कारक और विभक्ति चिन्ह (Case & Postpositions: सभी 8 कारक, ‘ने’ विभक्ति के नियम, अंग-विकार व दान के नियम, 4 महा-ट्रैप्स, मास्टर तालिका, PYQs व FAQs)

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कारक और विभक्ति चिन्ह (Karak in Hindi): 8 कारक, पहचान ट्रिक्स, विशिष्ट प्रयोग व मास्टर नोट्स

📝कारक: वाक्य के पदों को क्रिया से जोड़ने वाला सेतु

कारक की मानक परिभाषा: संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका सीधा संबंध वाक्य की ‘क्रिया’ (Verb) या अन्य पदों के साथ जाना जाता है, उसे ‘कारक’ (Case) कहते हैं। कारकों को स्पष्ट करने के लिए संज्ञा या सर्वनाम के आगे जो प्रत्यय या चिन्ह लगाए जाते हैं, उन्हें ‘विभक्ति’ या ‘परसर्ग’ (Postpositions) कहते हैं।

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विषय सूची [X]

1. हिन्दी के 8 कारक, विभक्ति चिन्ह एवं उनके कार्य

संस्कृत में संबंध और संबोधन को कारक नहीं माना जाता (वहाँ 6 कारक होते हैं), किंतु हिन्दी व्याकरण में 8 कारक मान्य हैं:

ℹ️8 कारक एवं उनके विभक्ति चिन्ह (परसर्ग)

कारक का नामविभक्ति चिन्ह (परसर्ग)क्रिया से संबंध / पहचान का सूत्र
1. कर्ता कारक (Nominative)ने (या शून्य/अप्रत्यक्ष)क्रिया को करने वाला (कौन / किसने?)
2. कर्म कारक (Accusative)को (या शून्य/अप्रत्यक्ष)जिस पर क्रिया का फल पड़े (क्या / किसको?)
3. करण कारक (Instrumental)से / के द्वाराक्रिया का साधन या माध्यम (किससे / किसके द्वारा?)
4. संप्रदान कारक (Dative)को / के लिए / के वास्तेजिसके लिए क्रिया की जाए या जिसे कुछ दिया जाए (किसके लिए?)
5. अपादान कारक (Ablative)से (अलग होने का भाव)अलग होना, भय, तुलना, लज्जा, दूरी, सीखने का भाव
6. संबंध कारक (Genitive)का, के, की / रा, रे, री / ना, ने, नीअन्य पदों से संबंध या स्वामित्व दर्शाना (किसका / किसकी?)
7. अधिकरण कारक (Locative)में, पर, पेक्रिया के होने का स्थान, समय या आधार (कहाँ / किसमें?)
8. संबोधन कारक (Vocative)हे! अरे! ओ! अजी!किसी को पुकारना, बुलाना या सचेत करना

2. कर्ता, कर्म, करण एवं संप्रदान कारक के वैज्ञानिक नियम

1. कर्ता कारक एवं 'ने' विभक्ति का विशिष्ट प्रयोग नियम

परिभाषा: वाक्य में कार्य करने वाले पद को ‘कर्ता कारक’ कहते हैं। इसका विभक्ति चिन्ह ‘ने’ है:

  • ‘ने’ का प्रयोग केवल सकर्मक भूतकाल में होता है:
    “राम ने पुस्तक पढ़ी।” | “मोहन ने पत्र लिखा।”
  • वर्तमान और भविष्यत् काल में ‘ने’ का लोप रहता है (शून्य विभक्ति):
    “राम पढ़ता है।” (राम ने पढ़ता है नहीं होगा) | “मोहन कल जाएगा।”
  • ‘ने’ प्रयोग के 3 विशेष अपवाद (परीक्षा स्पेशल):
    • अकर्मक होते हुए भी ‘ने’ लगता है: नहाना, छींकना, खाँसना, थूकना (जैसे- “उसने छींका।”, “उसने नहाया।”)।
    • सकर्मक होते हुए भी ‘ने’ नहीं लगता: लाना, बोलना, भूलना, जानना (जैसे- “वह पुस्तक लाया।” [उसने लाया गलत है], “वह सच बोला।”)।

ℹ️2. कर्म कारक (विभक्ति: 'को' या शून्य)

परिभाषा: जिस व्यक्ति या वस्तु पर क्रिया के व्यापार का फल पड़ता है, उसे ‘कर्म कारक’ कहते हैं:

  • सजीव कर्म के साथ ‘को’ विभक्ति लगती है: “अध्यापक ने छात्र को पीटा।” | “राम ने रावण को मारा।”
  • निर्जीव कर्म के साथ विभक्ति का लोप रहता है (शून्य विभक्ति): “मोहन फल खाता है।” (फल को खाता है नहीं) | “सीता पत्र लिखती है।”

💡3. करण कारक (विभक्ति: 'से / के द्वारा' - साधन एवं अंग-विकार)

परिभाषा: कर्ता जिस साधन या माध्यम से क्रिया को संपन्न करता है, उसे ‘करण कारक’ कहते हैं:

  • साधन / माध्यम रूप में: “राम ने बाण से रावण को मारा।” | “हम कलम से लिखते हैं।” | “वह बस द्वारा आया।”
  • अंग-विकार में करण कारक (येनांगविकारः): जब शरीर का कोई अंग विकृत हो, तो वहाँ ‘करण कारक’ होता है:
    “वह आँख से काना है।” | “भिखारी पैर से लंगड़ा है।” | “वह कान से बहरा है।”
  • समय पूछने या बताने में: “आपकी घड़ी में कितने बजे हैं?” (घड़ी से / द्वारा)।

🔥4. संप्रदान कारक (विभक्ति: 'को / के लिए' - दान एवं नमस्कार)

परिभाषा: जिसके लिए कोई क्रिया की जाए या जिसे कोई वस्तु सदा के लिए (दान) दी जाए, उसे ‘संप्रदान कारक’ कहते हैं:

  • के लिए / वास्ते: “माँ बच्चे के लिए दूध लाई।” | “यह दवा रोगी के लिए है।”
  • दान का नियम (सदा के लिए दी जाने वाली वस्तु में ‘को’ संप्रदान होता है):
    “राजा ब्राह्मण को गाय देता है।” (यहाँ ‘को’ संप्रदान कारक है, कर्म नहीं)।
    “सेठ ने गरीबों को कंबल बाँटे।” (संप्रदान कारक)
  • नमस्कार / आदर के भाव में: गुरुजी को नमस्कार।” | ईश्वर को प्रणाम।”

3. अपादान, संबंध, अधिकरण एवं संबोधन कारक

5. अपादान कारक (विभक्ति: 'से' - अलग होना, भय, तुलना, लज्जा, दूरी)

