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छत्तीसगढ़ का संपूर्ण इतिहास - मास्टर अभ्यास प्रश्नावली","intro":"<p><strong>भावी प्रशासनिक अधिकारियों और छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास के जिज्ञासुओं, आपका स्वागत है!</strong></p>\n\n<p>छत्तीसगढ़ की माटी का इतिहास शौर्य और त्याग की अद्भुत मिसाल है। प्राचीन काल के <strong>दक्षिण कोसल</strong> से लेकर मराठा काल के <strong>परगना पद्धति</strong> और आधुनिक काल के <strong>प्रजामंडल आंदोलनों</strong> तक, हर घटनाक्रम ने इस राज्य को विशिष्ट पहचान दी है। यह क्विज़ आपकी तैयारी को एक नई ऊँचाई देने के लिए तैयार की गई है।</p>\n\n<h4>इस क्विज़ की महत्वपूर्ण जानकारी:</h4>\n<p>• <strong>कुल प्रश्न:</strong> इस डेटाबेस में कुल 50 उच्च स्तरीय प्रश्न शामिल हैं।<br>\n• <strong>स्मार्ट डिस्प्ले:</strong> एकाग्रता बनाए रखने के लिए हर बार केवल 15 रैंडम प्रश्न ही दिखाई देंगे। पेज रिफ्रेश करने पर आपको नए प्रश्न मिलेंगे।<br>\n• <strong>नेगेटिव मार्किंग:</strong> परीक्षा की गंभीरता को समझते हुए इसमें 1/3 नेगेटिव मार्किंग रखी गई है।<br>\n• <strong>व्याख्या:</strong> प्रत्येक प्रश्न के साथ विस्तृत नोट्स जोड़े गए हैं, जो आपके त्वरित रिविज़न में सहायक होंगे।</p>\n\n<p><strong>लक्ष्य:</strong><br>\nयह प्रश्नावली विशेष रूप से <strong>CGPSC (Prelims & Mains), CG Vyapam, और राज्य स्तरीय शिक्षक भर्ती</strong> परीक्षाओं के लिए तैयार की गई है। इतिहास को केवल रटें नहीं, उसे जिएं।</p>\n\n<p><strong>नियम:</strong></p><p>[quiz_rules]</p>","duration":10,"negativeMarking":"1/3","displayCount":15,"questions":[{"text":"बस्तर का प्रसिद्ध 'हल्बा विद्रोह' (1774-79) किस शासक के समय हुआ था?","options":["अन्नम देव","अजमेर सिंह (Ajmer Singh)","दरिया देव","महिपाल देव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"हल्बा विद्रोह बस्तर के उत्तराधिकार के संघर्ष का परिणाम था। अजमेर सिंह ने हल्बा जनजातियों के सहयोग से अपने भाई दरिया देव के विरुद्ध विद्रोह किया था। इसे बस्तर का प्रथम जनजातीय विद्रोह माना जाता है। इस विद्रोह के अंत में बस्तर में मराठा और ब्रिटिश प्रभाव बढ़ गया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस स्थान को 'पुरातात्विक' साक्ष्यों के कारण 'हड़प्पा का समकालीन' माना जाता है?","options":["पचराही (Kawardha)","सिरपुर","मल्हार","राजिम"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"कबीरधाम (कवर्धा) जिले में स्थित 'पचराही' एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है। यहाँ उत्खनन से पाषाण काल से लेकर कल्चुरी काल तक के अवशेष मिले हैं। कुछ विद्वान यहाँ प्राप्त नगर नियोजन के अवशेषों की तुलना प्राचीन हड़प्पा सभ्यता की उन्नत संस्कृति से करते हैं।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 1857 की क्रांति के दौरान 'उदयपुर' (सरगुजा) के किस जमींदार ने विद्रोह किया था?","options":["धीरज सिंह","शिवराज सिंह (Shivraj Singh)","कल्याण सिंह","वीर नारायण सिंह"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"1857 की क्रांति में सरगुजा क्षेत्र की 'उदयपुर' रियासत में विद्रोह हुआ था। यहाँ के राजकुमार शिवराज सिंह और उनके भाइयों ने अंग्रेजों के विरुद्ध मोर्चा खोला था। बाद में अंग्रेजों ने इस रियासत को जप्त कर रायगढ़ के राजा को सौंप दिया था।"},{"text":"कल्चुरी काल में 'राजस्व' (Tax) विभाग का मुख्य अधिकारी क्या कहलाता था?","options":["महाप्रमातृ (Mahapramatru)","महाप्रतिहार","संधिविग्रहिक","महाबलाधिकृत"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"कल्चुरी प्रशासन बहुत ही सुव्यवस्थित था। 'महाप्रमातृ' राजस्व विभाग का प्रमुख होता था, जिसका कार्य भूमि का मापन और लगान वसूल करना था। 