उपसर्ग और प्रत्यय (Prefix & Suffix: शब्द निर्माण की वैज्ञानिक विधियाँ, आदि-स्वर वृद्धि नियम, 500+ महा-संग्रह, PYQs व FAQs) 2026

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उपसर्ग और प्रत्यय (Prefix & Suffix): शब्द निर्माण के नियम, आदि-स्वर वृद्धि ट्रिक्स व मास्टर नोट्स

📝उपसर्ग और प्रत्यय: शब्द संरचना के आधार स्तंभ

मानक परिभाषा: भाषा में नए शब्दों की रचना (Word Formation) के लिए मूल शब्दों के आगे या पीछे जोड़े जाने वाले अविकारी शब्दांशों को ‘उपसर्ग’ और ‘प्रत्यय’ कहते हैं। ये स्वतंत्र शब्द नहीं होते बल्कि शब्दांश (Morphemes) होते हैं, जो मूल शब्द के साथ जुड़कर उसके अर्थ में विशिष्ट परिवर्तन या नयापन लाते हैं।

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विषय सूची [X]

1. उपसर्ग और प्रत्यय में 3 बुनियादी अंतर

प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर उपसर्ग और प्रत्यय की स्थिति और प्रभाव पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं:

ℹ️उपसर्ग vs प्रत्यय: तुलनात्मक विश्लेषण

तुलना का आधारउपसर्ग (Prefix)प्रत्यय (Suffix)
जुड़ने का स्थानमूल शब्द के प्रारंभ (शुरुआत) में जुड़ता है।मूल शब्द के अंत (पीछे) में जुड़ता है।
अर्थ पर प्रभावमूल शब्द के अर्थ को उलट देता है या नई विशेषता लाता है।मूल शब्द के अर्थ को विशिष्ट दिशा देता है या व्याकरणिक कोटि बदलता है।
उदाहरण‘प्र’ + हार = प्रहार, ‘अप’ + मान = अपमानसमाज + ‘इक’ = सामाजिक, लिख + ‘आई’ = लिखाई

2. उपसर्ग के 4 मुख्य भेद

हिन्दी भाषा में स्रोत और उत्पत्ति के आधार पर 4 प्रकार के उपसर्गों का प्रयोग होता है:

✅1. संस्कृत के 22 मानक उपसर्ग (तत्सम उपसर्ग)

नियम: संस्कृत व्याकरण (पाणिनि अष्टाध्यायी) के अनुसार संस्कृत के 22 प्रामाणिक उपसर्ग होते हैं:

संस्कृत उपसर्गउपसर्ग का अर्थनिर्मित प्रमुख शब्द
अतिअधिक / परे / सीमा से बाहरअत्यधिक (अति + अधिक), अत्यंत, अत्याचार, अतिक्रमण, अतीव
अधिश्रेष्ठ / प्रधान / ऊपरअधिकार, अध्यक्ष (अधि + अक्ष), अधिपति, अधिनियम, अध्यादेश
अनुपीछे / समान / क्रमअन्वय (अनु + अय), अनुवाद, अनुशासन, अनुज, अन्वेषण
अपबुरा / हीन / विपरीतअपमान, अपशब्द, अपकर्ष, अपराध, अपशकुन
अभिसामने / पास / श्रेष्ठअभिमुख, अभ्यास (अभि + आस), अभिभाषण, अभियोग, अभ्युदय
अवहीन / नीच / पतनअवनति, अवगुण, अवज्ञा, अवशेष, अवलोकन
आतक / से / समेत / उल्टाआजीवन, आकंठ, आजन्म, आगमन, आकर्षण, आदान
उत् / उद्ऊपर / श्रेष्ठ / उत्कर्षउज्ज्वल (उत् + ज्वल), उच्चारण, उत्थान, उद्गम, उद्भव
उपनिकट / गौण / छोटाउपकार, उपाध्यक्ष, उपवन, उपदेश, उपनगर, उपग्रह
दुर्बुरा / कठिन (रहित)दुर्जन, दुराचार, दुर्गम, दुर्दशा, दुर्बल, दुर्लभ
दुस्बुरा / कठिन / दुष्टदुस्साहस, दुष्कर्म, दुष्कर, दुश्चरित्र, दुस्साध्य
निर्बिना / बाहर / रहितनिर्धन, निर्बल, निराकार, निर्दोष, निरपराध, निर्जन
निस्बिना / रहितनिश्चय, निष्कपट, निस्तेज, निष्फल, निस्संकोच
निभीतर / नीचे / विशेषनिवास, निबंध, निषेध, नियम, निदान, निमग्न
पराउलटा / पीछे / अनादरपराजय, पराभव, पराक्रम, परामर्श, पराविद्या
परिचारों ओर / पूर्ण / पासपर्यावरण (परि + आवरण), परिच्छेद, परिणाम, परिजन, परिक्रमा
प्रआगे / अधिक / विशेषप्रख्यात, प्रमाण, प्रबल, प्रगति, प्रयास, प्रयोग
प्रतिप्रत्येक / उलटा / सामनेप्रत्येक (प्रति + एक), प्रतिकूल, प्रतिध्वनि, प्रत्यक्ष, प्रतिवादी
विविशेष / भिन्न / अभावविज्ञान, विदेश, वियोग, विपक्ष, विकार, विनाश
सम्अच्छा / साथ / पूर्णसंकल्प, संतोष, सम्मुख, सम्मान, संस्कार, संवाद
सुअच्छा / सरल / सुंदरसुगम, सुपुत्र, स्वागत (सु + आगत), सुशिक्षित, सुभाषित
अन् / अपिनहीं / अभाव / भीअनादर, अनन्त, अनिष्ट (अपिधान = ढक्कन, अपिहित)