परिभाषा: संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से एक वस्तु का दूसरी वस्तु से अलग होने, डरने, तुलना करने, लजाने, सीखने या दूरी का बोध हो, उसे ‘अपादान कारक’ कहते हैं:

  • 1. अलग होने का भाव (Separation): “पेड़ से पत्ता गिरा।” | “गंगा हिमालय से निकलती है।” | “हाथ से कलम छूट गई।”
  • 2. डरने / भय का भाव: “बच्चा कुत्ते से डरता है।” | “चोर पुलिस से भागता है।”
  • 3. तुलना का भाव (Comparison): “सीता गीता से अधिक सुंदर है।” | “राम श्याम से लंबा है।”
  • 4. लज्जा / शर्म का भाव: “बहू ससुर से लजाती (शर्माती) है।”
  • 5. सीखने या आरंभ का भाव: “छात्र अध्यापक से व्याकरण सीखता है।” | “कल से परीक्षा शुरू होगी।”

ℹ️6. संबंध कारक (विभक्ति: 'का, के, की / रा, रे, री / ना, ने, नी')

परिभाषा: संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जो उसका संबंध वाक्य के किसी दूसरे संज्ञा पद से प्रकट करता है:

  • संज्ञा के साथ ‘का, के, की’: “यह राम की पुस्तक है।” | दशरथ के चार पुत्र थे।” | भारत का इतिहास गौरवशाली है।”
  • सर्वनाम के साथ ‘रा, रे, री’ एवं ‘ना, ने, नी’: “यह मेरा घर है।” | तुम्हारा नाम क्या है?” | अपना काम करो।”

💡7. अधिकरण कारक (विभक्ति: 'में, पर, पे' - स्थान, समय व आधार)

परिभाषा: क्रिया जिस स्थान, समय या आधार पर घटित होती है, उसे ‘अधिकरण कारक’ कहते हैं:

  • स्थान व आधार: “पक्षी पेड़ पर बैठे हैं।” | “मेज पर पुस्तक रखी है।” | “पानी में मछली तैरती है।”
  • समय का आधार: “परीक्षा मई में होगी।” | “वह शाम को लौटेगा।”
  • विषय या स्थिति का आधार: “वह गणित में होशियार है।” | “आनंद में मग्न।”

🔥8. संबोधन कारक (विभक्ति: 'हे! अरे! ओ! अजी!')

परिभाषा: जिस शब्द का प्रयोग किसी को पुकारने, बुलाने या सचेत करने के लिए किया जाता है:

  • हे प्रभु! हमारी रक्षा करो।”
  • अरे मोहन! तुम यहाँ कब आए?”
  • अजी! जरा सुनिए।”
  • नोट: संबोधन कारक के बाद सदैव विस्मयादिबोधक चिन्ह (!) लगाया जाता है। यह कारक केवल संज्ञाओं में होता है, सर्वनाम में नहीं।

4. परीक्षा Trap Alert: सबसे बड़े 4 कारक कन्फ्यूजन का समाधान

प्रतियोगी परीक्षाओं में परीक्षक अक्सर इन 4 सूक्ष्म अंतरों से प्रश्न बनाकर छात्रों को फँसाते हैं:

💡Trap 1: करण कारक 'से' vs अपादान कारक 'से' का अंतर

अचूक ट्रिक: ‘से’ का प्रयोग दो कारकों में होता है—साधन और अलगाव:

वाक्य उदाहरण‘से’ का अर्थ एवं भावसही कारक निर्णय
“राम कलम से लिखता है।”साधन / माध्यम (Instrument)करण कारक (कलम = लिखने का साधन)
“पेड़ से पत्ता गिरा।”अलग होने का भाव (Separation)अपादान कारक (पत्ता पेड़ से अलग हुआ)
“वह कुल्हाड़ी से वृक्ष काटता है।”काटने का साधनकरण कारक
“वह छत से गिर पड़ा।”छत से अलग होने का भावअपादान कारक
“सीता कुत्ते से डरती है।”भय / डर का भावअपादान कारक

🔥Trap 2: कर्म कारक 'को' vs संप्रदान कारक 'को' (धोबी vs भिखारी नियम)

गोल्डन नियम: जब कोई वस्तु किसी को दी जाए, तो यह देखें कि वह सदा के लिए दान दी गई है या वापस ली जाएगी:

वाक्य उदाहरणदेने का स्वरूपसही कारक निर्णय
“उसने भिखारी को कम्बल दिए।”सदा के लिए दान (वापस नहीं लिया जाएगा)संप्रदान कारक (भिखारी को = संप्रदान)
“उसने धोबी को कपड़े दिए।”धोने के बाद वापस लिया जाएगा (दान नहीं है)कर्म कारक (धोबी को = कर्म)
“राजा ने ब्राह्मण को दक्षिणा दी।”दान का भावसंप्रदान कारक
“राम ने दर्जी को कुर्ता दिया।”सिलने के बाद वापस लिया जाएगाकर्म कारक

ℹ️Trap 3: अधिकरण कारक में 'को' और 'से' का छिपा प्रयोग

  • “वह रात को आएगा।” -> यहाँ ‘रात को’ वास्तव में काल का आधार है (रात में), अतः यह अधिकरण कारक है (कर्म कारक नहीं)।
  • “वह दरवाजे-दरवाजे घूमता रहा।” -> यहाँ बिना विभक्ति के स्थान का आधार है (दरवाजे पर), अतः यह अधिकरण कारक है।

Trap 4: कर्म कारक में 'को' विभक्ति का लोप (शून्य विभक्ति)

  • “राम रोटी खाता है।” -> यहाँ ‘रोटी’ निर्जीव कर्म है, इसलिए ‘को’ नहीं लगा, पर यह कर्म कारक ही है।
  • “मोहन गाना सुनता है।” -> ‘गाना’ निर्जीव कर्म है (कर्म कारक शून्य विभक्ति)।

5. मास्टर तालिका: परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले 50 वाक्य व कारक

विगत 15 वर्षों की परीक्षाओं (CTET, State PSC, SI, RO/ARO) में सर्वाधिक पूछे गए 50 वाक्य:

कारक एवं विभक्ति की 3-कॉलम मास्टर तालिका

वाक्य / उदाहरणप्रयुक्त कारक का भेद एवं विभक्तिनियम एवं सूक्ष्म विश्लेषण
“पेड़ से पत्ता गिरा।”अपादान कारक (‘से’)पत्ता पेड़ से अलग हुआ (अलगाव)
“राजा ने गरीबों को कम्बल दिए।”संप्रदान कारक (‘को’)दान में दी गई वस्तु
“धोबी को कपड़े धुलने के लिए दो।”कर्म कारक (‘को’)कपड़े वापस लिए जाएंगे (दान नहीं)
“वह आँख से काना है।”करण कारक (‘से’)अंग-विकार का नियम (येनांगविकारः)
“सीता गीता से अधिक सुंदर है।”अपादान कारक (‘से’)तुलना का भाव
“बच्चा शेर से डरता है।”अपादान कारक (‘से’)भय / डर का भाव
“गंगा हिमालय से निकलती है।”अपादान कारक (‘से’)उद्गम / निकलने का भाव
“राम ने बाण से रावण को मारा।”करण कारक (‘से’) व कर्म कारक (‘को’)बाण = साधन (करण), रावण = कर्म
“छात्र अध्यापक से संगीत सीखता है।”अपादान कारक (‘से’)विद्या सीखने का भाव
“बहू ससुर से लजाती है।”अपादान कारक (‘से’)लज्जा / शर्म का भाव
“वह छत से कूद पड़ा।”अपादान कारक (‘से’)छत से अलग होने का भाव
“मेज पर पुस्तक रखी है।”अधिकरण कारक (‘पर’)पुस्तक रखने का आधार
“मछली जल में तैरती है।”अधिकरण कारक (‘में’)तैरने का स्थान / आधार
“आपकी घड़ी में कितने बजे हैं?”करण कारक / अधिकरणसमय पूछने का साधन
“यह राम का मकान है।”संबंध कारक (‘का’)स्वामित्व / संबंध का बोध
“हे ईश्वर! मुझ पर दया करो।”संबोधन (‘हे’) व अधिकरण (‘पर’)पुकारने का भाव
“माँ ने बच्चे को सुलाया।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (‘को’)सजीव कर्म
“उसने छींका।”कर्ता कारक (‘ने’)अकर्मक क्रिया का अपवाद
“वह पुस्तक लाया।”कर्ता कारक (शून्य विभक्ति)‘लाना’ सकर्मक में ‘ने’ नहीं लगता
“कल से नया सत्र शुरू होगा।”अपादान कारक (‘से’)समय का आरंभ बिंदु
“दिल्ली से आगरा कितनी दूर है?”अपादान कारक (‘से’)दो स्थानों की दूरी
“दवा रोगी के लिए है।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)उद्देश्य / जिसके लिए क्रिया हो
“गुरुजी को प्रणाम।”संप्रदान कारक (‘को’)नमस्कार / आदर का भाव
“वह कमरे में बंद है।”अधिकरण कारक (‘में’)स्थान का आधार
“अरे भाई! जरा संभल कर चलो।”संबोधन कारक (‘अरे’)सचेत करने का भाव
“शिकारी ने जाल फेंका।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (शून्य)जाल = निर्जीव कर्म
“उसने पत्र पढ़ा।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (शून्य)पत्र = निर्जीव कर्म
“किसान हल से खेत जोतता है।”करण कारक (‘से’)हल = जोतने का साधन
“विद्यार्थी बस से स्कूल आते हैं।”करण कारक (‘से’)बस = यात्रा का माध्यम
“वह जन्म से अंधा है।”करण कारक (‘से’)जन्म से अवस्था सूचक
“सांप बिल से बाहर निकला।”अपादान कारक (‘से’)बिल से अलग होने का भाव
“वृक्षों पर पक्षी चहक रहे हैं।”अधिकरण कारक (‘पर’)बैठने का आधार
“दशरथ के चार पुत्र थे।”संबंध कारक (‘के’)पारिवारिक संबंध
“यह मेरी कलम है।”संबंध कारक (‘री’)सर्वनाम का संबंध रूप
“दरवाजे पर कोई खड़ा है।”अधिकरण कारक (‘पर’)स्थान का आधार
“वह रात को पढ़ता है।”अधिकरण कारक (‘को’)समय का आधार
“सैनिक देश के लिए मरते हैं।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)बलिदान का भाव
“पंडितजी ने कथा सुनाई।”कर्ता कारक (‘ने’)सकर्मक भूतकाल
“लड़के ने कुत्ते को पत्थर से मारा।”कर्ता (‘ने’), कर्म (‘को’), करण (‘से’)3 कारकों का संयुक्त वाक्य
“पेड़ से फल टूटकर गिरा।”अपादान कारक (‘से’)अलगाव का भाव
“वह तलवार से युद्ध करता है।”करण कारक (‘से’)तलवार = युद्ध का अस्त्र/साधन
“अस्पताल स्टेशन से 2 किमी दूर है।”अपादान कारक (‘से’)दूरी का भाव
“वह गाँव से चला गया।”अपादान कारक (‘से’)स्थान से अलग होना
“उसने मुझे एक पुस्तक दी।”संप्रदान (‘मुझे’) व कर्म (‘पुस्तक’)द्विकर्मक वाक्य
“दूध में चीनी मिलाओ।”अधिकरण कारक (‘में’)मिश्रण का आधार
“भारत का ध्वज तिरंगा है।”संबंध कारक (‘का’)राष्ट्र का संबंध
“अरे! तुम इतनी जल्दी आ गए?”संबोधन कारक (‘अरे’)आश्चर्य / संबोधन
“वह लाठी के सहारे चलता है।”करण कारक (‘के सहारे’)साधन / माध्यम
“पक्षी पिंजरे से उड़ गया।”अपादान कारक (‘से’)पिंजरे से अलग होना
“रसोईघर में भोजन पक रहा है।”अधिकरण कारक (‘में’)स्थान का आधार

मानक वर्तनी नियम: कारक चिन्हों का संश्लिष्ट बनाम विश्लिष्ट लेखन

केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय और मानक हिन्दी व्याकरण के अनुसार कारक चिन्ह (परसर्ग) लिखने के 4 कड़े नियम हैं:

ℹ️कारक चिन्हों के मानक लेखन नियम (विश्लिष्ट vs संश्लिष्ट)

  • 1. संज्ञा शब्दों के साथ परसर्ग अलग (विश्लिष्ट) लिखे जाते हैं:
    जैसे- राम ने, सीता को, वृक्ष से, विद्यालय में, मेज पर (इन्हें ‘रामने’ या ‘सीताको’ लिखना अशुद्ध है)।
  • 2. सर्वनाम शब्दों के साथ परसर्ग सटाकर (संश्लिष्ट) लिखे जाते हैं:
    जैसे- उसने, मुझको, तुमसे, जिन्होंने, किसपर, उनसे, हमारा (इन्हें ‘उस ने’ या ‘मुझ को’ लिखना अशुद्ध है)।
  • 3. जब सर्वनाम के साथ दो कारक चिन्ह एक साथ आएँ:
    पहला चिन्ह सर्वनाम से सटाकर और दूसरा अलग लिखा जाएगा:
    जैसे- “उनमें से, “उसके लिए, “मुझपर से
  • 4. जब सर्वनाम और कारक के बीच ‘ही’ या ‘तक’ (निपात) आ जाए:
    परसर्ग अलग लिखा जाएगा:
    जैसे- “आप ही के लिए (आपहीकेलिए अशुद्ध है) | “मुझ तक को यह पता नहीं था।”

