस काल की मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है?","options":["कल्चुरी काल","शरभपुरीय काल","पांडु काल","नल काल"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"बिलासपुर के पास तालागांव में स्थित देवरानी-जेठानी मंदिर शरभपुरीय काल की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है। यहाँ भगवान शिव की एक विलक्षण प्रतिमा 'रुद्र शिव' प्राप्त हुई है, जिसका निर्माण 5वीं-6वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है।"},{"text":"1920 में 'BNC मिल मज़दूर आंदोलन' का नेतृत्व किसने किया था?","options":["पंडित सुंदरलाल शर्मा","ठाकुर प्यारेलाल सिंह","रविशंकर शुक्ल","महंत लक्ष्मी नारायण"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"राजनांदगांव की बंगाल नागपुर कॉटन (BNC) मिल में मज़दूरों के शोषण के विरुद्ध 37 दिनों तक चलने वाली ऐतिहासिक हड़ताल हुई थी। इसका सफल नेतृत्व ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने किया था। यह छत्तीसगढ़ का पहला सुसंगठित मज़दूर आंदोलन माना जाता है।"},{"text":"'नल वंश' के किस शासक ने स्वर्ण सिक्के जारी किए थे जिन पर 'सिंह' की आकृति अंकित थी?","options":["भवदत्त वर्मन","अर्थपति भट्टारक","वराहराज","स्कंदवर्मन"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"नलवंशी शासक वराहराज के 29 स्वर्ण सिक्के कोंडागांव के 'एडेंगा' गाँव से प्राप्त हुए हैं। इन सिक्कों से पता चलता है कि बस्तर क्षेत्र में नल वंश एक शक्तिशाली और समृद्ध राजवंश था। इनकी राजधानी 'पुष्करी' थी।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'राजस्व मंडल' (Revenue Board) का मुख्यालय कहाँ स्थित है?","options":["रायपुर","दुर्ग","बिलासपुर","जगदलपुर"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"प्रशासनिक दृष्टिकोण से छत्तीसगढ़ का राजस्व मंडल बिलासपुर में स्थित है। ऐतिहासिक रूप से बिलासपुर मराठा और ब्रिटिश काल से ही एक प्रमुख प्रशासनिक केंद्र रहा है। छत्तीसगढ़ का उच्च न्यायालय भी बिलासपुर (बोधरी) में स्थित है।"},{"text":"कल्चुरी प्रशासन में 'ग्राम प्रमुख' को क्या कहा जाता था?","options":["दाऊ","दीवान","गोंटिया","पटेल"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"कल्चुरी काल में गाँव प्रशासन की सबसे छोटी इकाई थी। गाँव का मुखिया 'गोंटिया' कहलाता था। उसका पद प्रायः वंशानुगत होता था और वह लगान वसूलने व गाँव की शांति व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होता था। यह पद मराठा काल में भी बना रहा।"},{"text":"'छत्तीसगढ़' नाम का सर्वप्रथम प्रयोग किस साहित्यकार की रचना में मिलता है?","options":["गोपाल मिश्र","दलपत राव","रेवाराम","लक्ष्मण कवि"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"खैरागढ़ रियासत के राजा लक्ष्मी निधि राय के दरबारी कवि 'दलपत राव' ने वर्ष 1494 में अपनी एक कविता में 'छत्तीसगढ़' शब्द का लिखित प्रयोग किया था। उन्होंने लिखा था- \"लक्ष्मी निधि राय राना, छत्तीसगढ़ गढ़ गढ़ियाना।\""},{"text":"1940 के 'व्यक्तिगत सत्याग्रह' में छत्तीसगढ़ से प्रथम सत्याग्रही कौन थे?","options":["पंडित रविशंकर शुक्ल","यति यतनलाल","पंडित सुंदरलाल शर्मा","ठाकुर प्यारेलाल सिंह"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए व्यक्तिगत सत्याग्रह के दौरान छत्तीसगढ़ से पंडित रविशंकर शुक्ल को प्रथम सत्याग्रही चुना गया था। उन्हें रायपुर से गिरफ्तार किया गया था। शुक्ल जी को आधुनिक छत्तीसगढ़ का निर्माता भी माना जाता है।"},{"text":"बस्तर की 'दंतेश्वरी देवी' का मंदिर किन नदियों के संगम पर स्थित है?","options":["शंखिनी और डंकिनी","इन्द्रावती और कोटरी","महानदी और शिवनाथ","अरपा और पैरी"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) का प्रसिद्ध शक्तिपीठ दंतेश्वरी मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण काकतीय शासक अन्नम देव ने 14वीं शताब्दी में करवाया था। माँ दंतेश्वरी को बस्तर की कुलदेवी माना जाता है।"