समास (Samas): सभी 6 भेदों की गहराई, विग्रह नियम, पहचानने की 100% अचूक ट्रिक्स व मास्टर नोट्स
समास: शब्दों के संक्षिप्तीकरण का चमत्कार
समास की मानक परिभाषा: दो या दो से अधिक शब्दों (पदों) के मेल से एक नया सार्थक और संक्षिप्त शब्द बनाने की प्रक्रिया को ‘समास’ कहते हैं। ‘समास’ का शाब्दिक अर्थ ‘संक्षेप’ या ‘घटाना’ होता है। सामासिक पद को उसके मूल पदों और संबंध-सूचक विभक्तियों के साथ अलग-अलग करना ‘समास-विग्रह’ कहलाता है।
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विषय सूची [X]
- समास (Samas): सभी 6 भेदों की गहराई, विग्रह नियम, पहचानने की 100% अचूक ट्रिक्स व मास्टर नोट्स
- 📝समास: शब्दों के संक्षिप्तीकरण का चमत्कार
- 1. पद-प्रधानता के आधार पर समास का वर्गीकरण
- ℹ️पद-प्रधानता का वैज्ञानिक चार्ट
- 2. संधि और समास में 4 बुनियादी अंतर
- ✅संधि vs समास: तुलनात्मक तालिका
- 3. अव्ययीभाव समास (पूर्वपद प्रधान)
- ℹ️अव्ययीभाव समास की 3 अचूक पहचान ट्रिक्स
- 4. तत्पुरुष समास (उत्तरपद प्रधान) एवं कारक भेद
- ✅तत्पुरुष समास के 6 कारक भेद
- 5. तत्पुरुष समास के 4 विशेष उपभेद (Special Subtypes)
- 💡तत्पुरुष के 4 विशेष उपभेद: नञ्, अलुक, उपपद व लुप्तपद
- 6. कर्मधारय समास (विशेषण-विशेष्य एवं उपमान-उपमेय)
- ℹ️कर्मधारय समास की पहचान एवं विग्रह नियम
- 7. द्विगु समास (संख्यावाचक पूर्वपद)
- ✅द्विगु समास के प्रमुख उदाहरण (समाहार नियम)
- 8. द्वंद्व समास (उभयपद प्रधान) एवं इसके 3 उपभेद
- 💡द्वंद्व समास के 3 वैज्ञानिक उपभेद
- 9. बहुव्रीहि समास (अन्य पद प्रधान)
- ✅बहुव्रीहि समास के प्रमुख उदाहरण एवं तीसरा अर्थ
- 10. परीक्षा Trap Alert: सबसे बड़े 3 समास कन्फ्यूजन का समाधान
- 🔥💡 परीक्षा हॉल निर्णय नियम: कब कौन सा समास चुनें?
- 11. मास्टर तालिका: परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले 50 सामासिक पद
- ℹ️एग्जाम-डे स्पेशल मास्टर सामासिक तालिका
- शास्त्रीय व्याकरण: बहुव्रीहि समास के 4 विशेष उपभेद
- ℹ️बहुव्रीहि समास के 4 शास्त्रीय भेद
- मास्टर ट्रिक: संख्यावाची शब्दों में समास का 4-स्तरीय नियम
- 💡💡 संख्यावाची शब्दों का वर्गीकरण चार्ट (Numbers Master Map)
- परीक्षा हॉल विशेष: 20 अति-कठिन एवं दुर्लभ सामासिक पद (RO/ARO व PSC स्पेशल)
- ✅20 अति-दुर्लभ सामासिक पद संग्रह
- समास शब्दकोश: अव्ययीभाव समास के 30 महत्वपूर्ण शब्द
- ✅अव्ययीभाव समास की मास्टर तालिका
- समास शब्दकोश: तत्पुरुष समास (कारक व उपभेद) के 50 नए शब्द
- ℹ️तत्पुरुष समास की मास्टर तालिका
- समास शब्दकोश: कर्मधारय समास के 30 महत्वपूर्ण शब्द
- 💡कर्मधारय समास की मास्टर तालिका
- समास शब्दकोश: द्विगु समास के 25 महत्वपूर्ण शब्द
- ✅द्विगु समास की मास्टर तालिका
- समास शब्दकोश: द्वंद्व समास के 30 महत्वपूर्ण शब्द
- ℹ️द्वंद्व समास की मास्टर तालिका
- समास शब्दकोश: बहुव्रीहि समास के 35 महत्वपूर्ण शब्द
- ✅बहुव्रीहि समास की मास्टर तालिका
- ज्ञान की परीक्षा: समास All-India PYQ महा-क्विज़
- 🔥🎯 अपना स्कोर आँकें: आपकी तैयारी का स्तर क्या है?
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- विशेषज्ञ निष्कर्ष एवं अगला अध्याय
- ✅अंतिम मार्गदर्शन
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1. पद-प्रधानता के आधार पर समास का वर्गीकरण
समास में दो पद होते हैं: पहला पद (पूर्वपद) और दूसरा पद (उत्तरपद)। पद की प्रधानता के आधार पर समास के 4 मुख्य वर्ग तथा परम्परा अनुसार 6 प्रमुख भेद होते हैं:
पद-प्रधानता का वैज्ञानिक चार्ट
| प्रधानता का आधार | समास का नाम | मुख्य विशेषता एवं सूत्र |
|---|---|---|
| 1. पूर्वपद (पहला पद) प्रधान | अव्ययीभाव समास | पहला पद अव्यय/उपसर्ग होता है और पूरा पद क्रिया-विशेषण बनता है। |
| 2. उत्तरपद (दूसरा पद) प्रधान | तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु | दूसरा पद मुख्य होता है (कारक विभक्ति, विशेषण-विशेष्य या संख्यावाचक)। |
| 3. दोनों पद प्रधान (उभयपद) | द्वंद्व समास | दोनों पदों का समान महत्व होता है और बीच में ‘और/या’ का लोप होता है। |
| 4. कोई पद प्रधान नहीं (अन्य पद प्रधान) | बहुव्रीहि समास | दोनों पद मिलकर किसी तीसरे विशेष अर्थ (देवी-देवता/संज्ञा) की ओर संकेत करते हैं। |
2. संधि और समास में 4 बुनियादी अंतर
संधि vs समास: तुलनात्मक तालिका
| तुलना का आधार | संधि (Sandhi) | समास (Samas) |
|---|---|---|
| मूल तत्व | दो वर्णों (ध्वनियों) का परस्पर मेल। | दो पदों (शब्दों) का परस्पर मेल। |
| प्रक्रिया | वर्ण-विकार (ध्वनि परिवर्तन) अनिवार्य है। | बीच की कारक विभक्ति या योजक शब्दों का लोप होता है। |