ℹ️2. हिन्दी के तद्भव उपसर्ग

हिन्दी उपसर्गअर्थप्रमुख उदाहरण
अनअभाव / निषेधअनपढ़, अनहोनी, अनजान, अनमोल, अनदेखा
अधआधाअधपका, अधमरा, अधजला, अधखिला
उनएक कम (संख्या)उनतीस (30 से 1 कम), उनचास, उनसठ, उन्नीस
कु / कबुरा / हीनकुपात्र, कुपुत्र, कुमार्ग, कपूत, कुढंग
निबिना / रहितनिडर, निकम्मा, निहत्था, निगोड़ा
भरपूरा / ठीकभरपेट, भरपूर, भरसक, भरमार
सु / सअच्छा / सहितसुपुत्र, सगोत्र, सपूत, सजग, सचेत
परदूसरा / बाद कापरोपकार, परहित, परदादा, परलोक, परपोता
बिनबिना / रहितबिनब्याहा, बिनबोले, बिनदेखा, बिनजाने
चौ / तिचार / तीनचौराहा, चौपाया, तिराहा, तिरंगा, तिपाई

💡3. उर्दू / फारसी (विदेशज) उपसर्ग

उर्दू उपसर्गअर्थप्रमुख उदाहरण
बेबिना / रहितबेचैन, बेकसूर, बेईमान, बेपरवाह, बेघर
बदबुराबदनाम, बदबू, बदसूरत, बदकिस्मत, बदहजमी
लाबिना / रहितलावारिस, लाजवाब, लापता, लाइलाज, लाचार
नाअभाव / नहींनापसंद, नालायक, नादान, नाराज, नाबालिक
खुशअच्छाखुशबू, खुशखबरी, खुशमिजाज, खुशनसीब
गैरभिन्न / बिनागैरहाजिर, गैरकानूनी, गैरसरकारी, गैरमुलकी
हमसमान / साथहमसफर, हमउम्र, हमदर्द, हमवतन, हमराज
सरमुख्य / प्रधानसरपंच, सरकार, सरहद, सरदार, सरगना
हरप्रत्येकहरएक, हरदिन, हरवक्त, हरसाल, हररोज
कमथोड़ा / हीनकमजोर, कमअक्ल, कमसिन, कमबख्त

🔥4. उपसर्ग की तरह प्रयुक्त होने वाले संस्कृत अव्यय

  • अधः (नीचे): अधःपतन, अधोमुख, अधोभाग, अधोलिखित
  • अंतः (भीतर): अंतःकरण, अंतःपुर, अंतर्राष्ट्रीय, अंतरात्मा
  • पुनर् (फिर): पुनर्जन्म, पुनरागमन, पुनर्निर्माण, पुनरुद्धार
  • प्राक् / प्राग् (पहले): प्रागैतिहासिक, प्राक्कथन, प्राक्कल्पना
  • पुरस् (आगे): पुरस्कार, पुरोहित, पुरश्चरण
  • तिरस् (तिरछा/अपमान): तिरस्कार, तिरोभाव, तिरोहित
  • स्व (अपना): स्वदेश, स्वधर्म, स्वराज्य, स्वाधीन (स्व + अधीन)

3. प्रत्यय के 2 मुख्य भेद: कृत् एवं तद्धित प्रत्यय

मूल शब्द की व्याकरणिक प्रकृति (धातु या संज्ञा) के आधार पर प्रत्यय के दो मुख्य भेद होते हैं:

✅1. कृत् प्रत्यय (कृदंत शब्द: क्रिया/धातु के अंत में)

परिभाषा: जो प्रत्यय क्रिया (धातु) के अंत में जुड़कर नए शब्द बनाते हैं, उन्हें ‘कृत् प्रत्यय’ कहते हैं और इनसे बने शब्दों को ‘कृदंत’ कहा जाता है। इसके 5 भेद होते हैं:

  • 1. कर्तृवाचक कृदंत (कर्ता का बोध कराने वाले):
    • अक -> लेखक (लिख् + अक), गायक, पाठक, नायक
    • अक्कड़ -> भुलक्कड़ (भूल + अक्कड़), घुमक्कड़, पियक्कड़
    • आऊ -> बिकाऊ (बिकना + आऊ), टिकाऊ, चलाऊ
    • वाला -> पढ़नेवाला, गानेवाला, रखवाला
  • 2. कर्मवाचक कृदंत (कर्म का बोध कराने वाले):
    • औना -> खिलौना (खेलना + औना), बिछौना
    • नी -> ओढ़नी, छलनी, सूँघनी
  • 3. करणवाचक कृदंत (क्रिया के साधन का बोध कराने वाले):
    • अन -> झाड़न, बंधन, बेलन, ढक्कन
    • ई -> फाँसी, रेती, भारी
    • आ -> झूला (झूलना + आ), ठेला, भूला
  • 4. भाववाचक कृदंत (क्रिया के भाव/व्यापार का बोध):
    • आई -> लिखाई, पढ़ाई, चढ़ाई, कमाई, सिलाई
    • आन -> उड़ान, थकान, मिलान, उठान
    • आवट -> सजावट, लिखावट, थकावट, बनावट
    • आहट -> घबराहट, चिल्लाहट, मुस्कुराहट
  • 5. क्रियाद्योतक कृदंत (क्रिया के जारी रहने का बोध):
    • ता -> चलता, पढ़ता, लिखता, दौड़ता हुआ

ℹ️2. तद्धित प्रत्यय (तद्धितांत शब्द: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण के अंत में)

परिभाषा: जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के अंत में जुड़कर नए शब्द बनाते हैं, उन्हें ‘तद्धित प्रत्यय’ कहते हैं और इनसे बने शब्दों को ‘तद्धितांत’ कहा जाता है। इसके 6 भेद होते हैं:

  • 1. कर्तृवाचक तद्धित (कर्ता निर्माण):
    • आर -> सुनार (सोना + आर), लुहार (लोहा + आर), कुम्हार (कुंभ + आर)
    • इया -> रसिया, मुखिया, सुखिया
    • ई -> तेली, धनी, माली
  • 2. भाववाचक तद्धित (भाव निर्माण):
    • ता -> मानवता, सुंदरता, मित्रता, पशुता
    • त्व -> मनुष्यत्व, अपनत्व, गुरुत्व, प्रभुत्व
    • पन -> बचपन, लड़कपन, अपनापन, पागलपन
    • आस -> मिठास (मीठा + आस), खटास
  • 3. संबंधवाचक तद्धित (संबंध सूचक):
    • एरा -> चचेरा (चाचा + एरा), ममेरा, फुफेरा, सपेरा
    • इक -> सामाजिक (समाज + इक), दैहिक, मानसिक
    • ईय -> भारतीय, राष्ट्रीय, प्रांतीय
  • 4. ऊनतावाचक / लघुतावाचक तद्धित (छोटा रूप दर्शाने वाले):
    • इया -> लुटिया (लोटा + इया), डिबिया (डिब्बा + इया), खटिया (खाट + इया)
    • री / ली -> छतरी, कोठरी, ढोलकी
  • 5. गणनावाचक तद्धित (क्रम/संख्या सूचक):
    • था -> चौथा, पहला
    • वाँ -> पाँचवाँ, दसवाँ, आठवाँ
    • हरा -> इकहरा, दोहरा, तिहरा
  • 6. सादृश्यवाचक तद्धित (समानता दर्शाने वाले):
    • सा -> पीला-सा, चाँद-सा, लाल-सा

4. परीक्षा हैक्स: आदि-स्वर वृद्धि का वैज्ञानिक नियम (First Vowel Change)

जब किसी शब्द में ‘इक’, ‘य’, ‘अ’, ‘इ’, ‘एय’, ‘ई’ प्रत्यय जुड़ते हैं, तो शब्द का पहला स्वर नियमानुसार दीर्घ (बड़ा) हो जाता है:

💡💡 आदि-स्वर वृद्धि के 4 अचूक सूत्र

सूत्र 1: ‘अ’ या ‘आ’ बदलकर ‘आ’ (ा) हो जाता है:

  • समाज + इक = सामाजिक | व्यवहार + इक = व्यावहारिक | संसार + इक = सांसारिक
  • अध्यात्म + इक = आध्यात्मिक | वर्ष + इक = वार्षिक | अर्थ + इक = आर्थिक
  • परलोक + इक = पारलौकिक | स्वभाव + इक = स्वाभाविक | प्रमाण + इक = प्रामाणिक

सूत्र 2: ‘इ’, ‘ई’ या ‘ए’ बदलकर ‘ऐ’ (ै) हो जाता है:

  • इतिहास + इक = ऐतिहासिक | विज्ञान + इक = वैज्ञानिक | दिन + इक = दैनिक
  • नीति + इक = नैतिक | वेद + इक = वैदिक | देव + इक = दैविक
  • जीव + इक = जैविक | देह + इक = दैहिक | विचार + इक = वैचारिक
  • कुंती + एय = कौंतेय | राधा + एय = राधेय | गंगा + एय = गांगेय

सूत्र 3: ‘उ’, ‘ऊ’ या ‘ओ’ बदलकर ‘औ’ (ौ) हो जाता है:

  • भूगोल + इक = भौगोलिक | उपन्यास + इक = औपन्यासिक | उद्योग + इक = औद्योगिक
  • भूत + इक = भौतिक | योग + इक = यौगिक | लोक + इक = लौकिक
  • मूल + इक = मौलिक | मुख + इक = मौखिक | पुरुष + य = पौरुष

सूत्र 4: ‘ऋ’ बदलकर ‘आर्’ हो जाता है:

  • गृहस्थ + य = गार्हस्थ्य | पृथक + य = पार्थक्य | मृत्तिका + इक = मार्तिक | ऋषि + अ = आर्ष

5. उन्नत व्याकरण: एक साथ 2 उपसर्ग, 2 प्रत्यय और उपसर्ग+प्रत्यय वाले शब्द

प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PSC, RO/ARO, SI) में सबसे कठिन प्रश्न इन मिश्रित संरचनाओं से आते हैं:

ℹ️1. एक ही शब्द में दो-दो उपसर्ग (Double Prefix)

मूल शब्दप्रथम उपसर्गद्वितीय उपसर्गअंतिम निर्मित शब्द
आचारदुर्आदुराचार (दुर् + आ + चार)
आवरणपरिआपर्यावरण (परि + आ + वरण)
करणविआव्याकरण (वि + आ + करण)
लोचनासम्आसमालोचना (सम् + आ + लोचना)
कारप्रतिउपप्रत्युपकार (प्रति + उप + कार)
रक्षितअसुअसुरक्षित (अ + सु + रक्षित)
हार्यअपरिअपरिहार्य (अ + परि + हार्य)
चारअतिआअत्याचार (अति + आ + चार)
हारनिर्आनिराहार (निर् + आ + हार)
करणनिर्आनिराकरण (निर् + आ + करण)

✅2. एक ही शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों (Prefix + Suffix)

उपसर्गमूल शब्दप्रत्ययअंतिम निर्मित शब्द
अपमानइतअपमानित
अनुभवईअनुभवी
सम्पूर्णतासंपूर्णता
दुर्बलतादुर्बलता
स्वतंत्रतास्वतंत्रता
परिपूर्णतापरिपूर्णता
बेचैनईबेचैनी
उपकारकउपकारक
निर्भयतानिर्भयता
अतिअंतइकआत्यंतिक

💡3. एक ही शब्द में दो-दो प्रत्यय (Double Suffix)

मूल शब्दप्रथम प्रत्ययद्वितीय प्रत्ययअंतिम निर्मित शब्द
मानवईयतामानवीयता
भारतईयताभारतीयता
राष्ट्रईयताराष्ट्रीयता
बचपनआबचपना
भूतइकताभौतिकता
समाजइकतासामाजिकता

विशेषज्ञ व्याकरण: संधि-आधारित गूढ़ उपसर्ग (Hidden Prefixes)

प्रतियोगी परीक्षाओं में जब उपसर्ग संधि के नियमों से जुड़ते हैं, तो उनका रूप बदल जाता है और विद्यार्थी भ्रमित हो जाते हैं:

ℹ️संधि-युक्त उपसर्गों का विश्लेषण

संधि-युक्त शब्दमूल उपसर्गमूल शब्दसंधि का प्रकार एवं नियम
अन्वेषणअनुएषणयण संधि (उ + ए = वे)
अध्यादेशअधिआदेशयण संधि (इ + आ = या)
अत्युत्तमअतिउत्तमयण संधि (इ + उ = यु)
संस्कारसम्कारव्यंजन संधि (म् का अनुस्वार व ‘स्’ का आगम)
संस्कृतिसम्कृतिव्यंजन संधि (‘स्’ का आगम)
उज्ज्वलउत्ज्वलव्यंजन संधि (त् + ज = ज्ज)
उच्छ्वासउत्श्वासव्यंजन संधि (त् का च्, श का छ)
दुराशादुर्आशाव्यंजन संधि (र् + आ = रा)
निराहारनिर्आहारव्यंजन संधि (र् + आ = रा)
स्वाभिमानस्वअभिमानदीर्घ स्वर संधि (अ + अ = आ)

परीक्षा Trap Alert: संस्कृत ‘अन्’ (हलंत) बनाम हिन्दी ‘अन’ (पूरा न)

परीक्षक अक्सर ‘अनेक’, ‘अनपढ़’ और ‘अनादि’ में उपसर्ग का सही रूप पूछकर भ्रम पैदा करते हैं:

💡संस्कृत 'अन्' vs हिन्दी 'अन' का वैज्ञानिक नियम

  • 1. संस्कृत तत्सम उपसर्ग ‘अन्’ (हलंत युक्त): यह उपसर्ग केवल स्वर वर्णों से शुरू होने वाले शब्दों से पहले जुड़ता है:
    • अन् + एक = अनेक | अन् + अर्थ = अनर्थ | अन् + इच्छा = अनिच्छा
    • अन् + उर्वर = अनुर्वर | अन् + आदि = अनादि | अन् + आदर = अनादर
  • 2. हिन्दी तद्भव उपसर्ग ‘अन’ (पूरा न युक्त): यह उपसर्ग केवल व्यंजन वर्णों से शुरू होने वाले शब्दों से पहले जुड़ता है:
    • अन + देखा = अनदेखा | अन + पढ़ = अनपढ़ | अन + होनी = अनहोनी
    • अन + जान = अनजान | अन + मोल = अनमोल | अन + कहा = अनकहा

मास्टर ट्रिक: ‘य’ प्रत्यय का जादुई नियम (स्वर वृद्धि + वर्ण आधा होना)

जब किसी शब्द के अंत में ‘य’ प्रत्यय जुड़ता है, तो दो बड़े वैज्ञानिक परिवर्तन एक साथ होते हैं:

  1. शब्द का पहला स्वर बड़ा (दीर्घ) हो जाता है (अ->आ, इ/ई/ए->ऐ, उ/ऊ/ओ->औ, ऋ->आर्)।
  2. शब्द का अंतिम वर्ण स्वर-रहित होकर आधा हो जाता है।

✅'य' प्रत्यय से निर्मित 15 प्रसिद्ध परीक्षा शब्द

मूल शब्दप्रत्ययनिर्मित शब्दध्वनि परिवर्तन विश्लेषण
पंडितयपांडित्य‘प’ का ‘पा’ हुआ तथा ‘त’ आधा (त्य) बना
सुंदरयसौंदर्य‘सु’ का ‘सौ’ हुआ तथा ‘र’ आधा होकर रेफ (र्य) बना
कवियकाव्य‘क’ का ‘का’ हुआ तथा ‘व’ आधा (व्य) बना
शूरयशौर्य‘शू’ का ‘शौ’ हुआ तथा ‘र’ रेफ बना
महात्मायमाहात्म्य‘म’ का ‘मा’ हुआ तथा ‘म’ आधा (त्म्य) बना
विधवायवैधव्य‘वि’ का ‘वै’ हुआ तथा ‘व’ आधा (व्य) बना (सर्वाधिक पूछा गया)
मधुरयमाधुर्य‘म’ का ‘मा’ हुआ तथा ‘र’ रेफ बना
समानयसामान्य‘स’ का ‘सा’ हुआ तथा ‘न’ आधा (न्य) बना
चतुरयचातुर्य‘च’ का ‘चा’ हुआ तथा ‘र’ रेफ बना
धीरयधैर्य‘धी’ का ‘धै’ हुआ तथा ‘र’ रेफ बना
एकयऐक्य‘ए’ का ‘ऐ’ हुआ तथा ‘क’ आधा (क्य) बना
गंभीरयगांभीर्य‘ग’ का ‘गां’ हुआ तथा ‘र’ रेफ बना
उदारयऔदार्य‘उ’ का ‘औ’ हुआ तथा ‘र’ रेफ बना
दीनयदैन्य‘दी’ का ‘दै’ हुआ तथा ‘न’ आधा (न्य) बना
वत्सलयवात्सल्य‘व’ का ‘वा’ हुआ तथा ‘ल’ आधा (ल्य) बना

शास्त्रीय व्याकरण: अपत्यवाचक (संतान / वंश सूचक) तद्धित प्रत्यय

प्राचीन संस्कृत व्याकरण में माता-पिता या वंश के नाम से संतान का नाम बनाने के लिए ‘अ’, ‘इ’, ‘ई’, ‘एय’ प्रत्यय जुड़ते हैं:

🔥संतान / वंश सूचक तद्धित प्रत्यय तालिका

मूल जनक / कुलप्रयुक्त प्रत्ययसंतान / वंशज शब्दपौराणिक संदर्भ
मनुअमानवमनु की संतान (मनुष्य)
दशरथइदाशरथिदशरथ के पुत्र (श्रीराम / लक्ष्मण)
पांडुअपांडवपांडु के 5 पुत्र
कुरुअकौरवकुरु वंश की संतान
वासुदेवअवासुदेववासुदेव के पुत्र (श्रीकृष्ण)
द्रुपदईद्रौपदीराजा द्रुपद की पुत्री
जनकईजानकीराजा जनक की पुत्री (सीता)
पर्वत (पर्वतराज)ईपार्वतीपर्वतराज हिमालय की पुत्री
कुंतीएयकौंतेयकुंती के पुत्र (अर्जुन / कर्ण / युधिष्ठिर)
राधाएयराधेयराधा (धाय माँ) के पालित पुत्र (कर्ण)
गंगाएयगांगेयगंगा के पुत्र (भीष्म पितामह)
अदितियआदित्यदेवमाता अदिति के पुत्र (सूर्य / देवता)
दितियदैत्यदिति के पुत्र (राक्षस)
विनताएयवैनतेयविनता के पुत्र (गरुड़)
अंजनीएयआंजनेयमाता अंजनी के पुत्र (हनुमान जी)