'महाप्रतिहार' राजमहल की सुरक्षा का प्रमुख होता था और 'संधिविग्रहिक' विदेश विभाग (युद्ध और शांति) देखता था।"},{"text":"'छिंदक नागवंश' की राजधानी चक्रकोट (बारसूर) पर किस काकतीय शासक ने आक्रमण कर अधिकार किया था?","options":["अन्नम देव (Annam Dev)","पुरुषोत्तम देव","हम्मीर देव","दिग्पाल देव"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"वारंगल (तेलंगाना) के काकतीय शासक अन्नम देव ने 1324 ईस्वी में छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया। उन्होंने बस्तर के अंतिम छिंदक नागवंशी राजा हरिश्चंद्र देव को पराजित कर बारसूर पर अधिकार किया और काकतीय वंश की नींव रखी। उन्होंने अपनी राजधानी 'मंदोता' बनाई थी।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में मराठों द्वारा शुरू की गई 'सूबेदारी प्रथा' का मुख्य दोष क्या था?","options":["सैनिक विद्रोह","अत्यधिक कर वसूली और शोषण (Extortion)","शिक्षा का अभाव","परिवहन की समस्या"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"सूबेदारी प्रथा (1787-1818) के दौरान सूबेदार एक निश्चित राशि भोंसले राजा को देते थे और उसके बदले उन्हें छत्तीसगढ़ से मनमाना कर वसूलने की छूट थी। सूबेदारों ने अपनी तिजोरी भरने के लिए जनता का भीषण आर्थिक शोषण किया, जिसके कारण इसे 'अंधकार युग' भी कहा जाता है।"},{"text":"'समुद्रगुप्त' की प्रयाग प्रशस्ति में वर्णित 'महाकांतार' का शासक कौन था?","options":["महेंद्र","व्याघ्रराज (Vyaghra Raj)","रुद्रसेन","विलासतुंग"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"प्रयाग प्रशस्ति (लेखक- हरिषेण) के अनुसार, समुद्रगुप्त ने अपने दक्षिणापथ अभियान में कोसल के राजा महेंद्र और महाकांतार के राजा 'व्याघ्रराज' को हराया था। 'महाकांतार' वर्तमान बस्तर और ओडिशा के कालाहांडी क्षेत्र के घने जंगलों को कहा जाता था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस प्रसिद्ध व्यक्ति ने 'हिंदू केसरी' पत्रिका का संपादन किया था?","options":["माधवराव सप्रे (Madhavrao Sapre)","वामनराव लाखे","सुंदरलाल शर्मा","ई. राघवेंद्र राव"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"माधवराव सप्रे छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के जनक माने जाते हैं। उन्होंने 1900 में 'छत्तीसगढ़ मित्र' और बाद में 'हिंदू केसरी' का संपादन कर राष्ट्रीय चेतना का प्रचार किया। उन्होंने लोकमान्य तिलक के मराठी 'केसरी' का हिंदी अनुवाद भी किया था।"},{"text":"'नल वंश' के किस शासक ने स्वर्ण सिक्के जारी किए थे जिन पर 'सिंह' की आकृति अंकित थी?","options":["भवदत्त वर्मन","अर्थपति भट्टारक","वराहराज (Varahraj)","स्कंदवर्मन"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"नलवंशी शासक वराहराज के 29 स्वर्ण सिक्के कोंडागांव के 'एडेंगा' गाँव से प्राप्त हुए हैं। इन सिक्कों से सिद्ध होता है कि बस्तर क्षेत्र में नल वंश एक शक्तिशाली और समृद्ध राजवंश था। इनकी राजधानी 'पुष्करी' थी जो वर्तमान भोपालपटनम के पास मानी जाती है।"},{"text":"'शारदा' (Sharda) नामक समाचार पत्र का प्रकाशन बिलासपुर से किसने किया था?","options":["द्वारिका प्रसाद मिश्र","पं. सुंदरलाल शर्मा","ठाकुर प्यारेलाल सिंह","पंडित रविशंकर शुक्ल"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"पंडित सुंदरलाल शर्मा ने समाज में जागृति फैलाने के लिए बिलासपुर से 'शारदा' नामक हस्तलिखित पत्रिका/समाचार पत्र का प्रकाशन किया था। उन्होंने इसके माध्यम से कुप्रथाओं और अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का विरोध किया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (1930) की शुरुआत किस घटना से मानी जाती है?","options":["नमक कानून तोड़ना","कंडेल नहर सत्याग्रह","जंगल सत्याग्रह (Gattasilli/Rudri)","गांधीजी का आगमन"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"छत्तीसगढ़ समुद्र से दूर होने के कारण यहाँ नमक कानून तोड़ना संभव नहीं था। इसलिए यहाँ सविनय अवज्ञा आंदोलन का स्वरूप 'जंगल सत्याग्रह' के रूप में प्रकट हुआ। धमतरी के गट्टासिल्ली और रुद्रि-नवागांव में हुए जंगल सत्याग्रहों ने ब्रिटिश प्रशासन की जड़ें हिला दी थीं।"