उन्नत व्याकरण: ‘शून्य विभक्ति’ (Null Inflection Marker – ∅)

जब वाक्य में कारक सक्रिय हो परंतु उसका विभक्ति चिन्ह अदृश्य / अप्रत्यक्ष (लोप) रहे, तो उसे ‘शून्य विभक्ति’ (∅) कहते हैं:

शून्य विभक्ति के प्रमुख परीक्षा रूप

कारकवाक्य उदाहरण (शून्य विभक्ति)दृश्य रूप (छिपा हुआ परसर्ग)
अप्रत्यक्ष कर्ता कारक (∅)“राम [∅] पुस्तक पढ़ता है।”वर्तमान काल में ‘ने’ का लोप (राम पढ़ता है)
अप्रत्यक्ष कर्म कारक (∅)“सीता रोटी [∅] खाती है।”निर्जीव कर्म में ‘को’ का लोप (रोटी को खाती है)
अप्रत्यक्ष अधिकरण कारक (∅)“वह अगले साल [∅] आएगा।”काल सूचक में ‘में’ का लोप (अगले साल में)
अप्रत्यक्ष अधिकरण कारक (∅)“वह दरवाजे-दरवाजे [∅] भटका।”स्थान सूचक में ‘पर’ का लोप (दरवाजे पर)

शास्त्रीय अंतर: संस्कृत में 6 कारक vs हिन्दी में 8 कारक क्यों?

💡💡 'क्रियान्वयित्वं कारकत्वम्' का शास्त्रीय सिद्धांत

  • संस्कृत का नियम (6 कारक): संस्कृत व्याकरण में केवल उसी पद को कारक माना जाता है जिसका क्रिया से सीधा संबंध (Direct Relation) हो (*’क्रियान्वयित्वं कारकत्वम्’* / *’क्रियाजनकत्वं कारकत्वम्’*)।
    • संबंध का संबंध क्रिया से न होकर दूसरी संज्ञा से होता है (जैसे- *दशरथ का पुत्र* -> यहाँ दशरथ का क्रिया से सीधा संबंध नहीं है)।
    • संबोधन का प्रयोग केवल ध्यान आकर्षित करने के लिए होता है। अतः संस्कृत में ये दोनों केवल ‘विभक्तियाँ’ मानी जाती हैं, कारक नहीं।
  • हिन्दी का नियम (8 कारक): हिन्दी एक वियोगात्मक (विश्लेषणात्मक) भाषा है। वाक्य के सभी पदों की अर्थ-व्यवस्था और संबंध को पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए हिन्दी में संबंध और संबोधन को मिलाकर कुल 8 कारक प्रामाणिक रूप से मान्य हैं।

परीक्षा हॉल विशेष: 20 अति-कठिन एवं शास्त्रीय कारक वाक्य (PSC व RO/ARO स्पेशल)

वे कठिन वाक्य जो राज्य प्रशासनिक परीक्षाओं के कट-ऑफ को निर्धारित करते हैं:

🔥20 अति-दुर्लभ शास्त्रीय कारक वाक्य संग्रह

कठिन वाक्य / उदाहरणप्रयुक्त कारक एवं विभक्तिशास्त्रीय नियम एवं विश्लेषण
“वह स्वभाव से सरल और दयालु है।”करण कारक (‘से’)‘प्रकृत्यादिभ्य उपसंख्यानम्’ (प्रकृति/स्वभाव सूचक)
“छात्र गुरु से व्याकरण सीखता है।”अपादान कारक (‘से’)‘आख्यातोपयोगे’ (नियमपूर्वक विद्या सीखने में)
“यह कपड़ा 100 रुपये मीटर बिका।”करण कारक (‘मीटर’)मूल्य, माप व तौल का माध्यम
“वह डर के मारे काँप रहा था।”करण कारक (‘के मारे’)‘हेतौ’ (कारण/हेतु सूचक साधन)
“वह जन्म से ही अंधा है।”करण कारक (‘से’)अवस्था / प्रकृति सूचक
“दशरथ के चार पुत्र थे।”संबंध कारक (‘के’)उत्पत्ति / पारिवारिक संबंध
“वह मुझे अपना भाई मानता है।”कर्म कारक (‘मुझे’)द्विकर्मक / कर्म का फल
“सैनिक देश पर न्योछावर हो गए।”अधिकरण कारक (‘पर’)समर्पण का आधार
“उसने अपनी जान की परवाह नहीं की।”संबंध कारक (‘की’)संबंध सूचक
“नदी किनारे भारी मेला लगा था।”अधिकरण कारक (‘किनारे’)स्थान का आधार (शून्य विभक्ति)
“वह सोमवार को आएगा।”अधिकरण कारक (‘को’)निश्चित समय का आधार
“सूर्य के निकलने पर कमल खिलते हैं।”अधिकरण कारक (‘पर’)‘यस्य च भावेन भावलक्षणम्’ (काल लक्षण)
“कवियों में कालिदास श्रेष्ठ हैं।”अधिकरण कारक (‘में’)‘यतश्च निर्धारणम्’ (समूह में श्रेष्ठता)
“चोर सिपाही की आँख बचाकर भागा।”अपादान कारक (‘बचाकर’)छिपने / ओझल होने का भाव
“यह दवा रोग को दूर करती है।”कर्म कारक (‘को’)क्रिया का फल
“बिल्ली छत से कूद पड़ी।”अपादान कारक (‘से’)स्थान से अलग होने का भाव
“राजा ने शत्रु पर बाण चलाया।”अधिकरण (‘पर’) व करण (‘बाण’)लक्ष्य (अधिकरण) + साधन (करण)
“माताजी ने बालक को गोद में लिया।”कर्म (‘को’) व अधिकरण (‘में’)बालक (कर्म) + गोद (आधार)
“उसने अपनी पुस्तक मेज पर रख दी।”संबंध (‘अपनी’) व अधिकरण (‘पर’)पुस्तक का संबंध + मेज का आधार
“धोबी को कपड़े प्रेस करने को दो।”कर्म कारक (‘को’)कपड़े वापस लिए जाएँगे (दान नहीं)

कारक वाक्यकोश: कर्ता एवं कर्म कारक के 30 नए परीक्षा वाक्य

सकर्मक-अकर्मक, सजीव-निर्जीव और शून्य विभक्ति पर आधारित कर्ता व कर्म कारक के उदाहरण:

कर्ता एवं कर्म कारक वाक्य तालिका

परीक्षोपयोगी वाक्य / उदाहरणकारक का भेद एवं विभक्तिव्याकरणिक नियम / विश्लेषण
“अध्यापक ने छात्रों को व्याकरण पढ़ाया।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (‘को’)अध्यापक = कर्ता, छात्रों को = सजीव कर्म
“उसने खाँसा।”कर्ता कारक (‘ने’)अकर्मक क्रिया में ‘ने’ का अपवाद
“वह मधुर गीत गाती है।”कर्ता (शून्य) व कर्म (शून्य)वर्तमान काल में ‘ने’ का लोप, गीत = निर्जीव कर्म
“माली ने पौधों को पानी दिया।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (‘को’)माली = कर्ता, पौधों को = कर्म
“पुलिस ने चोर को पकड़ा।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (‘को’)चोर को = सजीव कर्म कारक
“मोहन दूध पीता है।”कर्म कारक (शून्य विभक्ति)दूध = निर्जीव कर्म (‘को’ का लोप)
“सीता ने रामायण पढ़ी।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (शून्य)सकर्मक भूतकाल
“पिताजी अखबार पढ़ रहे हैं।”कर्म कारक (शून्य)अखबार = निर्जीव कर्म
“अमित ने खिलौना खरीदा।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (शून्य)खिलौना = कर्म कारक
“उसने चाय पी।”कर्ता (‘ने’)सकर्मक भूतकाल क्रिया
“कृष्ण ने कंस को मारा।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (‘को’)दोनों कारक प्रत्यक्ष चिन्ह सहित
“शिकारी ने हिरण को देखा।”कर्म कारक (‘को’)सजीव कर्म के साथ ‘को’
“सुरेश ने पत्र भेजा।”कर्म कारक (शून्य)पत्र = कर्म
“लड़की कपड़े धोती है।”कर्म कारक (शून्य)कपड़े = कर्म
“सरकार ने योजना शुरू की।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (शून्य)सरकार = कर्ता
“उसने सच बोला।”कर्ता कारक (शून्य / ‘ने’ अपवाद)‘बोलना’ में ‘ने’ का वैकल्पिक रूप
“वह रास्ता भूल गया।”कर्ता (शून्य)‘भूलना’ सकर्मक में ‘ने’ नहीं लगता
“न्यायाधीश ने फैसला सुनाया।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (शून्य)फैसला = कर्म कारक
“डॉक्टर ने मरीज को दवा दी।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (‘को’)मरीज को = कर्म कारक
“कवि ने कविता सुनाई।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (शून्य)कविता = कर्म
“उसने खाना पकाया।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (शून्य)खाना = कर्म
“धोबी कपड़े धो रहा है।”कर्म कारक (शून्य)कपड़े = कर्म
“बच्चे पतंग उड़ा रहे हैं।”कर्म कारक (शून्य)पतंग = कर्म कारक
“अमित ने मुझे बुलाया।”कर्म कारक (‘मुझे’ = मुझको)सर्वनाम का कर्म रूप
“उसने तुम्हें देखा।”कर्म कारक (‘तुम्हें’ = तुमको)सर्वनाम का कर्म रूप
“नेताजी ने भाषण दिया।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (शून्य)भाषण = कर्म
“मजदूरों ने पुल बनाया।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (शून्य)पुल = कर्म कारक
“उसने थूका।”कर्ता कारक (‘ने’)अकर्मक क्रिया में ‘ने’ का अपवाद
“माली फूल तोड़ता है।”कर्म कारक (शून्य)फूल = निर्जीव कर्म
“हलवाई ने जलेबी बनाई।”कर्ता (‘ने’) व कर्म (शून्य)जलेबी = कर्म कारक

कारक वाक्यकोश: करण कारक के 30 नए परीक्षा वाक्य (साधन व अंग-विकार)

साधन, माध्यम, अंग-विकार, स्वभाव और रीति सूचक करण कारक के महत्वपूर्ण उदाहरण:

ℹ️करण कारक वाक्य तालिका (Instrumental Case)

परीक्षोपयोगी वाक्य / उदाहरणप्रयुक्त कारक एवं विभक्तिनियम एवं कारण
“वह चाकू से फल काटता है।”करण कारक (‘से’)चाकू = काटने का साधन
“हम आँखों से देखते हैं।”करण कारक (‘से’)आँख = देखने का साधन
“वह कान से बहरा है।”करण कारक (‘से’)अंग-विकार का नियम (येनांगविकारः)
“वह पीठ से कूबड़ा है।”करण कारक (‘से’)अंग-विकार का नियम
“वह स्वभाव से बड़ा दयालु है।”करण कारक (‘से’)स्वभाव / प्रकृति सूचक नियम
“सैनिक बंदूक से गोली चलाता है।”करण कारक (‘से’)बंदूक = अस्त्र / साधन
“उसने सुई से कपड़ा सिला।”करण कारक (‘से’)सुई = सिलने का साधन
“वह ट्रेन द्वारा मुंबई गया।”करण कारक (‘द्वारा’)ट्रेन = यात्रा का माध्यम
“तार द्वारा सूचना भेजी गई।”करण कारक (‘द्वारा’)तार = संचार का माध्यम
“उसने मेहनत से सफलता पाई।”करण कारक (‘से’)मेहनत = सफलता का साधन
“यह मूर्ति संगमरमर से बनी है।”करण कारक (‘से’)संगमरमर = निर्माण का साधन/पदार्थ
“वह भूख से व्याकुल हो रहा है।”करण कारक (‘से’)भूख = व्याकुलता का कारण/हेतु
“बच्चा गेंद से खेलता है।”करण कारक (‘से’)गेंद = खेलने का साधन
“उसने रस्सी से नाव को बाँधा।”करण कारक (‘से’)रस्सी = बाँधने का साधन
“हम कानों से सुनते हैं।”करण कारक (‘से’)कान = सुनने का साधन
“वह कलम द्वारा अपनी बात कहता है।”करण कारक (‘द्वारा’)कलम = अभिव्यक्ति का माध्यम
“पेंटर ने ब्रश से चित्र बनाया।”करण कारक (‘से’)ब्रश = चित्र बनाने का साधन
“वह लाठी से कुत्ते को भगाता है।”करण कारक (‘से’)लाठी = साधन
“उसने हथौड़े से दीवार तोड़ी।”करण कारक (‘से’)हथौड़ा = तोड़ने का साधन
“कपड़ा मीटर से नापा जाता है।”करण कारक (‘से’)मीटर = माप का साधन
“गेहूँ किलो से तौला जाता है।”करण कारक (‘से’)किलो = तौल का साधन
“वह मुख से गूंगा है।”करण कारक (‘से’)अंग-विकार नियम
“वह हाथ से अपंग है।”करण कारक (‘से’)अंग-विकार नियम
“वह जाति से ब्राह्मण है।”करण कारक (‘से’)प्रकृति / जाति सूचक नियम
“वह नाम से परिचित है।”करण कारक (‘से’)माध्यम सूचक
“उसने पानी से हाथ धोए।”करण कारक (‘से’)पानी = धोने का साधन
“धनुष से बाण छूटा (साधन संदर्भ)।”करण कारक (‘से’)धनुष = प्रहार का साधन
“उसने प्रेम से सबको जीत लिया।”करण कारक (‘से’)प्रेम = जीतने का माध्यम
“अध्यापक ने डंडे से सजा दी।”करण कारक (‘से’)डंडा = साधन
“नाविक चप्पू से नाव चलाता है।”करण कारक (‘से’)चप्पू = चलाने का साधन