उपसर्ग शब्दकोश: संस्कृत के 22 उपसर्गों के 50 नए शब्द

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए तत्सम उपसर्ग युक्त 50 महत्वपूर्ण शब्द:

✅संस्कृत उपसर्गों की मास्टर तालिका

निर्मित शब्दउपसर्ग + मूल शब्दव्याकरणिक विश्लेषण / अर्थ
अध्यात्मअधि + आत्मयण संधि (इ + आ = या) / आत्म ज्ञान
अधिष्ठाताअधि + स्था + ताअधि (प्रधान) + स्था (बैठने वाला)
अनुकंपाअनु + कंपाअनु (पीछे/समान) + दया भाव
अनुशीलनअनु + शीलनलगातार अध्ययन / अभ्यास
अनुकरणअनु + करणपीछे-पीछे चलना / नकल
अनुस्वारअनु + स्वरस्वर के पीछे आने वाली नासिक्य ध्वनि
अपकीर्तिअप + कीर्तिअप (बुरी) + प्रसिद्धि / बदनामी
अपभ्रंशअप + भ्रंशविकृत या बिगड़ी हुई भाषा
अपव्ययअप + व्ययफिजूलखर्ची / अनुचित व्यय
अपहरणअप + हरणबलपूर्वक छीन ले जाना
अभ्यागतअभि + आगतयण संधि / घर आया हुआ अतिथि
अभिज्ञानअभि + ज्ञानपहचान / विशिष्ट ज्ञान
अभिजातअभि + जातउच्च कुल में जन्मा / श्रेष्ठ
अवतरणअव + तरणनीचे उतरना / उद्धरण
अवमूल्यनअव + मूल्यनमुद्रा का मूल्य घटाना
अवहेलनाअव + हेलनातिरस्कार / उपेक्षा करना
आचरणआ + चरणआ (सम्यक) + व्यवहार / चरित्र
आभारआ + भारउपकृत होने का भाव
आमरणआ + मरणआ (तक) + मृत्यु तक
उद्गारउत् + गारमन के भाव / आंतरिक विचार
उद्भवउत् + भवउत्पन्न होना / स्रोत
उच्छिन्नउत् + छिन्नजड़ से नष्ट किया हुआ
उद्योगउत् + योगपरिश्रम / कारखाना
उपकूलउप + कूलउप (निकट) + नदी का किनारा
उपशमनउप + शमनशांत करने की क्रिया
दुराग्रहदुर् + आग्रहदुर् (बुरा) + अनुचित हठ
दुर्बोधदुर् + बोधजिसे समझना कठिन हो
दुर्दम्यदुर् + दम्यजिसे दबाना कठिन हो
दुष्प्रवृत्तिदुस् + प्रवृत्तिबुरी आदत / निकृष्ट विचार
दुश्चिंतादुस् + चिंताबुरी या व्यर्थ की चिंता
निर्झरनिर् + झरनिर् (बिना बाधा) + झरना
निर्मलनिर् + मलमल (गंदगी) से रहित / स्वच्छ
निर्वाणनिर् + वाणमोक्ष / दीपक का बुझना
निस्तारनिस् + तारउद्धार / संकट से पार पाना
निस्पृहनिस् + स्पृहस्पृहा (इच्छा) से रहित
निगूढ़नि + गूढ़अत्यंत गुप्त / छिपा हुआ
नियोजननि + योजनयोजना बनाना / प्लानिंग
परामर्शपरा + मर्शसलाह / विचार-विमर्श
पराकाष्ठापरा + काष्ठाअंतिम सीमा / चरम सीमा
परिधिपरि + धिचारों ओर का घेरा (Circumference)
परिपक्वपरि + पक्वपूरी तरह पका हुआ / प्रौढ़
प्रलापप्र + लापव्यर्थ का विलाप / बकवास
प्रकंपप्र + कंपतीव्र कंपन / कांपना
प्रत्याशाप्रति + आशायण संधि / किसी बात की उम्मीद
प्रतिलिपिप्रति + लिपिफोटोकॉपी / दूसरी प्रति
प्रतिध्वनिप्रति + ध्वनिगूँज / टकराकर लौटी आवाज
विसर्जनवि + सर्जनत्यागना / समाप्त करना
व्याधिवि + आ + धिदो उपसर्ग (वि + आ) + शारीरिक रोग
संन्याससम् + नि + आसदो उपसर्ग (सम् + नि) + पूर्ण त्याग
संकीर्णसम् + कीर्णसंकुचित / तंग

उपसर्ग शब्दकोश: हिन्दी एवं उर्दू/फारसी के 40 नए शब्द

दैनिक जीवन और प्रशासनिक परीक्षाओं में पूछे जाने वाले 40 महत्वपूर्ण शब्द:

ℹ️तद्भव एवं उर्दू/फारसी उपसर्ग तालिका

निर्मित शब्दउपसर्ग + मूल शब्दभाषा एवं अर्थ
अनबनअन + बनहिन्दी / आपसी मतभेद या खटपट
अनमेलअन + मेलहिन्दी / जिसका मेल न बैठता हो
अधकचराअध + कचराहिन्दी / अधूरा या अपूर्ण ज्ञान
अधकहाअध + कहाहिन्दी / आधा कहा हुआ
उचक्काउ + चक्काहिन्दी / झपटने वाला चोर
उधेड़नाउ + धेड़नाहिन्दी / सिलाई खोलना / नष्ट करना
उनसठउन + साठहिन्दी / साठ से 1 कम (59)
उनहत्तरउन + सत्तरहिन्दी / सत्तर से 1 कम (69)
कुचालकु + चालहिन्दी / बुरा आचरण या चालबाजी
कुडौलकु + डौलहिन्दी / भद्दे आकार वाला
निठल्लानि + ठालाहिन्दी / बिना काम का बैठा व्यक्ति
निहत्थानि + हत्थाहिन्दी / बिना हथियार वाला
सपूतस + पूतहिन्दी / योग्य व आज्ञाकारी पुत्र
सजीवस + जीवहिन्दी / जीवन सहित / चैतन्य
परनानापर + नानाहिन्दी / माता के नाना
परपोतापर + पोताहिन्दी / पोते का पुत्र
तिराहाति + राहाहिन्दी / तीन रास्तों का संगम
तिकोनति + कोनहिन्दी / तीन कोनों वाली आकृति
चौमासाचौ + मासाहिन्दी / वर्षा ऋतु के चार महीने
पंचमेलपच + मेलहिन्दी / पाँच चीजों का मिश्रण
बेअसरबे + असरउर्दू / जिस पर कोई प्रभाव न पड़े
बेबुनियादबे + बुनियादउर्दू / बिना आधार का / झूठा
बेरहमबे + रहमउर्दू / बिना दया के / क्रूर
बदहवासबद + हवासउर्दू / घबराया हुआ / होश खोया
बदचलनबद + चलनउर्दू / बुरे चरित्र वाला
लाजवाबला + जवाबउर्दू / जिसका कोई उत्तर न हो / बेजोड़
लाकलामला + कलामउर्दू / बिना किसी संशय के / अकाट्य
नापाकना + पाकउर्दू / जो पवित्र न हो / अशुद्ध
नाचीज़ना + चीज़उर्दू / जिसका कोई महत्व न हो
खुशदिलखुश + दिलउर्दू / प्रसन्नचित्त स्वभाव
खुशनुमाखुश + नुमाउर्दू / सुखद व आनंददायक
गैरवाजिबगैर + वाजिबउर्दू / जो अनुचित हो / गैरजरूरी
गैरमुमकिनगैर + मुमकिनउर्दू / जो संभव न हो / असंभव
हमजोलीहम + जोलीउर्दू / साथ खेलने वाला हमउम्र साथी
हमसायाहम + सायाउर्दू / पड़ोसी / साथ रहने वाला
सरताजसर + ताजउर्दू / सिर का मुकुट / सबसे श्रेष्ठ
सरगनासर + गनाउर्दू / गिरोह का मुख्य मुखिया
हरदमहर + दमउर्दू / प्रत्येक क्षण / हमेशा
हरघड़ीहर + घड़ीउर्दू / हर समय
कमखर्चकम + खर्चउर्दू / कम व्यय करने वाला / मितव्ययी

प्रत्यय शब्दकोश: क्रिया/धातु से बने 40 नए कृदंत शब्द

क्रिया और धातुओं के अंत में कृत् प्रत्यय जुड़ने से बने 40 महत्वपूर्ण शब्द:

💡कृत् प्रत्यय (कृदंत) तालिका

निर्मित कृदंत शब्दमूल धातु/क्रिया + प्रत्ययकृदंत का भेद एवं अर्थ
तैराकतैरना + आककर्तृवाचक / तैरने में निपुण व्यक्ति
लड़ाकूलड़ना + आक / आकूकर्तृवाचक / युद्ध करने में तत्पर
खिलाड़ीखेलना + आड़ीकर्तृवाचक / खेल खेलने वाला
अनाड़ीअन + आड़ीकर्तृवाचक / अकुशल व्यक्ति
गवैयागाना + ऐयाकर्तृवाचक / गायन करने वाला
खवैयाखाना + ऐयाकर्तृवाचक / अत्यधिक खाने वाला
चाटनीचाटना + नीकर्मवाचक / खाने का स्वादिष्ट व्यंजन
मथनीमथना + नीकरणवाचक / दही मथने की रई
झाड़ूझाड़ना + ऊकरणवाचक / सफाई का साधन
लगानलगना + आनभाववाचक / जमीन का टैक्स
मिलानमिलना + आनभाववाचक / तुलना या मिलान करना
चालानचलना + आनभाववाचक / यातायात रसीद
बचतबचना + तभाववाचक / संचित धन
खपतखपना + तभाववाचक / सामग्री का उपभोग
रंगतरंगना + तभाववाचक / रंगत या निखार
गिनतीगिनना + तीभाववाचक / गणना करने की क्रिया
बढ़तीबढ़ना + तीभाववाचक / विकास या वृद्धि
कटौतीकाटना + औतीभाववाचक / कटौती करना
मनौतीमानना + औतीभाववाचक / मन्नत मांगना
चुनौतीचुनना + औतीभाववाचक / ललकार या मुकाबला
फिसलनफिसलना + अनभाववाचक / चिकनी सतह
लुटेरालूटना + एराकर्तृवाचक / लूटने वाला डाकू
बसेराबसना + एराभाववाचक / रहने का स्थान
छलियाछलना + इयाकर्तृवाचक / छल करने वाला
जड़ियाजड़ना + इयाकर्तृवाचक / रत्न जड़ने वाला कारीगर
घटियाघटना + इयाविशेषण / निम्न स्तर का
बढ़ियाबढ़ना + इयाविशेषण / उत्तम स्तर का
घुमावघूमना + आवभाववाचक / मोड़ या चक्कर
खिंचावखींचना + आवभाववाचक / तनाव की स्थिति
बहावबहना + आवभाववाचक / जल की धारा
कटाईकाटना + आईभाववाचक / फसल काटने की क्रिया
बुनाईबुनना + आईभाववाचक / स्वेटर/कपड़ा बुनना
छपाईछापना + आईभाववाचक / मुद्रण कार्य
कमाऊकमाना + ऊ / आऊकर्तृवाचक / धन कमाने वाला
सड़ांधसड़ना + आंधभाववाचक / सड़ी हुई दुर्गंध
उतारउतरना + आभाववाचक / नीचे आने की क्रिया
चढ़ावचढ़ना + आवभाववाचक / ऊँचाई की ओर गमन
कहावतकहना + आवतभाववाचक / लोकप्रचलित उक्ति
दिखावादेखना + आवाभाववाचक / बाहरी प्रदर्शन
पछतावापछताना + आवाभाववाचक / पश्चाताप