},{"text":"'सबलपुर' रियासत का छत्तीसगढ़ में विलय किस वर्ष हुआ था? (छत्तीसगढ़ के संदर्भ में भाषाई पुनर्गठन)","options":["1900 ई.","1905 ई.","1947 ई.","1956 ई."],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"वर्ष 1905 के भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन में 'सबलपुर' (ओड़िया भाषी) को बंगाल प्रांत में भेज दिया गया और छोटा नागपुर क्षेत्र की 5 रियासतें (सरगुजा क्षेत्र) छत्तीसगढ़ में शामिल की गईं। इसी समय छत्तीसगढ़ का वर्तमान मानचित्र पहली बार स्पष्ट हुआ।"},{"text":"'रत्नपुर के कल्चुरी' और 'रायपुर के कल्चुरी' के बीच विभाजक नदी कौन सी थी?","options":["महानदी","शिवनाथ नदी","हसदेव नदी","अरपा नदी"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"मध्यकाल में कल्चुरी साम्राज्य दो प्रमुख शाखाओं में बंटा था। शिवनाथ नदी इन दोनों प्रशासनिक इकाइयों की सीमा निर्धारित करती थी। नदी के उत्तर का हिस्सा 'रत्नपुर' शाखा के और दक्षिण का हिस्सा 'रायपुर' शाखा के अधीन था।"},{"text":"'विक्रमपुर' (वर्तमान बेलपान) नगर की स्थापना किस कल्चुरी शासक ने की थी?","options":["रत्नदेव प्रथम","पृथ्वीदेव द्वितीय","जाज्वल्यदेव द्वितीय","बाहेर साय"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"रत्नदेव प्रथम ने अपनी राजधानी तुम्माण से रत्नपुर स्थानांतरित की थी। उन्होंने ही 'विक्रमपुर' (बेलपान) और 'रत्नपुर' जैसे समृद्ध नगरों को बसाया था। रत्नपुर को उस समय के विद्वान स्वर्ग के समान सुंदर मानते थे।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के 'पांडु वंश' के किस शासक ने 'सकल कौसलाधिपति' की उपाधि धारण की थी?","options":["नन्नदेव","तीवरदेव","चंद्रगुप्त","हर्षगुप्त"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"पांडुवंशी राजा तीवरदेव एक महान विजेता थे। उन्होंने संपूर्ण कोसल क्षेत्र को जीतकर 'सकल कौसलाधिपति' की उपाधि धारण की थी। वे भगवान विष्णु के अनन्य भक्त (परम वैष्णव) थे और उन्होंने सिरपुर को अपनी शक्ति का केंद्र बनाया था।"},{"text":"'बस्तर का तारापुर विद्रोह' (1842) किसके नेतृत्व में हुआ था?","options":["दलगंजन सिंह","गुंडाधुर","हिड़मा मांझी","वीर नारायण सिंह"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"तारापुर विद्रोह बस्तर रियासत में बढ़ाए गए करों और दीवान की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध हुआ था। इसका नेतृत्व राजा भूपाल देव के भाई 'दलगंजन सिंह' ने किया था। यह विद्रोह आदिवासियों की आर्थिक स्वतंत्रता बचाने का एक बड़ा प्रयास था।"},{"text":"'सिंघनपुर' की गुफाएं छत्तीसगढ़ के किस जिले में स्थित हैं?","options":["बस्तर","रायगढ़","सरगुजा","धमतरी"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"रायगढ़ जिला अपनी प्रागैतिहासिक शैलचित्र कला के कारण विश्व प्रसिद्ध है। सिंघनपुर की गुफाओं में पूर्व पाषाण कालीन मानवों द्वारा बनाए गए लाल रंग के चित्र मिले हैं, जिनमें शिकार और सामूहिक नृत्य के दृश्य अंकित हैं।"},{"text":"कल्चुरी प्रशासन में 'राजस्व मंत्री' को क्या कहा जाता था?","options":["महाप्रतिहार","महाप्रमातृ","महासंधिविग्रहिक","महाक्षपटलिक"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"कल्चुरी प्रशासन बहुत ही व्यवस्थित था। 'महाप्रमातृ' राजस्व विभाग का प्रमुख होता था, जिसका कार्य भूमि का मापन और लगान वसूल करना था। 