कारक वाक्यकोश: संप्रदान कारक के 30 नए परीक्षा वाक्य (दान व उद्देश्य)

दान, कल्याण, उद्देश्य, नमस्कार और हित सूचक संप्रदान कारक के उदाहरण:

💡संप्रदान कारक वाक्य तालिका (Dative Case)

परीक्षोपयोगी वाक्य / उदाहरणप्रयुक्त कारक एवं विभक्तिनियम एवं कारण
“पिताजी ने अनाथालय को धन दान दिया।”संप्रदान कारक (‘को’)सदा के लिए दान (वापस नहीं लिया जाएगा)
“भूखे को अन्न और प्यासे को पानी दो।”संप्रदान कारक (‘को’)दान / परोपकार का नियम
“श्री गणेशाय नमः (श्री गणेश को नमस्कार)।”संप्रदान कारक (‘को’)‘नमः’ (नमस्कार) के योग में
“हनुमान जी को प्रणाम।”संप्रदान कारक (‘को’)आदर / नमस्कार का भाव
“विद्यार्थी ज्ञान के लिए पढ़ते हैं।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)उद्देश्य / हेतु का भाव
“वह परीक्षा की तैयारी के वास्ते दिल्ली गया।”संप्रदान कारक (‘के वास्ते’)उद्देश्य सूचक
“माताजी ने संन्यासी को भिक्षा दी।”संप्रदान कारक (‘को’)भिक्षा / दान का भाव
“देश की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करो।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)बलिदान का उद्देश्य
“व्यापारी ने मंदिर के लिए चंदा दिया।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)धार्मिक दान
“यह उपहार मित्र के लिए है।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)समर्पित करने का भाव
“स्वास्थ्य के लिए व्यायाम आवश्यक है।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)हित / कल्याण सूचक
“सूर्य देव को अर्घ्य दो।”संप्रदान कारक (‘को’)समर्पण / पूजन का भाव
“उसने बच्चों के लिए खिलौने खरीदे।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)जिसके लिए वस्तु खरीदी जाए
“पंडितजी को दक्षिणा दी गई।”संप्रदान कारक (‘को’)दक्षिणा / दान का भाव
“गरीब कन्या के विवाह के लिए सहायता दो।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)सहायता / दान
“यह वस्त्र गरीबों को बाँट दो।”संप्रदान कारक (‘को’)दान का भाव
“शिवजी को नमस्कार है।”संप्रदान कारक (‘को’)नमन का भाव
“वह नौकरी के लिए भटक रहा है।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)उद्देश्य सूचक
“जल जीवन के लिए अनिवार्य है।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)हित सूचक
“गौ सेवा के लिए गौशाला बनाई गई।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)सेवा का उद्देश्य
“उसने भिक्षुक को भोजन कराया।”संप्रदान कारक (‘को’)भोजन दान
“यह धन अनाथ बच्चों के लिए है।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)समर्पित संपत्ति
“पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़ लगाओ।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)उद्देश्य सूचक
“राजा ने प्रजा के कल्याण के लिए कुएँ खुदवाए।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)लोकहित सूचक
“गुरु को सादर प्रणाम।”संप्रदान कारक (‘को’)आदर भाव
“यह औषधि बुखार के लिए है।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)निवारण का उद्देश्य
“उसने पुस्तकालय के लिए पुस्तकें दान कीं।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)पुस्तक दान
“सैनिकों के लिए गर्म कपड़े भेजे गए।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)जिसके हित में कार्य हो
“उसने अकाल पीड़ितों को सहायता राशि दी।”संप्रदान कारक (‘को’)आपदा राहत दान
“राष्ट्रहित के लिए त्याग करो।”संप्रदान कारक (‘के लिए’)परम उद्देश्य

कारक वाक्यकोश: अपादान कारक के 30 नए परीक्षा वाक्य (अलगाव, भय, तुलना)

अलग होने, डरने, लजाने, तुलना करने, दूरी और उद्गम सूचक अपादान कारक के उदाहरण:

अपादान कारक वाक्य तालिका (Ablative Case)

परीक्षोपयोगी वाक्य / उदाहरणप्रयुक्त कारक एवं विभक्तिनियम एवं कारण
“पेड़ से आम नीचे गिरा।”अपादान कारक (‘से’)फल का पेड़ से अलग होना (अलगाव)
“धनुष से तीर छूटा।”अपादान कारक (‘से’)तीर का धनुष से अलग होना
“वह घोड़े से गिर पड़ा।”अपादान कारक (‘से’)घोड़े से अलग होना
“यमुना यमुनोत्री से निकलती है।”अपादान कारक (‘से’)नदी का उद्गम स्थल (भवः प्रभवः)
“नर्मदा अमरकंटक से निकलती है।”अपादान कारक (‘से’)उद्गम स्थल
“चूहा बिल्ली से डरता है।”अपादान कारक (‘से’)भय / डर का नियम (भीत्रार्थानां भयहेतुः)
“हिरण बाघ से भागता है।”अपादान कारक (‘से’)भय का भाव
“चोर अंधेरे से डरता है।”अपादान कारक (‘से’)भय सूचक
“मोहन सोहन से अधिक बुद्धिमान है।”अपादान कारक (‘से’)तुलना का नियम
“हिमालय विंध्याचल से ऊँचा है।”अपादान कारक (‘से’)दो पर्वतों की तुलना
“सोना चांदी से महंगा है।”अपादान कारक (‘से’)मूल्य की तुलना
“दुल्हन बड़ों से लजाती है।”अपादान कारक (‘से’)लज्जा / शर्म का नियम
“वह पाप से घृणा करता है।”अपादान कारक (‘से’)घृणा / विरक्ति का भाव
“छात्र शिक्षक से गणित सीखता है।”अपादान कारक (‘से’)नियमपूर्वक विद्या सीखना
“अर्जुन ने द्रोणाचार्य से धनुर्विद्या सीखी।”अपादान कारक (‘से’)विद्या अर्जन नियम
“कानपुर लखनऊ से 80 किमी दूर है।”अपादान कारक (‘से’)दो स्थानों के बीच की दूरी
“हमारा घर विद्यालय से पास है।”अपादान कारक (‘से’)दूरी सूचक
“सोमवार से नया सत्र प्रारंभ होगा।”अपादान कारक (‘से’)कार्य का आरंभ बिंदु
“वह कल से अनुपस्थित है।”अपादान कारक (‘से’)काल का आरंभ
“कैदी जेल से भाग गया।”अपादान कारक (‘से’)जेल से अलग होना
“पत्ता टहनी से टूटा।”अपादान कारक (‘से’)अलगाव का भाव
“आँख से आँसू टपके।”अपादान कारक (‘से’)आँसू का आँख से अलग होना
“वह पद से भ्रष्ट हो गया।”अपादान कारक (‘से’)पदच्युत / विमुख होना
“वह कर्तव्य से विमुख हो गया।”अपादान कारक (‘से’)कर्तव्य से हटना
“सांप बिल से बाहर आया।”अपादान कारक (‘से’)स्थान से बाहर निकलना
“सूर्य से प्रकाश निकलता है।”अपादान कारक (‘से’)प्रकाश का स्रोत
“वह समाज से बहिष्कृत है।”अपादान कारक (‘से’)समाज से अलग होना
“दूध से दही बनता है।”अपादान कारक (‘से’)रूपांतरण / उत्पत्ति
“तिल से तेल निकलता है।”अपादान कारक (‘से’)निष्कर्षण / उत्पत्ति
“वह बुरी संगति से दूर रहता है।”अपादान कारक (‘से’)अलग रहने का भाव