},{"text":"किस कल्चुरी शासक के समय में 'त्रिकुलिंगाधिपति' की उपाधि का उल्लेख मिलता है?","options":["रत्नदेव प्रथम","जाज्वल्यदेव प्रथम","पृथ्वीदेव प्रथम (Prithvidev I)","कलिंगराज"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"पृथ्वीदेव प्रथम कल्चुरी वंश के एक शक्तिशाली राजा थे। उन्होंने अपनी शक्ति का विस्तार किया और 'सकल कौसलाधिपति' के साथ-साथ 'त्रिकुलिंगाधिपति' की उपाधि भी धारण की थी। वे भगवान शिव के अनन्य भक्त थे।"},{"text":"बस्तर के 'मेरिया विद्रोह' (1842-63) का मुख्य कारण क्या था?","options":["कर में वृद्धि","नरबलि प्रथा पर रोक लगाना (Abolition of Human Sacrifice)","जंगलों की कटाई","ईसाई धर्म का प्रचार"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"बस्तर की जनजातियों में प्रचलित 'नरबलि प्रथा' (जिसे मेरिया कहा जाता था) को अंग्रेजों ने गैर-कानूनी घोषित कर बंद करने का प्रयास किया। जनजातियों ने इसे अपने धर्म और परंपरा में हस्तक्षेप माना और 'हिड़मा मांझी' के नेतृत्व में विद्रोह कर दिया।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'कल्चुरी शासन' के पतन का मुख्य कारण क्या था?","options":["मराठा आक्रमण (Maratha Invasion, 1741)","मुगल आक्रमण","आंतरिक गृहयुद्ध","अकाल"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"1741 ईस्वी में नागपुर के भोंसले राजा रघुजी प्रथम के सेनापति भास्कर पंत ने छत्तीसगढ़ पर आक्रमण किया। उस समय रतनपुर के राजा रघुनाथ सिंह वृद्ध थे। उन्होंने बिना युद्ध किए आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे 800 वर्षों से चले आ रहे कल्चुरी शासन का अंत हुआ।"},{"text":"'पांडु वंश' के शासक महासिवगुप्त बालार्जुन के समय सिरपुर आने वाले चीनी यात्री कौन थे?","options":["फाह्यान","इत्सिंग","ह्वेनसांग (Hiuen Tsang, 639 AD)","मेगस्थनीज"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"चीनी यात्री ह्वेनसांग 639 ईस्वी में सिरपुर (श्रीपुर) आया था। उसने अपनी पुस्तक 'सी-यू-की' में कोसल की समृद्धि और वहाँ के बौद्ध विहारों का वर्णन किया है। उसने सिरपुर को बौद्ध और हिंदू संस्कृति का महान केंद्र बताया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'रायपुर' नगर की स्थापना किसने की थी?","options":["रत्नदेव प्रथम","रामचंद्र देव (Ramchandra Dev)","ब्रह्मदेव राय","कलिंगराज"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"कल्चुरी वंश की रायपुर शाखा (लहुरी शाखा) के राजा रामचंद्र देव ने 14वीं शताब्दी में रायपुर नगर बसाया था। उन्होंने अपने पुत्र 'ब्रह्मदेव राय' के नाम पर इसका नाम रायपुर रखा। बाद में ब्रह्मदेव राय ने इसे अपनी राजधानी बनाया और वहाँ 'हाटकेश्वर महादेव' मंदिर बनवाया।"},{"text":"'सिंघनपुर' की गुफाएं छत्तीसगढ़ के किस जिले में स्थित हैं जो पूर्व पाषाण काल के शैलचित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं?","options":["बस्तर","रायगढ़ (Raigarh)","सरगुजा","धमतरी"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"रायगढ़ जिला अपनी शैलचित्र कला के कारण विश्व प्रसिद्ध है। सिंघनपुर की गुफाओं में पूर्व पाषाण कालीन मानवों द्वारा बनाए गए लाल रंग के चित्र मिले हैं, जिनमें शिकार और सामूहिक नृत्य के दृश्य दिखाए गए हैं। इसे छत्तीसगढ़ का 'प्राचीनतम संग्रहालय' भी कहा जा सकता है।