प्रत्यय शब्दकोश: संज्ञा, सर्वनाम व विशेषण से बने 40 नए तद्धितांत शब्द

संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के अंत में जुड़ने वाले 40 प्रमुख तद्धित प्रत्यय:

✅तद्धित प्रत्यय (तद्धितांत) तालिका

निर्मित तद्धितांत शब्दमूल शब्द + प्रत्ययतद्धित का भेद एवं अर्थ
पंडिताइनपंडित + आइनस्त्री-प्रत्यय / पंडित की पत्नी
ठकुराइनठाकुर + आइनस्त्री-प्रत्यय / ठाकुर की पत्नी
चौधराइनचौधरी + आइनस्त्री-प्रत्यय / चौधरी की पत्नी
देवरानीदेवर +groups/आनीस्त्री-प्रत्यय / देवर की पत्नी
सेठानीसेठ +groups/आनीस्त्री-प्रत्यय / सेठ की पत्नी
रसोइयारसोई + इयाकर्तृवाचक / भोजन पकाने वाला
सुखियासुख + इयागुणवाचक / सुखी व्यक्ति
दुखियादुःख + इयागुणवाचक / पीड़ित व्यक्ति
घमंडीघमंड + ईगुणवाचक / अहंकारी स्वभाव
क्रोधीक्रोध + ईगुणवाचक / गुस्से वाला व्यक्ति
लोभीलोभ + ईगुणवाचक / लालची व्यक्ति
शर्मीलाशर्म + ईलागुणवाचक / लजीला स्वभाव
रसीलारस + ईलागुणवाचक / रस से भरा हुआ
चमकीलाचमक + ईलागुणवाचक / चमकदार वस्तु
जहरीलाजहर + ईलागुणवाचक / विषैला पदार्थ
कंकरीलाकंकड़ + ईलागुणवाचक / पत्थरों से युक्त भूमि
खर्चीलाखर्च + ईलागुणवाचक / अधिक खर्च करने वाला
दयालुदया + आलुगुणवाचक / दया की भावना रखने वाला
कृपालुकृपा + आलुगुणवाचक / कृपा करने वाला
श्रद्धालुश्रद्धा + आलुगुणवाचक / आस्थावान भक्त
झगड़ालूझगड़ा + आलूगुणवाचक / कलह करने वाला
ससुरालससुर + आलसंबंधवाचक / पत्नी/पति का घर
ननिहालनानी + हाल / आलसंबंधवाचक / नानी का घर
घरानाघर + आनासंबंधवाचक / वंश या संगीत परंपरा
रोजानारोज + आनाकालवाचक / प्रतिदिन होने वाला
सालानासाल + आनाकालवाचक / प्रतिवर्ष होने वाला
मेहनतानामेहनत + आनापारिश्रमिक / मजदूरी
नजरानानजर + आनाभेंट / उपहार
रंगीनरंग + ईनगुणवाचक / रंगों से युक्त
शौकीनशौक + ईनगुणवाचक / शौक रखने वाला
नमकीननमक + ईनस्वादवाचक / नमकीन खाद्य
ग्रामीणग्राम + ईणस्थानवाचक / गाँव का निवासी
कुलवंतीकुल + वंतीस्त्री-प्रत्यय / श्रेष्ठ कुल की स्त्री
गुणवानगुण + वानगुणवाचक / गुणों से युक्त पुरुष
बलवानबल + वानगुणवाचक / शक्तिशाली
धनवानधन + वानगुणवाचक / पैसे वाला
भाग्यवानभाग्य + वानगुणवाचक / किस्मत वाला
रूपवतीरूप + वतीस्त्री-प्रत्यय / सुंदर स्त्री
ज्ञानवतीज्ञान + वतीस्त्री-प्रत्यय / विदुषी महिला
पुत्रवतीपुत्र + वतीस्त्री-प्रत्यय / पुत्र वाली माता

आदि-स्वर वृद्धि शब्दकोश: ‘इक’, ‘य’, ‘अ’, ‘इ’ के 30 नए शब्द

आदि-स्वर वृद्धि (First Vowel Change) नियम पर आधारित 30 उच्च-स्तरीय परीक्षा शब्द:

🔥आदि-स्वर वृद्धि नियम की मास्टर तालिका

निर्मित शब्दमूल शब्द + प्रत्ययस्वर परिवर्तन नियम एवं विश्लेषण
प्रादेशिकप्रदेश + इक‘प्र’ (अ) का ‘प्रा’ (आ) हुआ
काल्पनिककल्पना + इक‘क’ (अ) का ‘का’ (आ) हुआ
तात्विकतत्व + इक‘त’ (अ) का ‘ता’ (आ) हुआ
पारिवारिकपरिवार + इक‘प’ (अ) का ‘पा’ (आ) हुआ
सामयिकसमय + इक‘स’ (अ) का ‘सा’ (आ) हुआ
पारस्परिकपरस्पर + इक‘प’ (अ) का ‘पा’ (आ) हुआ
प्रासंगिकप्रसंग + इक‘प्र’ (अ) का ‘प्रा’ (आ) हुआ
प्रशासनिकप्रशासन + इक‘प्र’ (अ) का ‘प्रा’ (आ) हुआ
वाणिज्यवणिक + य‘व’ का ‘वा’ हुआ तथा ‘क’ आधा बना
ऐंद्रियइंद्रिय + अ‘इ’ का ‘ऐ’ हुआ
ऐच्छिकइच्छा + इक‘इ’ का ‘ऐ’ हुआ
शैवशिव + अ‘शि’ (इ) का ‘शै’ (ऐ) हुआ / शिव के उपासक
वैष्णवविष्णु + अ‘वि’ (इ) का ‘वै’ (ऐ) हुआ / विष्णु के उपासक
शाक्तशक्ति + अ‘श’ का ‘शा’ हुआ / दुर्गा के उपासक
पार्थपृथा (कुंती) + अ‘पृ’ (ऋ) का ‘पा’ (आर्) हुआ / अर्जुन
राघवरघु + अ‘र’ (अ) का ‘रा’ (आ) हुआ / श्रीराम
सौमित्रसुमित्रा + अ‘सु’ (उ) का ‘सौ’ (औ) हुआ / लक्ष्मण
मारुतिमरुत + इ‘म’ (अ) का ‘मा’ (आ) हुआ / पवनपुत्र हनुमान
सौहार्दसुहृद + अ‘सु’ (उ) का ‘सौ’ हुआ तथा ‘ऋ’ का ‘आर्’
चाणक्यचणक + य‘च’ का ‘चा’ हुआ तथा ‘क’ आधा बना
कौटिल्यकुटिल + य‘कु’ (उ) का ‘कौ’ (औ) हुआ तथा ‘ल’ आधा बना
मौनमुनि + अ‘मु’ (उ) का ‘मौ’ (औ) हुआ
सौरसूर्य + अ‘सू’ (ऊ) का ‘सौ’ (औ) हुआ
यौवनयुवा + अ‘यु’ (उ) का ‘यौ’ (औ) हुआ
गौरवगुरु + अ‘गु’ (उ) का ‘गौ’ (औ) हुआ
लाघवलघु + अ‘ल’ (अ) का ‘ला’ (आ) हुआ
पार्थक्यपृथक + य‘पृ’ (ऋ) का ‘पा’ (आर्) हुआ
मार्तिकमृत्तिका + इक‘मृ’ (ऋ) का ‘मा’ (आर्) हुआ
कौशलकुशल + अ‘कु’ (उ) का ‘कौ’ (औ) हुआ
आर्षऋषि + अ‘ऋ’ का ‘आर्’ हुआ / ऋषियों द्वारा रचित

ज्ञान की परीक्षा: उपसर्ग और प्रत्यय All-India PYQ महा-क्विज़

‘अत्यंत’ शब्द में कौन सा उपसर्ग लगा हुआ है? (UPPSC / CTET)

  • अत
  • अति
  • अत्य
  • अ

‘धार्मिक’ शब्द में कौन सा प्रत्यय जुड़ा है और इसके कारण पहला वर्ण क्यों बदला? (CGPSC / REET)

  • मिक
  • इक (आदि-स्वर वृद्धि नियम से ‘धर्म’ का ‘धार्’ हुआ)
  • क
  • ईक

‘पर्यावरण’ शब्द में कुल कितने उपसर्ग विद्यमान हैं? (UP RO/ARO / KVS)

  • केवल एक (पर्या)
  • दो (परि + आ)
  • तीन (प + रि + आ)
  • कोई उपसर्ग नहीं

निम्नलिखित में से किस शब्द में ‘कृत् प्रत्यय’ (कृदंत) का प्रयोग हुआ है? (MP SI / DSSSB)

  • मिठास
  • सजावट
  • सुंदरता
  • लड़केपन

‘अपमानित’ शब्द में क्रमशः क्या-क्या उपस्थित है? (UKPSC / State SI)

  • केवल उपसर्ग
  • केवल प्रत्यय
  • ‘अप’ उपसर्ग और ‘इत’ प्रत्यय
  • दो उपसर्ग

‘दुराचार’ शब्द में मूल उपसर्ग कौन सा है? (BPSC / CG Vyapam)

  • दुर
  • दुरा
  • दुर्
  • दुः

🔥🎯 अपना स्कोर आँकें: आपकी तैयारी का स्तर क्या है?

कुल प्रश्न: 6 | सही उत्तरों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी तैयारी का विश्लेषण करें:

  • 🏆 6 में से 6 सही (टॉपर स्तर): अद्भुत! उपसर्ग, प्रत्यय और आदि-स्वर वृद्धि के वैज्ञानिक नियमों पर आपकी पकड़ शत-प्रतिशत है।
  • 🥈 6 में से 5 सही (उत्कृष्ट स्तर): बहुत बढ़िया तैयारी! केवल 2 उपसर्गों वाले शब्दों और संधि-आधारित उपसर्गों का पुनः अभ्यास करें।
  • 🥉 6 में से 4 सही (औसत स्तर): आपकी नींव अच्छी है, लेकिन ‘कृत् बनाम तद्धित’ और ‘इक प्रत्यय नियमों’ का रिवीजन आवश्यक है।
  • ⚠️ 4 से कम सही (रिवीजन आवश्यक): निराश न हों! ऊपर दिए गए “आदि-स्वर वृद्धि नियम (First Vowel Change)” को दोबारा ध्यान से पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

विशेषज्ञ निष्कर्ष एवं अगला अध्याय

✅अंतिम मार्गदर्शन

उपसर्ग और प्रत्यय हिन्दी शब्द-रचना (Word Formation) की वह वैज्ञानिक कुंजी हैं जो आपकी शब्दावली को असीमित विस्तार देती हैं। इस पोस्ट में दिए गए आदि-स्वर वृद्धि नियमों और मिश्रित संरचनाओं का नियमित अभ्यास आपको परीक्षा में 100% सटीकता प्रदान करेगा।

रोडमैप के अनुसार अगले अध्याय (पोस्ट 11) में हम अध्ययन करेंगे — “समास (Samas): सभी 6 भेदों की गहराई, विग्रह के नियम, पहचानने की 100% अचूक ट्रिक्स व PYQs”।

अपनी तैयारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए हमारे साथ निरंतर जुड़े रहें!

Er. M. S.
संपादक एवं परीक्षा रणनीतिकार | ✓ Govt. Selected

Er. M. S. (Mentor M. S. Sir)

मैकेनिकल इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि, PGDCA और 7+ वर्षों के सघन प्रतियोगी परीक्षा विश्लेषण का अनुभव। वर्तमान में केंद्र सरकार के प्रतिष्ठित उपक्रम में कार्यरत। जटिल सिद्धांतों को वैज्ञानिक तालिकाओं में ढालकर छात्रों तक पहुँचाना ही हमारा लक्ष्य है।

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