| अलगाव की क्रिया | अलग करने को ‘संधि-विच्छेद’ कहते हैं। | अलग करने को ‘समास-विग्रह’ कहते हैं। |
| शब्द दायरा | केवल तत्सम (संस्कृत) शब्दों में मुख्य है। | तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी सभी प्रकार के शब्दों में होता है। |
3. अव्ययीभाव समास (पूर्वपद प्रधान)
जिस सामासिक पद का पहला पद (पूर्वपद) अव्यय या उपसर्ग हो और वही प्रधान हो, तथा समस्त पद क्रिया-विशेषण की भाँति कार्य करे, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं:
अव्ययीभाव समास की 3 अचूक पहचान ट्रिक्स
- ट्रिक 1 (उपसर्ग युक्त पद): यथा, प्रति, आ, अनु, भर, बे, बा, नि, हर, ला आदि उपसर्ग से शुरू होने वाले पद:
- यथाशक्ति -> शक्ति के अनुसार | प्रतिदिन -> प्रत्येक दिन / दिन-दिन | आजन्म -> जन्म से लेकर
- भरपेट -> पेट भरकर | बेकसूर -> बिना कसूर के | बाइज्जत -> इज्जत के साथ | निडर -> बिना डर के
- ट्रिक 2 (पुनरुक्त शब्द / शब्दों की पुनरावृत्ति): जब एक ही शब्द की दो बार आवृत्ति हो:
- रातों-रात -> रात ही रात में | दिनों-दिन -> दिन ही दिन में | बीचों-बीच -> ठीक बीच में | कानों-कान -> कान ही कान में
- हाथों-हाथ -> एक हाथ से दूसरे हाथ में | धड़ाधड़ -> धड़-धड़ की आवाज के साथ | पल-पल -> प्रत्येक पल
- ट्रिक 3 (नदीवाची शब्दों के साथ संख्या – संस्कृत नियम): यदि नदी के नाम से पहले संख्या आए, तो द्विगु नहीं बल्कि अव्ययीभाव होता है (जैसे- पञ्चगंगम् = पाँच गंगाओं का समाहार, द्वियमुनम्)।
4. तत्पुरुष समास (उत्तरपद प्रधान) एवं कारक भेद
जिस समास का दूसरा पद (उत्तरपद) प्रधान हो और दोनों पदों के बीच की कारक विभक्ति का लोप हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसके 6 कारक भेद होते हैं:
तत्पुरुष समास के 6 कारक भेद
| कारक भेद | लोप होने वाली विभक्ति | प्रमुख सामासिक पद एवं विग्रह |
|---|---|---|
| 1. कर्म तत्पुरुष (द्वितीया) | ‘को’ का लोप | गगनचुंबी (गगन को चूमने वाला), ग्रामगत (ग्राम को गया हुआ), माखनचोर (माखन को चुराने वाला), चिड़ीमार (चिड़ियों को मारने वाला) |
| 2. करण तत्पुरुष (तृतीया) | ‘से / के द्वारा’ का लोप | तुलसीकृत (तुलसी द्वारा रचित), शोकाकुल (शोक से आकुल), हस्तलिखित (हाथ से लिखित), मनचाहा (मन से चाहा) |
| 3. संप्रदान तत्पुरुष (चतुर्थी) | ‘के लिए’ का लोप | रसोईघर (रसोई के लिए घर), देशभक्ति (देश के लिए भक्ति), यज्ञशाला (यज्ञ के लिए शाला), हथकड़ी (हाथ के लिए कड़ी) |
| 4. अपादान तत्पुरुष (पंचमी) | ‘से’ (अलग होने का भाव) | ऋणमुक्त (ऋण से मुक्त), देशनिकाला (देश से निकाला हुआ), धनहीन (धन से हीन), पथभ्रष्ट (पथ से भ्रष्ट) |
| 5. संबंध तत्पुरुष (षष्ठी) | ‘का / के / की’ का लोप | राजपुत्र (राजा का पुत्र), गंगाजल (गंगा का जल), पराधीन (पर के अधीन), विद्यासागर (विद्या का सागर) |
| 6. अधिकरण तत्पुरुष (सप्तमी) | ‘में / पर’ का लोप | आपबीती (आप पर बीती), गृहप्रवेश (गृह में प्रवेश), रणधीर (रण में धीर), कविश्रेष्ठ (कवियों में श्रेष्ठ), घुड़सवार (घोड़े पर सवार) |
5. तत्पुरुष समास के 4 विशेष उपभेद (Special Subtypes)
उच्च-स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PSCs, RO/ARO) में तत्पुरुष के इन 4 विशेष उपभेदों से प्रश्न पूछे जाते हैं:
तत्पुरुष के 4 विशेष उपभेद: नञ्, अलुक, उपपद व लुप्तपद
- 1. नञ् तत्पुरुष समास (निषेध / अभाव सूचक): जिस समास का पूर्वपद नकारात्मक (अ, अन, ना, गैर) हो:
- अन्याय -> न न्याय | अनपढ़ -> न पढ़ा हुआ | नास्तिक -> न आस्तिक | अयोग्य -> न योग्य | अनदेखा -> न देखा हुआ
- 2. अलुक तत्पुरुष समास (विभक्ति का लोप न होना): जिसमें पूर्वपद की संस्कृत कारक विभक्ति का लोप नहीं होता:
- युधिष्ठिर -> युधि (युद्ध में) + स्थिर (स्थिर रहने वाला) | वाचस्पति -> वाचः (वाणी का) + पति
- मनसिज -> मनसि (मन में) + ज (जन्म लेने वाला = कामदेव) | खेचर -> खे (आकाश में) + चर (विचरने वाला)
- अंतेवासी -> अंते (समीप) + वासी (रहने वाला शिष्य)
- 3. उपपद तत्पुरुष समास (दूसरा पद स्वतंत्र शब्द न होकर कृदंत प्रत्यय हो):
- जलद -> जल देने वाला | पंकज -> पंक में जन्म लेने वाला | शास्त्रज्ञ -> शास्त्र को जानने वाला | कुंभकार -> घड़ा बनाने वाला
- 4. लुप्तपद / मध्यमपदलोपी तत्पुरुष (बीच के पूरे पद का लोप होना):
- दहीबड़ा -> दही में डूबा हुआ बड़ा | बैलगाड़ी -> बैल से चलने वाली गाड़ी
- पवनचक्की -> पवन से चलने वाली चक्की | पर्णकुटी -> पत्तों से बनी हुई कुटिया | तुलादान -> तुला से तौलकर दिया जाने वाला दान