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'भूमि व्यवस्था' के लिए 'पट्टा और कबूलियत' की प्रथा किसने शुरू की थी?","options":["मराठों ने","ब्रिटिश प्रशासन (During Agency Period)","कल्चुरी राजाओं ने","रियासत काल में"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"1818 से 1830 के बीच जब छत्तीसगढ़ ब्रिटिश संरक्षण (Agnes के अधीन) में था, तब प्रशासक मेजर एग्न्यु ने भू-राजस्व व्यवस्था में सुधार किया। उन्होंने किसानों को 'पट्टा' जारी करना और उनसे 'कबूलियत' (सहमति पत्र) लेना शुरू किया ताकि शोषण कम हो सके।"},{"text":"1940 के 'व्यक्तिगत सत्याग्रह' में छत्तीसगढ़ से प्रथम सत्याग्रही कौन थे?","options":["पंडित रविशंकर शुक्ल (Pt. Ravishankar Shukla)","यति यतनलाल","पंडित सुंदरलाल शर्मा","ठाकुर प्यारेलाल सिंह"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"गांधीजी द्वारा शुरू किए गए व्यक्तिगत सत्याग्रह के दौरान छत्तीसगढ़ से पंडित रविशंकर शुक्ल को प्रथम सत्याग्रही चुना गया था। उन्हें रायपुर से गिरफ्तार कर लिया गया था। शुक्ल जी छत्तीसगढ़ के सबसे कद्दावर राष्ट्रीय नेता थे।"},{"text":"बस्तर में 'रथ यात्रा' (गोंचा पर्व) की शुरुआत किस काकतीय शासक ने की थी?","options":["अन्नम देव","पुरुषोत्तम देव (Purushottam Dev)","प्रताप रुद्र देव","दलपत देव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"काकतीय राजा पुरुषोत्तम देव जगन्नाथ पुरी (ओडिशा) की यात्रा पर गए थे, जहाँ उन्हें 'रथ-पति' की उपाधि दी गई थी। वापस आकर उन्होंने बस्तर में 1408 ईस्वी में 'गोंचा पर्व' और रथ यात्रा की शुरुआत की, जो आज भी बस्तर की संस्कृति का अटूट हिस्सा है।"},{"text":"'तारापुर विद्रोह' (1842-54) का नेतृत्व किसने किया था?","options":["दलगंजन सिंह (Dalganjan Singh)","गुंडाधुर","हिड़मा मांझी","वीर नारायण सिंह"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"तारापुर विद्रोह बस्तर रियासत में बढ़ाए गए करों (Lagan) और दीवान की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध हुआ था। इसका नेतृत्व राजा भूपाल देव के भाई दलगंजन सिंह ने किया था। यह विद्रोह बस्तर की स्वायत्तता बचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस राजवंश को 'अमरार्य कुल' भी कहा जाता है?","options":["कल्चुरी वंश","शरभपुरीय वंश (Sharabhpuriya Dynasty)","नल वंश","पांडु वंश"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"शरभपुरीय राजवंश के शासक स्वयं को 'अमरार्य कुल' का वंशज मानते थे। इस वंश के राजाओं ने छत्तीसगढ़ में गुप्तों के सामंत के रूप में शुरुआत की और बाद में स्वतंत्र राज्य स्थापित किया। इनकी राजमुद्रा पर 'गजलक्ष्मी' का चित्र अंकित होता था।"},{"text":"प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल 'तालागांव' (मनियारी नदी के तट पर) किस वंश की कला का केंद्र था?","options":["पांडु वंश","कल्चुरी वंश","शरभपुरीय वंश (Sharabhpuriya Dynasty)","नल वंश"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"बिलासपुर के पास तालागांव में स्थित 'देवरानी-जेठानी मंदिर' शरभपुरीय काल की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है। यहाँ भगवान शिव की एक विलक्षण प्रतिमा 'रुद्र शिव' मिली है, जिसके शरीर के अंग विभिन्न जीव-जंतुओं के चेहरों से बने हैं।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'सुबा पद्धति' का अंत किस वर्ष हुआ था?","options":["1787 ई.","1818 ई. (1818 AD)","1830 ई.","1854 ई."],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"1818 में मराठों और अंग्रेजों के बीच हुए समझौते के बाद छत्तीसगढ़ ब्रिटिश संरक्षण में आ गया। इसके साथ ही भ्रष्ट 'सुबा पद्धति' का अंत हुआ और छत्तीसगढ़ का प्रशासन ब्रिटिश अधीक्षकों (Superintendents) के हाथों में चला गया। पहले अधीक्षक कैप्टन एडमंड थे।"