मुहावरे और लोकोक्तियाँ (Muhavare & Lokoktiyan) : 500+ संग्रह व PYQs

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मुहावरे और लोकोक्तियाँ (Idioms & Proverbs): 500+ महा-संग्रह, अर्थ, वाक्य प्रयोग व मास्टर नोट्स

📝मुहावरे और लोकोक्तियाँ: लोक-जीवन और भाषा का प्राण

मानक परिभाषा: भाषा को सजीव, व्यंग्यात्मक, प्रभावोत्पादक और चमत्कारिक बनाने के लिए जब कोई वाक्यांश अपने सामान्य (अभिधा) अर्थ को छोड़कर विशेष (लाक्षणिक) अर्थ प्रकट करता है, तो उसे ‘मुहावरा’ (Idiom) कहते हैं। वहीं, सदियों के लोक-अनुभव पर आधारित पूर्ण, स्वतंत्र और नीतिपरक कथन को ‘लोकोक्ति’ (लोक + उक्ति = कहावत / Proverb) कहा जाता है।

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विषय सूची [X]

1. मुहावरे और लोकोक्ति में 5 बुनियादी अंतर

प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर मुहावरे और लोकोक्ति के सैद्धांतिक अंतर पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं:

ℹ️मुहावरा vs लोकोक्ति: तुलनात्मक मास्टर तालिका

तुलना का आधारमुहावरा (Idiom / वाग्धारा)लोकोक्ति (Proverb / कहावत)
1. स्वरूप एवं संरचनामुहावरा केवल एक ‘वाक्यांश’ (Phrase) होता है।लोकोक्ति अपने आप में एक ‘पूर्ण वाक्य’ (Complete Sentence) होती है।
2. स्वतंत्र प्रयोगइसका स्वतंत्र प्रयोग नहीं हो सकता (वाक्य में जोड़ना अनिवार्य है)।इसका स्वतंत्र रूप से पूरा प्रयोग किया जा सकता है।
3. क्रिया रूप एवं अंतइसके अंत में प्रायः ‘ना’ (क्रिया रूप) आता है (जैसे- आँखें खुलना, कान भरना)।इसके अंत में ‘ना’ आना अनिवार्य नहीं होता (जैसे- अधजल गगरी छलकत जाए)।
4. रूप-परिवर्तन (विकार)वाक्य के लिंग, वचन और काल के अनुसार बदल जाता है।इसका रूप अपरिवर्तित (स्थिर) रहता है, कोई बदलाव नहीं होता।
5. मूल उत्पत्ति स्रोतअरबी भाषा के ‘मुहाविरह’ (अभ्यास/बातचीत) से बना है।‘लोक में प्रचलित उक्ति’ (जन-अनुभव की सच्चाई) से जन्मी है।

2. शारीरिक अंगों पर आधारित महत्वपूर्ण मुहावरे

मानव शरीर के अंगों पर बने मुहावरे परीक्षाओं में सबसे अधिक पूछे जाते हैं:

आँख, कान, नाक और मुँह पर आधारित मुहावरे

मुहावरासटीक लाक्षणिक अर्थमानक वाक्य प्रयोग
आँखें खुलनाहोश आना / वास्तविकता का ज्ञान होना“व्यापार में धोखा खाने के बाद उसकी आँखें खुलीं।”
आँखों में धूल झोंकनाधोखा देना / छल करना“चोर पुलिस की आँखों में धूल झोंककर फरार हो गया।”
आँख का तारा होनाअत्यधिक प्रिय होना“एकलौता बेटा अपनी माँ की आँखों का तारा होता है।”
आँखें फेर लेनापहले जैसा व्यवहार न रखना / उदासीन होना“संकट के समय पुराने मित्रों ने भी आँखें फेर लीं।”
कान भरनाचुगली करना / पीठ पीछे शिकायत करना“पड़ोसी हमेशा दूसरों के कान भरने का काम करते हैं।”
कान पर जूँ न रेंगनाकोई असर न होना / बेपरवाह रहना“पिताजी के बार-बार समझाने पर भी उसके कान पर जूँ नहीं रेंगी।”
नाक कटनाइज्जत / प्रतिष्ठा नष्ट होना“पुत्र के कुकर्मों से पूरे खानदान की नाक कट गई।”
नाक का बाल होनाअत्यधिक प्रिय / घनिष्ठ होना“अपनी ईमानदारी के कारण वह अधिकारी की नाक का बाल बना हुआ है।”
मुँह की खानाबुरी तरह पराजित होना / मात खाना“युद्ध में शत्रु सेना को मुँह की खानी पड़ी।”
मुँह में पानी आनाललचा जाना / जी ललचाना“गरमा-गरम रसमलाई देखकर सबके मुँह में पानी आ गया।”

ℹ️सिर, कलेजा, हाथ, दाँत और कमर पर आधारित मुहावरे

मुहावरासटीक लाक्षणिक अर्थमानक वाक्य प्रयोग
सिर पर कफ़न बाँधनाबलिदान देने को तत्पर रहना“सैनिक सीमा पर सिर पर कफ़न बाँधकर लड़ते हैं।”
सिर आँखों पर बैठानाअत्यधिक आदर-सत्कार करना“गाँव वालों ने विजयी खिलाड़ी को सिर आँखों पर बैठाया।”
कलेजा ठंडा होनामन को शांति / संतोष मिलना“अपराधी को सजा मिलने पर ही पीड़ित का कलेजा ठंडा हुआ।”
कलेजे पर पत्थर रखनादिल मजबूत करना / भारी दुःख सहना“माँ ने कलेजे पर पत्थर रखकर बेटे को युद्ध में भेजा।”
दाँत खट्टे करनापराजित करना / पसीने छुड़ा देना“भारतीय सेना ने दुश्मन के दाँत खट्टे कर दिए।”
दाँतों तले उंगली दबानाआश्चर्यचकित / हैरान रह जाना“जादूगर के हैरतअंगेज करतब देखकर सबने दाँतों तले उंगली दबा ली।”
हाथ खींचनासहायता देना बंद करना / अलग होना“व्यापार में घाटा होते ही साझेदार ने हाथ खींच लिए।”
हाथ मलनापछताना / पश्चाताप करना“अवसर निकल जाने के बाद हाथ मलने से कोई लाभ नहीं।”
कमर कसनादृढ़ संकल्प करना / तैयार होना“छात्रों ने परीक्षा में अव्वल आने के लिए कमर कस ली है।”
कमर टूटनाबेसहारा होना / आर्थिक रूप से बर्बाद होना“बाढ़ से किसानों की कमर टूट गई।”

3. संख्यावाची एवं पशु-पक्षी आधारित मुहावरे व लोकोक्तियाँ

संख्याओं और जीव-जंतुओं के व्यवहार पर रचे गए लोकप्रिय मुहावरे:

💡संख्यावाची मुहावरे (Number-based Idioms)

मुहावरासटीक अर्थमानक वाक्य प्रयोग
नौ दो ग्यारह होनारफूचक्कर होना / भाग जाना“पुलिस की गाड़ी की आवाज सुनते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गए।”
तीन तेरह होनातितर-बितर होना / बिखर जाना“लाठीचार्ज होते ही भीड़ तीन तेरह हो गई।”
उन्नीस-बीस का अंतर होनाबहुत थोड़ा / नाममात्र का अंतर“दोनों भाइयों के स्वभाव में केवल उन्नीस-बीस का अंतर है।”
छत्तीस का आंकड़ा होनाघोर शत्रुता / गहरा विरोध होना“उन दोनों परिवारों में वर्षों से छत्तीस का आंकड़ा है।”
एक और एक ग्यारह होनासंगठन में शक्ति होना / एकता का बल“यदि हम मिलकर काम करें तो एक और एक ग्यारह हो जाएँगे।”
छक्के छूटनाहिम्मत टूटना / घबरा जाना“प्रतियोगिता का कठिन स्तर देखकर अच्छे-अच्छों के छक्के छूट गए।”
पाँचों उंगलियाँ घी में होनाचारों तरफ से लाभ ही लाभ होना“नौकरी के साथ व्यापार में भी लाभ होने से उसकी पाँचों उंगलियाँ घी में हैं।”
आठ-आठ आँसू रोनाबुरी तरह विलाप करना / बहुत पछताना“गलत संगत में पड़कर जब जेल हुई, तो वह आठ-आठ आँसू रोया।”