'महासंधिविग्रहिक' विदेश मंत्री होता था और 'महाप्रतिहार' राजमहल की सुरक्षा देखता था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'प्रथम ब्रिटिश अधीक्षक' (Superintendent) कौन थे?","options":["कैप्टन एडमंड","मेजर एग्न्यु","कर्नल रसेल","कैप्टन सैंडिस"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"वर्ष 1818 में जब छत्तीसगढ़ ब्रिटिश संरक्षण में आया, तब यहाँ प्रशासन चलाने के लिए अधीक्षकों की नियुक्ति की गई। पहले अधीक्षक 'कैप्टन एडमंड' थे। उनके बाद आए 'मेजर एग्न्यु' ने राजधानी को रतनपुर से रायपुर स्थानांतरित किया था।"},{"text":"1923 के 'रायपुर ध्वज सत्याग्रह' का नेतृत्व किसने किया था?","options":["ठाकुर प्यारेलाल सिंह","पंडित सुंदरलाल शर्मा","पंडित रविशंकर शुक्ल","महंत लक्ष्मी नारायण"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"नागपुर के झंडा सत्याग्रह की तर्ज पर रायपुर में भी 'ध्वज सत्याग्रह' हुआ था। इसका प्रमुख नेतृत्व ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने किया था। इस आंदोलन में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियों ने तिरंगे के सम्मान के लिए जेल यात्राएं की थीं।"},{"text":"'शिशुपाल पर्वत' छत्तीसगढ़ के किस जिले में स्थित है?","options":["बस्तर","महासमुंद","सरगुजा","धमतरी"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"शिशुपाल पर्वत महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र में स्थित है। ऐतिहासिक और लोक कथाओं के अनुसार यहाँ राजा शिशुपाल का शासन था। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्त्व के कारण पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के इतिहास का 'अंधकार काल' किसे कहा जाता है?","options":["कल्चुरी काल","मराठा सुबा काल","गुप्त काल","अंग्रेजी काल"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"मराठा सुबा शासन (1787-1818) के दौरान छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था अत्यंत लचर थी। सूबेदारों ने केवल धन लूटने पर ध्यान दिया, जिससे जनता में भारी गरीबी और असुरक्षा फैल गई थी। इसीलिए इतिहासकारों ने इसे 'अंधकार काल' की संज्ञा दी है।"},{"text":"'छिंदक नागवंश' के अंतिम शासक कौन थे जिन्हें काकतीय राजा अन्नम देव ने हराया था?","options":["सोमेश्वर देव","नृपति भूषण","हरिश्चंद्र देव","कन्हर देव"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"बस्तर के छिंदक नागवंश के अंतिम राजा हरिश्चंद्र देव थे। वर्ष 1324 ईस्वी में वारंगल के काकतीय राजकुमार अन्नम देव ने उन पर आक्रमण किया और उन्हें पराजित कर बस्तर पर काकतीय सत्ता स्थापित की थी।"},{"text":"किस ऐतिहासिक स्थल को 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' कहा जाता है?","options":["मल्हार","भोरमदेव","राजिम","सिरपुर"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"कबीरधाम (कवर्धा) जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर को उसकी नागर शैली और कामुक मूर्तिकला के कारण 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' कहा जाता है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में फणि नागवंशी राजाओं द्वारा करवाया गया था।\n[/pyq_quiz]"}],"feedbackHigh":"<h4>असाधारण प्रदर्शन!</h4><p>बधाई हो! आपकी इस विषय पर पकड़ उत्कृष्ट है।</p>","feedbackMedium":"<h4>बहुत अच्छा प्रयास!</h4><p>आपका प्रदर्शन सराहनीय है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में सुधार की गुंजाइश है।</p>","feedbackLow":"<h4>अभ्यास जारी रखें!</h4><p>निराश न हों। गलत हुए प्रश्नों की व्याख्याओं को ध्यान से पढ़ें और फिर से प्रयास करें।</p>","nextSteps":"<h4>आगे क्या पढ़ें?</h4><ul><li><a href=\"#\">संबंधित लेख 1</a></li></ul>"}" class="wp-block-msworld-practice-quiz">
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