},{"text":"'दुर्ग' जिले में 1910 के महान 'खैरागढ़ किसान आंदोलन' का नेतृत्व किसने किया था?","options":["डॉ. खूबचंद बघेल","ठाकुर प्यारेलाल सिंह","पंडित सुंदरलाल शर्मा","नरसिंह प्रसाद अग्रवाल"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"ठाकुर प्यारेलाल सिंह छत्तीसगढ़ में श्रमिक और किसान आंदोलनों के प्रणेता थे। उन्होंने खैरागढ़ और राजनांदगांव क्षेत्र में किसानों को संगठित कर उनके हक की लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने ही राजनांदगांव में प्रसिद्ध 'BNC मिल मज़दूर आंदोलन' (1920) का सफल नेतृत्व किया था।"},{"text":"'कल्चुरी प्रशासन' में विदेश मंत्री को क्या कहा जाता था?","options":["महाप्रतिहार","महाक्षपटलिक","महाप्रमातृ","महासंधिविग्रहिक (Mahasandhivigrahika)"],"correctAnswerIndex":"3","explanation":"महासंधिविग्रहिक राजा का वह मंत्री होता था जो युद्ध और संधि (Foreign Affairs) के मामले देखता था। महाक्षपटलिक 'रिकॉर्ड कीपर' (दस्तावेज़ रक्षक) होता था और महाप्रतिहार महल के सुरक्षा इंतजामों का प्रमुख होता था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस स्थान से 'कुषाण कालीन' सोने के सिक्के प्राप्त हुए हैं?","options":["आरंग","तेलीकोट (रायगढ़)","बिलासपुर (Bilaspur context)","रायपुर"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"कुषाण सम्राट कनिष्क के समय के साक्ष्य छत्तीसगढ़ में सीमित हैं। रायगढ़ के तेलीकोट और बिलासपुर के खरसिया क्षेत्र से कुषाण कालीन सिक्के प्राप्त हुए हैं। इनसे पता चलता है कि कुषाणों का व्यापारिक या राजनीतिक प्रभाव इस क्षेत्र तक था।"},{"text":"'रत्नपुर के कल्चुरी' और 'रायपुर के कल्चुरी' के बीच विभाजक रेखा कौन सी नदी मानी जाती थी?","options":["महानदी","शिवनाथ नदी (Shivnath River)","हसदेव नदी","अरपा नदी"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"मध्यकाल में कल्चुरी साम्राज्य दो शाखाओं में बंटा था। शिवनाथ नदी के उत्तर का भाग 'रत्नपुर' शाखा के अधीन था और दक्षिण का भाग 'रायपुर' शाखा के अधीन। शिवनाथ नदी इन दोनों प्रशासनिक इकाइयों की सीमा निर्धारित करती थी।"},{"text":"1905 के 'बंगाल विभाजन' के समय छत्तीसगढ़ की सीमाओं में क्या प्रमुख परिवर्तन हुआ?","options":["बस्तर को ओड़िशा में मिलाया गया।","संबलपुर को बंगाल प्रांत में और 5 छोटी रियासतों (सरगुजा क्षेत्र) को छत्तीसगढ़ में शामिल किया गया।","छत्तीसगढ़ को मध्य प्रदेश से अलग किया गया।","रायपुर को राजधानी बनाया गया।"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"1905 के भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन में संबलपुर (ओड़िया भाषी) को बंगाल प्रेसीडेंसी में भेज दिया गया। इसके बदले छोटा नागपुर क्षेत्र की 5 रियासतें- सरगुजा, जशपुर, उदयपुर, कोरिया और चांगभखार- छत्तीसगढ़ में शामिल की गईं। इसी समय छत्तीसगढ़ का वर्तमान मानचित्र पहली बार स्पष्ट हुआ।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही' का दर्जा किसे प्राप्त है?","options":["पं. रविशंकर शुक्ल","बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव","पं. सुंदरलाल शर्मा","यति यतनलाल"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"1940 में महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए 'व्यक्तिगत सत्याग्रह' के लिए छत्तीसगढ़ से पहले सत्याग्रही पंडित रविशंकर शुक्ल थे। उन्होंने रायपुर में सत्याग्रह किया और उन्हें गिरफ्तार किया गया। दूसरे सत्याग्रही यति यतनलाल थे।"