कारक वाक्यकोश: संबंध एवं अधिकरण कारक के 30 नए वाक्य

स्वामित्व, पारिवारिक संबंध, स्थान का आधार, समय और समूह में श्रेष्ठता सूचक उदाहरण:

ℹ️संबंध एवं अधिकरण कारक वाक्य तालिका

परीक्षोपयोगी वाक्य / उदाहरणप्रयुक्त कारक एवं विभक्तिनियम एवं कारण
“यह भारतेंदु का नाटक है।”संबंध कारक (‘का’)रचना एवं लेखक का संबंध
“गंगा का जल पवित्र होता है।”संबंध कारक (‘का’)जल और गंगा का संबंध
“राम के भाई लक्ष्मण थे।”संबंध कारक (‘के’)पारिवारिक भ्रातृ संबंध
“सोने की थाली बहुत सुंदर है।”संबंध कारक (‘की’)पदार्थ और वस्तु का संबंध
“यह मेरी मातृभूमि है।”संबंध कारक (‘री’)सर्वनाम का संबंध रूप
“अपना आचरण शुद्ध रखो।”संबंध कारक (‘ना’)निजवाचक संबंध रूप
“देश की सीमा पर सैनिक तैनात हैं।”संबंध (‘की’) व अधिकरण (‘पर’)सीमा का संबंध + सीमा पर आधार
“कमरे की छत गिर गई।”संबंध कारक (‘की’)भवन अंग संबंध
“राजा का महल भव्य है।”संबंध कारक (‘का’)स्वामित्व का भाव
“चिड़ियों का घोंसला पेड़ पर है।”संबंध (‘का’) व अधिकरण (‘पर’)पक्षी का घोंसला + पेड़ का आधार
“सिंह वन में रहता है।”अधिकरण कारक (‘में’)रहने का स्थान / आधार
“पक्षी डाल पर बैठा है।”अधिकरण कारक (‘पर’)बैठने का भौतिक आधार
“घड़े में ठंडा पानी है।”अधिकरण कारक (‘में’)पात्र का आंतरिक आधार
“सभा में अनेक विद्वान उपस्थित थे।”अधिकरण कारक (‘में’)सम्मेलन का स्थान
“वह कक्षा में प्रथम आया।”अधिकरण कारक (‘में’)स्थान / वर्ग का आधार
“छात्रों में राहुल सबसे तेज है।”अधिकरण कारक (‘में’)समूह में श्रेष्ठता (यतश्च निर्धारणम्)
“पुष्पों में कमल सर्वश्रेष्ठ है।”अधिकरण कारक (‘में’)श्रेष्ठता निर्धारण नियम
“वह संगीत में अत्यंत प्रवीण है।”अधिकरण कारक (‘में’)विषय में निपुणता का आधार
“वह युद्ध में वीर है।”अधिकरण कारक (‘में’)रण क्षेत्र का आधार
“पुस्तक अलमारी में रखी है।”अधिकरण कारक (‘में’)स्थान का आधार
“दीवार पर सुंदर चित्र टंगा है।”अधिकरण कारक (‘पर’)ऊर्ध्वाधर आधार
“वह घोड़े पर सवार है।”अधिकरण कारक (‘पर’)सवारी का आधार
“गाड़ी 5 बजे आएगी।”अधिकरण कारक (शून्य)समय का निश्चित आधार
“वह प्रातःकाल टहलता है।”अधिकरण कारक (शून्य)काल का आधार
“छत पर कपड़े सूख रहे हैं।”अधिकरण कारक (‘पर’)स्थान का आधार
“नदी में नाव तैर रही है।”अधिकरण कारक (‘में’)जल का आधार
“मन में शांति रखो।”अधिकरण कारक (‘में’)आंतरिक भाव का आधार
“वृक्ष पर पके फल लगे हैं।”अधिकरण कारक (‘पर’)स्थिति का आधार
“वह ध्यान में लीन है।”अधिकरण कारक (‘में’)मानसिक अवस्था का आधार
“पहाड़ पर मंदिर स्थित है।”अधिकरण कारक (‘पर’)भौगोलिक स्थान का आधार

कारक वाक्यकोश: संबोधन कारक एवं बहु-कारक संयुक्त वाक्य

संबोधन के विविध रूप और एक ही वाक्य में 3 से 4 कारकों के सम्मिश्रण वाले उदाहरण:

💡संबोधन एवं बहु-कारक संयुक्त वाक्य तालिका

वाक्य उदाहरणप्रयुक्त कारक समूहप्रत्येक कारक का विश्लेषण
“हे भगवान! इस निर्दोष की रक्षा करो।”संबोधन (‘हे’) व संबंध (‘की’)भगवान = संबोधन, निर्दोष की = संबंध
“अरे बच्चो! शांत बैठो।”संबोधन कारक (‘अरे’)बालकों को सचेत करना
“ओ भाई! जरा इधर तो आओ।”संबोधन कारक (‘ओ’)ध्यान आकर्षित करना
“अजी सुनते हो! बाजार से फल ले आना।”संबोधन कारक (‘अजी’)आदरणीय संबोधन
“हे देश के वीरो! आगे बढ़ो।”संबोधन (‘हे’) व संबंध (‘के’)वीरो = संबोधन
“राम ने अयोध्या से जाकर लंका में रावण को मारा।”कर्ता, अपादान, अधिकरण, कर्मराम ने (कर्ता), अयोध्या से (अपादान), लंका में (अधिकरण), रावण को (कर्म)
“पिताजी ने बाजार से भाई के लिए पुस्तक खरीदी।”कर्ता, अपादान, संप्रदान, कर्मपिताजी ने (कर्ता), बाजार से (अपादान), भाई के लिए (संप्रदान), पुस्तक (कर्म)
“राजा ने महल की छत से जनता को सम्बोधित किया।”कर्ता, संबंध, अपादान, कर्मराजा ने (कर्ता), महल की (संबंध), छत से (अपादान), जनता को (कर्म)
“माँ ने रसोई में चाकू से बच्चे के लिए सेब काटा।”कर्ता, अधिकरण, करण, संप्रदान, कर्ममाँ ने (कर्ता), रसोई में (अधिकरण), चाकू से (करण), बच्चे के लिए (संप्रदान), सेब (कर्म)
“छात्रों ने कक्षा में शिक्षक से प्रश्न पूछा।”कर्ता, अधिकरण, अपादान, कर्मछात्रों ने (कर्ता), कक्षा में (अधिकरण), शिक्षक से (अपादान/करण), प्रश्न (कर्म)
“हे प्रभु! हम पर कृपा बनाए रखना।”संबोधन (‘हे’) व अधिकरण (‘पर’)प्रभु = संबोधन, हम पर = अधिकरण
“सैनिक ने बंदूक से शत्रु को सीमा पर मार गिराया।”कर्ता, करण, कर्म, अधिकरणसैनिक ने (कर्ता), बंदूक से (करण), शत्रु को (कर्म), सीमा पर (अधिकरण)
“अरे मित्र! तुम कल कहाँ थे?”संबोधन कारक (‘अरे’)मित्र = संबोधन
“माली ने बगीचे से फूलों को टोकरी में रखा।”कर्ता, अपादान, कर्म, अधिकरणमाली ने (कर्ता), बगीचे से (अपादान), फूलों को (कर्म), टोकरी में (अधिकरण)
“उसने जेब से पैसे निकालकर भिखारी को दिए।”कर्ता, अपादान, कर्म, संप्रदानउसने (कर्ता), जेब से (अपादान), पैसे (कर्म), भिखारी को (संप्रदान)
“हे भारत के नागरिको! देश का सम्मान करो।”संबोधन (‘हे’) व संबंध (‘के/का’)नागरिको = संबोधन, देश का = संबंध
“गोपाल ने नदी से जल लाकर शिवजी को चढ़ाया।”कर्ता, अपादान, कर्म, संप्रदानगोपाल ने (कर्ता), नदी से (अपादान), जल (कर्म), शिवजी को (संप्रदान)
“अरे भाइयो और बहनो! मेरी बात सुनो।”संबोधन कारक (‘अरे’)जनसंबोधन
“डॉक्टर ने अस्पताल में सुई से मरीज को दवा दी।”कर्ता, अधिकरण, करण, संप्रदानडॉक्टर ने (कर्ता), अस्पताल में (अधिकरण), सुई से (करण), मरीज को (संप्रदान)
“हे परमात्मा! संसार से दुःख दूर करो।”संबोधन (‘हे’) व अपादान (‘से’)परमात्मा = संबोधन, संसार से = अपादान

ज्ञान की परीक्षा: कारक All-India PYQ महा-क्विज़

“पेड़ से पत्ता गिरा।” — इस वाक्य में ‘पेड़ से’ में कौन सा कारक है? (UPPSC / CTET)

  • करण कारक
  • अपादान कारक
  • कर्म कारक
  • अधिकरण कारक

“राजा ने निर्धनों को कम्बल बाँटे।” — इस वाक्य में ‘निर्धनों को’ में कौन सा कारक है? (CGPSC / REET)

  • कर्म कारक
  • संप्रदान कारक
  • करण कारक
  • संबंध कारक

“वह पैर से लंगड़ा है।” — इस वाक्य में ‘पैर से’ में किस नियम के तहत कारक है? (UP RO/ARO / KVS)

  • अपादान कारक
  • करण कारक
  • अधिकरण कारक
  • कर्म कारक

“सीता कुत्ते से डरती है।” — इस वाक्य में कौन सा कारक विद्यमान है? (MP SI / DSSSB)

  • करण कारक
  • अपादान कारक
  • कर्म कारक
  • संबंध कारक

‘ने’ विभक्ति का प्रयोग निम्नलिखित में से किस काल में होता है? (UKPSC / State SI)

  • सकर्मक भूतकाल में
  • अकर्मक वर्तमान काल में
  • सामान्य भविष्यत् काल में
  • सभी कालों में

“आपकी घड़ी में कितने बजे हैं?” — यहाँ घड़ी में कौन सा कारक माना जाएगा? (BPSC / CG Vyapam)

  • अधिकरण कारक
  • करण कारक
  • कर्म कारक
  • अपादान कारक

🔥🎯 अपना स्कोर आँकें: आपकी तैयारी का स्तर क्या है?

कुल प्रश्न: 6 | सही उत्तरों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी तैयारी का विश्लेषण करें:

  • 🏆 6 में से 6 सही (टॉपर स्तर): अद्भुत! कारक के सभी 8 भेदों, अपादान के 5 नियमों और ‘ने’ विभक्ति के अपवादों पर आपकी पकड़ शत-प्रतिशत है।
  • 🥈 6 में से 5 सही (उत्कृष्ट स्तर): बहुत बढ़िया तैयारी! केवल अंग-विकार व संप्रदान ‘दान नियम’ के 1-2 उदाहरणों का पुनः अभ्यास करें।
  • 🥉 6 में से 4 सही (औसत स्तर): आपकी नींव अच्छी है, लेकिन ‘करण vs अपादान’ और ‘कर्म vs संप्रदान’ का रिवीजन आवश्यक है।
  • ⚠️ 4 से कम सही (रिवीजन आवश्यक): निराश न हों! ऊपर दिए गए “4 परीक्षा Trap Alert (कन्फ्यूजन निवारण)” को दोबारा ध्यान से पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

विशेषज्ञ निष्कर्ष एवं अगला अध्याय

अंतिम मार्गदर्शन

कारक और विभक्ति चिन्ह हिन्दी वाक्य-विन्यास (Syntax) की रीढ़ हैं जो शब्दों को आपस में जोड़कर अर्थवान वाक्य का निर्माण करते हैं। इस पोस्ट में दिए गए 4 महा-ट्रैप्स और 50 वाक्यों की मास्टर तालिका का नियमित अभ्यास आपको परीक्षा में 100% अंक दिलाएगा।

रोडमैप के अनुसार अगले अध्याय (पोस्ट 17) में हम अध्ययन करेंगे — अव्यय और निपात (Indeclinable Words): 4 मुख्य भेद, निपात के 9 प्रकार, पहचानने की 100% अचूक ट्रिक्स व PYQs”

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