समास (Samas: सभी 6 भेदों की गहराई, विग्रह के नियम, पद-प्रधानता, 4 विशेष तत्पुरुष उपभेद, 100% अचूक ट्रिक्स, मास्टर तालिका, PYQs व FAQs)

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समास (Samas): सभी 6 भेदों की गहराई, विग्रह नियम, पहचानने की 100% अचूक ट्रिक्स व मास्टर नोट्स

📝समास: शब्दों के संक्षिप्तीकरण का चमत्कार

समास की मानक परिभाषा: दो या दो से अधिक शब्दों (पदों) के मेल से एक नया सार्थक और संक्षिप्त शब्द बनाने की प्रक्रिया को ‘समास’ कहते हैं। ‘समास’ का शाब्दिक अर्थ ‘संक्षेप’ या ‘घटाना’ होता है। सामासिक पद को उसके मूल पदों और संबंध-सूचक विभक्तियों के साथ अलग-अलग करना ‘समास-विग्रह’ कहलाता है।

हिन्दी शब्द-रचना के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए हमारे पिछले अध्यायों वर्णमाला, वर्तनी शुद्धि, संधि, शब्द भेद, पर्यायवाची, विलोम शब्द, अनेकार्थी शब्द, वाक्यांश के लिए एक शब्द, श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द और उपसर्ग और प्रत्यय का अध्ययन अवश्य करें।

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विषय सूची [X]

1. पद-प्रधानता के आधार पर समास का वर्गीकरण

समास में दो पद होते हैं: पहला पद (पूर्वपद) और दूसरा पद (उत्तरपद)। पद की प्रधानता के आधार पर समास के 4 मुख्य वर्ग तथा परम्परा अनुसार 6 प्रमुख भेद होते हैं:

ℹ️पद-प्रधानता का वैज्ञानिक चार्ट

प्रधानता का आधारसमास का नाममुख्य विशेषता एवं सूत्र
1. पूर्वपद (पहला पद) प्रधानअव्ययीभाव समासपहला पद अव्यय/उपसर्ग होता है और पूरा पद क्रिया-विशेषण बनता है।
2. उत्तरपद (दूसरा पद) प्रधानतत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगुदूसरा पद मुख्य होता है (कारक विभक्ति, विशेषण-विशेष्य या संख्यावाचक)।
3. दोनों पद प्रधान (उभयपद)द्वंद्व समासदोनों पदों का समान महत्व होता है और बीच में ‘और/या’ का लोप होता है।
4. कोई पद प्रधान नहीं (अन्य पद प्रधान)बहुव्रीहि समासदोनों पद मिलकर किसी तीसरे विशेष अर्थ (देवी-देवता/संज्ञा) की ओर संकेत करते हैं।

2. संधि और समास में 4 बुनियादी अंतर

संधि vs समास: तुलनात्मक तालिका

तुलना का आधारसंधि (Sandhi)समास (Samas)
मूल तत्वदो वर्णों (ध्वनियों) का परस्पर मेल।दो पदों (शब्दों) का परस्पर मेल।
प्रक्रियावर्ण-विकार (ध्वनि परिवर्तन) अनिवार्य है।बीच की कारक विभक्ति या योजक शब्दों का लोप होता है।
अलगाव की क्रियाअलग करने को ‘संधि-विच्छेद’ कहते हैं।अलग करने को ‘समास-विग्रह’ कहते हैं।
शब्द दायराकेवल तत्सम (संस्कृत) शब्दों में मुख्य है।तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी सभी प्रकार के शब्दों में होता है।

3. अव्ययीभाव समास (पूर्वपद प्रधान)

जिस सामासिक पद का पहला पद (पूर्वपद) अव्यय या उपसर्ग हो और वही प्रधान हो, तथा समस्त पद क्रिया-विशेषण की भाँति कार्य करे, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं:

ℹ️अव्ययीभाव समास की 3 अचूक पहचान ट्रिक्स

  • ट्रिक 1 (उपसर्ग युक्त पद): यथा, प्रति, आ, अनु, भर, बे, बा, नि, हर, ला आदि उपसर्ग से शुरू होने वाले पद:
    • यथाशक्ति -> शक्ति के अनुसार | प्रतिदिन -> प्रत्येक दिन / दिन-दिन | आजन्म -> जन्म से लेकर
    • भरपेट -> पेट भरकर | बेकसूर -> बिना कसूर के | बाइज्जत -> इज्जत के साथ | निडर -> बिना डर के
  • ट्रिक 2 (पुनरुक्त शब्द / शब्दों की पुनरावृत्ति): जब एक ही शब्द की दो बार आवृत्ति हो:
    • रातों-रात -> रात ही रात में | दिनों-दिन -> दिन ही दिन में | बीचों-बीच -> ठीक बीच में | कानों-कान -> कान ही कान में
    • हाथों-हाथ -> एक हाथ से दूसरे हाथ में | धड़ाधड़ -> धड़-धड़ की आवाज के साथ | पल-पल -> प्रत्येक पल
  • ट्रिक 3 (नदीवाची शब्दों के साथ संख्या – संस्कृत नियम): यदि नदी के नाम से पहले संख्या आए, तो द्विगु नहीं बल्कि अव्ययीभाव होता है (जैसे- पञ्चगंगम् = पाँच गंगाओं का समाहार, द्वियमुनम्)।

4. तत्पुरुष समास (उत्तरपद प्रधान) एवं कारक भेद

जिस समास का दूसरा पद (उत्तरपद) प्रधान हो और दोनों पदों के बीच की कारक विभक्ति का लोप हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसके 6 कारक भेद होते हैं:

तत्पुरुष समास के 6 कारक भेद

कारक भेदलोप होने वाली विभक्तिप्रमुख सामासिक पद एवं विग्रह
1. कर्म तत्पुरुष (द्वितीया)‘को’ का लोपगगनचुंबी (गगन को चूमने वाला), ग्रामगत (ग्राम को गया हुआ), माखनचोर (माखन को चुराने वाला), चिड़ीमार (चिड़ियों को मारने वाला)
2. करण तत्पुरुष (तृतीया)‘से / के द्वारा’ का लोपतुलसीकृत (तुलसी द्वारा रचित), शोकाकुल (शोक से आकुल), हस्तलिखित (हाथ से लिखित), मनचाहा (मन से चाहा)
3. संप्रदान तत्पुरुष (चतुर्थी)‘के लिए’ का लोपरसोईघर (रसोई के लिए घर), देशभक्ति (देश के लिए भक्ति), यज्ञशाला (यज्ञ के लिए शाला), हथकड़ी (हाथ के लिए कड़ी)
4. अपादान तत्पुरुष (पंचमी)‘से’ (अलग होने का भाव)ऋणमुक्त (ऋण से मुक्त), देशनिकाला (देश से निकाला हुआ), धनहीन (धन से हीन), पथभ्रष्ट (पथ से भ्रष्ट)
5. संबंध तत्पुरुष (षष्ठी)‘का / के / की’ का लोपराजपुत्र (राजा का पुत्र), गंगाजल (गंगा का जल), पराधीन (पर के अधीन), विद्यासागर (विद्या का सागर)
6. अधिकरण तत्पुरुष (सप्तमी)‘में / पर’ का लोपआपबीती (आप पर बीती), गृहप्रवेश (गृह में प्रवेश), रणधीर (रण में धीर), कविश्रेष्ठ (कवियों में श्रेष्ठ), घुड़सवार (घोड़े पर सवार)