पशु-पक्षी एवं प्रकृति आधारित मुहावरे व लोकोक्तियाँ

मुहावरा / लोकोक्तिसटीक अर्थमानक वाक्य प्रयोग
ऊँट के मुँह में जीराआवश्यकता की तुलना में बहुत कम वस्तु“पहलवान को केवल एक सेब देना ऊँट के मुँह में जीरा के समान है।”
भैंस के आगे बीन बजानामूर्ख को ज्ञान देना / व्यर्थ प्रयास“अज्ञानी व्यक्ति को दर्शन समझाना भैंस के आगे बीन बजाना है।”
बंदर क्या जाने अदरक का स्वादअज्ञानी द्वारा गुणवान वस्तु का अनादर“साहित्यिक रचना को अनपढ़ को दिखाना बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद है।”
धोबी का कुत्ता न घर का न घाट काजिसका कहीं कोई ठिकाना न रहे“दोनों पार्टियों के चक्कर में वह धोबी का कुत्ता बन गया।”
आस्तीन का साँपकपटी मित्र / घर का छिपा शत्रु“जिसे मैंने सच्चा दोस्त समझा, वही आस्तीन का साँप निकला।”
गधे को बाप बनानाकाम निकालने के लिए मूर्ख की खुशामद“आजकल स्वार्थी लोग काम निकालने के लिए गधे को भी बाप बना लेते हैं।”
भीगी बिल्ली बननाडर के मारे सहम जाना / लाचार होना“मालिक के सामने आते ही लापरवाह नौकर भीगी बिल्ली बन गया।”
हवा से बातें करनाबहुत तेज गति से दौड़ना“महाराणा प्रताप का चेतक हवा से बातें करता था।”

4. परीक्षा Trap Alert: 20 सबसे अधिक पूछे जाने वाले भ्रामक मुहावरे

परीक्षक अक्सर मिलते-जुलते मुहावरों के सूक्ष्म अर्थों में भ्रम पैदा करते हैं:

🔥भ्रम निवारक मुहावरे एवं उनके वास्तविक अर्थ

मुहावरासही लाक्षणिक अर्थपरीक्षा ट्रैप एवं सूक्ष्म अंतर
अंगूठा दिखानाऐन वक्त पर साफ मना करना / इनकार करना‘अंगूठा चूमना’ (खुशामद करना) से भ्रमित न हों
अंगूठा चूमनाचापलूसी करना / खुशामद करनाआदर नहीं, चापलूसी का भाव
अंधे की लाठी (लकड़ी)एकमात्र सहारा होनाश्रवण कुमार संदर्भ
अक्ल पर पत्थर पड़नाबुद्धि भ्रष्ट होना / समझ न काम करनाअक्ल का चरने जाना
ईंट से ईंट बजानापूरी तरह तहस-नहस / नष्ट-भ्रष्ट करनायुद्ध या विनाश संदर्भ
ईंट का जवाब पत्थर से देनाकड़ा प्रहार / मुँहतोड़ जवाब देनाप्रतिक्रिया सूचक
गुदड़ी का लालनिर्धन घर में जन्मा गुणी / प्रतिभाशाली व्यक्तिलाल बहादुर शास्त्री संदर्भ
गागर में सागर भरनाथोड़े शब्दों में बहुत बड़ी बात कहनाबिहारीलाल के दोहे
चिराग तले अंधेराअपनी बुराई न दिखाई देना / पास में अज्ञानउपदेश देने वाले के घर दोष
घाट-घाट का पानी पीनासंसार का बहुत अनुभवी होनाचालाक होना नहीं, अनुभवी होना
छाती पर मूंग दलनापास रहकर कष्ट / मानसिक संताप देनापास रहकर परेशान करना
तलवे चाटनाअत्यधिक चापलूसी / दासता करनास्वाभिमान रहित होना
दिन दूना रात चौगुना बढ़नाअत्यधिक तीव्र गति से उन्नति करनाप्रगति सूचक
पानी-पानी होनाअत्यधिक लज्जित / शर्मिंदा होनाघबराना नहीं, लज्जित होना
पसीना बहानाकठिन परिश्रम करनामेहनत सूचक
बगुला भगत होनापाखंडी / ढोंगी व्यक्ति होनाकपटी साधु
मिट्टी का माधोअत्यंत मूर्ख / बुद्धू व्यक्तिअज्ञानी
लकीर का फकीर होनापुरानी परंपराओं का अंधानुकरण करनारूढ़िवादी होना
सूरज को दीपक दिखानाप्रसिद्ध / महान व्यक्ति का अल्प परिचय देनापरिचय की औपचारिकता
हथेली पर सरसों जमानाअसंभव कार्य को तुरंत करने की जिदकठिन कार्य

5. मास्टर तालिका: परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाने वाली 50 लोकोक्तियाँ

विगत 15 वर्षों की परीक्षाओं (CTET, State PSC, SI, RO/ARO, REET) में सर्वाधिक पूछी गई 50 लोकोक्तियाँ:

ℹ️प्रसिद्ध लोकोक्तियाँ, अर्थ एवं वाक्य प्रयोग तालिका

लोकोक्ति (कहावत)सटीक लोक-अर्थमानक वाक्य प्रयोग
“अधजल गगरी छलकत जाए।”कम ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है।“अल्पज्ञानी अपनी विद्वता की डींगें हाँकते हैं, सच है- अधजल गगरी छलकत जाए।”
“अंधों में काना राजा।”मूर्खों के बीच थोड़ा ज्ञानी भी श्रेष्ठ माना जाता है।“उस अनपढ़ गाँव में मैट्रिक पास लड़का अंधों में काना राजा बना है।”
“अपनी डफली अपना राग।”सबका अलग-अलग मत होना / संगठन का अभाव।“समिति के सदस्यों में कोई सहमति नहीं है, सब अपनी डफली अपना राग अलाप रहे हैं।”
“आ बैल मुझे मार।”जानबूझकर स्वयं विपत्ति मोल लेना।“बिना कारण बलवान से उलझना तो आ बैल मुझे मार वाली बात है।”
“आगे नाथ न पीछे पगहा।”जिसका कोई जिम्मेदार या आगे-पीछे न हो (पूर्ण स्वतंत्र)।“वह किसी की नहीं सुनता क्योंकि उसके आगे नाथ न पीछे पगहा है।”
“आम के आम गुठलियों के दाम।”दोहरा लाभ प्राप्त होना।“अखबार पढ़कर रद्दी बेच दी, इसे कहते हैं- आम के आम गुठलियों के दाम।”
“उल्टा चोर कोतवाल को डांटे।”अपना दोष न मानकर निर्दोष पर हावी होना।“गलती तुम्हारी थी और तुम मुझे ही धमका रहे हो, यह तो वही हुआ- उल्टा चोर कोतवाल को डांटे।”
“एक अनार सौ बीमार।”वस्तु कम और माँगने वाले अधिक होना।“एक पद के लिए दस हजार आवेदन आए, यह तो एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति है।”
“कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली।”दो असमान स्तर वाले व्यक्तियों की तुलना।“उस बड़े उद्योगपति से इस छोटे दुकानदार की तुलना कैसी, कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली।”
“कोयला की दलाली में हाथ काले।”बुरे काम का परिणाम सदा बुरा ही होता है।“अपराधियों की संगति में रहने से बदनामी ही मिलेगी, क्योंकि कोयले की दलाली में हाथ काले होते हैं।”
“घर का भेदी लंका ढाए।”आपसी फूट से सर्वनाश होना।“गुप्त जानकारी लीक होने से कंपनी डूब गई, सच है- घर का भेदी लंका ढाए।”
“चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए।”अत्यधिक कंजूस होना।“बीमार होने पर भी वह दवा नहीं खरीदता, उस पर चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए कहावत चरितार्थ होती है।”
“चोर की दाढ़ी में तिनका।”दोषी व्यक्ति स्वयं संशय या डर में रहता है।“चोरी की बात चलते ही वह घबरा गया, इसे कहते हैं- चोर की दाढ़ी में तिनका।”
“जल में रहकर मगर से बैर।”जिसके आश्रय में रहें, उससे शत्रुता करना अनुचित है।“कार्यालय में रहकर अधिकारी से विरोध मत करो, जल में रहकर मगर से बैर ठीक नहीं।”
“जाके पाँव न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई।”जिसने कभी दुःख न सहा हो, वह दूसरों का दुःख नहीं समझ सकता।“अमीर लोग गरीबों की पीड़ा नहीं समझ सकते, क्योंकि जाके पाँव न फटी बिवाई सो क्या जाने पीर पराई।”
“डूबते को तिनके का सहारा।”संकट में थोड़ी सी सहायता भी बहुत बड़ी होती है।“कर्ज में डूबे व्यापारी को मित्र का थोड़ा सहयोग डूबते को तिनके का सहारा बन गया।”
“दूर के ढोल सुहावने होते हैं।”दूर से चीजें सुंदर लगती हैं, पास जाने पर वास्तविकता पता चलती है।“विदेश का जीवन बाहर से अच्छा लगता है, पर दूर के ढोल सुहावने होते हैं।”
“नाच न जाने आंगन टेढ़ा।”अपनी अयोग्यता छिपाने के लिए साधनों में दोष निकालना।“परीक्षा में असफल होकर वह प्रश्नपत्र को कठिन बता रहा है, यह तो नाच न जाने आंगन टेढ़ा है।”
“नेकी कर दरिया में डाल।”भलाई करके उपकार को भूल जाना / फल की इच्छा न करना।“परोपकार के बाद यश की लालसा मत रखो, बस नेकी कर दरिया में डाल।”
“पढ़े फारसी बेचे तेल, यह देखो कुदरत का खेल।”उच्च योग्यता होने पर भी विवशता में निम्न कार्य करना।“इंजीनियर का चपरासी बनना पढ़े फारसी बेचे तेल को चरितार्थ करता है।”
“बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय।”बुरे कर्म करके अच्छे फल की आशा करना व्यर्थ है।“धोखा देकर सुख नहीं मिल सकता, क्योंकि बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय।”
“मान न मान मैं तेरा मेहमान।”जबरदस्ती किसी के गले पड़ना।“बिना बुलाए उसके घर जाकर बैठ जाना मान न मान मैं तेरा मेहमान है।”
“मुख में राम बगल में छुरी।”ऊपर से मित्रवत किंतु मन में कपट / विश्वासघात।“चापलूस मित्रों से सावधान रहो, वे मुख में राम बगल में छुरी रखते हैं।”
“साँच को आँच नहीं।”सच्चे व्यक्ति को किसी का डर नहीं होता।“न्यायालय में सत्य की ही जीत होगी, क्योंकि साँच को आँच नहीं।”
“हाथ कंगन को आरसी क्या।”प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।“मेरी योग्यता तुम स्वयं देख सकते हो, हाथ कंगन को आरसी क्या।”