6. कर्मधारय समास (विशेषण-विशेष्य एवं उपमान-उपमेय)
जिस समास का उत्तरपद प्रधान हो तथा दोनों पदों के बीच विशेषण-विशेष्य (विशेषता बताने वाला) अथवा उपमान-उपमेय (तुलना करने वाला) संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं:
कर्मधारय समास की पहचान एवं विग्रह नियम
- ट्रिक 1 (विग्रह करने पर ‘है जो’ या ‘के समान’ आना):
- नीलकमल -> नीला है जो कमल | महात्मा -> महान है जो आत्मा | कापुरुष -> कायर है जो पुरुष
- चरणकमल -> कमल के समान चरण | कनकलता -> कनक (सोने) के समान लता | चंद्रमुख -> चंद्रमा के समान मुख
- ट्रिक 2 (रूपक / अभेद संबंध – विग्रह में ‘रूपी’ आना):
- विद्याधन -> विद्या रूपी धन | भवसागर -> भव (संसार) रूपी सागर | क्रोधाग्नि -> क्रोध रूपी अग्नि | मुखचंद्र -> मुख रूपी चंद्रमा
7. द्विगु समास (संख्यावाचक पूर्वपद)
जिस सामासिक पद का पहला पद संख्यावाचक विशेषण हो और समस्त पद किसी समूह या समाहार का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं:
द्विगु समास के प्रमुख उदाहरण (समाहार नियम)
| सामासिक पद | समास-विग्रह | समूह / समाहार की संख्या |
|---|---|---|
| त्रिफला | तीन फलों का समाहार / समूह | 3 फल |
| चौराहा | चार राहों (रास्तों) का समाहार | 4 राहें |
| पंचवटी | पाँच वट (बरगद) वृक्षों का समाहार | 5 वट वृक्ष |
| षडरस | छह रसों का समाहार | 6 रस |
| सप्तर्षि | सात ऋषियों का समूह | 7 ऋषि |
| अष्टाध्यायी | आठ अध्यायों का समाहार (पाणिनि ग्रंथ) | 8 अध्याय |
| नवग्रह | नौ ग्रहों का समाहार | 9 ग्रह |
| शताब्दी | सौ अब्दों (वर्षों) का समाहार | 100 वर्ष |
| दुपट्टा | दो पट्टों (कपड़ों) का समाहार | 2 पट्ट |
| तिरंगा | तीन रंगों का समाहार (सामान्य अर्थ में) | 3 रंग |
8. द्वंद्व समास (उभयपद प्रधान) एवं इसके 3 उपभेद
जिस समास के दोनों पद प्रधान हों तथा विग्रह करने पर ‘और’, ‘तथा’, ‘या’, ‘अथवा’ जैसे योजक शब्दों का प्रयोग हो, उसे द्वंद्व समास कहते हैं। इसके 3 उपभेद होते हैं:
द्वंद्व समास के 3 वैज्ञानिक उपभेद
- 1. इतरेतर द्वंद्व (विग्रह में ‘और’ / ‘तथा’ आए – दोनों का स्वतंत्र अस्तित्व):
- माता-पिता -> माता और पिता | राधा-कृष्ण -> राधा और कृष्ण | अन्न-जल -> अन्न और जल | दाल-रोटी -> दाल और रोटी
- धर्माधर्म -> धर्म और अधर्म | सुरासुर -> सुर और असुर | पच्चीस -> पाँच और बीस (5 + 20)
- 2. समाहार द्वंद्व (विग्रह में ‘आदि / वगैरह’ आए – समूह व समान अर्थ का बोध):
- हाथ-पाँव -> हाथ-पाँव आदि | कपड़ा-लत्ता -> कपड़ा-लत्ता आदि | रुपया-पैसा -> रुपया-पैसा आदि | बाल-बच्चे -> बाल-बच्चे आदि
- सेठ-साहूकार -> सेठ-साहूकार आदि | चाय-वाय -> चाय-नाश्ता आदि
- 3. वैकल्पिक द्वंद्व (विग्रह में ‘या’ / ‘अथवा’ आए – परस्पर विरोधी विकल्प):
- लाभ-हानि -> लाभ या हानि | पाप-पुण्य -> पाप या पुण्य | भला-बुरा -> भला या बुरा | थोड़ा-बहुत -> थोड़ा या बहुत
- सुख-दुःख -> सुख या दुःख | जय-पराजय -> जय या पराजय | आज-कल -> आज या कल
9. बहुव्रीहि समास (अन्य पद प्रधान)
जिस समास में न तो पूर्वपद प्रधान हो और न ही उत्तरपद, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे (अन्य) पद या विशेष संज्ञा की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं:
बहुव्रीहि समास के प्रमुख उदाहरण एवं तीसरा अर्थ
| सामासिक पद | समास-विग्रह | तीसरा विशेष अर्थ (प्रधान पद) |
|---|---|---|
| दशानन | दस हैं आनन (मुख) जिसके | रावण |
| पीतांबर | पीत (पीले) हैं अंबर (वस्त्र) जिसके | भगवान श्रीकृष्ण / विष्णु |
| लंबोदर | लंबा है उदर (पेट) जिसका | भगवान गणेश |
| चक्रपाणि | चक्र है पाणि (हाथ) में जिसके | भगवान विष्णु |
| त्रिनेत्र | तीन नेत्र हैं जिसके | भगवान शिव |
| चतुरानन | चार आनन (मुख) हैं जिसके | भगवान ब्रह्मा |
| विषधर | विष को धारण करने वाला | सर्प (साँप) |
| आशुतोष | जो शीघ्र (आशु) प्रसन्न हो जाता है | भगवान शिव |
| वज्रपाणि | वज्र है पाणि (हाथ) में जिसके | देवराज इंद्र |
| निशाचर | रात में विचरण करने वाला | राक्षस |
| चंद्रशेखर | चंद्र है शिखर पर जिसके | भगवान शिव |
| अंशुमाली | किरणें (अंशु) हैं माला जिसकी | सूर्य देव |
| वीणापाणि | वीणा है पाणि (हाथ) में जिसके | माता सरस्वती |
| पतझड़ | पत्ते झड़ते हैं जिस मौसम में | एक विशेष ऋतु (वसंत पूर्व) |
| प्रधानमंत्री | मंत्रियों में जो प्रधान है | विशेष प्रशासनिक पद |
10. परीक्षा Trap Alert: सबसे बड़े 3 समास कन्फ्यूजन का समाधान
परीक्षक अक्सर विद्यार्थियों को फँसाने के लिए ऐसे शब्द देते हैं जिनमें दो-दो समास होते हैं:
💡 परीक्षा हॉल निर्णय नियम: कब कौन सा समास चुनें?