5. तत्पुरुष समास के 4 विशेष उपभेद (Special Subtypes)

उच्च-स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PSCs, RO/ARO) में तत्पुरुष के इन 4 विशेष उपभेदों से प्रश्न पूछे जाते हैं:

💡तत्पुरुष के 4 विशेष उपभेद: नञ्, अलुक, उपपद व लुप्तपद

  • 1. नञ् तत्पुरुष समास (निषेध / अभाव सूचक): जिस समास का पूर्वपद नकारात्मक (अ, अन, ना, गैर) हो:
    • अन्याय -> न न्याय | अनपढ़ -> न पढ़ा हुआ | नास्तिक -> न आस्तिक | अयोग्य -> न योग्य | अनदेखा -> न देखा हुआ
  • 2. अलुक तत्पुरुष समास (विभक्ति का लोप न होना): जिसमें पूर्वपद की संस्कृत कारक विभक्ति का लोप नहीं होता:
    • युधिष्ठिर -> युधि (युद्ध में) + स्थिर (स्थिर रहने वाला) | वाचस्पति -> वाचः (वाणी का) + पति
    • मनसिज -> मनसि (मन में) + ज (जन्म लेने वाला = कामदेव) | खेचर -> खे (आकाश में) + चर (विचरने वाला)
    • अंतेवासी -> अंते (समीप) + वासी (रहने वाला शिष्य)
  • 3. उपपद तत्पुरुष समास (दूसरा पद स्वतंत्र शब्द न होकर कृदंत प्रत्यय हो):
    • जलद -> जल देने वाला | पंकज -> पंक में जन्म लेने वाला | शास्त्रज्ञ -> शास्त्र को जानने वाला | कुंभकार -> घड़ा बनाने वाला
  • 4. लुप्तपद / मध्यमपदलोपी तत्पुरुष (बीच के पूरे पद का लोप होना):
    • दहीबड़ा -> दही में डूबा हुआ बड़ा | बैलगाड़ी -> बैल से चलने वाली गाड़ी
    • पवनचक्की -> पवन से चलने वाली चक्की | पर्णकुटी -> पत्तों से बनी हुई कुटिया | तुलादान -> तुला से तौलकर दिया जाने वाला दान

6. कर्मधारय समास (विशेषण-विशेष्य एवं उपमान-उपमेय)

जिस समास का उत्तरपद प्रधान हो तथा दोनों पदों के बीच विशेषण-विशेष्य (विशेषता बताने वाला) अथवा उपमान-उपमेय (तुलना करने वाला) संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं:

ℹ️कर्मधारय समास की पहचान एवं विग्रह नियम

  • ट्रिक 1 (विग्रह करने पर ‘है जो’ या ‘के समान’ आना):
    • नीलकमल -> नीला है जो कमल | महात्मा -> महान है जो आत्मा | कापुरुष -> कायर है जो पुरुष
    • चरणकमल -> कमल के समान चरण | कनकलता -> कनक (सोने) के समान लता | चंद्रमुख -> चंद्रमा के समान मुख
  • ट्रिक 2 (रूपक / अभेद संबंध – विग्रह में ‘रूपी’ आना):
    • विद्याधन -> विद्या रूपी धन | भवसागर -> भव (संसार) रूपी सागर | क्रोधाग्नि -> क्रोध रूपी अग्नि | मुखचंद्र -> मुख रूपी चंद्रमा

7. द्विगु समास (संख्यावाचक पूर्वपद)

जिस सामासिक पद का पहला पद संख्यावाचक विशेषण हो और समस्त पद किसी समूह या समाहार का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं:

द्विगु समास के प्रमुख उदाहरण (समाहार नियम)

सामासिक पदसमास-विग्रहसमूह / समाहार की संख्या
त्रिफलातीन फलों का समाहार / समूह3 फल
चौराहाचार राहों (रास्तों) का समाहार4 राहें
पंचवटीपाँच वट (बरगद) वृक्षों का समाहार5 वट वृक्ष
षडरसछह रसों का समाहार6 रस
सप्तर्षिसात ऋषियों का समूह7 ऋषि
अष्टाध्यायीआठ अध्यायों का समाहार (पाणिनि ग्रंथ)8 अध्याय
नवग्रहनौ ग्रहों का समाहार9 ग्रह
शताब्दीसौ अब्दों (वर्षों) का समाहार100 वर्ष
दुपट्टादो पट्टों (कपड़ों) का समाहार2 पट्ट
तिरंगातीन रंगों का समाहार (सामान्य अर्थ में)3 रंग

8. द्वंद्व समास (उभयपद प्रधान) एवं इसके 3 उपभेद

जिस समास के दोनों पद प्रधान हों तथा विग्रह करने पर ‘और’, ‘तथा’, ‘या’, ‘अथवा’ जैसे योजक शब्दों का प्रयोग हो, उसे द्वंद्व समास कहते हैं। इसके 3 उपभेद होते हैं:

💡द्वंद्व समास के 3 वैज्ञानिक उपभेद

  • 1. इतरेतर द्वंद्व (विग्रह में ‘और’ / ‘तथा’ आए – दोनों का स्वतंत्र अस्तित्व):
    • माता-पिता -> माता और पिता | राधा-कृष्ण -> राधा और कृष्ण | अन्न-जल -> अन्न और जल | दाल-रोटी -> दाल और रोटी
    • धर्माधर्म -> धर्म और अधर्म | सुरासुर -> सुर और असुर | पच्चीस -> पाँच और बीस (5 + 20)
  • 2. समाहार द्वंद्व (विग्रह में ‘आदि / वगैरह’ आए – समूह व समान अर्थ का बोध):
    • हाथ-पाँव -> हाथ-पाँव आदि | कपड़ा-लत्ता -> कपड़ा-लत्ता आदि | रुपया-पैसा -> रुपया-पैसा आदि | बाल-बच्चे -> बाल-बच्चे आदि
    • सेठ-साहूकार -> सेठ-साहूकार आदि | चाय-वाय -> चाय-नाश्ता आदि
  • 3. वैकल्पिक द्वंद्व (विग्रह में ‘या’ / ‘अथवा’ आए – परस्पर विरोधी विकल्प):
    • लाभ-हानि -> लाभ या हानि | पाप-पुण्य -> पाप या पुण्य | भला-बुरा -> भला या बुरा | थोड़ा-बहुत -> थोड़ा या बहुत
    • सुख-दुःख -> सुख या दुःख | जय-पराजय -> जय या पराजय | आज-कल -> आज या कल

9. बहुव्रीहि समास (अन्य पद प्रधान)

जिस समास में न तो पूर्वपद प्रधान हो और न ही उत्तरपद, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे (अन्य) पद या विशेष संज्ञा की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं:

बहुव्रीहि समास के प्रमुख उदाहरण एवं तीसरा अर्थ

सामासिक पदसमास-विग्रहतीसरा विशेष अर्थ (प्रधान पद)
दशाननदस हैं आनन (मुख) जिसकेरावण
पीतांबरपीत (पीले) हैं अंबर (वस्त्र) जिसकेभगवान श्रीकृष्ण / विष्णु
लंबोदरलंबा है उदर (पेट) जिसकाभगवान गणेश
चक्रपाणिचक्र है पाणि (हाथ) में जिसकेभगवान विष्णु
त्रिनेत्रतीन नेत्र हैं जिसकेभगवान शिव
चतुराननचार आनन (मुख) हैं जिसकेभगवान ब्रह्मा
विषधरविष को धारण करने वालासर्प (साँप)
आशुतोषजो शीघ्र (आशु) प्रसन्न हो जाता हैभगवान शिव
वज्रपाणिवज्र है पाणि (हाथ) में जिसकेदेवराज इंद्र
निशाचररात में विचरण करने वालाराक्षस
चंद्रशेखरचंद्र है शिखर पर जिसकेभगवान शिव
अंशुमालीकिरणें (अंशु) हैं माला जिसकीसूर्य देव
वीणापाणिवीणा है पाणि (हाथ) में जिसकेमाता सरस्वती
पतझड़पत्ते झड़ते हैं जिस मौसम मेंएक विशेष ऋतु (वसंत पूर्व)
प्रधानमंत्रीमंत्रियों में जो प्रधान हैविशेष प्रशासनिक पद

10. परीक्षा Trap Alert: सबसे बड़े 3 समास कन्फ्यूजन का समाधान

परीक्षक अक्सर विद्यार्थियों को फँसाने के लिए ऐसे शब्द देते हैं जिनमें दो-दो समास होते हैं:

🔥💡 परीक्षा हॉल निर्णय नियम: कब कौन सा समास चुनें?

  1. कर्मधारय vs बहुव्रीहि (जैसे- पीतांबर, नीलकंठ, महादेव):
    • यदि विग्रह हो: ‘पीला है जो अंबर’ -> कर्मधारय समास
    • यदि विग्रह हो: ‘पीले हैं अंबर जिसके अर्थात श्रीकृष्ण’ -> बहुव्रीहि समास
    • गोल्डन टिप: यदि परीक्षा में बिना विग्रह के ‘पीतांबर’ या ‘नीलकंठ’ आए और विकल्प में कर्मधारय व बहुव्रीहि दोनों हों, तो हमेशा ‘बहुव्रीहि’ को पहली प्राथमिकता दें।
  2. द्विगु vs बहुव्रीहि (जैसे- त्रिनेत्र, दशानन, पंचानन, चतुर्भुज):
    • यदि विग्रह हो: ‘तीन नेत्रों का समाहार’ -> द्विगु समास
    • यदि विग्रह हो: ‘तीन नेत्र हैं जिसके अर्थात शिव’ -> बहुव्रीहि समास
    • गोल्डन टिप: संख्यावाचक शब्द यदि किसी पौराणिक देवी-देवता के लिए रूढ़ हो चुका हो, तो वह सदैव ‘बहुव्रीहि’ माना जाएगा।
  3. संधि और समास दोनों युक्त शब्द (जैसे- रामायण, देवालय, देवासुर):
    • रामायण: राम + अयन (दीर्घ संधि) तथा राम का अयन (संबंध तत्पुरुष समास)।
    • देवासुर: देव + असुर (दीर्घ संधि) तथा देव और असुर (इतरेतर द्वंद्व समास)।

11. मास्टर तालिका: परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले 50 सामासिक पद

विगत 15 वर्षों की परीक्षाओं (CTET, State PSC, SI, RO/ARO) में सर्वाधिक पूछे गए 50 शब्द:

ℹ️एग्जाम-डे स्पेशल मास्टर सामासिक तालिका

सामासिक पदसही समास-विग्रहसमास का भेद एवं नियम
युधिष्ठिरयुद्ध में स्थिर रहने वालाअलुक तत्पुरुष समास
दहीबड़ादही में डूबा हुआ बड़ामध्यमपदलोपी (लुप्तपद) तत्पुरुष
यथाशक्तिशक्ति के अनुसारअव्ययीभाव समास (‘यथा’ अव्यय)
रातों-रातरात ही रात मेंअव्ययीभाव समास (पुनरुक्त शब्द)
राजपुत्रराजा का पुत्रसंबंध तत्पुरुष (‘का’ का लोप)
रोगमुक्तरोग से मुक्तअपादान तत्पुरुष (‘से’ अलग भाव)
रसोईघररसोई के लिए घरसंप्रदान तत्पुरुष (‘के लिए’ लोप)
आपबीतीआप पर बीतीअधिकरण तत्पुरुष (‘पर’ का लोप)
हस्तलिखितहाथ से लिखितकरण तत्पुरुष (‘से’ साधन लोप)
गगनचुंबीगगन को चूमने वालाकर्म तत्पुरुष (‘को’ का लोप)
अन्यायन न्यायनञ् तत्पुरुष समास
नास्तिकन आस्तिकनञ् तत्पुरुष समास
वाचस्पतिवाणी का पतिअलुक तत्पुरुष समास
मनसिजमन में जन्म लेने वाला (कामदेव)अलुक तत्पुरुष / बहुव्रीहि
नीलकमलनीला है जो कमलकर्मधारय समास (विशेषण-विशेष्य)
चरणकमलकमल के समान चरणकर्मधारय समास (उपमान-उपमेय)
विद्याधनविद्या रूपी धनकर्मधारय समास (रूपक संबंध)
महात्मामहान है जो आत्माकर्मधारय समास
कापुरुषकायर है जो पुरुषकर्मधारय समास
त्रिफलातीन फलों का समाहारद्विगु समास (संख्या 3)
चौराहाचार राहों का समाहारद्विगु समास (संख्या 4)
पंचवटीपाँच वटों का समाहारद्विगु समास (संख्या 5)
अष्टाध्यायीआठ अध्यायों का समाहारद्विगु समास (संख्या 8)
सप्तर्षिसात ऋषियों का समूहद्विगु समास (संख्या 7)
शताब्दीसौ वर्षों का समाहारद्विगु समास (संख्या 100)
माता-पितामाता और पिताइतरेतर द्वंद्व समास
राधा-कृष्णराधा और कृष्णइतरेतर द्वंद्व समास
अन्न-जलअन्न और जलइतरेतर द्वंद्व समास
हाथ-पाँवहाथ-पाँव आदिसमाहार द्वंद्व समास
रुपया-पैसारुपया-पैसा आदिसमाहार द्वंद्व समास
लाभ-हानिलाभ या हानिवैकल्पिक द्वंद्व समास
पाप-पुण्यपाप या पुण्यवैकल्पिक द्वंद्व समास
धर्माधर्मधर्म और अधर्मइतरेतर द्वंद्व समास
पच्चीसपाँच और बीसइतरेतर द्वंद्व समास
दशाननदस हैं मुख जिसके (रावण)बहुव्रीहि समास
पीतांबरपीले हैं वस्त्र जिसके (श्रीकृष्ण)बहुव्रीहि समास
लंबोदरलंबा है पेट जिसका (गणेश)बहुव्रीहि समास
चक्रपाणिचक्र है हाथ में जिसके (विष्णु)बहुव्रीहि समास
त्रिनेत्रतीन नेत्र हैं जिसके (शिव)बहुव्रीहि समास
चतुराननचार मुख हैं जिसके (ब्रह्मा)बहुव्रीहि समास
विषधरविष धारण करने वाला (साँप)बहुव्रीहि समास
आशुतोषशीघ्र प्रसन्न होने वाले (शिव)बहुव्रीहि समास
वज्रपाणिवज्र है हाथ में जिसके (इंद्र)बहुव्रीहि समास
चंद्रशेखरचंद्र है सिर पर जिसके (शिव)बहुव्रीहि समास
वीणापाणिवीणा है हाथ में जिसके (सरस्वती)बहुव्रीहि समास
पर्णकुटीपत्तों से बनी कुटीलुप्तपद तत्पुरुष समास
बैलगाड़ीबैल से चलने वाली गाड़ीलुप्तपद तत्पुरुष समास
पवनचक्कीपवन से चलने वाली चक्कीलुप्तपद तत्पुरुष समास
जलदजल देने वाला (बादल)उपपद तत्पुरुष समास
शास्त्रज्ञशास्त्र जानने वालाउपपद तत्पुरुष समास

शास्त्रीय व्याकरण: बहुव्रीहि समास के 4 विशेष उपभेद

उच्च-स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं (State PSC, RO/ARO, TGT/PGT) में बहुव्रीहि के आंतरिक भेदों से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं:

ℹ️बहुव्रीहि समास के 4 शास्त्रीय भेद

बहुव्रीहि का उपभेदपहचान का नियमप्रमुख सामासिक पद एवं विग्रह
1. समानाधिकरण बहुव्रीहिदोनों पदों में समान (प्रथमा) विभक्ति हो।पीतांबर (पीत हैं अंबर जिसके = कृष्ण), लंबोदर (लंबा है उदर जिसका = गणेश), चतुर्मुख (ब्रह्मा)
2. व्यधिकरण बहुव्रीहिदोनों पदों में अलग-अलग विभक्तियाँ हों (पूर्वपद प्रथमा, उत्तरपद सप्तमी आदि)।चक्रपाणि (चक्र है पाणि/हाथ में जिसके = विष्णु), चंद्रशेखर (चंद्र है शिखर पर जिसके = शिव), शूलपाणि (शिव)
3. सहबहुव्रीहि (तुल्ययोग)पूर्वपद में ‘स’ (सहित/साथ) उपसर्ग जुड़ा हो।सपरिवार (परिवार सहित है जो), सदेह (देह सहित), साग्रह (आग्रह सहित), सचेत (चेतना सहित)
4. व्यतिहार बहुव्रीहिघात-प्रतिघात, परस्पर लड़ाई या झगड़े का बोध कराने वाले शब्द।लाठालाठी (लाठियों से जो लड़ाई हुई), बाताबाती (बातों-बातों से जो झगड़ा हुआ), धक्कामुक्की, गालागाली

मास्टर ट्रिक: संख्यावाची शब्दों में समास का 4-स्तरीय नियम

संख्या दिखने पर केवल ‘द्विगु समास’ नहीं होता! संख्यावाची शब्दों में संदर्भ के अनुसार 4 अलग-अलग समास होते हैं:

💡💡 संख्यावाची शब्दों का वर्गीकरण चार्ट (Numbers Master Map)

  • 1. द्विगु समास (समूह / समाहार का बोध):
    • जब 1 से 9 तक की संख्या या 10 के गुणक (दहाई/सैकड़ा) किसी समूह को दर्शाएँ:
      त्रिफला (3 फल), चौराहा (4 राहें), नवग्रह (9 ग्रह), शताब्दी (100 वर्ष)।
  • 2. द्वंद्व समास (10 से 99 के बीच की मिश्रित संख्याएँ):
    • जब दो संख्याएँ मिलकर बनी हों (इतरेतर द्वंद्व):
      पच्चीस (पाँच और बीस = 5 + 20), इकतीस (एक और तीस = 1 + 30), अड़तालीस (आठ और चालीस = 8 + 40), बहत्तर (दो और सत्तर = 2 + 70)।
  • 3. बहुव्रीहि समास (तीसरे विशेष अर्थ में रूढ़ संख्याएँ):
    • जब संख्या किसी देवी-देवता या विशेष व्यक्ति के लिए निश्चित हो:
      दशानन (10 मुख = रावण), त्रिनेत्र (3 आँखें = शिव), चतुर्भुज (4 भुजाएँ = विष्णु), सहस्राक्ष (1000 आँखें = इंद्र)।
  • 4. अव्ययीभाव समास (नदीवाची शब्दों के साथ संख्या – संस्कृत पाणिनि नियम):
    • नदी के नाम के पहले संख्या आने पर द्विगु नहीं, अव्ययीभाव होता है:
      पञ्चगंगम् (पाँच गंगाओं का समाहार), द्वियमुनम् (दो यमुनाओं का समाहार)।