},{"text":"बस्तर का 'मुरिया विद्रोह' (1876) किस अंग्रेज अधिकारी के दुर्व्यवहार के कारण हुआ था?","options":["कैप्टन इलियट","गोपालराव","दीवान गोपीनाथ कापड़दार (Gopinath Kapardas)","ब्रैकन"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"राजा भैरम देव के दीवान गोपीनाथ कापड़दार के दमनकारी व्यवहार और शोषण के विरुद्ध मुरिया जनजातियों ने विद्रोह किया था। इस विद्रोह के दौरान ही 'जगदलपुर की घेराबंदी' की गई थी। बाद में अंग्रेज अधिकारी मैकजॉर्ज ने 'पुष्पाल' में शांति समझौता करवाया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'राजस्व मंडल' (Revenue Board) का मुख्यालय कहाँ स्थित है?","options":["रायपुर","दुर्ग","बिलासपुर (Bilaspur)","जगदलपुर"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"प्रशासनिक दृष्टिकोण से छत्तीसगढ़ का राजस्व मंडल बिलासपुर में स्थित है। ऐतिहासिक रूप से बिलासपुर मराठा काल और ब्रिटिश काल से ही एक प्रमुख प्रशासनिक और न्यायिक केंद्र रहा है।"},{"text":"कल्चुरी राजा 'कल्याण साय' ने कितने वर्षों तक मुगल दरबार (दिल्ली) में समय बिताया था?","options":["2 वर्ष","4 वर्ष","8 वर्ष (8 Years)","12 वर्ष"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"रतनपुर के कल्चुरी राजा कल्याण साय को राजस्व जमा न करने के कारण मुगल सेनापति दिल्ली ले गए थे। उन्होंने वहां सम्राट अकबर के दरबार में 8 वर्ष बिताए। वापस आकर उन्होंने छत्तीसगढ़ में 'जमाबंदी प्रणाली' शुरू की, जिसमें राज्य को 36 गढ़ों में बांटा गया था।"},{"text":"1946 में 'छत्तीसगढ़ शोषण विरोधी मंच' का गठन किसने किया था?","options":["ठाकुर प्यारेलाल सिंह (Thakur Pyarelal Singh)","डॉ. खूबचंद बघेल","रविशंकर शुक्ल","गजाधर साव"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने किसानों और मजदूरों को शोषण से बचाने के लिए 1946 में इस मंच की स्थापना की थी। यह संगठन छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की मांग को स्वर देने वाले प्रारंभिक संगठनों में से एक था।"},{"text":"बस्तर की प्रसिद्ध 'दंतेश्वरी देवी' का मंदिर किन नदियों के संगम पर स्थित है?","options":["शंखिनी और डंकिनी (Shankhini & Dankini)","इन्द्रावती और कोटरी","महानदी और शिवनाथ","अरपा और पैरी"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) का प्रसिद्ध शक्तिपीठ दंतेश्वरी मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण काकतीय शासक अन्नम देव ने 14वीं शताब्दी में करवाया था। माँ दंतेश्वरी को बस्तर की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।"},{"text":"'छत्तीसगढ़' नाम का प्रयोग सर्वप्रथम किस कवि की रचना में मिलता है?","options":["दलपत राव (Dalpat Rao)","रेवाराम","गोपाल मिश्र","लक्ष्मण कवि"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"खैरागढ़ रियासत के राजा लक्ष्मी निधि राय के दरबारी कवि दलपत राव ने 1494 ईस्वी में अपनी एक कविता में सर्वप्रथम 'छत्तीसगढ़' शब्द का लिखित प्रयोग किया था। उन्होंने लिखा था- \"लक्ष्मी निधि राय राना, छत्तीसगढ़ गढ़ गढ़ियाना।\""},{"text":"'नल वंश' के किस शासक ने राजिम के राजीव लोचन मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था?","options":["विलासतुंग","पृथ्वीदेव द्वितीय (Kalchuri context)","जगपाल देव (General of Kalchuri)","रत्नदेव तृतीय"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"यद्यपि राजीव लोचन मंदिर नलवंशी राजा विलासतुंग ने बनवाया था, लेकिन कल्चुरी राजा पृथ्वीदेव द्वितीय के सेनापति 'जगतपाल' या 'जगपाल देव' ने 12वीं शताब्दी में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। इसका उल्लेख राजिम शिलालेख में मिलता है।