- कर्मधारय vs बहुव्रीहि (जैसे- पीतांबर, नीलकंठ, महादेव):
- यदि विग्रह हो: ‘पीला है जो अंबर’ -> कर्मधारय समास।
- यदि विग्रह हो: ‘पीले हैं अंबर जिसके अर्थात श्रीकृष्ण’ -> बहुव्रीहि समास।
- गोल्डन टिप: यदि परीक्षा में बिना विग्रह के ‘पीतांबर’ या ‘नीलकंठ’ आए और विकल्प में कर्मधारय व बहुव्रीहि दोनों हों, तो हमेशा ‘बहुव्रीहि’ को पहली प्राथमिकता दें।
- द्विगु vs बहुव्रीहि (जैसे- त्रिनेत्र, दशानन, पंचानन, चतुर्भुज):
- यदि विग्रह हो: ‘तीन नेत्रों का समाहार’ -> द्विगु समास।
- यदि विग्रह हो: ‘तीन नेत्र हैं जिसके अर्थात शिव’ -> बहुव्रीहि समास।
- गोल्डन टिप: संख्यावाचक शब्द यदि किसी पौराणिक देवी-देवता के लिए रूढ़ हो चुका हो, तो वह सदैव ‘बहुव्रीहि’ माना जाएगा।
- संधि और समास दोनों युक्त शब्द (जैसे- रामायण, देवालय, देवासुर):
- रामायण: राम + अयन (दीर्घ संधि) तथा राम का अयन (संबंध तत्पुरुष समास)।
- देवासुर: देव + असुर (दीर्घ संधि) तथा देव और असुर (इतरेतर द्वंद्व समास)।
11. मास्टर तालिका: परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले 50 सामासिक पद
विगत 15 वर्षों की परीक्षाओं (CTET, State PSC, SI, RO/ARO) में सर्वाधिक पूछे गए 50 शब्द:
एग्जाम-डे स्पेशल मास्टर सामासिक तालिका
| सामासिक पद | सही समास-विग्रह | समास का भेद एवं नियम |
|---|---|---|
| युधिष्ठिर | युद्ध में स्थिर रहने वाला | अलुक तत्पुरुष समास |
| दहीबड़ा | दही में डूबा हुआ बड़ा | मध्यमपदलोपी (लुप्तपद) तत्पुरुष |
| यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार | अव्ययीभाव समास (‘यथा’ अव्यय) |
| रातों-रात | रात ही रात में | अव्ययीभाव समास (पुनरुक्त शब्द) |
| राजपुत्र | राजा का पुत्र | संबंध तत्पुरुष (‘का’ का लोप) |
| रोगमुक्त | रोग से मुक्त | अपादान तत्पुरुष (‘से’ अलग भाव) |
| रसोईघर | रसोई के लिए घर | संप्रदान तत्पुरुष (‘के लिए’ लोप) |
| आपबीती | आप पर बीती | अधिकरण तत्पुरुष (‘पर’ का लोप) |
| हस्तलिखित | हाथ से लिखित | करण तत्पुरुष (‘से’ साधन लोप) |
| गगनचुंबी | गगन को चूमने वाला | कर्म तत्पुरुष (‘को’ का लोप) |
| अन्याय | न न्याय | नञ् तत्पुरुष समास |
| नास्तिक | न आस्तिक | नञ् तत्पुरुष समास |
| वाचस्पति | वाणी का पति | अलुक तत्पुरुष समास |
| मनसिज | मन में जन्म लेने वाला (कामदेव) | अलुक तत्पुरुष / बहुव्रीहि |
| नीलकमल | नीला है जो कमल | कर्मधारय समास (विशेषण-विशेष्य) |
| चरणकमल | कमल के समान चरण | कर्मधारय समास (उपमान-उपमेय) |
| विद्याधन | विद्या रूपी धन | कर्मधारय समास (रूपक संबंध) |
| महात्मा | महान है जो आत्मा | कर्मधारय समास |
| कापुरुष | कायर है जो पुरुष | कर्मधारय समास |
| त्रिफला | तीन फलों का समाहार | द्विगु समास (संख्या 3) |
| चौराहा | चार राहों का समाहार | द्विगु समास (संख्या 4) |
| पंचवटी | पाँच वटों का समाहार | द्विगु समास (संख्या 5) |
| अष्टाध्यायी | आठ अध्यायों का समाहार | द्विगु समास (संख्या 8) |
| सप्तर्षि | सात ऋषियों का समूह | द्विगु समास (संख्या 7) |
| शताब्दी | सौ वर्षों का समाहार | द्विगु समास (संख्या 100) |
| माता-पिता | माता और पिता | इतरेतर द्वंद्व समास |
| राधा-कृष्ण | राधा और कृष्ण | इतरेतर द्वंद्व समास |
| अन्न-जल | अन्न और जल | इतरेतर द्वंद्व समास |
| हाथ-पाँव | हाथ-पाँव आदि | समाहार द्वंद्व समास |
| रुपया-पैसा | रुपया-पैसा आदि | समाहार द्वंद्व समास |
| लाभ-हानि | लाभ या हानि | वैकल्पिक द्वंद्व समास |
| पाप-पुण्य | पाप या पुण्य | वैकल्पिक द्वंद्व समास |
| धर्माधर्म | धर्म और अधर्म | इतरेतर द्वंद्व समास |
| पच्चीस | पाँच और बीस | इतरेतर द्वंद्व समास |
| दशानन | दस हैं मुख जिसके (रावण) | बहुव्रीहि समास |
| पीतांबर | पीले हैं वस्त्र जिसके (श्रीकृष्ण) | बहुव्रीहि समास |
| लंबोदर | लंबा है पेट जिसका (गणेश) | बहुव्रीहि समास |
| चक्रपाणि | चक्र है हाथ में जिसके (विष्णु) | बहुव्रीहि समास |
| त्रिनेत्र | तीन नेत्र हैं जिसके (शिव) | बहुव्रीहि समास |
| चतुरानन | चार मुख हैं जिसके (ब्रह्मा) | बहुव्रीहि समास |
| विषधर | विष धारण करने वाला (साँप) | बहुव्रीहि समास |
| आशुतोष | शीघ्र प्रसन्न होने वाले (शिव) | बहुव्रीहि समास |
| वज्रपाणि | वज्र है हाथ में जिसके (इंद्र) | बहुव्रीहि समास |
| चंद्रशेखर | चंद्र है सिर पर जिसके (शिव) | बहुव्रीहि समास |
| वीणापाणि | वीणा है हाथ में जिसके (सरस्वती) | बहुव्रीहि समास |
| पर्णकुटी | पत्तों से बनी कुटी | लुप्तपद तत्पुरुष समास |
| बैलगाड़ी | बैल से चलने वाली गाड़ी | लुप्तपद तत्पुरुष समास |
| पवनचक्की | पवन से चलने वाली चक्की | लुप्तपद तत्पुरुष समास |
| जलद | जल देने वाला (बादल) | उपपद तत्पुरुष समास |
| शास्त्रज्ञ | शास्त्र जानने वाला | उपपद तत्पुरुष समास |
शास्त्रीय व्याकरण: बहुव्रीहि समास के 4 विशेष उपभेद
उच्च-स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं (State PSC, RO/ARO, TGT/PGT) में बहुव्रीहि के आंतरिक भेदों से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं:
बहुव्रीहि समास के 4 शास्त्रीय भेद