भाषा-वैज्ञानिक नियम: मुहावरे में ‘पर्यायवाची प्रतिस्थापन निषेध’

केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय और मानक हिन्दी व्याकरण के अनुसार मुहावरों के 2 कड़े शास्त्रीय नियम हैं:

ℹ️मुहावरों के 2 अटल व्याकरणिक नियम

  • 1. पर्यायवाची प्रतिस्थापन निषेध नियम (No-Synonym Replacement):
    मुहावरे के मूल शब्दों के स्थान पर उनके पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग सर्वथा वर्जित है:
    • ‘आँख का तारा’ को ‘नेत्र का तारा’ या ‘नयन का तारा’ नहीं लिखा जा सकता।
    • ‘अक्ल पर पत्थर पड़ना’ को ‘बुद्धि पर पाषाण पड़ना’ लिखना अशुद्ध होगा।
    • ‘कमर टूटना’ को ‘कटि टूटना’ नहीं कहा जा सकता।
  • 2. शब्द-शक्ति का शास्त्रीय आधार:
    मुहावरे का आधार सदैव ‘लक्षणा शब्द-शक्ति’ (लाक्षणिक अर्थ) होता है, जबकि लोकोक्ति का आधार ‘व्यंजना शब्द-शक्ति’ (व्यंग्यात्मक व जीवन-दर्शन) होता है।

परीक्षा हॉल विशेष: 20 अति-कठिन एवं दुर्लभ मुहावरे (RO/ARO व PSC स्पेशल)

वे कठिन मुहावरे जो राज्य प्रशासनिक परीक्षाओं के कट-ऑफ को निर्धारित करते हैं:

20 अति-दुर्लभ मुहावरे एवं उनके सटीक अर्थ

कठिन मुहावरासटीक लाक्षणिक अर्थमानक वाक्य प्रयोग
अंगिया बेताल होनाअत्यधिक क्रोधी / उग्र स्वभाव का होना“जरा सी बात पर वह अंगिया बेताल हो जाता है।”
अढ़ाई दिन की बादशाहतबहुत थोड़े समय का सुख / अधिकार“सत्ता का घमंड मत करो, यह तो अढ़ाई दिन की बादशाहत है।”
अड़ियल टट्टू होनाअत्यधिक हठी / जिद्दी स्वभाव का होना“उसे समझाना व्यर्थ है, वह तो अड़ियल टट्टू है।”
आधा तीतर आधा बटेरबेमेल / अनमेल वस्तुओं का मिश्रण“हिन्दी में अनावश्यक अंग्रेजी शब्द ठूँसना आधा तीतर आधा बटेर है।”
उल्टी गंगा बहानारीति / परंपरा के सर्वथा विपरीत कार्य करना“बड़ों को ज्ञान सिखाकर तुम उल्टी गंगा क्यों बहा रहे हो?”
कौड़ी का तीन समझनाअत्यधिक तुच्छ / महत्वहीन समझना“घमंडी अधिकारी जनता को कौड़ी का तीन समझता है।”
खटाई में पड़नाकार्य में अड़चन आना / अनिर्णय में लटकना“विवाद बढ़ते ही सरकारी योजना खटाई में पड़ गई।”
गाल बजानाडींग हाँकना / बढ़-चढ़कर व्यर्थ बातें करना“काम कुछ नहीं करते, बस दिन-भर गाल बजाते रहते हैं।”
गूलर का फूल होनादुर्लभ वस्तु होना / कभी दिखाई न देना“आजकल ईमानदार नेता तो गूलर का फूल हो गए हैं।”
चांदी का जूता मारनाघूस / रिश्वत देकर अनुचित काम कराना“उसने अधिकारी को चांदी का जूता मारकर अपना काम करा लिया।”
छछूंदर के सिर पर चमेली का तेलअयोग्य व्यक्ति को उच्च / मूल्यवान पद मिलना“भ्रष्ट व्यक्ति का मंत्री बनना छछूंदर के सिर चमेली का तेल है।”
टका सा जवाब देनासाफ इनकार करना / रूखा उत्तर देना“मदद मांगने पर उसने टका सा जवाब दे दिया।”
दाल-भात में मूसलचंदबिना मतलब किसी के काम में दखल देना“हमारी बातचीत के बीच आकर तुम दाल-भात में मूसलचंद मत बनो।”
पगड़ी उछालनाभरे समाज में बेइज्जत / अपमानित करना“अपराधियों ने भले मानुस की पगड़ी उछाल दी।”
बहती गंगा में हाथ धोनाअवसर का अनुचित / तुरंत लाभ उठाना“बाजार में मंदी का लाभ उठाकर व्यापारियों ने बहती गंगा में हाथ धोया।”
हवा के घोड़े पर सवार होनाबहुत जल्दी में होना / घमंड में होना“वह किसी की नहीं सुनता, हमेशा हवा के घोड़े पर सवार रहता है।”
काठ का उल्लू होनामहामूर्ख / बुद्धिहीन होना“उसे कुछ भी समझाना बेकार है, वह तो काठ का उल्लू है।”
कलम तोड़नाअत्यधिक सुंदर व प्रभावशाली लेखन करना“लेखक ने उपन्यास के अंत में सचमुच कलम तोड़ दी।”
कलेजे पर साँप लोटनादूसरों की उन्नति देखकर ईर्ष्या से जलना“पड़ोसी की नई गाड़ी देखकर उसके कलेजे पर साँप लोट गया।”
तिल का ताड़ बनानाछोटी सी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ा देना“साधारण विवाद को तिल का ताड़ मत बनाओ।”

परीक्षा हॉल विशेष: 15 अति-कठिन एवं शास्त्रीय लोकोक्तियाँ (PSC स्पेशल)

वे लोक-अनुभव जो उच्च-स्तरीय परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:

💡15 शास्त्रीय लोकोक्तियाँ एवं उनके लोक-अर्थ

शास्त्रीय लोकोक्तिसटीक लोक-अर्थमानक वाक्य प्रयोग
“अंधा बाँटे रेवड़ी, फिर-फिर अपनों को दे।”अधिकार मिलने पर केवल अपने लोगों को लाभ पहुँचाना।“भर्ती परीक्षा में अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों को चुना, सच है- अंधा बाँटे रेवड़ी फिर-फिर अपनों को दे।”
“आँख के अंधे नाम नयनसुख।”गुण के सर्वथा विपरीत नाम होना।“नाम तो है ‘धनराज’ पर जेब में कौड़ी नहीं, इसे कहते हैं- आँख के अंधे नाम नयनसुख।”
“उतर गई लोई तो क्या करेगा कोई।”बेशर्म / निर्लज्ज व्यक्ति को किसी की परवाह नहीं होती।“कुकर्मों के बाद भी उसे कोई पश्चाताप नहीं, उतर गई लोई तो क्या करेगा कोई।”
“ओखली में सिर दिया तो मूसलों का क्या डर।”जब कठिन कार्य शुरू कर दिया, तो बाधाओं से नहीं डरना चाहिए।“सिविल सेवा की तैयारी शुरू की है तो मेहनत से मत डरो, ओखली में सिर दिया तो मूसलों का क्या डर।”
“कौआ चला हंस की चाल, अपनी चाल भी भूला।”दूसरों की अंधी नकल में अपनी मूल पहचान भी खो देना।“पश्चिमी संस्कृति की नकल में भारतीय युवा अपनी संस्कृति भूल रहे हैं, सच है- कौआ चला हंस की चाल।”
“घर की मुर्गी दाल बराबर।”आसानी से उपलब्ध गुणी वस्तु का कोई आदर न होना।“घर के अनुभवी वैद्य को छोड़कर शहर जाना घर की मुर्गी दाल बराबर है।”
“चोर-चोर मौसेरे भाई।”एक ही स्वभाव के बुरे लोगों का आपस में गहरा मेल होना।“दोनों भ्रष्ट व्यापारी मिलकर जनता को लूट रहे हैं, सच है- चोर-चोर मौसेरे भाई।”
“जस दूल्हा तस बनी बराता।”जैसा नेता या मुखिया, वैसे ही उसके अनुयायी।“पार्टी के सभी नेता अध्यक्ष की तरह भ्रष्ट हैं, जस दूल्हा तस बनी बराता।”
“तू डाल-डाल मैं पात-पात।”एक से बढ़कर दूसरा चालाक होना।“अपराधी कितना भी चतुर हो, पुलिस उससे आगे है- तू डाल-डाल मैं पात-पात।”
“तिनके की ओट में पहाड़।”छोटी सी आड़ में बहुत बड़ा रहस्य या तथ्य छिपा होना।“उसके शांत चेहरे के पीछे बड़ा षड्यंत्र था, यह तो तिनके की ओट में पहाड़ निकला।”
“नीम हकीम खतरे जान।”अधूरा ज्ञान रखने वाले व्यक्ति से जीवन का खतरा होना।“झोलाछाप डॉक्टर से इलाज मत कराओ, नीम हकीम खतरे जान होता है।”
“अपनी करनी पार उतरनी।”मनुष्य को अपने कर्मों का फल स्वयं भोगना पड़ता है।“दूसरों को दोष मत दो, अपनी करनी पार उतरनी होती है।”
“खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे।”लज्जित या असफल होकर दूसरों पर व्यर्थ क्रोध निकालना।“हारने के बाद वह अंपायर पर चिल्ला रहा है, इसे कहते हैं- खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे।”
“गंगा गए गंगादास, जमना गए जमनादास।”अवसरवादी / सिद्धांतहीन व्यक्ति जो जिधर लाभ देखे उधर हो जाए।“उस राजनेता का कोई उसूल नहीं, वह तो गंगा गए गंगादास जमना गए जमनादास है।”
“नौ दिन चले अढ़ाई कोस।”अत्यधिक धीमी गति से कार्य करना / सुस्त कार्यप्रणाली।“सरकारी दफ्तरों में काम की गति नौ दिन चले अढ़ाई कोस जैसी है।”

मुहावरा शब्दकोश: प्रकृति, अग्नि, जल व आकाश संबंधी 30 मुहावरे

प्राकृतिक तत्वों और खगोलीय घटनाओं पर आधारित महत्वपूर्ण मुहावरे:

प्रकृति एवं तत्वों पर आधारित मुहावरे तालिका

मुहावरासटीक लाक्षणिक अर्थमानक वाक्य प्रयोग
अंगारों पर पैर रखनाजानबूझकर भारी विपत्ति / खतरे में पड़ना“उस दबंग से दुश्मनी लेना अंगारों पर पैर रखने जैसा है।”
अंगार उगलनाअत्यधिक क्रोधपूर्ण / कड़वे वचन बोलना“अपमानित होकर वह सभा में अंगार उगलने लगा।”
आकाश-पाताल एक करनाअत्यधिक कठिन व अथक परिश्रम करना“आईएएस बनने के लिए उसने आकाश-पाताल एक कर दिया।”
आकाश के तारे तोड़नाअसंभव कार्य को संभव कर दिखाना“इस बंजर भूमि में हरियाली लाना आकाश के तारे तोड़ने जैसा है।”
आंधी के आम होनाअत्यधिक सस्ती या मुफ्त में मिली वस्तु“सैल में मिले वस्त्र तो आंधी के आम जैसे हैं।”
आसमान पर दिमाग होनाअत्यधिक घमंडी व अहंकारी होना“अमीर होते ही उसका दिमाग आसमान पर चढ़ गया।”
आसमान टूट पड़नाअचानक भारी संकट / वज्रपात आ जाना“पिता की मृत्यु से परिवार पर आसमान टूट पड़ा।”
आग बबूला होनाअत्यधिक क्रोधित / लाल-पीला होना“नौकर की लापरवाही देखकर मालिक आग बबूला हो गया।”
आग में घी डालनाक्रोध या झगड़े को और भड़काना“उनकी पुरानी रंजिश में उसने आग में घी डालने का काम किया।”
आग लगने पर कुआँ खोदनाविपत्ति आने पर उपाय खोजना“परीक्षा से एक दिन पहले पढ़ना आग लगने पर कुआँ खोदना है।”
ओस के मोती होनाक्षणभंगुर / बहुत थोड़े समय का सुख“यह सांसारिक सुख तो ओस के मोती जैसा है।”
खून-पसीना एक करनाकड़ी मेहनत व लगन से काम करना“उसने खून-पसीना एक करके अपना मकान बनवाया।”
खून का घूंट पीनाभीतर ही भीतर क्रोध व अपमान सहना“अधिकारी के कटु वचनों को वह खून का घूंट पीकर सह गया।”
गंगा नहानाबड़ा व कठिन कार्य पूरा करके निश्चिंत होना“बेटी का विवाह संपन्न कराकर पिता ने जैसे गंगा नहा ली।”
जमीन पर पैर न पड़नाअत्यधिक खुशी या अहंकार में होना“प्रथम पुरस्कार पाकर उसके जमीन पर पैर नहीं पड़ रहे।”
जमीन-आसमान का फर्कबहुत भारी व स्पष्ट अंतर होना“दोनों भाइयों के आचरण में जमीन-आसमान का फर्क है।”
दिन में तारे दिखाई देनाभारी संकट या आघात से घबरा जाना“परीक्षा हॉल में कठिन प्रश्न देखकर उसे दिन में तारे दिखाई देने लगे।”
धूप में बाल सफेद करनाबिना अनुभव के उम्र बीतना“मैं सब समझता हूँ, मैंने धूप में बाल सफेद नहीं किए हैं।”
पानी फेरनाबनी-बनाई बात या योजना को बिगाड़ना“अंतिम समय में मना करके उसने सारी योजना पर पानी फेर दिया।”
पानी का बुलबुलानाशवान / क्षणभंगुर जीवन“मनुष्य का शरीर तो पानी का बुलबुला है।”
पहाड़ टूटनाअसहनीय भारी दुःख आ पड़ना“व्यापार में दिवालिया होते ही उस पर पहाड़ टूट पड़ा।”
पाताल की खबर लानागुप्त से गुप्त बात का पता लगाना“खुफिया पुलिस पाताल की खबर भी निकाल लाती है।”
बहती हवा देखनासमय और परिस्थिति का रुख पहचानना“चतुर व्यापारी बहती हवा देखकर ही निवेश करता है।”
बालू की भीतशीघ्र नष्ट होने वाली कमजोर वस्तु“झूठ पर आधारित संबंध बालू की भीत होते हैं।”
बिजली गिरनाअचानक भारी आघात / विपत्ति आना“कारखाने में आग लगने की खबर से मालिक पर बिजली गिर पड़ी।”
हवा लगनाबुरी संगति या वातावरण का प्रभाव पड़ना“शहर जाते ही सीधे-सादे लड़के को शहर की हवा लग गई।”
हवा हो जानाबहुत तेज गति से भागना / गायब होना“पुलिस की गाड़ी देखते ही भीड़ हवा हो गई।”
अंगार बननाअत्यधिक लाल या क्रोधित होना“अपमान सुनकर उसकी आँखें अंगार बन गईं।”
आँसुओं की धार बहनालगातार अत्यंत विलाप करना“वियोग में उसकी आँसुओं की धार बहने लगी।”
दिन फिरनाभाग्य चमकना / अच्छे दिन आना“कठिन मेहनत के बाद अब उनके दिन फिर गए हैं।”

मुहावरा शब्दकोश: वस्तु, रंग, स्वाद व आभूषण संबंधी 30 मुहावरे

दैनिक जीवन की वस्तुओं और पदार्थों पर बने प्रमुख लाक्षणिक मुहावरे:

ℹ️वस्तु व रंग आधारित मुहावरे तालिका

मुहावरासटीक लाक्षणिक अर्थमानक वाक्य प्रयोग
अंक भरनास्नेहपूर्वक गले लगाना / आलिंगन करना“माँ ने बहुत दिनों बाद लौटे बेटे को अंक भर लिया।”
अपनी खिचड़ी अलग पकानासबसे अलग-थलग रहकर काम करना“वह किसी से बात नहीं करता, अपनी खिचड़ी अलग पकाता है।”
आटे-दाल का भाव मालूम होनाजीवन की कठिन वास्तविकताओं का ज्ञान होना“जब खुद कमाओगे तब आटे-दाल का भाव मालूम होगा।”
उल्लू सीधा करनाअपना स्वार्थ सिद्ध करना“आजकल लोग केवल अपना उल्लू सीधा करने में लगे रहते हैं।”
कंचन बरसनाअत्यधिक धन-लाभ या संपन्नता होना“उस नए व्यापार में तो कंचन बरस रहा है।”
कड़वा घूंट पीनाविवशता में अपमान या कटु बात सहना“अन्याय देखकर भी वह कड़वा घूंट पीकर चुप रहा।”
कायापलट होनापूरी तरह रूप या दशा बदल जाना“नए प्रबंधक के आते ही कंपनी की कायापलट हो गई।”
कालिख पोतनाकुल या समाज को कलंकित / बदनाम करना“चोरी करके उसने खानदान के नाम पर कालिख पोत दी।”
किताब का कीड़ा होनाहर समय केवल पढ़ाई में लगे रहना“वह किताब का कीड़ा है, दुनियादारी की खबर नहीं रखता।”
कौड़ी-कौड़ी जोड़नाकठिनाई से थोड़ा-थोड़ा धन जमा करना“उसने कौड़ी-कौड़ी जोड़कर यह घर बनाया है।”
गुड़-गोबर करनाबना-बनाया काम पूरी तरह बिगाड़ देना“झगड़ा करके उसने सारे उत्सव का गुड़-गोबर कर दिया।”
गुलछर्रे उड़ानामौज-मस्ती व फिजूलखर्ची करना“पिता की कमाई पर वह दिन-भर गुलछर्रे उड़ाता है।”
चंपत होनाभाग जाना / रफूचक्कर होना“किराया दिए बिना ही किराएदार चंपत हो गया।”
चांदी काटनाबहुत अधिक मुनाफा / धन कमाना“त्योहारों के मौसम में दुकानदारों ने खूब चांदी काटी।”
चार चाँद लगनाशोभा या प्रतिष्ठा में अत्यधिक वृद्धि होना“मंत्री जी के पधारने से समारोह में चार चाँद लग गए।”
चिराग गुल होनावंश का समाप्त होना / जीवन दीप बुझना“एकलौते बेटे की मृत्यु से घर का चिराग गुल हो गया।”
चूड़ियाँ पहननाकायरता दिखाना / अकर्मण्य होना“यदि अन्याय नहीं रोक सकते तो चूड़ियाँ पहन लो।”
चुटकी लेनाहँसी उड़ाना / व्यंग्यबाण चलाना“वह हमेशा दूसरों की बातों पर चुटकी लेता रहता है।”
छक्के छुड़ानाबुरी तरह पराजित करना / पछाड़ना“भारतीय पहलवान ने विदेशी खिलाड़ी के छक्के छुड़ा दिए।”
जले पर नमक छिड़कनादुःखी व्यक्ति को और अधिक ताने मारना“असफल छात्र को ताना मारकर जले पर नमक मत छिड़को।”
झाड़ू फेरनासब कुछ नष्ट-भ्रष्ट / साफ कर देना“जुए की लत ने उसकी सारी जमापूँजी पर झाड़ू फेर दिया।”
ढोल पीटनागुप्त बात को चारों तरफ प्रचारित करना“जरा सा लाभ क्या हुआ, उसने पूरे मोहल्ले में ढोल पीट दिया।”
तिल धरने की जगह न होनाअत्यधिक भीड़-भाड़ होना“मेले में इतनी भीड़ थी कि तिल धरने की जगह न थी।”
थाली का बैंगन होनासिद्धांतहीन / अवसरवादी व्यक्ति“उसका कोई भरोसा नहीं, वह तो थाली का बैंगन है।”
धूप-छाँह का खेलसुख और दुःख का निरंतर चक्र“जीवन तो धूप-छाँह का खेल है, कभी सुख कभी दुःख।”
नमक-मिर्च लगानाबात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहना“वह हमेशा बातों में नमक-मिर्च लगाकर सुनाता है।”
पगड़ी रखनामान-सम्मान की रक्षा हेतु विनती करना“उसने अपनी पगड़ी उसके चरणों में रख दी।”
पत्ते खड़कनाखतरे का तनिक भी आभास होना“जंगल में पत्ता खड़कते ही शिकारी चौकन्ना हो गया।”
फूटी कौड़ी न होनापास में तनिक भी धन न होना“आजकल उसके पास फूटी कौड़ी भी नहीं है।”
रंग में भंग पड़नाहँसी-खुशी और आनंद में विघ्न पड़ना“अचानक बिजली जाने से पार्टी के रंग में भंग पड़ गया।”

मुहावरा शब्दकोश: मानवीय स्वभाव, क्रोध व व्यवहार संबंधी 40 मुहावरे

मानसिक दशाओं और व्यवहार को व्यक्त करने वाले 40 महत्वपूर्ण मुहावरे:

💡मानवीय व्यवहार एवं मनोभाव मुहावरे तालिका

मुहावरासटीक लाक्षणिक अर्थमानक वाक्य प्रयोग
अक्ल का अंधा होनामहामूर्ख / बुद्धिहीन व्यक्ति होना“उसे समझाना व्यर्थ है, वह तो अक्ल का अंधा है।”
अपनी खाल में मस्त रहनाअपने सीमित साधनों में संतुष्ट रहना“वह किसी से ईर्ष्या नहीं करता, अपनी खाल में मस्त रहता है।”
अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारनाअपना नुकसान स्वयं अपने हाथों करना“अच्छी नौकरी छोड़कर उसने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।”
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बननास्वयं अपनी ही प्रशंसा करते रहना“सच्चे गुणी लोग अपने मुँह मियाँ मिट्ठू नहीं बनते।”
आँखें चार होनाआमना-सामना होना / परस्पर प्रेम होना“पुस्तकालय में अचानक उनकी आँखें चार हो गईं।”
आँखें बिछानाअत्यधिक प्रेम व आदर से प्रतीक्षा करना“गाँव वाले नेताजी के स्वागत में आँखें बिछाए बैठे थे।”
आँखों पर परदा पड़नासच्चाई न दिखाई देना / अक्ल मारी जाना“पुत्र-मोह में धृतराष्ट्र की आँखों पर परदा पड़ गया था।”
आपे से बाहर होनाअत्यधिक क्रोध में आत्म-नियंत्रण खोना“गाली सुनते ही वह आपे से बाहर हो गया।”
उधेड़बुन में पड़नागहन सोच-विचार या असमंजस में होना“वह सुबह से इसी उधेड़बुन में पड़ा है कि क्या करे।”
एक आँख से देखनासभी के साथ समान व निष्पक्ष व्यवहार“न्यायाधीश सबको एक आँख से देखता है।”
कलेजे का टुकड़ाअत्यधिक प्रिय व लाड़ली संतान“संतान माता-पिता के कलेजे का टुकड़ा होती है।”
कान खड़े होनासतर्क / सावधान / चौकन्ना होना“खटका सुनते ही पहरेदार के कान खड़े हो गए।”
खून खौलनाअन्याय देखकर अत्यधिक क्रोध आना“देशद्रोहियों की बातें सुनकर मेरा खून खौल उठता है।”
गर्दन पर छुरी फेरनाघोर विश्वासघात करना / भारी हानि पहुँचाना“नकली दवाइयाँ बेचकर व्यापारी जनता की गर्दन पर छुरी फेर रहे हैं।”
गाँठ बाँधनाकिसी सीख या बात को अच्छी तरह याद रखना“शिक्षक की इस प्रेरणादायी बात को गाँठ बाँध लो।”
गिरगिट की तरह रंग बदलनाअवसरवादी होना / बात से तुरंत मुकरना“उस पर विश्वास मत करो, वह गिरगिट की तरह रंग बदलता है।”
घुटने टेकनापराजय मान लेना / आत्मसमर्पण करना“शत्रु सेना ने भारतीय वीरों के आगे घुटने टेक दिए।”
घोड़े बेचकर सोनापूर्णतः बेफिक्र / निश्चिंत होकर सोना“परीक्षा समाप्त होते ही छात्र घोड़े बेचकर सो रहे हैं।”
चलती गाड़ी में रोड़ा अटकानासुचारू रूप से चल रहे काम में बाधा डालना“अच्छे प्रोजेक्ट में रोड़ा अटकाना विरोधियों की आदत है।”
छाती पर पत्थर रखनाभारी दुःख को धैर्यपूर्वक सहन करना“उसने छाती पर पत्थर रखकर बेटे को विदा किया।”
जान हथेली पर रखनाजीवन की परवाह किए बिना जोखिम उठाना“सैनिक जान हथेली पर रखकर सीमा की रक्षा करते हैं।”
जी-जान से जुटनापूरी शक्ति व निष्ठा से कार्य में लगना“वह परीक्षा पास करने के लिए जी-जान से जुटा है।”
जी चुरानाकाम से भागना / मेहनत से कतराना“सफल वही होता है जो कभी काम से जी नहीं चुराता।”
टेढ़ी खीर होनाअत्यधिक कठिन व दुष्कर कार्य होना“आईएएस परीक्षा पास करना कोई आसान नहीं, टेढ़ी खीर है।”
तारे गिननाचिंता या बेचैनी में रात जागकर बिताना“परिणाम की प्रतीक्षा में उसने रात भर तारे गिने।”
दाँत पीसनागुस्से में दाँत किटकिटाना / अत्यधिक क्रोध“अपराधी पुलिस को देखकर दाँत पीसने लगा।”
नाक रगड़नाअत्यधिक दीनतापूर्वक क्षमा या विनती करना“अपराधी ने जज के सामने बहुत नाक रगड़ी।”
नहले पर दहला मारनाकरारा जवाब देना / ईंट का जवाब पत्थर“उसकी कूटनीति पर मंत्री ने नहले पर दहला मार दिया।”
नानी याद आनाभारी संकट या कठिनाई में होश उड़ जाना“पहाड़ की चढ़ाई चढ़ते ही सबको नानी याद आ गई।”
पीठ दिखानायुद्ध या संकट से डरकर भाग जाना“वीर सैनिक कभी मैदान में पीठ नहीं दिखाते।”
फूला न समानाअत्यधिक हर्ष व आनंद में मग्न होना“प्रथम स्थान पाने पर बालक फूला न समाया।”
बट्टा लगानामान-प्रतिष्ठा को कलंकित करना“उसके बुरे कर्मों ने परिवार के यश पर बट्टा लगा दिया।”
बाल की खाल निकालनाव्यर्थ के सूक्ष्म दोष या नुक्ताचीनी करना“आलोचकों का काम केवल बाल की खाल निकालना होता है।”
बात का धनी होनाअपने वचन / वादे का पक्का होना“राजा हरिश्चंद्र बात के धनी थे।”
भाड़े का टट्टू होनापैसों के लिए काम करने वाला किराए का व्यक्ति“उसका कोई सिद्धांत नहीं, वह केवल भाड़े का टट्टू है।”
मक्खियाँ मारनाबेकार बैठना / कोई काम-धंधा न करना“दिन भर मक्खियाँ मारने से घर नहीं चलता।”
मिट्टी में मिलनापूरी तरह नष्ट या बर्बाद हो जाना“जुए की लत से उसकी सारी संपत्ति मिट्टी में मिल गई।”
रोंगटे खड़े होनाअत्यधिक भय, विस्मय या रोमांच होना“शेर की दहाड़ सुनकर सबके रोंगटे खड़े हो गए।”
लल्लो-चप्पो करनास्वार्थ के लिए अत्यधिक चापलूसी करना“अधिकारियों की लल्लो-चप्पो करके उसने प्रमोशन पा लिया।”
सिर धुननाअत्यधिक विलाप करना / भारी पछतावा होना“अवसर चूक जाने पर अब सिर धुनने से क्या लाभ।”