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'प्रेस' और 'जनजागरण' के अग्रदूत माधवराव सप्रे ने 'हिंदी ग्रंथ माला' कहाँ से प्रकाशित की थी?","options":["रायपुर","बिलासपुर","नागपुर (Nagpur)","जबलपुर"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"माधवराव सप्रे ने छत्तीसगढ़ में चेतना फैलाने के लिए नागपुर से 'हिंदी ग्रंथ माला' प्रकाशित की थी। वे छत्तीसगढ़ के निवासी थे लेकिन उनकी पत्रकारिता का कार्यक्षेत्र नागपुर और रायपुर दोनों रहा। उन्होंने स्वदेशी आंदोलन का भी पुरजोर समर्थन किया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ की किस जमींदारी को 'सोनाखान' के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ 'सोने की खान' है?","options":["बलौदाबाजार क्षेत्र (Sonakhan)","बस्तर","कोरिया","सरगुजा"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"सोनाखान बलौदाबाजार जिले में स्थित एक छोटी सी जमींदारी थी। यहाँ के बिंझवार जनजाति के जमींदारों ने हमेशा अंग्रेजों का कड़ा विरोध किया। वीर नारायण सिंह इसी पावन धरती के सपूत थे, जिन्होंने अकाल पीड़ितों की मदद के लिए अंग्रेजों से युद्ध किया।"},{"text":"'कल्चुरी काल' में ग्राम प्रमुख को क्या कहा जाता था?","options":["दाऊ","दीवान","गोंटिया (Gontia)","पटेल"],"correctAnswerIndex":"2","explanation":"कल्चुरी प्रशासन में गाँव सबसे छोटी इकाई थी। गाँव का मुखिया 'गोंटिया' कहलाता था। उसका पद वंशानुगत होता था और वह लगान वसूलने व शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तरदायी था। मराठा काल में भी यह पद बना रहा।"},{"text":"1930 के 'गट्टासिल्ली' जंगल सत्याग्रह का नेतृत्व किसने किया था?","options":["पंडित सुंदरलाल शर्मा","बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव (Babu Chhotelal Shrivastav)","रविशंकर शुक्ल","ई. राघवेंद्र राव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"धमतरी जिले के गट्टासिल्ली में पशुओं को चराने के अधिकार को लेकर जंगल सत्याग्रह हुआ था। इसका प्रमुख नेतृत्व बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, नत्थूजी जगताप और नारायण राव मेघावाले ने किया था। यह आंदोलन गांधीवादी अहिंसक तरीके का उत्कृष्ट उदाहरण था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के किस स्थान से 'शुंग कालीन' साक्ष्य और मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं?","options":["मल्हार (Malhar)","सिरपुर","आरंग","पचराही"],"correctAnswerIndex":"0","explanation":"बिलासपुर जिले के मल्हार से शुंग कालीन शुंग और मौर्य काल की ब्राह्मी लिपि के शिलालेख और कलाकृतियाँ प्राप्त हुई हैं। यहाँ से भगवान विष्णु की चतुर्भुजी प्रतिमा भी मिली है, जो शुंग काल की मानी जाती है।"},{"text":"'काकतीय वंश' के किस राजा ने जगदलपुर को बस्तर की राजधानी बनाया था?","options":["अन्नम देव","दलपत देव (Dalpat Dev)","अजमेर सिंह","भैरम देव"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"राजा दलपत देव ने 18वीं शताब्दी में अपनी राजधानी मंदोता से स्थानांतरित कर जगदलपुर बनाई थी। उन्होंने ही जगदलपुर में प्रसिद्ध 'दलपत सागर' तालाब का निर्माण करवाया था, जो छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा कृत्रिम तालाब माना जाता है।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'सूबेदार' विट्ठलराव दिनकर के समय कौन सा अंग्रेज यात्री आया था?","options":["मिस्टर इलियट","जे.टी. ब्लंट (J.T. Blunt, 1795)","मेजर एग्न्यु","कर्नल रसेल"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"कैप्टन जे.टी. ब्लंट 1795 ईस्वी में छत्तीसगढ़ की यात्रा पर आया था। उस समय विट्ठलराव दिनकर यहाँ के सूबेदार थे। ब्लंट ने अपने यात्रा वृत्तांत में छत्तीसगढ़ की कृषि, व्यापार और प्रशासनिक स्थिति का विस्तृत वर्णन किया है।"