परीक्षा हॉल विशेष: 20 अति-कठिन एवं दुर्लभ सामासिक पद (RO/ARO व PSC स्पेशल)

वे कठिन सामासिक पद जो राज्य प्रशासनिक परीक्षाओं के कट-ऑफ को निर्धारित करते हैं:

20 अति-दुर्लभ सामासिक पद संग्रह

कठिन सामासिक पदसही समास-विग्रहसमास का भेद एवं नियम
शाकपार्थिवशाक प्रिय पार्थिव (राजा)मध्यमपदलोपी (लुप्तपद) तत्पुरुष
वज्रांग (बजरंग)वज्र के समान कठोर हैं अंग जिसके (हनुमान जी)बहुव्रीहि समास
कूपमंडूककूप (कुएँ) में रहने वाला मंडूक (संकुचित बुद्धि वाला)बहुव्रीहि समास
शाखामृगशाखाओं पर दौड़ने वाला मृग (बंदर)बहुव्रीहि समास
कुसुमायुधकुसुम (फूल) हैं आयुध (हथियार) जिसके (कामदेव)बहुव्रीहि समास
अनंगअंग-रहित है जो (कामदेव)बहुव्रीहि समास
वाग्दत्तावाणी द्वारा (विवाह हेतु) दी गई कन्यातृतीया (करण) तत्पुरुष समास
आत्मघातीस्वयं की हत्या करने वालाउपपद तत्पुरुष समास
पर्णशालापत्तों से बनी हुई शाला (कुटिया)लुप्तपद तत्पुरुष समास
सिरमौरसिर का मौर (मुकुट / श्रेष्ठ)संबंध तत्पुरुष समास
सिरदर्दसिर में दर्दअधिकरण तत्पुरुष समास
अहर्निशअहन् (दिन) और निशा (रात)इतरेतर द्वंद्व समास
शीतोष्णशीत या उष्ण (ठंडा या गर्म)वैकल्पिक द्वंद्व / कर्मधारय
सहोदरसमान उदर (पेट) से जन्मा सगा भाईबहुव्रीहि / कर्मधारय
पतझड़पत्ते झड़ते हैं जिस ऋतु में (एक विशेष मौसम)बहुव्रीहि समास
चितचोरचित्त को चुराने वालाकर्म तत्पुरुष समास
मदमस्तमद से मस्तकरण तत्पुरुष समास
बलिपशुबलि के लिए पशुसंप्रदान तत्पुरुष समास
जीवदयाजीवों पर दयाअधिकरण तत्पुरुष समास
पद्मनाभपद्म (कमल) है नाभि में जिसके (भगवान विष्णु)बहुव्रीहि समास

समास शब्दकोश: अव्ययीभाव समास के 30 महत्वपूर्ण शब्द

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए अव्ययीभाव समास के महत्वपूर्ण सामासिक पद:

अव्ययीभाव समास की मास्टर तालिका

सामासिक पदसही समास-विग्रहव्याकरणिक विश्लेषण / उपसर्ग
आपादमस्तकपैर (पाद) से सिर (मस्तक) तक‘आ’ उपसर्ग (तक अर्थ में)
आजानुजानु (घुटनों) तक‘आ’ उपसर्ग
यथायोग्ययोग्यता के अनुसार‘यथा’ अव्यय
यथामतिमति (बुद्धि) के अनुसार‘यथा’ अव्यय
यथार्थअर्थ के अनुसार‘यथा’ अव्यय
यथेष्टइच्छा (इष्ट) के अनुसार‘यथा’ अव्यय
यथाविधिविधि के अनुसार‘यथा’ अव्यय
प्रत्यक्षअक्षियों (आँखों) के सामने‘प्रति’ उपसर्ग (प्रति + अक्ष)
परोक्षआँखों से परे (ओझल)‘पर’ अव्यय (पर + अक्ष)
प्रत्यंगअंग-अंग / प्रत्येक अंग‘प्रति’ उपसर्ग
प्रतिक्षणप्रत्येक क्षण‘प्रति’ उपसर्ग
प्रतिमाहप्रत्येक माह‘प्रति’ उपसर्ग
प्रत्याशाआशा के बदले आशा‘प्रति’ उपसर्ग (प्रति + आशा)
प्रत्युत्तरउत्तर के बदले उत्तर‘प्रति’ उपसर्ग (प्रति + उत्तर)
आजीवनजीवन भर‘आ’ उपसर्ग
आकंठकंठ तक‘आ’ उपसर्ग
आबालवृद्धबालक से लेकर वृद्ध तक‘आ’ उपसर्ग
आमरणमरण (मृत्यु) तक‘आ’ उपसर्ग
आसेतुहिमालयसेतुबंध (रामेश्वरम) से हिमालय तक‘आ’ उपसर्ग
अनुकूलमन / इच्छा के अनुसार‘अनु’ उपसर्ग
अनुरूपरूप के अनुसार‘अनु’ उपसर्ग
अनुशासनशासन के पीछे / नियमबद्ध‘अनु’ उपसर्ग
अनजानेबिना जाने हुए‘अन’ तद्भव उपसर्ग
बेखटकेबिना खटके / बिना डर के‘बे’ उर्दू उपसर्ग
बेपरवाहबिना परवाह के‘बे’ उर्दू उपसर्ग
बेहिसाबबिना हिसाब के‘बे’ उर्दू उपसर्ग
बेशकबिना शक के‘बे’ उर्दू उपसर्ग
बाकायदाकायदे / नियम के साथ‘बा’ उर्दू उपसर्ग
हररोज़प्रत्येक रोज़ (दिन)‘हर’ उपसर्ग
घर-घरप्रत्येक घरपुनरुक्त शब्द
साफ-साफबिलकुल साफपुनरुक्त शब्द
लूटम-लूटलूट के बाद लूटपुनरुक्त शब्द
मारामारीमार के बाद मारपुनरुक्त शब्द
देखा-देखीदेखने के बाद देखनापुनरुक्त शब्द

समास शब्दकोश: तत्पुरुष समास (कारक व उपभेद) के 50 नए शब्द

कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण व उपभेदों के 50 प्रमुख शब्द:

ℹ️तत्पुरुष समास की मास्टर तालिका

सामासिक पदसही समास-विग्रहतत्पुरुष का भेद एवं विभक्ति
जेबकतराजेब को कतरने वालाकर्म तत्पुरुष (‘को’ का लोप)
स्वर्गप्राप्तस्वर्ग को प्राप्तकर्म तत्पुरुष
शरणागतशरण को आगत (आया हुआ)कर्म तत्पुरुष
आशातीतआशा से अतीत (परे)कर्म तत्पुरुष
सर्वप्रियसभी को प्रियकर्म तत्पुरुष
भयाकुलभय से आकुल (व्याकुल)करण तत्पुरुष (‘से’ का लोप)
रेखांकितरेखा से अंकितकरण तत्पुरुष
जन्मांधजन्म से अंधाकरण तत्पुरुष
रसभरारस से भरा हुआकरण तत्पुरुष
पददलितपद (पैरों) से दलित / रौंदा हुआकरण तत्पुरुष
वाक्युद्धवाणी (वचनों) से युद्धकरण तत्पुरुष
मदांधमद (अहंकार) से अंधाकरण तत्पुरुष
गुरुदक्षिणागुरु के लिए दक्षिणासंप्रदान तत्पुरुष (‘के लिए’ लोप)
सत्याग्रहसत्य के लिए आग्रहसंप्रदान तत्पुरुष
गौशालागौओं (गायों) के लिए शालासंप्रदान तत्पुरुष
मालगाड़ीमाल ढोने के लिए गाड़ीसंप्रदान तत्पुरुष
राहखर्चराह (मार्ग) के लिए खर्चसंप्रदान तत्पुरुष
युद्धभूमियुद्ध के लिए भूमिसंप्रदान तत्पुरुष
स्नानघरस्नान के लिए घरसंप्रदान तत्पुरुष
नेत्रहीननेत्रों से हीन (रहित)अपादान तत्पुरुष (‘से’ अलग भाव)
पदच्युतपद से हटाया हुआअपादान तत्पुरुष
धर्मविमुखधर्म से विमुख / अलगअपादान तत्पुरुष
भयभीतभय से भीत (डरा हुआ)अपादान तत्पुरुष
जातिभ्रष्टजाति से भ्रष्ट / निष्कासितअपादान तत्पुरुष
सेवामुक्तसेवा (नौकरी) से मुक्तअपादान तत्पुरुष
राजदरबारराजा का दरबारसंबंध तत्पुरुष (‘का’ का लोप)
राजकन्याराजा की कन्यासंबंध तत्पुरुष
सेनापतिसेना का पति (प्रमुख)संबंध तत्पुरुष
लखपतिलाखों का पति (स्वामी)संबंध तत्पुरुष
पराधीनतापर (दूसरे) के अधीन होने का भावसंबंध तत्पुरुष
दीनानाथदीनों (गरीबों) के नाथसंबंध तत्पुरुष
अमचूरआम का चूर्णसंबंध तत्पुरुष
कन्यादानकन्या का दानसंबंध तत्पुरुष
आनंदमग्नआनंद में मग्नअधिकरण तत्पुरुष (‘में’ का लोप)
सर्वोत्तमसब में उत्तमअधिकरण तत्पुरुष
पुरुषोत्तमपुरुषों में उत्तम (सामान्य अर्थ)अधिकरण तत्पुरुष
शास्त्रनिपुणशास्त्र में निपुणअधिकरण तत्पुरुष
ध्यानमग्नध्यान में मग्नअधिकरण तत्पुरुष
देशाटनदेश में अटन (भ्रमण)अधिकरण तत्पुरुष
वनवासवन में वासअधिकरण तत्पुरुष
कविपुंगवकवियों में पुंगव (श्रेष्ठ)अधिकरण तत्पुरुष
अश्रद्धान श्रद्धानञ् तत्पुरुष समास
अनुचितन उचितनञ् तत्पुरुष समास
अनिच्छान इच्छानञ् तत्पुरुष समास
अनश्वरन नश्वर (अविनाशी)नञ् तत्पुरुष समास
स्वर्णकारस्वर्ण (सोना) बनाने वाला कारीगरउपपद तत्पुरुष समास
मधुमक्खीमधु एकत्र करने वाली मक्खीमध्यमपदलोपी तत्पुरुष
गुड़धानीगुड़ मिली हुई धानीमध्यमपदलोपी तत्पुरुष
रेलगाड़ीरेल (पटरी) पर चलने वाली गाड़ीमध्यमपदलोपी तत्पुरुष
घोड़ागाड़ीघोड़े से चलने वाली गाड़ीमध्यमपदलोपी तत्पुरुष

समास शब्दकोश: कर्मधारय समास के 30 महत्वपूर्ण शब्द

विशेषण-विशेष्य और उपमान-उपमेय पर आधारित कर्मधारय समास के 30 प्रमुख पद:

💡कर्मधारय समास की मास्टर तालिका

सामासिक पदसही समास-विग्रहसंबंध एवं नियम
रक्तांबररक्त (लाल) है जो अंबर (वस्त्र)विशेषण-विशेष्य
सद्विचारसत् (अच्छा) है जो विचारविशेषण-विशेष्य
कुविचारकु (बुरा) है जो विचारविशेषण-विशेष्य
सुयोगसु (अच्छा) है जो योगविशेषण-विशेष्य
नराधमअधम (नीच) है जो नरविशेषण-विशेष्य
पुरुषरत्नरत्न के समान पुरुषउपमान-उपमेय
मुखारविंदअरविंद (कमल) के समान मुखउपमान-उपमेय
देहलतालता रूपी देहरूपक संबंध
वचनामृतअमृत रूपी वचनरूपक संबंध
करकमलकमल के समान कर (हाथ)उपमान-उपमेय
शुभागमनशुभ है जो आगमनविशेषण-विशेष्य
परमानंदपरम है जो आनंदविशेषण-विशेष्य
महर्षिमहान हैं जो ऋषिविशेषण-विशेष्य
राजर्षिजो राजा भी हैं और ऋषि भीउभयपद विशेषण
महाकाव्यमहान है जो काव्यविशेषण-विशेष्य
भलामानसभला है जो मानस (मनुष्य)विशेषण-विशेष्य
अधपकाआधा है जो पकाविशेषण-विशेष्य
अधमराआधा है जो मराविशेषण-विशेष्य
लालमिर्चलाल है जो मिर्चविशेषण-विशेष्य
कालीमिर्चकाली है जो मिर्चविशेषण-विशेष्य
अंधविश्वासअंधा है जो विश्वासविशेषण-विशेष्य
प्राणप्रियप्राणों के समान प्रियउपमान-उपमेय
मृगलोचनीमृग के लोचन (आँखों) के समान लोचन वालीउपमान-उपमेय
मीनाक्षीमीन (मछली) के समान अक्षियों (आँखों) वालीउपमान-उपमेय
चंद्रवदनचंद्रमा के समान वदन (मुख)उपमान-उपमेय
कीर्तिलतालता रूपी कीर्तिरूपक संबंध
ज्ञानदीपकदीपक रूपी ज्ञानरूपक संबंध
शोकसागरसागर रूपी शोकरूपक संबंध
नवयुवकनव (नया) है जो युवकविशेषण-विशेष्य
महाजनमहान है जो जनविशेषण-विशेष्य