| बहुव्रीहि का उपभेद | पहचान का नियम | प्रमुख सामासिक पद एवं विग्रह |
|---|---|---|
| 1. समानाधिकरण बहुव्रीहि | दोनों पदों में समान (प्रथमा) विभक्ति हो। | पीतांबर (पीत हैं अंबर जिसके = कृष्ण), लंबोदर (लंबा है उदर जिसका = गणेश), चतुर्मुख (ब्रह्मा) |
| 2. व्यधिकरण बहुव्रीहि | दोनों पदों में अलग-अलग विभक्तियाँ हों (पूर्वपद प्रथमा, उत्तरपद सप्तमी आदि)। | चक्रपाणि (चक्र है पाणि/हाथ में जिसके = विष्णु), चंद्रशेखर (चंद्र है शिखर पर जिसके = शिव), शूलपाणि (शिव) |
| 3. सहबहुव्रीहि (तुल्ययोग) | पूर्वपद में ‘स’ (सहित/साथ) उपसर्ग जुड़ा हो। | सपरिवार (परिवार सहित है जो), सदेह (देह सहित), साग्रह (आग्रह सहित), सचेत (चेतना सहित) |
| 4. व्यतिहार बहुव्रीहि | घात-प्रतिघात, परस्पर लड़ाई या झगड़े का बोध कराने वाले शब्द। | लाठालाठी (लाठियों से जो लड़ाई हुई), बाताबाती (बातों-बातों से जो झगड़ा हुआ), धक्कामुक्की, गालागाली |
मास्टर ट्रिक: संख्यावाची शब्दों में समास का 4-स्तरीय नियम
संख्या दिखने पर केवल ‘द्विगु समास’ नहीं होता! संख्यावाची शब्दों में संदर्भ के अनुसार 4 अलग-अलग समास होते हैं:
💡 संख्यावाची शब्दों का वर्गीकरण चार्ट (Numbers Master Map)
- 1. द्विगु समास (समूह / समाहार का बोध):
- जब 1 से 9 तक की संख्या या 10 के गुणक (दहाई/सैकड़ा) किसी समूह को दर्शाएँ:
त्रिफला (3 फल), चौराहा (4 राहें), नवग्रह (9 ग्रह), शताब्दी (100 वर्ष)।
- जब 1 से 9 तक की संख्या या 10 के गुणक (दहाई/सैकड़ा) किसी समूह को दर्शाएँ:
- 2. द्वंद्व समास (10 से 99 के बीच की मिश्रित संख्याएँ):
- जब दो संख्याएँ मिलकर बनी हों (इतरेतर द्वंद्व):
पच्चीस (पाँच और बीस = 5 + 20), इकतीस (एक और तीस = 1 + 30), अड़तालीस (आठ और चालीस = 8 + 40), बहत्तर (दो और सत्तर = 2 + 70)।
- जब दो संख्याएँ मिलकर बनी हों (इतरेतर द्वंद्व):
- 3. बहुव्रीहि समास (तीसरे विशेष अर्थ में रूढ़ संख्याएँ):
- जब संख्या किसी देवी-देवता या विशेष व्यक्ति के लिए निश्चित हो:
दशानन (10 मुख = रावण), त्रिनेत्र (3 आँखें = शिव), चतुर्भुज (4 भुजाएँ = विष्णु), सहस्राक्ष (1000 आँखें = इंद्र)।
- जब संख्या किसी देवी-देवता या विशेष व्यक्ति के लिए निश्चित हो:
- 4. अव्ययीभाव समास (नदीवाची शब्दों के साथ संख्या – संस्कृत पाणिनि नियम):
- नदी के नाम के पहले संख्या आने पर द्विगु नहीं, अव्ययीभाव होता है:
पञ्चगंगम् (पाँच गंगाओं का समाहार), द्वियमुनम् (दो यमुनाओं का समाहार)।
- नदी के नाम के पहले संख्या आने पर द्विगु नहीं, अव्ययीभाव होता है:
परीक्षा हॉल विशेष: 20 अति-कठिन एवं दुर्लभ सामासिक पद (RO/ARO व PSC स्पेशल)
वे कठिन सामासिक पद जो राज्य प्रशासनिक परीक्षाओं के कट-ऑफ को निर्धारित करते हैं:
20 अति-दुर्लभ सामासिक पद संग्रह
| कठिन सामासिक पद | सही समास-विग्रह | समास का भेद एवं नियम |
|---|---|---|
| शाकपार्थिव | शाक प्रिय पार्थिव (राजा) | मध्यमपदलोपी (लुप्तपद) तत्पुरुष |
| वज्रांग (बजरंग) | वज्र के समान कठोर हैं अंग जिसके (हनुमान जी) | बहुव्रीहि समास |
| कूपमंडूक | कूप (कुएँ) में रहने वाला मंडूक (संकुचित बुद्धि वाला) | बहुव्रीहि समास |
| शाखामृग | शाखाओं पर दौड़ने वाला मृग (बंदर) | बहुव्रीहि समास |
| कुसुमायुध | कुसुम (फूल) हैं आयुध (हथियार) जिसके (कामदेव) | बहुव्रीहि समास |
| अनंग | अंग-रहित है जो (कामदेव) | बहुव्रीहि समास |
| वाग्दत्ता | वाणी द्वारा (विवाह हेतु) दी गई कन्या | तृतीया (करण) तत्पुरुष समास |
| आत्मघाती | स्वयं की हत्या करने वाला | उपपद तत्पुरुष समास |
| पर्णशाला | पत्तों से बनी हुई शाला (कुटिया) | लुप्तपद तत्पुरुष समास |
| सिरमौर | सिर का मौर (मुकुट / श्रेष्ठ) | संबंध तत्पुरुष समास |
| सिरदर्द | सिर में दर्द | अधिकरण तत्पुरुष समास |
| अहर्निश | अहन् (दिन) और निशा (रात) | इतरेतर द्वंद्व समास |
| शीतोष्ण | शीत या उष्ण (ठंडा या गर्म) | वैकल्पिक द्वंद्व / कर्मधारय |
| सहोदर | समान उदर (पेट) से जन्मा सगा भाई | बहुव्रीहि / कर्मधारय |
| पतझड़ | पत्ते झड़ते हैं जिस ऋतु में (एक विशेष मौसम) | बहुव्रीहि समास |
| चितचोर | चित्त को चुराने वाला | कर्म तत्पुरुष समास |
| मदमस्त | मद से मस्त | करण तत्पुरुष समास |
| बलिपशु | बलि के लिए पशु | संप्रदान तत्पुरुष समास |
| जीवदया | जीवों पर दया | अधिकरण तत्पुरुष समास |
| पद्मनाभ | पद्म (कमल) है नाभि में जिसके (भगवान विष्णु) | बहुव्रीहि समास |
समास शब्दकोश: अव्ययीभाव समास के 30 महत्वपूर्ण शब्द
विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए अव्ययीभाव समास के महत्वपूर्ण सामासिक पद:
अव्ययीभाव समास की मास्टर तालिका
| सामासिक पद | सही समास-विग्रह | व्याकरणिक विश्लेषण / उपसर्ग |
|---|---|---|
| आपादमस्तक | पैर (पाद) से सिर (मस्तक) तक | ‘आ’ उपसर्ग (तक अर्थ में) |
| आजानु | जानु (घुटनों) तक | ‘आ’ उपसर्ग |
| यथायोग्य | योग्यता के अनुसार | ‘यथा’ अव्यय |
| यथामति | मति (बुद्धि) के अनुसार | ‘यथा’ अव्यय |
| यथार्थ | अर्थ के अनुसार | ‘यथा’ अव्यय |
| यथेष्ट | इच्छा (इष्ट) के अनुसार | ‘यथा’ अव्यय |
| यथाविधि | विधि के अनुसार | ‘यथा’ अव्यय |