लोकोक्ति शब्दकोश: सामाजिक, नीतिपरक एवं व्यावहारिक 40 लोकोक्तियाँ

जीवन-दर्शन और व्यावहारिक नीति पर आधारित 40 प्रामाणिक कहावतें:

सामाजिक एवं नीतिपरक लोकोक्तियाँ तालिका

लोकोक्ति (कहावत)सटीक लोक-अर्थमानक वाक्य प्रयोग
“अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।”अकेला व्यक्ति बड़ा कार्य संपन्न नहीं कर सकता।“समाज सुधार के लिए सबका सहयोग चाहिए, क्योंकि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।”
“अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है।”अपने क्षेत्र में हर कोई साहसी बनता है।“यहाँ डींगें मत हाँको, अपनी गली में तो कुत्ता भी शेर होता है।”
“अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।”समय बीत जाने पर पछताना व्यर्थ है।“साल भर पढ़े नहीं, अब रोने से क्या फायदा- अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।”
“आँख का अंधा गाँठ का पूरा।”मूर्ख किंतु धनवान व्यक्ति।“धूर्त लोग उस अमीर लड़के को ठग रहे हैं, वह तो आँख का अंधा गाँठ का पूरा है।”
“आप भले तो जग भला।”यदि मनुष्य खुद अच्छा है तो सारा संसार अच्छा लगता है।“दूसरों में दोष मत खोजो, अपने आचरण को शुद्ध रखो- आप भले तो जग भला।”
“इस हाथ दे उस हाथ ले।”कर्म का तत्काल फल मिलना / खरा लेन-देन।“यहाँ कोई उधारी नहीं चलती, बस इस हाथ दे उस हाथ ले का नियम है।”
“ईश्वर की माया कहीं धूप कहीं छाया।”भाग्य की विचित्रता / जीवन में विषमता।“एक ओर अपार धन और दूसरी ओर भुखमरी, सच है- ईश्वर की माया कहीं धूप कहीं छाया।”
“उल्टा बांस बरेली को।”विपरीत कार्य करना / जहाँ वस्तु की प्रचुरता हो वहीं ले जाना।“कश्मीर में सेब बेचना तो उल्टा बांस बरेली को वाली बात है।”
“ऊंची दुकान फीका पकवान।”केवल बाहरी दिखावा, वास्तविकता में गुणहीन।“उस बड़े होटल का नाम ही नाम है, खाना घटिया है- ऊंची दुकान फीका पकवान।”
“ऊँट किस करवट बैठता है।”अनिश्चित परिणाम का किस ओर निर्णय होना।“चुनाव के नतीजे आने दो, देखते हैं ऊँट किस करवट बैठता है।”
“एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा।”एक दोष पहले से था, दूसरा और जुड़ जाना।“वह पहले ही क्रोधी था, अब शराबी भी बन गया- एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा।”
“एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं।”एक ही स्थान पर दो समान शक्तिशाली नेता नहीं रह सकते।“कार्यालय में दो अधिकारी मुखिया नहीं हो सकते, एक म्यान में दो तलवारें नहीं समातीं।”
“कभी गाड़ी नाव पर, कभी नाव गाड़ी पर।”जीवन में परिस्थितियों का निरंतर उलटफेर होना।“समय सदा एकसा नहीं रहता, कभी गाड़ी नाव पर कभी नाव गाड़ी पर होती है।”
“कर भला तो हो भला।”भलाई करने वाले का अंततः भला ही होता है।“निःस्वार्थ भाव से सेवा करो, ईश्वर फल देगा- कर भला तो हो भला।”
“काबुल में क्या गधे नहीं होते।”हर समाज या स्थान पर अच्छे-बुरे लोग होते हैं।“विदेश में भी अपराधी मिल ही जाते हैं, सच है- काबुल में क्या गधे नहीं होते।”
“काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती।”कपटपूर्ण आचरण से काम केवल एक ही बार बनता है।“झूठ बोलकर अब तुम मुझे दोबारा नहीं ठग सकते, काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती।”
“खोटे सिक्के भी वक्त पर काम आते हैं।”तुच्छ समझी जाने वाली वस्तु भी समय पर उपयोगी होती है।“किसी की उपेक्षा मत करो, खोटे सिक्के भी वक्त पर काम आते हैं।”
“खोदा पहाड़ निकली चुहिया।”बहुत अधिक परिश्रम का अत्यंत अल्प परिणाम निकलना।“महीनों की जाँच के बाद कुछ न मिला, यह तो खोदा पहाड़ निकली चुहिया हुआ।”
“गरजने वाले बादल बरसते नहीं।”जो केवल डींगें मारते हैं वे काम नहीं करते।“उसकी धमकियों से मत डरो, गरजने वाले बादल कभी बरसते नहीं।”
“गुड़ खाए गुलगुलों से परहेज।”बड़ा पाप करना और छोटी बुराई से बचने का ढोंग करना।“रिश्वत लेते हो और चाय पीने से मना करते हो, यह तो गुड़ खाए गुलगुलों से परहेज है।”
“गेहूं के साथ घुन भी पिसता है।”अपराधियों की संगति में निर्दोष भी मारा जाता है।“दंगाइयों के साथ खड़े बेकसूर भी पकड़े गए, सच है- गेहूं के साथ घुन भी पिसता है।”
“घर का जोगी जोगना आन गाँव का सिद्ध।”अपने घर के गुणी व्यक्ति का आदर न होना।“गाँव के विद्वान वैद्य की कोई नहीं सुनता, इसे कहते हैं- घर का जोगी जोगना।”
“घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने।”झूठी शान और शेखी बघारना।“जेब में पैसे नहीं और गाड़ी खरीदने की बात कर रहा है- घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने।”
“चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात।”सुख के दिन बहुत थोड़े समय के होते हैं।“धन का घमंड मत करो, यह तो चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात है।”
“चिकने घड़े पर पानी नहीं ठहरता।”निर्लज्ज व्यक्ति पर किसी उपदेश का प्रभाव नहीं पड़ता।“उसे कितना भी समझाओ कोई असर नहीं होता, वह तो चिकना घड़ा है।”
“जिसकी लाठी उसकी भैंस।”शक्तिशाली की ही जीत और अधिकार होता है।“अदालत में धनवान ने बाजी मार ली, सच है- जिसकी लाठी उसकी भैंस।”
“जितने मुँह उतनी बातें।”हर व्यक्ति का अलग-अलग मत या अफवाह होना।“दुर्घटना की खबर पर लोगों ने जितने मुँह उतनी बातें बनानी शुरू कर दीं।”
“जैसी करनी वैसी भरनी।”कर्मों के अनुसार ही मनुष्य को फल मिलता है।“धोखा दोगे तो धोखा ही मिलेगा, क्योंकि जैसी करनी वैसी भरनी होती है।”
“तेते पाँव पसारिए जेती लांबी सौर।”अपनी सामर्थ्य या आय के अनुसार ही खर्च करना चाहिए।“कर्ज लेकर दिखावा मत करो, बुजुर्ग कह गए हैं- तेते पाँव पसारिए जेती लांबी सौर।”
“दाल में कुछ काला होना।”किसी बात में संदेह या गड़बड़ी का आभास होना।“उसके चुप रहने से मुझे लगा कि दाल में कुछ काला है।”
“नाई की बारात में सब ठाकुर।”जहाँ सभी मुखिया बनें और कार्यकर्ता कोई न हो।“इस कमेटी में कोई काम नहीं करता, यहाँ तो नाई की बारात में सब ठाकुर बने हैं।”
“न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी।”ऐसी असंभव शर्त रखना जिससे काम न हो सके।“वह इतनी बड़ी रकम मांग रहा है कि न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी।”
“न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।”झगड़े या समस्या की मूल जड़ को ही समाप्त कर देना।“उस विवादित जमीन को सरकार ने जब्त कर लिया, न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।”
“पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं।”दूसरों के अधीन रहकर कभी सुख नहीं मिल सकता।“आत्मनिर्भर बनो, क्योंकि पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं।”
“पाँचों उंगलियाँ बराबर नहीं होतीं।”सभी मनुष्य एक समान योग्य या गुणवान नहीं होते।“सभी संतानों का स्वभाव अलग होता है, पाँचों उंगलियाँ बराबर नहीं होतीं।”
“बंदर के हाथ में नारियल।”अयोग्य व्यक्ति को कोई बहुमूल्य वस्तु मिलना।“मूर्ख को कीमती मोबाइल देना बंदर के हाथ में नारियल सौंपना है।”
“बिल्ली के भागों छींका टूटा।”अयोग्य व्यक्ति को अचानक अप्रत्याशित लाभ मिलना।“योग्य उम्मीदवार के न आने से उसे नौकरी मिल गई, यह तो बिल्ली के भागों छींका टूटा।”
“मन चंगा तो कठौती में गंगा।”हृदय शुद्ध हो तो घर ही तीर्थ के समान है।“संत रविदास ने कहा था कि पवित्र आचरण ही सच्ची पूजा है- मन चंगा तो कठौती में गंगा।”
“रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई।”सर्वस्व नष्ट होने पर भी घमंड या अकड़ न जाना।“कारोबार डूब गया पर उसकी हेकड़ी नहीं गई, सच है- रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई।”
“सांप मरे और लाठी भी न टूटे।”काम भी पूरा हो जाए और कोई नुकसान भी न हो।“समझदारी से मामला ऐसे सुलझाओ कि सांप भी मरे और लाठी भी न टूटे।”