समास शब्दकोश: द्विगु समास के 25 महत्वपूर्ण शब्द

संख्यावाचक पूर्वपद और समूह/समाहार का बोध कराने वाले 25 प्रमुख शब्द:

द्विगु समास की मास्टर तालिका

सामासिक पदसही समास-विग्रहसंख्या एवं समाहार
त्रिलोकतीन लोकों का समाहार3 लोक
त्रिभुवनतीन भुवनों का समाहार3 भुवन
त्रिवेणीतीन वेणियों (नदियों) का समाहार3 नदियाँ
त्रिकालतीन कालों का समाहार3 काल
त्रिकोणतीन कोणों का समाहार3 कोण
चतुर्युगचार युगों का समाहार4 युग
चतुर्भुजचार भुजाओं का समाहार (ज्यामिति में)4 भुजाएँ
चतुर्वेदचार वेदों का समाहार4 वेद
पंचतत्वपाँच तत्वों का समाहार5 तत्व
पंचामृतपाँच अमृतरूपी पदार्थों का समाहार5 अमृत
पंचतंत्रपाँच तंत्रों (सिद्धांतों) का समाहार5 तंत्र
पंचरंगपाँच रंगों का समाहार5 रंग
षट्कोणछह कोणों का समाहार6 कोण
सप्ताहसात अह्नों (दिनों) का समाहार7 दिन
सतरंगसात रंगों का समाहार7 रंग
अठन्नीआठ आनों का समाहार8 आने
चवन्नीचार आनों का समाहार4 आने
अष्टसिद्धिआठ सिद्धियों का समाहार8 सिद्धियाँ
अष्टधातुआठ धातुओं का समाहार8 धातुएँ
नवरत्ननौ रत्नों का समाहार9 रत्न
नवरात्रिनौ रात्रियों का समाहार9 रातें
दशकदस वर्षों का समाहार10 वर्ष
पसेरीपाँच सेर का समाहार (माप)5 सेर
सतसईसात सौ दोहों का समाहार (बिहारी सतसई)700 दोहे
सहस्राब्दीएक हजार वर्षों का समाहार1000 वर्ष

समास शब्दकोश: द्वंद्व समास के 30 महत्वपूर्ण शब्द

इतरेतर, समाहार और वैकल्पिक द्वंद्व समास के 30 प्रमुख पद:

ℹ️द्वंद्व समास की मास्टर तालिका

सामासिक पदसही समास-विग्रहद्वंद्व का उपभेद
सीतारामसीता और रामइतरेतर द्वंद्व
गौरीशंकरगौरी (पार्वती) और शंकर (शिव)इतरेतर द्वंद्व
हर-हरिहर (शिव) और हरि (विष्णु)इतरेतर द्वंद्व
लव-कुशलव और कुशइतरेतर द्वंद्व
लोटा-डोरीलोटा और डोरीइतरेतर द्वंद्व
दूध-दहीदूध और दहीइतरेतर द्वंद्व
फल-फूलफल और फूलइतरेतर द्वंद्व
कंद-मूलकंद और मूलइतरेतर द्वंद्व
गाय-भैंसगाय और भैंसइतरेतर द्वंद्व
घास-फूसघास-फूस आदिसमाहार द्वंद्व
साग-पातसाग-पात आदिसमाहार द्वंद्व
कुर्ता-टोपीकुर्ता-टोपी आदिसमाहार द्वंद्व
लेन-देनलेन या देनवैकल्पिक द्वंद्व
आय-व्ययआय या व्ययवैकल्पिक द्वंद्व
खरा-खोटाखरा या खोटावैकल्पिक द्वंद्व
उचित-अनुचितउचित या अनुचितवैकल्पिक द्वंद्व
सत्यासत्यसत्य या असत्यवैकल्पिक द्वंद्व
लाभालाभलाभ या अलाभ (हानि)वैकल्पिक द्वंद्व
जयाजयजय या अजय (पराजय)वैकल्पिक द्वंद्व
कर्माकर्मकर्म और अकर्मइतरेतर द्वंद्व
शीतातपशीत और आतप (धूप)इतरेतर द्वंद्व
राग-द्वेषराग और द्वेषइतरेतर द्वंद्व
छोटा-बड़ाछोटा या बड़ावैकल्पिक द्वंद्व
ऊँच-नीचऊँच या नीचवैकल्पिक द्वंद्व
यश-अपयशयश या अपयशवैकल्पिक द्वंद्व
ग्यारहएक और दस (1 + 10)इतरेतर द्वंद्व (संख्या)
बारहदो और दस (2 + 10)इतरेतर द्वंद्व (संख्या)
उन्नीसनौ और दस (एक कम बीस)इतरेतर द्वंद्व (संख्या)
बयालीसदो और चालीस (2 + 40)इतरेतर द्वंद्व (संख्या)
तिरसठतीन और साठ (3 + 60)इतरेतर द्वंद्व (संख्या)

समास शब्दकोश: बहुव्रीहि समास के 35 महत्वपूर्ण शब्द

अन्य पद प्रधान और पौराणिक देवी-देवताओं/विशेष अर्थ में रूढ़ 35 प्रमुख पद:

बहुव्रीहि समास की मास्टर तालिका

सामासिक पदसही समास-विग्रहतीसरा विशेष अर्थ (प्रधान पद)
गजाननगज के समान आनन (मुख) है जिसकाभगवान गणेश
एकदंतएक है दंत (दाँत) जिसकाभगवान गणेश
हेरंबशिवजी के प्रिय पुत्रभगवान गणेश
लंबकर्णलंबे हैं कान जिसकेभगवान गणेश / हाथी
षडाननछह आनन (मुख) हैं जिसकेकार्तिकेय
मुरलीधरमुरली को धारण करने वालेभगवान श्रीकृष्ण
गिरिधरगिरि (पर्वत) को धारण करने वालेभगवान श्रीकृष्ण
घनश्यामघन (बादल) के समान श्याम हैं जोभगवान श्रीकृष्ण
बंशीधरबंशी को धारण करने वालेभगवान श्रीकृष्ण
दामोदरदाम (रस्सी) बंधी है उदर पर जिसकेभगवान श्रीकृष्ण
रमेशरमा (लक्ष्मी) के ईश हैं जोभगवान विष्णु
जनार्दनजन का उद्धार करने वालेभगवान विष्णु
गदाधरगदा को धारण करने वालेभगवान विष्णु / भीम
ऋषिकेशइंद्रियों के स्वामी हैं जोभगवान विष्णु
त्रिलोचनतीन लोचन (नेत्र) हैं जिसकेभगवान शिव
गंगाधरगंगा को सिर पर धारण करने वालेभगवान शिव
पशुपतिपशुओं (जीवों) के स्वामी हैं जोभगवान शिव
दिगंबरदिशाएं ही हैं अंबर (वस्त्र) जिसकेभगवान शिव / जैन मुनि
पिनाकपाणिपिनाक धनुष है हाथ में जिसकेभगवान शिव
मृत्युंजयमृत्यु को जीतने वालेभगवान शिव
मारुतनंदनमारुत (पवन) के नंदन (पुत्र)हनुमान जी
पवनपुत्रपवन के पुत्रहनुमान जी
कपीशकपियों (वानरों) के ईशसुग्रीव / हनुमान जी
मेघनादमेघ के समान नाद (गर्जना) करने वालारावण पुत्र (इंद्रजीत)
मंदोदरीमंद (पतला) है उदर जिसकारावण की पत्नी
गांडीवधारीगांडीव धनुष को धारण करने वालेअर्जुन
धनंजयधन को जीतने वालेअर्जुन
धृतराष्ट्रराष्ट्र को धारण करने वाले (अंधे राजा)कौरवों के पिता
वाग्देवीवाणी की देवी हैं जोमाता सरस्वती
पद्मासनापद्म (कमल) है आसन जिसकामाता सरस्वती / लक्ष्मी
शैलपुत्रीशैल (पर्वतराज हिमालय) की पुत्रीमाता पार्वती
मकरध्वजमकर (मगरमच्छ) है ध्वज पर जिसकेकामदेव
मीनकेतुमीन (मछली) है ध्वज पर जिसकीकामदेव
बारहसिंगाबारह सींग हैं जिसकेएक विशेष मृग (हिरण)
दुधमुँहादूध पीता है जो (मुँह में दूध है जिसके)छोटा अबोध शिशु
🗂️ 💡 महत्वपूर्ण तथ्य एवं त्वरित रिवीज़न फ़्लैशकार्ड्स 1 / 15
महत्वपूर्ण शब्द / फैक्ट

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विग्रह / व्याख्या
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ज्ञान की परीक्षा: समास All-India PYQ महा-क्विज़

‘युधिष्ठिर’ शब्द में कौन सा समास विद्यमान है? (UPPSC / CTET)

  • कर्मधारय समास
  • अलुक तत्पुरुष समास
  • द्विगु समास
  • अव्ययीभाव समास

‘यथाशक्ति’ शब्द में कौन सा समास है? (CGPSC / REET)

  • तत्पुरुष समास
  • कर्मधारय समास
  • अव्ययीभाव समास
  • द्वंद्व समास

‘दहीबड़ा’ शब्द का सही समास-विग्रह और भेद क्या होगा? (UP RO/ARO / KVS)

  • दही और बड़ा (द्वंद्व समास)
  • दही का बड़ा (संबंध तत्पुरुष)
  • दही में डूबा हुआ बड़ा (मध्यमपदलोपी तत्पुरुष)
  • दही रूपी बड़ा (कर्मधारय समास)

‘नीलकमल’ में कौन सा समास है? (MP SI / DSSSB)

  • द्विगु समास
  • कर्मधारय समास
  • अव्ययीभाव समास
  • बहुव्रीहि समास

‘त्रिनेत्र’ शब्द में यदि शिवजी का बोध हो, तो कौन सा समास माना जाएगा? (UKPSC / State SI)

  • द्विगु समास
  • बहुव्रीहि समास
  • कर्मधारय समास
  • तत्पुरुष समास

‘धर्माधर्म’ शब्द में कौन सा समास है? (BPSC / CG Vyapam)

  • अव्ययीभाव समास
  • इतरेतर द्वंद्व समास
  • कर्मधारय समास
  • तत्पुरुष समास

🔥🎯 अपना स्कोर आँकें: आपकी तैयारी का स्तर क्या है?

कुल प्रश्न: 6 | सही उत्तरों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी तैयारी का विश्लेषण करें:

  • 🏆 6 में से 6 सही (टॉपर स्तर): अद्भुत! समास के सभी 6 भेदों, अलुक/लुप्तपद तत्पुरुष और विग्रह नियमों पर आपकी पकड़ शत-प्रतिशत है।
  • 🥈 6 में से 5 सही (उत्कृष्ट स्तर): बहुत बढ़िया तैयारी! केवल कर्मधारय vs बहुव्रीहि के प्राथमिक चयन नियम का एक बार पुनः अभ्यास करें।
  • 🥉 6 में से 4 सही (औसत स्तर): आपकी नींव अच्छी है, लेकिन ‘पद-प्रधानता’ और ‘द्वंद्व के 3 उपभेदों’ का रिवीजन आवश्यक है।
  • ⚠️ 4 से कम सही (रिवीजन आवश्यक): निराश न हों! ऊपर दिए गए “10 परीक्षा Trap Alert (कन्फ्यूजन निवारण)” को दोबारा ध्यान से पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

विशेषज्ञ निष्कर्ष एवं अगला अध्याय

अंतिम मार्गदर्शन

समास भाषा में मितव्ययिता, सौंदर्य और व्याकरणिक कसावट लाने की अद्भुत विधा है। इस पोस्ट में दिए गए पद-प्रधानता नियमों, 4 विशेष तत्पुरुष उपभेदों और मास्टर तालिका का नियमित अभ्यास आपको परीक्षा में 100% अंक दिलाएगा।

रोडमैप के अनुसार अगले अध्याय (पोस्ट 12) में हम अध्ययन करेंगे — “संज्ञा (Noun): सभी 5 प्रकार, व्यक्तिवाचक से भाववाचक संज्ञा बनाने के 100% अचूक नियम व PYQs”

अपनी तैयारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए हमारे साथ निरंतर जुड़े रहें!

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