},{"text":"'कवर्धा' का प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर किस भगवान को समर्पित है?","options":["विष्णु","शिव (Lord Shiva)","ब्रह्मा","सूर्य"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"भोरमदेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसका नाम गोंड जनजाति के उपास्य देव 'भोरमदेव' के नाम पर पड़ा है। यह मंदिर नागर शैली और कामुक मूर्तिकला का अद्भुत संगम है, जिसे फणि नागवंशी राजाओं ने बनवाया था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ में 'होमरूल लीग' (1917) की शाखा बिलासपुर में किसने स्थापित की थी?","options":["पं. रविशंकर शुक्ल","ई. राघवेंद्र राव (E. Raghavendra Rao)","घनश्याम सिंह गुप्त","पंडित सुंदरलाल शर्मा"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"ई. राघवेंद्र राव बिलासपुर क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक नेता थे। उन्होंने एनी बेसेंट और तिलक के विचारों से प्रभावित होकर बिलासपुर में होमरूल लीग की स्थापना की और स्वतंत्रता आंदोलन को गति प्रदान की।"},{"text":"'सरगुजा रियासत' का भारत संघ में विलय किस वर्ष हुआ था?","options":["1947","1948 (January 1948)","1950","1956"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"छत्तीसगढ़ की सभी 14 रियासतों, जिनमें सरगुजा भी शामिल थी, का औपचारिक विलय जनवरी 1948 में सरदार वल्लभभाई पटेल की देखरेख में हुआ था। सरगुजा छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी रियासतों में से एक थी।"},{"text":"किस ऐतिहासिक स्थल को 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' कहा जाता है?","options":["मल्हार","भोरमदेव (Bhoramdeo)","राजिम","सिरपुर"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"कबीरधाम जिले के भोरमदेव मंदिर की कामुक प्रतिमाएं और स्थापत्य शैली मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिरों से बहुत मेल खाती है, इसीलिए इसे 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' कहा जाता है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था।"},{"text":"छत्तीसगढ़ के इतिहास का 'अंधकार काल' किसे कहा जाता है?","options":["कल्चुरी काल","मराठा सुबा काल (Subedari Period)","गुप्त काल","अंग्रेजी काल"],"correctAnswerIndex":"1","explanation":"मराठा सुबा शासन (1787-1818) के दौरान छत्तीसगढ़ में शासन और कानून व्यवस्था नाममात्र की थी। सूबेदारों ने केवल धन लूटने पर ध्यान दिया, जिससे जनता में भारी गरीबी और असुरक्षा फैल गई थी। इसीलिए इतिहासकारों ने इसे अंधकार काल की संज्ञा दी है।\n[/pyq_quiz]"}],"feedbackHigh":"<h4>अद्भुत ऐतिहासिक समझ!</h4><p>बधाई हो! छत्तीसगढ़ के इतिहास पर आपकी पकड़ बहुत गहरी है। आपका यह ज्ञान आपको परीक्षा में निश्चित ही सफलता दिलाएगा।</p>","feedbackMedium":"<h4>सराहनीय प्रयास, सुधार की गुंजाइश!</h4><p>आपका प्रदर्शन अच्छा है, लेकिन कुछ तकनीकी क्षेत्रों (जैसे कल्चुरी प्रशासन और विद्रोहों की तिथियों) में सुधार की आवश्यकता है। व्याख्याओं को ध्यान से पढ़ें।</p>","feedbackLow":"<h4>गहन अध्ययन की आवश्यकता!</h4><p>घबराएं नहीं! इतिहास एक विस्तृत विषय है। यूआरएल में दिए गए नोट्स को एक बार पुनः एकाग्रता से पढ़ें और मुख्य घटनाओं का चार्ट बनाएं, फिर दोबारा प्रयास करें।</p>","nextSteps":"<h4>अपनी तैयारी को और बेहतर बनाएं</h4>\n<p>इस टेस्ट के बाद, नीचे दिए गए लेखों को पढ़कर अपने ज्ञान को और गहरा करें:</p>\n<ul>\n <li><a href=\"https://msworldhindi.com/chhattisgarh-general-knowledge-notes-hindi/\">छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान: सम्पूर्ण नोट्स</a></li>\n <li><a href=\"https://msworldhindi.com/chhattisgarh-tribes-culture-notes-hindi/\">छत्तीसगढ़ की जनजातियां एवं संस्कृति</a></li>\n <li><a href=\"https://msworldhindi.com/chhattisgarh-geography-river-system-hindi/\">छत्तीसगढ़ का भूगोल और नदी अपवाह तंत्र</a></li>\n <li><a href=\"https://msworldhindi.com/chhattisgarh-panchayati-raj-notes-hindi/\">छत्तीसगढ़ पंचायती राज एवं नगरीय निकाय</a></li>\n</ul>"}" class="wp-block-msworld-practice-quiz">
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