लोकोक्ति शब्दकोश: ग्रामीण, कृषि व लोक-व्यवहार की 40 दुर्लभ लोकोक्तियाँ

भारत के ग्रामीण परिवेश और लोक-अनुभव से निकली 40 उच्च-स्तरीय कहावतें:

🔥ग्रामीण एवं लोक-व्यवहार लोकोक्तियाँ तालिका

लोकोक्ति (कहावत)सटीक लोक-अर्थमानक वाक्य प्रयोग
“अंधा क्या चाहे दो आँखें।”मनचाही और अभीष्ट वस्तु की सहज प्राप्ति होना।“बेरोजगार को अच्छी नौकरी का प्रस्ताव मिल गया, अंधा क्या चाहे दो आँखें।”
“अपनी छाछ को कोई खट्टा नहीं कहता।”अपनी वस्तु या विचार की कोई बुराई नहीं करता।“हर दुकानदार अपने माल की तारीफ ही करता है, अपनी छाछ को कोई खट्टा नहीं कहता।”
“अक्ल बड़ी या भैंस।”शारीरिक बल की तुलना में बुद्धि का बल सदा श्रेष्ठ होता है।“बुद्धि से युक्ति निकालो, बाहुबल से नहीं, बुजुर्ग कह गए हैं- अक्ल बड़ी या भैंस।”
“आगे कुआँ पीछे खाई।”दोनों ओर से घोर संकट या विपत्ति में फँसना।“इधर जाओ तो पुलिस उधर जाओ तो डाकू, हमारे लिए तो आगे कुआँ पीछे खाई है।”
“आम खाने से मतलब, पेड़ गिनने से क्या।”केवल अपने लाभ से मतलब रखना, व्यर्थ की बातों में न पड़ना।“सामग्री अच्छी मिली है तो इस्तेमाल करो, आम खाओ पेड़ मत गिनो।”
“आधा छोड़ सारी को धावे, आधा रहे न सारी पावे।”अत्यधिक लालच करने से सब कुछ नष्ट हो जाता है।“जो मिला है उसमें संतोष करो, आधा छोड़ सारी को धावे आधा रहे न सारी पावे।”
“उधो का लेना न माधो का देना।”किसी से कोई वास्ता न रखना / पूर्णतः निष्पक्ष रहना।“मैं राजनीति में नहीं पड़ता, मेरा तो उधो का लेना न माधो का देना है।”
“एक पंथ दो काज।”एक ही प्रयास या यात्रा से दोहरे कार्य सिद्ध होना।“दिल्ली में इंटरव्यू भी दे आया और मित्र से भी मिल लिया- एक पंथ दो काज हो गए।”
“एक हाथ से ताली नहीं बजती।”किसी भी विवाद या झगड़े में दोनों पक्षों का दोष होता है।“केवल एक को दोष मत दो, एक हाथ से ताली कभी नहीं बजती।”
“कंगाली में आटा गीला।”विपत्ति या गरीबी में और अधिक संकट आ जाना।“नौकरी छूटी ही थी कि बीमारी का खर्च आ गया, इसे कहते हैं- कंगाली में आटा गीला।”
“कौड़ी नहीं पास चले हैं नवाब।”बिना साधनों या योग्यता के बड़ी शान दिखाना।“जेब खाली है और फाइव स्टार होटल में जाने की जिद है- कौड़ी नहीं पास चले हैं नवाब।”
“खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है।”संगति का प्रभाव देखकर दूसरों में भी बदलाव आना।“मित्रों को पढ़ते देखकर वह भी पढ़ने लगा, सच है- खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है।”
“खेत खाए गदहा मार खाए जोलहा।”अपराध किसी और का और दंड किसी निर्दोष को मिलना।“दोषी भाग गया और बेकसूर को पुलिस ने पकड़ लिया- खेत खाए गदहा मार खाए जोलहा।”
“गाय मारकर जूता दान।”बड़ा पाप करके छोटा सा धर्म का ढोंग करना।“घोटाले के पैसों से मंदिर बनवाना गाय मारकर जूता दान करने जैसा है।”
“गुड़ दिए मरे तो जहर क्यों दे।”जब प्रेम या शांति से काम बने तो कठोरता नहीं बरतनी चाहिए।“समझाकर काम करा लो, डांटने की क्या जरूरत- गुड़ दिए मरे तो जहर क्यों दे।”
“घर खीर तो बाहर खीर।”यदि घर में संपन्नता और सम्मान है तो बाहर भी आदर मिलता है।“परिवार का साथ हो तो दुनिया भी झुकती है- घर खीर तो बाहर खीर।”
“घोड़ी को लात और आदमी को बात।”दुष्ट को दंड से और सज्जन को समझाने से राह पर लाया जाता है।“सभ्य व्यक्ति को केवल संकेत ही काफी है, घोड़ी को लात और आदमी को बात।”
“चोर को मोर।”एक धूर्त को दूसरा उससे भी बड़ा धूर्त मिल जाना।“उस ठग को दूसरे चालबाज ने ठग लिया, सच है- चोर को मोर मिल गया।”
“जंगल में मोर नाचा किसने देखा।”उपयुक्त कद्रदान या मंच के बिना कला का प्रदर्शन व्यर्थ है।“अनपढ़ों के सामने कविता पाठ करना जंगल में मोर नाचा किसने देखा है।”
“जर का जोर पूरा है और सब अधूरा है।”संसार में धन की शक्ति सबसे प्रबल मानी जाती है।“आजकल पैसे से ही सब काम बनते हैं, सच है- जर का जोर पूरा है।”
“जैसी बहे बयार पीठ तब तैसी दीजिए।”समय और परिस्थिति का रुख देखकर आचरण करना चाहिए।“हठ मत करो, वक्त की नजाकत समझो- जैसी बहे बयार पीठ तब तैसी दीजिए।”
“टके सेर भाजी टके सेर खाजा।”जहाँ गुणवान और मूर्ख का एक समान मूल्यांकन हो।“उस अव्यवस्थित कंपनी में योग्य और अयोग्य का वेतन बराबर है- टके सेर भाजी टके सेर खाजा।”
“तुलसी पत्ता छोटा पर गुण में मोटा।”बाह्य रूप से छोटी वस्तु भी अत्यंत गुणकारी हो सकती है।“इस छोटे बच्चे की प्रतिभा देखकर सब हैरान हैं- तुलसी पत्ता छोटा पर गुण में मोटा।”
“थोथा चना बाजे घना।”गुणहीन या अल्पज्ञानी व्यक्ति बहुत अधिक बढ़-चढ़कर बोलता है।“अज्ञानी ही अपनी शेखी बघारते हैं, सच कहा है- थोथा चना बाजे घना।”
“दुधारू गाय की लात भी सहनी पड़ती है।”जिससे लाभ होता है उसकी थोड़ी डाँट या नखरे भी सहने पड़ते हैं।“कंपनी को मुनाफा देने वाले मैनेजर की सख्ती सब सहते हैं- दुधारू गाय की लात भी सहनी पड़ती है।”
“नानी के आगे ननिहाल का बखान।”अधिक जानकार व्यक्ति के सामने उसी के विषय की शेखी बघारना।“गणित के प्रोफेसर के सामने गणित की डींगें हाँकना नानी के आगे ननिहाल का बखान है।”
“नीम न मीठी होय चाहे सींचो गुड़ घी से।”दुर्जन का स्वभाव कितना भी प्रयत्न करो बदलता नहीं।“उस पापी को कितना भी समझाओ वह नहीं सुधरेगा- नीम न मीठी होय चाहे सींचो गुड़ घी से।”
“पहले तोलो फिर बोलो।”हमेशा सोच-समझकर और विचारपूर्वक बात कहनी चाहिए।“कटु वचन मत बोलो, बुजुर्गों ने सिखाया है- पहले तोलो फिर बोलो।”
“बारह बरस पीछे घूरे के भी दिन फिरते हैं।”समय आने पर दीन-हीन और गरीब के भी अच्छे दिन आते हैं।“निराश मत हो, धैर्य रखो- बारह बरस पीछे घूरे के भी दिन फिरते हैं।”
“बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधे।”कठिन और जोखिम भरे काम की शुरुआत कौन करे।“योजना तो अच्छी है पर अधिकारी से बात कौन करे- बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधे।”
“मन के हारे हार है मन के जीते जीत।”मनोबल और आत्मविश्वास ही सफलता-विफलता का आधार है।“हौसला मत खोओ, याद रखो- मन के हारे हार है मन के जीते जीत।”
“मुद्दई सुस्त गवाह चुस्त।”जिसका काम है वह लापरवाह है और दूसरा व्यक्ति व्यर्थ में परेशान है।“दूल्हा शांत बैठा है और रिश्तेदार परेशान हैं- यह तो मुद्दई सुस्त गवाह चुस्त हुआ।”
“हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और।”कथनी और करनी में भारी अंतर होना / केवल दिखावा।“नेताओं के वादों पर मत जाओ, उनके तो हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और होते हैं।”
“सावन हरे न भादों सूखे।”सदा एक जैसी समान स्थिति में रहना / सुख-दुःख से अप्रभावित।“संत पुरुष कभी विचलित नहीं होते, वे तो सावन हरे न भादों सूखे रहते हैं।”
“होनहार बिरवान के होत चीकने पात।”प्रतिभाशाली व्यक्ति के लक्षण बचपन से ही दिखाई देने लगते हैं।“बालक की प्रतिभा देखकर शिक्षक ने कहा- होनहार बिरवान के होत चीकने पात।”
“हथेली पर दही नहीं जमता।”कोई भी बड़ा काम तुरंत या जल्दबाजी में नहीं होता।“धैर्य रखो, सफलता में समय लगता है- हथेली पर दही नहीं जमता।”
“सिर मुँडाते ही ओले पड़ना।”कार्य आरंभ करते ही तुरंत विघ्न या संकट आ जाना।“दुकान खोली ही थी कि लॉकडाउन लग गया- सिर मुँडाते ही ओले पड़े।”
“साँप का काटा रस्सी से डरता है।”एक बार धोखा खाने वाला व्यक्ति हर छोटी बात पर चौकन्ना रहता है।“व्यापार में नुकसान के बाद वह बहुत सतर्क हो गया है- साँप का काटा रस्सी से डरता है।”
“लकड़ी के बल बंदर नाचे।”भय या शक्ति के प्रभाव से ही कोई कार्य करता है।“सख्त कानून के डर से ही लोग नियमों का पालन करते हैं- लकड़ी के बल बंदर नाचे।”
“लगे न फिटकरी रंग चोखा होय।”बिना किसी खर्च या प्रयास के उत्तम फल प्राप्त होना।“बिना पैसे खर्च किए इतना बढ़िया काम हो गया, सच है- लगे न फिटकरी रंग चोखा होय।”