| प्रत्यक्ष | अक्षियों (आँखों) के सामने | ‘प्रति’ उपसर्ग (प्रति + अक्ष) |
| परोक्ष | आँखों से परे (ओझल) | ‘पर’ अव्यय (पर + अक्ष) |
| प्रत्यंग | अंग-अंग / प्रत्येक अंग | ‘प्रति’ उपसर्ग |
| प्रतिक्षण | प्रत्येक क्षण | ‘प्रति’ उपसर्ग |
| प्रतिमाह | प्रत्येक माह | ‘प्रति’ उपसर्ग |
| प्रत्याशा | आशा के बदले आशा | ‘प्रति’ उपसर्ग (प्रति + आशा) |
| प्रत्युत्तर | उत्तर के बदले उत्तर | ‘प्रति’ उपसर्ग (प्रति + उत्तर) |
| आजीवन | जीवन भर | ‘आ’ उपसर्ग |
| आकंठ | कंठ तक | ‘आ’ उपसर्ग |
| आबालवृद्ध | बालक से लेकर वृद्ध तक | ‘आ’ उपसर्ग |
| आमरण | मरण (मृत्यु) तक | ‘आ’ उपसर्ग |
| आसेतुहिमालय | सेतुबंध (रामेश्वरम) से हिमालय तक | ‘आ’ उपसर्ग |
| अनुकूल | मन / इच्छा के अनुसार | ‘अनु’ उपसर्ग |
| अनुरूप | रूप के अनुसार | ‘अनु’ उपसर्ग |
| अनुशासन | शासन के पीछे / नियमबद्ध | ‘अनु’ उपसर्ग |
| अनजाने | बिना जाने हुए | ‘अन’ तद्भव उपसर्ग |
| बेखटके | बिना खटके / बिना डर के | ‘बे’ उर्दू उपसर्ग |
| बेपरवाह | बिना परवाह के | ‘बे’ उर्दू उपसर्ग |
| बेहिसाब | बिना हिसाब के | ‘बे’ उर्दू उपसर्ग |
| बेशक | बिना शक के | ‘बे’ उर्दू उपसर्ग |
| बाकायदा | कायदे / नियम के साथ | ‘बा’ उर्दू उपसर्ग |
| हररोज़ | प्रत्येक रोज़ (दिन) | ‘हर’ उपसर्ग |
| घर-घर | प्रत्येक घर | पुनरुक्त शब्द |
| साफ-साफ | बिलकुल साफ | पुनरुक्त शब्द |
| लूटम-लूट | लूट के बाद लूट | पुनरुक्त शब्द |
| मारामारी | मार के बाद मार | पुनरुक्त शब्द |
| देखा-देखी | देखने के बाद देखना | पुनरुक्त शब्द |
समास शब्दकोश: तत्पुरुष समास (कारक व उपभेद) के 50 नए शब्द
कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण व उपभेदों के 50 प्रमुख शब्द:
तत्पुरुष समास की मास्टर तालिका
| सामासिक पद | सही समास-विग्रह | तत्पुरुष का भेद एवं विभक्ति |
|---|---|---|
| जेबकतरा | जेब को कतरने वाला | कर्म तत्पुरुष (‘को’ का लोप) |
| स्वर्गप्राप्त | स्वर्ग को प्राप्त | कर्म तत्पुरुष |
| शरणागत | शरण को आगत (आया हुआ) | कर्म तत्पुरुष |
| आशातीत | आशा से अतीत (परे) | कर्म तत्पुरुष |
| सर्वप्रिय | सभी को प्रिय | कर्म तत्पुरुष |
| भयाकुल | भय से आकुल (व्याकुल) | करण तत्पुरुष (‘से’ का लोप) |
| रेखांकित | रेखा से अंकित | करण तत्पुरुष |
| जन्मांध | जन्म से अंधा | करण तत्पुरुष |
| रसभरा | रस से भरा हुआ | करण तत्पुरुष |
| पददलित | पद (पैरों) से दलित / रौंदा हुआ | करण तत्पुरुष |
| वाक्युद्ध | वाणी (वचनों) से युद्ध | करण तत्पुरुष |
| मदांध | मद (अहंकार) से अंधा | करण तत्पुरुष |
| गुरुदक्षिणा | गुरु के लिए दक्षिणा | संप्रदान तत्पुरुष (‘के लिए’ लोप) |
| सत्याग्रह | सत्य के लिए आग्रह | संप्रदान तत्पुरुष |
| गौशाला | गौओं (गायों) के लिए शाला | संप्रदान तत्पुरुष |
| मालगाड़ी | माल ढोने के लिए गाड़ी | संप्रदान तत्पुरुष |
| राहखर्च | राह (मार्ग) के लिए खर्च | संप्रदान तत्पुरुष |
| युद्धभूमि | युद्ध के लिए भूमि | संप्रदान तत्पुरुष |
| स्नानघर | स्नान के लिए घर | संप्रदान तत्पुरुष |
| नेत्रहीन | नेत्रों से हीन (रहित) | अपादान तत्पुरुष (‘से’ अलग भाव) |
| पदच्युत | पद से हटाया हुआ | अपादान तत्पुरुष |
| धर्मविमुख | धर्म से विमुख / अलग | अपादान तत्पुरुष |
| भयभीत | भय से भीत (डरा हुआ) | अपादान तत्पुरुष |
| जातिभ्रष्ट | जाति से भ्रष्ट / निष्कासित | अपादान तत्पुरुष |
| सेवामुक्त | सेवा (नौकरी) से मुक्त | अपादान तत्पुरुष |
| राजदरबार | राजा का दरबार | संबंध तत्पुरुष (‘का’ का लोप) |
| राजकन्या | राजा की कन्या | संबंध तत्पुरुष |
| सेनापति | सेना का पति (प्रमुख) | संबंध तत्पुरुष |
| लखपति | लाखों का पति (स्वामी) | संबंध तत्पुरुष |
| पराधीनता | पर (दूसरे) के अधीन होने का भाव | संबंध तत्पुरुष |
| दीनानाथ | दीनों (गरीबों) के नाथ | संबंध तत्पुरुष |
| अमचूर | आम का चूर्ण | संबंध तत्पुरुष |
| कन्यादान | कन्या का दान | संबंध तत्पुरुष |
| आनंदमग्न | आनंद में मग्न | अधिकरण तत्पुरुष (‘में’ का लोप) |
| सर्वोत्तम | सब में उत्तम | अधिकरण तत्पुरुष |
| पुरुषोत्तम | पुरुषों में उत्तम (सामान्य अर्थ) | अधिकरण तत्पुरुष |
| शास्त्रनिपुण | शास्त्र में निपुण | अधिकरण तत्पुरुष |
| ध्यानमग्न | ध्यान में मग्न | अधिकरण तत्पुरुष |
| देशाटन | देश में अटन (भ्रमण) | अधिकरण तत्पुरुष |
| वनवास | वन में वास | अधिकरण तत्पुरुष |
| कविपुंगव | कवियों में पुंगव (श्रेष्ठ) | अधिकरण तत्पुरुष |
| अश्रद्धा | न श्रद्धा | नञ् तत्पुरुष समास |
| अनुचित | न उचित | नञ् तत्पुरुष समास |
| अनिच्छा | न इच्छा | नञ् तत्पुरुष समास |
| अनश्वर | न नश्वर (अविनाशी) | नञ् तत्पुरुष समास |
| स्वर्णकार | स्वर्ण (सोना) बनाने वाला कारीगर | उपपद तत्पुरुष समास |
| मधुमक्खी | मधु एकत्र करने वाली मक्खी | मध्यमपदलोपी तत्पुरुष |
| गुड़धानी | गुड़ मिली हुई धानी | मध्यमपदलोपी तत्पुरुष |
| रेलगाड़ी | रेल (पटरी) पर चलने वाली गाड़ी | मध्यमपदलोपी तत्पुरुष |
| घोड़ागाड़ी | घोड़े से चलने वाली गाड़ी | मध्यमपदलोपी तत्पुरुष |