ज्ञान की परीक्षा: मुहावरे और लोकोक्तियाँ All-India PYQ महा-क्विज़

‘आँखों में धूल झोंकना’ मुहावरे का सही अर्थ क्या है? (UPPSC / CTET)

  • धोखा देना
  • आँख में धूल जाना
  • साफ न दिखाई देना
  • लज्जित होना

‘अधजल गगरी छलकत जाए’ लोकोक्ति का सही भावार्थ क्या होगा? (CGPSC / REET)

  • आधा घड़ा पानी से भरा होना
  • कम ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है
  • मूर्ख व्यक्ति ज्ञानी बन जाता है
  • गगरी से पानी गिरना

निम्नलिखित में से कौन सा ‘मुहावरा’ है (लोकोक्ति नहीं)? (UP RO/ARO / KVS)

  • अंधों में काना राजा
  • अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता
  • दाँतों तले उंगली दबाना
  • उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

‘गागर में सागर भरना’ मुहावरे का क्या तात्पर्य है? (MP SI / DSSSB)

  • घड़े में समुद्र का पानी भरना
  • असंभव कार्य करना
  • थोड़े शब्दों में बहुत बड़ी बात कहना
  • बहुत अधिक बातें करना

‘अंगूठा दिखाना’ मुहावरे का सही अर्थ क्या है? (UKPSC / State SI)

  • अंगूठे से इशारा करना
  • मना करना / इनकार करना
  • अंगूठा चूमना
  • धमकी देना

‘हाथ कंगन को आरसी क्या’ लोकोक्ति का सही अर्थ क्या है? (BPSC / CG Vyapam)

  • हाथ में कंगन पहनना
  • सुंदर दर्पण देखना
  • प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती
  • कंगन के लिए शीशा देखना

🔥🎯 अपना स्कोर आँकें: आपकी तैयारी का स्तर क्या है?

कुल प्रश्न: 6 | सही उत्तरों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी तैयारी का विश्लेषण करें:

  • 🏆 6 में से 6 सही (टॉपर स्तर): अद्भुत! मुहावरे, लोकोक्तियों के सूक्ष्म अर्थों और वाक्य प्रयोग पर आपकी पकड़ शत-प्रतिशत है।
  • 🥈 6 में से 5 सही (उत्कृष्ट स्तर): बहुत बढ़िया तैयारी! केवल मुहावरे vs लोकोक्ति के संरचनात्मक अंतर का एक बार पुनः अभ्यास करें।
  • 🥉 6 में से 4 सही (औसत स्तर): आपकी नींव अच्छी है, लेकिन ’20 भ्रामक मुहावरे (Trap Alert)’ का रिवीजन आवश्यक है।
  • ⚠️ 4 से कम सही (रिवीजन आवश्यक): निराश न हों! ऊपर दिए गए “मुहावरे और लोकोक्तियों की मास्टर तालिका” को दोबारा ध्यान से पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

विशेषज्ञ निष्कर्ष एवं अगला अध्याय

अंतिम मार्गदर्शन

मुहावरे और लोकोक्तियाँ हिन्दी भाषा की वह सांस्कृतिक निधि हैं जो भाषा को धारदार, व्यंग्यात्मक और सजीव बनाती हैं। इस पोस्ट में दिए गए अंग-वार मुहावरों और प्रसिद्ध लोकोक्तियों का नियमित अभ्यास आपको परीक्षा में 100% अंक दिलाएगा।

रोडमैप के अनुसार अगले अध्याय (पोस्ट 20) में हम अध्ययन करेंगे — “रस, छंद और अलंकार (Kavya Shastra): सभी 9 रस व स्थायी भाव, मात्रिक व वर्णिक छंद, 20+ प्रमुख अलंकार ट्रिक्स व PYQs”

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