समास शब्दकोश: कर्मधारय समास के 30 महत्वपूर्ण शब्द
विशेषण-विशेष्य और उपमान-उपमेय पर आधारित कर्मधारय समास के 30 प्रमुख पद:
कर्मधारय समास की मास्टर तालिका
| सामासिक पद | सही समास-विग्रह | संबंध एवं नियम |
|---|---|---|
| रक्तांबर | रक्त (लाल) है जो अंबर (वस्त्र) | विशेषण-विशेष्य |
| सद्विचार | सत् (अच्छा) है जो विचार | विशेषण-विशेष्य |
| कुविचार | कु (बुरा) है जो विचार | विशेषण-विशेष्य |
| सुयोग | सु (अच्छा) है जो योग | विशेषण-विशेष्य |
| नराधम | अधम (नीच) है जो नर | विशेषण-विशेष्य |
| पुरुषरत्न | रत्न के समान पुरुष | उपमान-उपमेय |
| मुखारविंद | अरविंद (कमल) के समान मुख | उपमान-उपमेय |
| देहलता | लता रूपी देह | रूपक संबंध |
| वचनामृत | अमृत रूपी वचन | रूपक संबंध |
| करकमल | कमल के समान कर (हाथ) | उपमान-उपमेय |
| शुभागमन | शुभ है जो आगमन | विशेषण-विशेष्य |
| परमानंद | परम है जो आनंद | विशेषण-विशेष्य |
| महर्षि | महान हैं जो ऋषि | विशेषण-विशेष्य |
| राजर्षि | जो राजा भी हैं और ऋषि भी | उभयपद विशेषण |
| महाकाव्य | महान है जो काव्य | विशेषण-विशेष्य |
| भलामानस | भला है जो मानस (मनुष्य) | विशेषण-विशेष्य |
| अधपका | आधा है जो पका | विशेषण-विशेष्य |
| अधमरा | आधा है जो मरा | विशेषण-विशेष्य |
| लालमिर्च | लाल है जो मिर्च | विशेषण-विशेष्य |
| कालीमिर्च | काली है जो मिर्च | विशेषण-विशेष्य |
| अंधविश्वास | अंधा है जो विश्वास | विशेषण-विशेष्य |
| प्राणप्रिय | प्राणों के समान प्रिय | उपमान-उपमेय |
| मृगलोचनी | मृग के लोचन (आँखों) के समान लोचन वाली | उपमान-उपमेय |
| मीनाक्षी | मीन (मछली) के समान अक्षियों (आँखों) वाली | उपमान-उपमेय |
| चंद्रवदन | चंद्रमा के समान वदन (मुख) | उपमान-उपमेय |
| कीर्तिलता | लता रूपी कीर्ति | रूपक संबंध |
| ज्ञानदीपक | दीपक रूपी ज्ञान | रूपक संबंध |
| शोकसागर | सागर रूपी शोक | रूपक संबंध |
| नवयुवक | नव (नया) है जो युवक | विशेषण-विशेष्य |
| महाजन | महान है जो जन | विशेषण-विशेष्य |
समास शब्दकोश: द्विगु समास के 25 महत्वपूर्ण शब्द
संख्यावाचक पूर्वपद और समूह/समाहार का बोध कराने वाले 25 प्रमुख शब्द:
द्विगु समास की मास्टर तालिका
| सामासिक पद | सही समास-विग्रह | संख्या एवं समाहार |
|---|---|---|
| त्रिलोक | तीन लोकों का समाहार | 3 लोक |
| त्रिभुवन | तीन भुवनों का समाहार | 3 भुवन |
| त्रिवेणी | तीन वेणियों (नदियों) का समाहार | 3 नदियाँ |
| त्रिकाल | तीन कालों का समाहार | 3 काल |
| त्रिकोण | तीन कोणों का समाहार | 3 कोण |
| चतुर्युग | चार युगों का समाहार | 4 युग |
| चतुर्भुज | चार भुजाओं का समाहार (ज्यामिति में) | 4 भुजाएँ |
| चतुर्वेद | चार वेदों का समाहार | 4 वेद |
| पंचतत्व | पाँच तत्वों का समाहार | 5 तत्व |
| पंचामृत | पाँच अमृतरूपी पदार्थों का समाहार | 5 अमृत |
| पंचतंत्र | पाँच तंत्रों (सिद्धांतों) का समाहार | 5 तंत्र |
| पंचरंग | पाँच रंगों का समाहार | 5 रंग |
| षट्कोण | छह कोणों का समाहार | 6 कोण |
| सप्ताह | सात अह्नों (दिनों) का समाहार | 7 दिन |
| सतरंग | सात रंगों का समाहार | 7 रंग |
| अठन्नी | आठ आनों का समाहार | 8 आने |
| चवन्नी | चार आनों का समाहार | 4 आने |
| अष्टसिद्धि | आठ सिद्धियों का समाहार | 8 सिद्धियाँ |
| अष्टधातु | आठ धातुओं का समाहार | 8 धातुएँ |
| नवरत्न | नौ रत्नों का समाहार | 9 रत्न |
| नवरात्रि | नौ रात्रियों का समाहार | 9 रातें |
| दशक | दस वर्षों का समाहार | 10 वर्ष |
| पसेरी | पाँच सेर का समाहार (माप) | 5 सेर |
| सतसई | सात सौ दोहों का समाहार (बिहारी सतसई) | 700 दोहे |
| सहस्राब्दी | एक हजार वर्षों का समाहार | 1000 वर्ष |
समास शब्दकोश: द्वंद्व समास के 30 महत्वपूर्ण शब्द
इतरेतर, समाहार और वैकल्पिक द्वंद्व समास के 30 प्रमुख पद:
द्वंद्व समास की मास्टर तालिका
| सामासिक पद | सही समास-विग्रह | द्वंद्व का उपभेद |
|---|---|---|
| सीताराम | सीता और राम | इतरेतर द्वंद्व |
| गौरीशंकर | गौरी (पार्वती) और शंकर (शिव) | इतरेतर द्वंद्व |
| हर-हरि | हर (शिव) और हरि (विष्णु) | इतरेतर द्वंद्व |
| लव-कुश | लव और कुश | इतरेतर द्वंद्व |
| लोटा-डोरी | लोटा और डोरी | इतरेतर द्वंद्व |
| दूध-दही | दूध और दही | इतरेतर द्वंद्व |
| फल-फूल | फल और फूल | इतरेतर द्वंद्व |
| कंद-मूल | कंद और मूल | इतरेतर द्वंद्व |
| गाय-भैंस | गाय और भैंस | इतरेतर द्वंद्व |
| घास-फूस | घास-फूस आदि | समाहार द्वंद्व |
| साग-पात | साग-पात आदि | समाहार द्वंद्व |
| कुर्ता-टोपी | कुर्ता-टोपी आदि | समाहार द्वंद्व |
| लेन-देन | लेन या देन | वैकल्पिक द्वंद्व |
| आय-व्यय | आय या व्यय | वैकल्पिक द्वंद्व |
| खरा-खोटा | खरा या खोटा | वैकल्पिक द्वंद्व |
| उचित-अनुचित | उचित या अनुचित | वैकल्पिक द्वंद्व |
| सत्यासत्य | सत्य या असत्य | वैकल्पिक द्वंद्व |
| लाभालाभ | लाभ या अलाभ (हानि) | वैकल्पिक द्वंद्व |
| जयाजय | जय या अजय (पराजय) | वैकल्पिक द्वंद्व |
| कर्माकर्म | कर्म और अकर्म | इतरेतर द्वंद्व |
| शीतातप | शीत और आतप (धूप) | इतरेतर द्वंद्व |
| राग-द्वेष | राग और द्वेष | इतरेतर द्वंद्व |
| छोटा-बड़ा | छोटा या बड़ा | वैकल्पिक द्वंद्व |
| ऊँच-नीच | ऊँच या नीच | वैकल्पिक द्वंद्व |
| यश-अपयश | यश या अपयश | वैकल्पिक द्वंद्व |
| ग्यारह | एक और दस (1 + 10) | इतरेतर द्वंद्व (संख्या) |
| बारह | दो और दस (2 + 10) | इतरेतर द्वंद्व (संख्या) |
| उन्नीस | नौ और दस (एक कम बीस) | इतरेतर द्वंद्व (संख्या) |
| बयालीस | दो और चालीस (2 + 40) | इतरेतर द्वंद्व (संख्या) |
| तिरसठ | तीन और साठ (3 + 60) | इतरेतर द्वंद्व (संख्या) |
समास शब्दकोश: बहुव्रीहि समास के 35 महत्वपूर्ण शब्द
अन्य पद प्रधान और पौराणिक देवी-देवताओं/विशेष अर्थ में रूढ़ 35 प्रमुख पद:
बहुव्रीहि समास की मास्टर तालिका
| सामासिक पद | सही समास-विग्रह | तीसरा विशेष अर्थ (प्रधान पद) |
|---|---|---|
| गजानन | गज के समान आनन (मुख) है जिसका | भगवान गणेश |
| एकदंत | एक है दंत (दाँत) जिसका | भगवान गणेश |
| हेरंब | शिवजी के प्रिय पुत्र | भगवान गणेश |
| लंबकर्ण | लंबे हैं कान जिसके | भगवान गणेश / हाथी |
| षडानन | छह आनन (मुख) हैं जिसके | कार्तिकेय |
| मुरलीधर | मुरली को धारण करने वाले | भगवान श्रीकृष्ण |
| गिरिधर | गिरि (पर्वत) को धारण करने वाले | भगवान श्रीकृष्ण |
| घनश्याम | घन (बादल) के समान श्याम हैं जो | भगवान श्रीकृष्ण |
| बंशीधर | बंशी को धारण करने वाले | भगवान श्रीकृष्ण |
| दामोदर | दाम (रस्सी) बंधी है उदर पर जिसके | भगवान श्रीकृष्ण |
| रमेश | रमा (लक्ष्मी) के ईश हैं जो | भगवान विष्णु |
| जनार्दन | जन का उद्धार करने वाले | भगवान विष्णु |
| गदाधर | गदा को धारण करने वाले | भगवान विष्णु / भीम |
| ऋषिकेश | इंद्रियों के स्वामी हैं जो | भगवान विष्णु |
| त्रिलोचन | तीन लोचन (नेत्र) हैं जिसके | भगवान शिव |
| गंगाधर | गंगा को सिर पर धारण करने वाले | भगवान शिव |
| पशुपति | पशुओं (जीवों) के स्वामी हैं जो | भगवान शिव |
| दिगंबर | दिशाएं ही हैं अंबर (वस्त्र) जिसके | भगवान शिव / जैन मुनि |
| पिनाकपाणि | पिनाक धनुष है हाथ में जिसके | भगवान शिव |
| मृत्युंजय | मृत्यु को जीतने वाले | भगवान शिव |
| मारुतनंदन | मारुत (पवन) के नंदन (पुत्र) | हनुमान जी |
| पवनपुत्र | पवन के पुत्र | हनुमान जी |
| कपीश | कपियों (वानरों) के ईश | सुग्रीव / हनुमान जी |
| मेघनाद | मेघ के समान नाद (गर्जना) करने वाला | रावण पुत्र (इंद्रजीत) |
| मंदोदरी | मंद (पतला) है उदर जिसका | रावण की पत्नी |
| गांडीवधारी | गांडीव धनुष को धारण करने वाले | अर्जुन |
| धनंजय | धन को जीतने वाले | अर्जुन |
| धृतराष्ट्र | राष्ट्र को धारण करने वाले (अंधे राजा) | कौरवों के पिता |
| वाग्देवी | वाणी की देवी हैं जो | माता सरस्वती |
| पद्मासना | पद्म (कमल) है आसन जिसका | माता सरस्वती / लक्ष्मी |
| शैलपुत्री | शैल (पर्वतराज हिमालय) की पुत्री | माता पार्वती |
| मकरध्वज | मकर (मगरमच्छ) है ध्वज पर जिसके | कामदेव |
| मीनकेतु | मीन (मछली) है ध्वज पर जिसकी | कामदेव |
| बारहसिंगा | बारह सींग हैं जिसके | एक विशेष मृग (हिरण) |
| दुधमुँहा | दूध पीता है जो (मुँह में दूध है जिसके) | छोटा अबोध शिशु |
ज्ञान की परीक्षा: समास All-India PYQ महा-क्विज़
‘युधिष्ठिर’ शब्द में कौन सा समास विद्यमान है? (UPPSC / CTET)
‘यथाशक्ति’ शब्द में कौन सा समास है? (CGPSC / REET)
‘दहीबड़ा’ शब्द का सही समास-विग्रह और भेद क्या होगा? (UP RO/ARO / KVS)
‘नीलकमल’ में कौन सा समास है? (MP SI / DSSSB)
‘त्रिनेत्र’ शब्द में यदि शिवजी का बोध हो, तो कौन सा समास माना जाएगा? (UKPSC / State SI)
‘धर्माधर्म’ शब्द में कौन सा समास है? (BPSC / CG Vyapam)
🎯 अपना स्कोर आँकें: आपकी तैयारी का स्तर क्या है?
कुल प्रश्न: 6 | सही उत्तरों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी तैयारी का विश्लेषण करें:
- 🏆 6 में से 6 सही (टॉपर स्तर): अद्भुत! समास के सभी 6 भेदों, अलुक/लुप्तपद तत्पुरुष और विग्रह नियमों पर आपकी पकड़ शत-प्रतिशत है।
- 🥈 6 में से 5 सही (उत्कृष्ट स्तर): बहुत बढ़िया तैयारी! केवल कर्मधारय vs बहुव्रीहि के प्राथमिक चयन नियम का एक बार पुनः अभ्यास करें।
- 🥉 6 में से 4 सही (औसत स्तर): आपकी नींव अच्छी है, लेकिन ‘पद-प्रधानता’ और ‘द्वंद्व के 3 उपभेदों’ का रिवीजन आवश्यक है।
- ⚠️ 4 से कम सही (रिवीजन आवश्यक): निराश न हों! ऊपर दिए गए “10 परीक्षा Trap Alert (कन्फ्यूजन निवारण)” को दोबारा ध्यान से पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
विशेषज्ञ निष्कर्ष एवं अगला अध्याय
अंतिम मार्गदर्शन
समास भाषा में मितव्ययिता, सौंदर्य और व्याकरणिक कसावट लाने की अद्भुत विधा है। इस पोस्ट में दिए गए पद-प्रधानता नियमों, 4 विशेष तत्पुरुष उपभेदों और मास्टर तालिका का नियमित अभ्यास आपको परीक्षा में 100% अंक दिलाएगा।
रोडमैप के अनुसार अगले अध्याय (पोस्ट 12) में हम अध्ययन करेंगे — “संज्ञा (Noun): सभी 5 प्रकार, व्यक्तिवाचक से भाववाचक संज्ञा बनाने के 100% अचूक नियम व PYQs”।
अपनी तैयारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए हमारे साथ निरंतर जुड़े रहें!
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